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Current Affairs - Daily 27 अक्टूबर 2026

यूएई के निकट तेल रिसाव से समुद्री प्रदूषण की चिंता बढ़ी

अक्टूबर 2026 में यूएई के निकट समुद्री तेल रिसाव के बाद उम्म अल क्वैन, शारजाह और रास अल खैमाह में समुद्र तट अस्थायी रूप से बंद किए गए। तेल के फैलाव से समुद्री पारिस्थितिकी, मत्स्य संसाधनों और विलवणीकरण सुविधाओं को लेकर चिंता बढ़ी है।

संयुक्त अरब अमीरात में तेल रिसाव से समुद्री प्रदूषण की चिन्ता बढ़ी

 

  • अक्टूबर 2026 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के तट के निकट समुद्र में तेल रिसाव के कारण उम्म अल क्वैन, शारजाह और रास अल खैमाह के समुद्र तटों को अस्थायी रूप से बन्द करना पड़ा. उपग्रह चित्रों से तेल की परत तटीय क्षेत्रों की ओर फैलने के संकेत मिले. 
  • इससे समुद्री जैव विविधता, मत्स्य पालन तथा समुद्री जल के विलवणीकरण संयन्त्रों के लिए खतरा उत्पन्न हुआ. प्रशासन ने तेल के फैलाव को रोकने तथा पर्यावरणीय क्षति के आकलन के उपाय प्रारम्भ किए. 26 अक्टूबर तक सम्बन्धित टैंकर की पहचान और रिसाव के कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी.

तेल रिसाव क्या है?

  • समुद्र अथवा अन्य पर्यावरणीय क्षेत्रों में पेट्रोलियम हाइड्रोकार्बन का आकस्मिक या अवैध उत्सर्जन तेल रिसाव कहलाता है. इसके प्रमुख कारण तेलवाहक जहाजों की दुर्घटनाएँ, अपतटीय तेल उत्खनन, पाइपलाइन में रिसाव, उपकरणों की खराबी तथा मानवीय त्रुटियाँ हैं.

समुद्री जल में तेल का व्यवहार

समुद्र में पहुँचने पर तेल सामान्यतः सतह पर फैलकर हवाओं और जलधाराओं के साथ प्रवाहित होता है. इस दौरान विभिन्न प्रक्रियाएँ होती हैं—

  • प्रसार एवं वाष्पीकरण: तेल की परत फैलती है तथा हल्के वाष्पशील घटक वाष्पित होते हैं.
  • परिक्षेपण एवं विलयन: लहरों के कारण तेल छोटी बूँदों में विभाजित होता है तथा कुछ घटक जल में घुलते हैं.
  • पायसीकरण: तेल और जल मिलकर स्थायी पायस बना सकते हैं, जिससे सफाई कठिन होती है.
  • प्रकाश-ऑक्सीकरण एवं जैव निम्नीकरण: सूर्य का प्रकाश और सूक्ष्मजीव हाइड्रोकार्बन के विघटन में योगदान देते हैं.
  • अवसादन: कुछ तेल कणों से जुड़कर समुद्र तल पर जमा हो सकता है.

पर्यावरणीय एवं आर्थिक प्रभाव

  • तेल की परत सूर्य के प्रकाश का प्रवेश घटाकर प्रकाश-संश्लेषण को प्रभावित कर सकती है. विषैले हाइड्रोकार्बन मछलियों, प्लवकों तथा अन्य समुद्री जीवों को नुकसान पहुँचाते हैं. तेल से पक्षियों के पंखों की जलरोधी और तापरोधी क्षमता प्रभावित होती है. समुद्री कछुए एवं स्तनधारी जीव भी संकट में पड़ते हैं. मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियाँ, समुद्री घास तथा तटीय आर्द्रभूमियाँ विशेष रूप से संवेदनशील हैं. इससे खाद्य शृंखला, मत्स्य पालन, पर्यटन और तटीय आजीविका प्रभावित होती है.

तेल रिसाव नियन्त्रण की प्रमुख विधियाँ

  • कन्टेनमेण्ट बूम: तैरते अवरोधों से तेल का फैलाव रोकना.
  • स्किमिंग एवं शोषक पदार्थ: सतह से तेल एकत्र करना.
  • इन-सिटू बर्निंग: सीमित क्षेत्र में एकत्र तेल को नियन्त्रित ढंग से जलाना.
  • रासायनिक परिक्षेपक: तेल को सूक्ष्म बूँदों में विभाजित करना; इससे जलीय जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
  • जैवोपचार: सूक्ष्मजीवों की सहायता से तेल का विघटन.
  • तटीय सफाई: तेल हटाना तथा प्रभावित आवासों का पुनर्स्थापन.

अंतरराष्ट्रीय नियम और भारत की तैयारियाँ

  • अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन का MARPOL अभिसमय, विशेष रूप से इसका अनुलग्नक-I, जहाजों से होने वाले तेल प्रदूषण को नियंत्रित करता है। तेल प्रदूषण संबंधी तैयारी, प्रतिक्रिया और सहयोग अभिसमय (OPRC), 1990, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करता है।
  • भारत में भारतीय तटरक्षक बल, राष्ट्रीय तेल रिसाव आपदा आकस्मिकता योजना (NOSDCP) के अंतर्गत समुद्री तेल रिसाव से निपटने की कार्रवाई का समन्वय करता है। रिसाव के पैमाने और आवश्यक संसाधनों के आधार पर प्रतिक्रिया को तीन स्तरों में वर्गीकृत किया जाता है। प्रत्येक दो वर्ष में आयोजित राष्ट्रीय स्तर का प्रदूषण प्रतिक्रिया अभ्यास (NATPOLREX) तैयारियों को परखता है। इसका दसवाँ संस्करण अक्टूबर 2025 में चेन्नई के समुद्र तट से दूर आयोजित किया गया था।

आगे की राह: दीर्घकालिक क्षति को न्यूनतम करने के लिए जहाजों की निगरानी मजबूत करना, उपग्रह निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणालियाँ, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संवेदनशील समुद्री पर्यावासों की बहाली आवश्यक हैं।

 

प्रश्न. समुद्री तेल रिसाव एवं उसके पर्यावरणीय प्रबन्धन के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

  1. पायसीकरण की प्रक्रिया में जल-में-तेल का स्थायी पायस बनने से समुद्र में रिसे हुए तेल के बने रहने की अवधि बढ़ सकती है.
  2. रासायनिक परिक्षेपक समुद्री पर्यावरण से रिसे हुए सम्पूर्ण तेल को भौतिक रूप से हटा देते हैं.
  3. मारपोल अभिसमय का अनुलग्नक-I जहाजों से होने वाले तेल प्रदूषण की रोकथाम से सम्बन्धित है.

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

(A) केवल 1 और 2

(B) केवल 2 और 3

(C) केवल 1 और 3

(D) 1, 2 और 3

उत्तर—(C)

व्याख्या : 

कथन 1 सही है. पायसीकरण से जल-में-तेल का स्थायी पायस बन सकता है, जिससे तेल लम्बे समय तक समुद्री पर्यावरण में बना रह सकता है.

कथन 2 गलत है. रासायनिक परिक्षेपक तेल को छोटी बूँदों में विभाजित करते हैं, लेकिन उसे पूरी तरह समाप्त नहीं करते. इससे जलस्तम्भ में तेल का वितरण तथा कुछ समुद्री जीवों का उसके सम्पर्क में आना बढ़ सकता है.

कथन 3 सही है. मारपोल अभिसमय का अनुलग्नक-I जहाजों से परिचालन सम्बन्धी तथा दुर्घटनावश होने वाले तेल प्रदूषण की रोकथाम के नियम निर्धारित करता है.