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Current Affairs - Daily 27 अक्टूबर 2026

अराजकता: राजनीतिक अव्यवस्था और कानूनहीनता से परे

यूनानी शब्द ‘अनार्खिया’ से निकली अराजकता की अवधारणा केंद्रीय शासकीय सत्ता के अभाव को दर्शाती है। इसे सामान्यतः अव्यवस्था से जोड़ा जाता है, लेकिन राजनीतिक चिंतन में यह राज्य के पदानुक्रमित नियंत्रण के बिना सामाजिक संगठन की संभावना से भी संबंधित है।

अराजकता : राजनीतिक अव्यवस्था से परे एक वैचारिक अवधारणा

  • फ्रांस सहित विभिन्न यूरोपीय देशों में जनप्रदर्शनों तथा भारत में राजनीतिक विवादों के कारण 'अराजकता' (Anarchy) की अवधारणा पुनः चर्चा में आई है. भारत में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से सम्बन्धित विरोध प्रदर्शनों के दौरान अराजकता उत्पन्न करने के आरोप लगाए गए. इससे लोकतान्त्रिक असहमति, सार्वजनिक अव्यवस्था और राजनीतिक अराजकता के बीच अन्तर समझना महत्त्वपूर्ण हो गया है.

अराजकता क्या है?

  • अराजकता शब्द की उत्पत्ति यूनानी शब्द Anarkhia से हुई है, जिसका अर्थ है—'शासक का अभाव'. राजनीतिक दृष्टि से इसका तात्पर्य केन्द्रीय शासनसत्ता की अनुपस्थिति से है. सामान्यतः इसे अव्यवस्था और कानूनहीनता से जोड़ा जाता है, किन्तु राजनीतिक दर्शन में इसका व्यापक अर्थ है.

अराजकतावाद : एक राजनीतिक विचारधारा

  • उन्नीसवीं शताब्दी में विकसित अराजकतावाद (Anarchism) राज्य की बाध्यकारी सत्ता के स्थान पर स्वैच्छिक सहयोग और स्वशासित समुदायों की स्थापना का समर्थन करता है.

इसके प्रमुख सिद्धान्त हैं—

  • राज्यसत्ता का विरोध: बाध्यकारी शासन और थोपी गई सत्ता-संरचनाओं का विरोध.
  • व्यक्तिगत स्वतन्त्रता: व्यक्ति की स्वायत्तता एवं शोषण से मुक्ति.
  • विकेन्द्रीकरण: स्थानीय स्तर पर स्वशासित समुदायों की स्थापना.
  • पारस्परिक सहयोग: स्वैच्छिक संगठनों, समानता और सामूहिक सहयोग पर बल.
  • प्रत्यक्ष लोकतन्त्र: सहभागी एवं सहमति आधारित निर्णय प्रक्रिया.

प्रमुख विचारक एवं योगदान

  • विलियम गॉडविन (1756–1836): अपनी पुस्तक An Enquiry Concerning Political Justice (1793) में तर्कसंगत व्यक्तिगत स्वतन्त्रता का समर्थन किया.
  • पियरे-जोसफ प्रूधों (1809–1865): स्वयं को अराजकतावादी कहने वाले प्रारम्भिक प्रमुख विचारक; What Is Property? (1840) में सम्पत्ति सम्बन्धों की आलोचना की.
  • मिखाइल बाकुनिन (1814–1876): क्रान्तिकारी सामूहिकतावादी अराजकतावाद एवं सत्तावादी समाजवाद के विरोध के समर्थक.
  • पीटर क्रोपोटकिन (1842–1921): अराजक साम्यवाद तथा पारस्परिक सहायता के प्रमुख प्रतिपादक.

अराजकतावाद के प्रमुख प्रकार

  1. व्यक्तिवादी अराजकतावाद: व्यक्तिगत स्वायत्तता एवं स्वैच्छिक सम्बन्धों को प्राथमिकता.
  2. अराजक साम्यवाद: सामूहिक स्वामित्व तथा आवश्यकतानुसार वितरण का समर्थन.
  3. अराजक श्रमिक संघवाद: श्रमिक संगठनों एवं स्वप्रबन्धन पर बल.
  4. अराजक पूँजीवाद: राज्यविहीन व्यवस्था में निजी सम्पत्ति एवं मुक्त बाजार का समर्थन; अराजकतावाद के अन्तर्गत इसका वर्गीकरण विवादित है.
  5. हरित अराजकतावाद: पर्यावरणीय शोषण और प्रभुत्वकारी संरचनाओं का विरोध.

अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों में अराजकता

  • अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में अराजकता का अर्थ सम्प्रभु राष्ट्रों के ऊपर किसी सर्वोच्च विश्व सरकार का अभाव है. इसका अर्थ अनिवार्यतः अव्यवस्था नहीं है. राष्ट्र कूटनीति, सन्धियों और अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं के माध्यम से सहयोग कर सकते हैं.

भारतीय सन्दर्भ एवं आलोचना

  • महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज की अवधारणा विकेन्द्रीकरण, अहिंसा और स्थानीय स्वशासन पर आधारित थी, जिसमें अराजकतावादी विचारों से आंशिक समानता दिखाई देती है.
  • आलोचकों के अनुसार राज्यविहीन व्यवस्था में सुरक्षा, न्याय, सार्वजनिक सेवाओं तथा सामूहिक समन्वय की चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं. हालाँकि, शान्तिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और लोकतान्त्रिक असहमति को स्वतः अराजकता नहीं माना जा सकता.

निष्कर्ष: अराजकता केवल अव्यवस्था नहीं है; अराजकतावाद बाध्यकारी सत्ता पर प्रश्न उठाते हुए स्वतन्त्रता, समानता और स्वैच्छिक सामाजिक संगठन का समर्थन करने वाली राजनीतिक विचारधारा है.

प्रश्न. अराजकता एवं अराजकतावाद के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

  1. अराजकतावाद अनिवार्य रूप से सभी प्रकार के सामाजिक संगठनों और सामूहिक निर्णय प्रक्रियाओं का विरोध करता है.
  2. अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों में अराजकता का अर्थ सम्प्रभु राष्ट्रों से ऊपर किसी केन्द्रीय सर्वोच्च सत्ता का अभाव है.
  3. पीटर क्रोपोटकिन का सम्बन्ध अराजक साम्यवाद तथा पारस्परिक सहायता के सिद्धान्त से है.

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

(A) केवल 1 और 2

(B) केवल 2 और 3

(C) केवल 1 और 3

(D) 1, 2 और 3

उत्तर—(B)

व्याख्या : 

कथन 1 गलत है: अराजकतावाद बाध्यकारी एवं पदानुक्रमिक सत्ता का विरोध करता है, लेकिन सामाजिक संगठनों का अनिवार्यतः विरोध नहीं करता. अनेक अराजकतावादी स्वैच्छिक संगठनों, विकेन्द्रीकृत संस्थाओं और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का समर्थन करते हैं.

कथन 2 सही है: अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों में अराजकता का अर्थ स्वतन्त्र सम्प्रभु राष्ट्रों के ऊपर किसी सर्वोच्च विश्व सरकार या सत्ता का अभाव है. इसका अर्थ आवश्यक रूप से अन्तर्राष्ट्रीय अव्यवस्था नहीं है.

कथन 3 सही है: पीटर क्रोपोटकिन अराजक साम्यवाद के प्रमुख विचारक थे. उनकी पुस्तक Mutual Aid: A Factor of Evolution (1902) सामाजिक एवं विकासवादी प्रक्रियाओं में सहयोग के महत्त्व को रेखांकित करती है.

 

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श्रेणीसमाचार
 चर्चित व्यक्तित्व

लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा चौथी बार ब्राजील के राष्ट्रपति निर्वाचित 

 

  • ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने 25 अक्टूबर, 2026 को राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण में विजय प्राप्त कर ऐतिहासिक चौथा कार्यकाल हासिल किया. ब्राजील के सर्वोच्च निर्वाचन न्यायालय (TSE) के अनुसार वर्कर्स पार्टी के लूला को 6,42,56,232 मत (51.79 प्रतिशत), जबकि लिबरल पार्टी के फ्लावियो बोल्सोनारो को 5,98,26,041 मत (48.21 प्रतिशत) प्राप्त हुए. 
  • निर्वाचन न्यायालय के अध्यक्ष न्यायमूर्ति कासियो नूनेस मार्केस ने परिणाम की पुष्टि की. लूला इससे पहले 2003–2010 तक दो कार्यकाल राष्ट्रपति रहे तथा जनवरी 2023 में तीसरी बार सत्ता में आए थे. उनका नया कार्यकाल 5 जनवरी, 2027 से प्रारम्भ होगा. 
  • फ्लावियो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के पुत्र हैं. इस चुनाव में लूला ने पहले चरण में पिछड़ने के बाद दूसरे चरण में विजय प्राप्त की.
पुरस्कार एवं सम्मान

शबरी नैचुरल्स को जापान का गुड डिजाइन पुरस्कार 2026 

 

  •  महाराष्ट्र के शबरी आदिवासी वित्त एवं विकास महामण्डल की पहल ‘शबरी नैचुरल्स’ को जनजातीय कला से प्रेरित उत्पादों की ब्राण्डिंग एवं पैकेजिंग के लिए जापान का प्रतिष्ठित ‘गुड डिजाइन पुरस्कार 2026’ प्राप्त हुआ. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 अक्टूबर, 2026 को ‘मन की बात’ के 139वें संस्करण में इस उपलब्धि का उल्लेख किया. 
  • शबरी नैचुरल्स के अन्तर्गत शहद, महुआ, चिरौंजी तथा बाँस से बने उत्पादों की पैकेजिंग में पारम्परिक जनजातीय कला का उपयोग किया जाता है. गुड डिजाइन पुरस्कार की शुरुआत 1957 में हुई थी. इसका संचालन जापान इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन प्रमोशन द्वारा किया जाता है. विजेता डिजाइनों को जी-मार्क से मान्यता मिलती है. 
  • वर्ष 2026 के पुरस्कारों की घोषणा 15 अक्टूबर को की गई थी. यह सम्मान जनजातीय उत्पादों की विशिष्ट पहचान, बाजार विस्तार तथा स्थानीय आजीविका संवर्द्धन के लिए महत्त्वपूर्ण है.
निधन

जापान के पूर्व प्रधानमंत्री यासुओ फुकुदा का 90 वर्ष की आयु में निधन 

 

  • जापान के पूर्व प्रधानमंत्री यासुओ फुकुदा का 22 अक्टूबर, 2026 को 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उनके निधन की आधिकारिक जानकारी 26 अक्टूबर को सार्वजनिक हुई. लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता फुकुदा सितम्बर 2007 से सितम्बर 2008 तक जापान के 91वें प्रधानमंत्री रहे. उन्होंने शिंजो आबे का स्थान लिया था. उनके पिता ताकेओ फुकुदा भी जापान के प्रधानमंत्री रह चुके थे, जिससे वे प्रधानमंत्री बनने वाले जापान के पहले पिता-पुत्र युगल बने.
  • वासेदा विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त फुकुदा 1990 में पहली बार संसद के निचले सदन के सदस्य निर्वाचित हुए. वे 2000–2004 तक मुख्य कैबिनेट सचिव भी रहे. प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने 2008 में होक्काइडो के तोयाको में जी-8 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की. चीन सहित एशियाई देशों के साथ सम्बन्ध सुधारने में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा.
 खेल

अहमदाबाद को विश्व सीनियर भारोत्तोलन चैम्पियनशिप 2029 की मेजबानी 

 

  • अन्तर्राष्ट्रीय भारोत्तोलन महासंघ (IWF) ने 25 अक्टूबर, 2026 को गुजरात के अहमदाबाद को वर्ष 2029 की विश्व सीनियर भारोत्तोलन चैम्पियनशिप की मेजबानी प्रदान करने की घोषणा की. यह निर्णय चीन के निंगबो में महासंघ की कार्यकारी परिषद् की बैठक में लिया गया. भारत पहली बार विश्व सीनियर भारोत्तोलन चैम्पियनशिप की मेजबानी करेगा. 
  • वर्ष 2030 की सीनियर विश्व चैम्पियनशिप रूस की राजधानी मॉस्को में होगी. वर्ष 2028 की विश्व युवा चैम्पियनशिप प्रिश्टिना (कोसोवो) और विश्व जूनियर चैम्पियनशिप कराकस (वेनेजुएला) में आयोजित होगी. अन्तर्राष्ट्रीय भारोत्तोलन महासंघ की स्थापना 10 जून, 1905 को हुई थी. 
  • इसका मुख्यालय लुसाने, स्विट्जरलैण्ड में है. यह भारोत्तोलन का अन्तर्राष्ट्रीय नियामक महासंघ है, जिसे अन्तर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति की मान्यता प्राप्त है. इस आयोजन से भारत में भारोत्तोलन एवं अन्तर्राष्ट्रीय खेल अवसंरचना को प्रोत्साहन मिलने की सम्भावना है.
खेल

आन से-यंग ने लगातार तीसरी बार फ्रेंच ओपन बैडमिंटन खिताब जीता 

 

  • दक्षिण कोरिया की विश्व की शीर्ष वरीयता प्राप्त बैडमिंटन खिलाड़ी आन से-यंग ने 25 अक्टूबर, 2026 को फ्रांस में सम्पन्न योनैक्स फ्रेंच ओपन 2026 का महिला एकल खिताब जीता. विश्व बैडमिंटन महासंघ (BWF) की सुपर-750 श्रेणी की इस प्रतियोगिता के फाइनल में उन्होंने भारत की दो बार की ओलम्पिक पदक विजेता पी. वी. सिन्धु को 16–21, 21–11, 21–12 से पराजित किया. 
  • पहला गेम सिन्धु ने जीता था, लेकिन अगले दोनों गेम जीतकर आन से-यंग विजेता बनीं. यह उनका लगातार तीसरा तथा कुल चौथा फ्रेंच ओपन खिताब था. इससे पहले वे 2019, 2024 एवं 2025 में विजेता रही थीं. 
  • यह वर्ष 2026 में उनका दसवाँ खिताब भी था. इस विजय के साथ उनकी लगातार जीत का क्रम 50 मैचों तक पहुँच गया. सिन्धु प्रतियोगिता की उपविजेता रहीं.
ऐतिहासिक स्थल

उत्तराखण्ड के काशीपुर में प्राचीन गोविषाण स्थल का पुनः पुरातात्त्विक उत्खनन 

 

  • भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) ने अक्टूबर 2026 में उत्तराखण्ड के ऊधम सिंह नगर जिले के काशीपुर में द्रोण सागर के निकट लगभग 90 एकड़ क्षेत्र में फैले पुरातात्त्विक टीले का पुनः उत्खनन प्रारम्भ किया. इस स्थल की पहचान प्राचीन गोविषाण से की जाती है. पुरातत्त्वविद् अलेक्जेण्डर कनिंघम ने इसे सातवीं शताब्दी के चीनी बौद्ध यात्री ह्वेनसांग द्वारा वर्णित स्थान से सम्बद्ध किया था. 
  • यहाँ 1939–40, 1965–66 और 1970–71 में भी उत्खनन हुए थे. पूर्व उत्खननों में गुप्तकालीन एवं प्रारम्भिक मध्यकालीन मन्दिर संरचनाओं के अवशेष मिले थे. एएसआई के देहरादून मण्डल के अनुसार नवीन उत्खनन का उद्देश्य वैज्ञानिक प्रमाण एकत्र करना तथा स्थल के सांस्कृतिक विकासक्रम को स्पष्ट करना है. 
  • स्थानीय मान्यताओं में इसका सम्बन्ध महाभारत के द्रोणाचार्य एवं पाण्डवों से बताया जाता है, किन्तु यह सम्बन्ध पुरातात्त्विक रूप से प्रमाणित नहीं है.
चर्चित अवधारणा

इमर्सिव प्रौद्योगिकियाँ : वास्तविक एवं आभासी संसार का एकीकरण 

 

  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 26 अक्टूबर, 2026 को इमर्सिव प्रौद्योगिकियों के बढ़ते उपयोग पर विशेष विवरण जारी किया. इन प्रौद्योगिकियों में आभासी वास्तविकता (VR), संवर्द्धित वास्तविकता (AR), मिश्रित वास्तविकता (MR) तथा विस्तारित वास्तविकता (XR) शामिल हैं. आभासी वास्तविकता पूर्णतः कृत्रिम डिजिटल परिवेश निर्मित करती है, जबकि संवर्द्धित वास्तविकता वास्तविक परिवेश में डिजिटल जानकारी जोड़ती है. 
  • मिश्रित वास्तविकता में वास्तविक एवं आभासी वस्तुएँ परस्पर क्रिया कर सकती हैं. इनका उपयोग शिक्षा, चिकित्सा प्रशिक्षण, औद्योगिक अभिकल्पन, पर्यटन, खेल एवं मनोरंजन में होता है. मुम्बई स्थित भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT) एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र को प्रोत्साहित कर रहा है. 
  • केन्द्रीय बजट 2026–27 में 15,000 माध्यमिक विद्यालयों तथा 500 महाविद्यालयों में सामग्री निर्माता प्रयोगशालाओं के लिए ₹250 करोड़ आवंटित किए गए. यह विषय 27–29 अक्टूबर के ईएसटीआईसी-2026 सम्मेलन में भी शामिल है.
पर्यावरण एवं जैव विविधता

अरुणाचल प्रदेश में ओफियोराइजा की दो नई वनस्पति प्रजातियों की खोज 

 

  • अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले के विजयनगर क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने पुष्पीय पौधों की दो नई प्रजातियों—Ophiorrhiza shidiensis एवं Ophiorrhiza pemae—की पहचान की है. इनका विवरण 23 अक्टूबर, 2026 को वैज्ञानिक शोध पत्रिका Taiwania में प्रकाशित हुआ. दोनों प्रजातियाँ रुबिएसी कुल से सम्बन्धित हैं, जिसमें कॉफी के पौधे भी शामिल हैं. यह अध्ययन भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के कृष्णा चौलू एवं विनय कुमार साहनी तथा मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज की रेंथलेई लालनुनफेली ने किया. 
  • O. shidiensis का नाम लिसू समुदाय द्वारा गान्धीग्राम के लिए प्रयुक्त पारम्परिक नाम ‘शिडी’ पर रखा गया है. O. pemae का नाम अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खाण्डू के सम्मान में रखा गया है.  
  • इनकी पहचान पत्तियों, पुष्पों एवं अन्य संरचनात्मक विशेषताओं के तुलनात्मक अध्ययन से हुई. यह खोज भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को रेखांकित करती है.
पर्यावरण एवं जैव विविधता

केरल के मीशापुलिमाला क्षेत्र में नीलकुरिंजी का पुष्पन 

 

  • केरल के मुन्नार क्षेत्र में स्थित मीशापुलिमाला की पहाड़ी ढलानों पर अक्टूबर 2026 में नीलकुरिंजी (Strobilanthes kunthiana) के पुष्प खिलने की खबर सामने आई. केरल वन विकास निगम के रोडो मैन्शन के निकट लगभग 2,470 मीटर की ऊँचाई पर इसका पुष्पन देखा गया. नीलकुरिंजी पश्चिमी घाट के शोला वनों एवं उच्च पर्वतीय घास के मैदानों में पाई जाने वाली पुष्पीय झाड़ी है.  
  • इसके नीले-बैंगनी रंग के पुष्प पहाड़ियों को विशिष्ट रंग प्रदान करते हैं. इसकी कुछ आबादियों में लगभग 12 वर्ष के अन्तराल पर सामूहिक पुष्पन होता है. सम्बन्धित क्षेत्र में इससे पहले 2014 में व्यापक पुष्पन दर्ज हुआ था. 
  • अलग-अलग क्षेत्रों में नीलकुरिंजी के पुष्पन का चक्र भिन्न हो सकता है. यह घटना पश्चिमी घाट की विशिष्ट जैव विविधता, परागणकर्ताओं तथा संवेदनशील पर्वतीय पारिस्थितिकी तन्त्र के संरक्षण का महत्त्व दर्शाती है.
महत्त्वपूर्ण दिवस

जम्मू-कश्मीर में 79वाँ विलय दिवस मनाया गया 

 

  • जम्मू-कश्मीर में 26 अक्टूबर, 2026 को 79वाँ विलय दिवस (Accession Day) मनाया गया. यह दिवस 26 अक्टूबर, 1947 को तत्कालीन रियासत के महाराजा हरि सिंह द्वारा भारत में विलय के अधिमिलन-पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर करने की ऐतिहासिक घटना की स्मृति में मनाया जाता है. 
  • तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड माउण्टबेटन ने 27 अक्टूबर, 1947 को अधिमिलन स्वीकार किया था. यह घटना भारत के विभाजन के बाद उत्पन्न राजनीतिक एवं सैन्य परिस्थितियों तथा पाकिस्तान की ओर से हुए कबायली आक्रमण के दौरान हुई. अधिमिलन-पत्र में रक्षा, विदेश मामले तथा संचार जैसे विषय शामिल थे. जम्मू-कश्मीर केन्द्रशासित प्रदेश में यह आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश है.
  •  जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के अन्तर्गत पूर्ववर्ती राज्य को 31 अक्टूबर, 2019 से जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख नामक दो केन्द्रशासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया. भारतीय इतिहास एवं राजव्यवस्था की दृष्टि से यह दिवस महत्त्वपूर्ण है.