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Current Affairs - Daily 30 अक्टूबर 2026

लवणीय दलदल: तटीय कटाव के विरुद्ध प्रकृति का जीवंत सुरक्षा कवच

हालिया वैज्ञानिक शोध ने तटीय कटाव, समुद्र-स्तर में वृद्धि और तूफान से जुड़े खतरों के समाधान में लवणीय दलदलों की भूमिका पर ध्यान आकर्षित किया है। कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरनमेंट में प्रकाशित अध्ययन ने समुद्री दीवारों के सामने दलदलों की बहाली से मिलने वाले सुरक्षात्मक और आर्थिक लाभों का परीक्षण किया। वहीं, ग्लोबल वेटलैंड आउटलुक ने आर्द्रभूमियों के व्यापक क्षरण को रेखांकित करते हुए पारिस्थितिकी-आधारित तटीय अनुकूलन की आवश्यकता उजागर की है।

लवणीय दलदल : तटीय अपरदन के विरुद्ध प्रकृति की जीवित सुरक्षा-पंक्ति

  • हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों ने तटीय अपरदन, समुद्र-स्तर में वृद्धि और तूफानी लहरों से बचाव के प्रकृति-आधारित उपाय के रूप में लवणीय दलदलों (Salt Marshes) के महत्व को पुनः रेखांकित किया है। 
  • Communications Earth & Environment में प्रकाशित अध्ययन ने समुद्री तटबन्धों के आगे दलदली वनस्पति के पुनर्स्थापन से होने वाले संरक्षणात्मक एवं आर्थिक लाभों का विश्लेषण किया। वैश्विक आर्द्रभूमि परिदृश्य भी आर्द्रभूमियों के क्षरण के कारण इनके संरक्षण की आवश्यकता दर्शाता है।

लवणीय दलदल क्या हैं?

  • ये ज्वार से प्रभावित तटीय आर्द्रभूमियाँ हैं, जिनमें लवण-सहिष्णु घासें, शाकीय पौधे और अन्य हैलोफाइट वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। इनका विकास मुख्यतः अपेक्षाकृत शांत तटों, ज्वारनदमुखों, लैगून तथा ज्वारीय खाड़ियों में होता है, जहाँ महीन अवसाद जमा होते हैं। 
  • मैंग्रोव में काष्ठीय वृक्षों एवं झाड़ियों की प्रधानता होती है, जबकि लवणीय दलदलों में सामान्यतः शाकीय वनस्पति का प्रभुत्व होता है।

तटीय भू-आकृतियाँ और लहरों की ऊर्जा में कमी

  • लवणीय दलदल समुद्र और तटीय बस्तियों के बीच प्राकृतिक अवरोध का कार्य करते हैं। इनके तनों एवं पत्तियों से उत्पन्न घर्षण लहरों की ऊर्जा घटाता है, जबकि जड़ें तथा भूमिगत तने अवसाद को बाँधकर भूमि की स्थिरता बढ़ाते हैं। जलधाराओं का वेग घटने से अवसादन और दलदली सतह के क्रमिक उत्थान को सहायता मिल सकती है। 
  • हालाँकि यह प्रभाव ज्वारीय जल-गहराई, लहरों की ऊँचाई, वनस्पति की सघनता और अवसाद की उपलब्धता पर निर्भर करता है। अत्यधिक तीव्र तूफानों में वनस्पति क्षतिग्रस्त हो सकती है; इसलिए यह हर स्थान पर कठोर तटीय संरचनाओं का पूर्ण विकल्प नहीं है।

तटीय प्रक्रियाएँ

  • अपरदन—समुद्री लहरों/धाराओं से अवसाद का हटना। अभिवृद्धि (Accretion)—अवसाद के जमाव से तट का बढ़ना। तरंग क्षीणन—लहर की ऊँचाई अथवा ऊर्जा में कमी। अन्तर्ज्वारीय क्षेत्र-उच्च और निम्न ज्वार-सीमा के बीच का क्षेत्र।

 

आँकड़े और भारतीय परिप्रेक्ष्य

  • राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केन्द्र (NCCR) के 1990–2018 के आकलन में भारत की मुख्यभूमि की विश्लेषित तटरेखा का 33·6% भाग अपरदन, 26·9% अभिवृद्धि और लगभग 39·5% भाग स्थिर अवस्था में पाया गया। 
  • ये आँकड़े ऐतिहासिक अवधि के हैं, वर्तमान वार्षिक अपरदन-दर नहीं। वैश्विक आर्द्रभूमि परिदृश्य, 2025 के अनुसार वर्ष 1970 के बाद विश्व में कम-से-कम 40 करोड़ हेक्टेयर आर्द्रभूमि नष्ट हुई है। यह आँकड़ा सभी प्रकार की आर्द्रभूमियों के लिए है, केवल लवणीय दलदलों के लिए नहीं।

संवैधानिक और कानूनी आधार

  • संविधान का अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण-संरक्षण का निर्देश देता है, जबकि अनुच्छेद 51A(g) नागरिकों के पर्यावरणीय कर्तव्य को निर्धारित करता है। न्यायिक व्याख्या में अनुच्छेद 21 को स्वस्थ पर्यावरण से भी जोड़ा गया है।
  • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 तथा तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) अधिसूचना, 2019 तटीय प्रबन्धन का प्रमुख नियामक आधार हैं। लवणीय दलदलों को पारिस्थितिक दृष्टि से संवेदनशील तटीय क्षेत्रों में मान्यता दी गई है। आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबन्धन) नियम, 2017 भी अपने निर्धारित दायरे की आर्द्रभूमियों पर प्रासंगिक हैं।

पारिस्थितिक, आर्थिक और सामाजिक महत्व

  • ये दलदल मछलियों एवं अन्य जलीय जीवों के प्रजनन-पोषण स्थल, प्रवासी पक्षियों के आहार क्षेत्र और पोषक-तत्व चक्र के प्रमुख केन्द्र हैं। जलसंतृप्त अवसादों में जैविक कार्बन का दीर्घकालीन भण्डारण इन्हें ‘ब्लू कार्बन’ पारितंत्र का हिस्सा बनाता है। 
  • तटीय अपरदन में कमी से बुनियादी ढाँचे और आजीविका की सुरक्षा में सहायता मिल सकती है। तटबन्धों के सामने दलदल का संरक्षण ‘हाइब्रिड’ समाधान है, जिसमें पारिस्थितिकी और अभियांत्रिकी के लाभ एक साथ प्राप्त होते हैं।

ब्लू कार्बन

  • ब्लू कार्बन—मैंग्रोव, समुद्री घास और ज्वारीय लवणीय दलदलों जैसे तटीय एवं समुद्री पारितंत्रों द्वारा संचित कार्बन। हाइब्रिड रक्षा- वनस्पतीय प्राकृतिक अवरोध और अभियांत्रिक संरचना का संयोजन।

 

कारण, समस्याएँ और चुनौतियाँ

  • भूमि-पुनर्भरण, बन्दरगाह निर्माण, जलीय कृषि, प्रदूषण तथा नदियों से अवसाद की आपूर्ति में परिवर्तन से दलदलों का क्षरण होता है। समुद्र-स्तर तेजी से बढ़ने पर पर्याप्त अवसादन न होने से ये डूब सकते हैं। 
  • समुद्री दीवारें इनके स्थल की ओर स्वाभाविक विस्तार को रोकती हैं; इस स्थिति को ‘कोस्टल स्क्वीज’ कहा जाता है। उपयुक्त ज्वारीय आवागमन और लवणता बहाल किए बिना केवल पौधरोपण करना टिकाऊ पुनर्स्थापन सुनिश्चित नहीं करता।

सरकारी पहल और उदाहरण

  • भारत में CRZ व्यवस्था, तटीय क्षेत्र प्रबन्धन योजनाएँ, राष्ट्रीय तटीय मिशन और NCCR की तटरेखा निगरानी संस्थागत आधार प्रदान करती हैं। जून 2023 में आरम्भ MISHTI 
  • योजना विशेष रूप से मैंग्रोव पुनर्स्थापन के लिए है; इसे लवणीय दलदलों की पृथक योजना नहीं मानना चाहिए। विश्व के विभिन्न तटों पर ‘लिविंग शोरलाइन’ उपायों में दलदली वनस्पति, अवसाद प्रबन्धन और आवश्यकता के अनुसार कम ऊँचाई की सुरक्षात्मक संरचनाओं को संयोजित किया जाता है।

आगे की राह

  • भारत को लवणीय दलदलों का व्यवस्थित मानचित्रण करके इन्हें तटीय संवेदनशीलता आकलन तथा जिला आपदा प्रबन्धन में सम्मिलित करना चाहिए। पुनर्स्थापन में प्राकृतिक ज्वारीय प्रवाह, स्थानीय लवण-सहिष्णु पौधों, अवसाद-सन्तुलन और स्थल की ओर विस्तार के लिए पर्याप्त स्थान को प्राथमिकता मिले। 
  • उपग्रह एवं मैदानी निगरानी से वास्तविक अपरदन-नियन्त्रण प्रभाव मापा जाए। सामुदायिक भागीदारी, दीर्घकालीन वित्तपोषण और आवश्यकतानुसार हाइब्रिड संरचनाएँ अपनाना उपयोगी होगा।

 

प्रश्न

प्रश्न. लवणीय दलदलों एवं तटीय संरक्षण के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - 

1. लवणीय दलदल मुख्यतः अपेक्षाकृत शांत अन्तर्ज्वारीय क्षेत्रों में विकसित होते हैं, जहाँ अवसादन लवण-सहिष्णु वनस्पति को सहारा देता है।

2. लवणीय दलदली वनस्पति तरंगों की ऊर्जा घटा सकती है, किन्तु उसकी प्रभावशीलता स्थानीय जलगतिकीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

3. MISHTI योजना विशेष रूप से मैंग्रोव के बजाय लवणीय दलदलों के पुनर्स्थापन पर केन्द्रित है।

4. भारत की CRZ व्यवस्था लवणीय दलदलों को पारिस्थितिक दृष्टि से संवेदनशील तटीय विशेषताओं में मान्यता देती है।

कूट 

(A) केवल 1, 2 और 4   

(B) केवल 1 और 3   

(C) केवल 2, 3 और 4   

(D) 1, 2, 3 और 4

उत्तर—(A)

व्याख्या - कथन 1, 2 और 4 सही हैं। लवणीय दलदल उपयुक्त अन्तर्ज्वारीय क्षेत्रों में बनते हैं तथा उनकी वनस्पति स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तरंगों की ऊर्जा घटाकर अवसादन में सहायता कर सकती है। CRZ में इन्हें पारिस्थितिक दृष्टि से संवेदनशील माना गया है। 

कथन 3 गलत है, क्योंकि MISHTI मैंग्रोव पुनर्स्थापन से सम्बन्धित है।