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Current Affairs - Daily 29 अक्टूबर 2026

भारत-रूस संबंध और बदलती बहु-संरेखण नीति

भारत की रणनीतिक स्वायत्तता अब केवल गुटनिरपेक्षता नहीं बल्कि विभिन्न शक्ति केंद्रों के साथ समानांतर साझेदारियां बनाए रखने की क्षमता पर निर्भर करती है। बढ़ती वैश्विक प्रतिद्वंद्विता इस संतुलन को कठिन बना रही है।

भारत-रूस संबंध और बदलती बहु-संरेखण नीति

  • पाठ्यक्रम मानचित्रण: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — भारत के विदेश संबंध, द्विपक्षीय संबंध और वैश्विक समूह।
  • स्रोत एवं तिथि: द हिंदू, 28 अक्टूबर 2026।

हालिया संदर्भ

रूस, पश्चिम और अन्य प्रमुख शक्तियों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने का भारत का प्रयास मॉस्को में अविश्वास पैदा कर सकता है।

इसका तात्कालिक संदर्भ एससीओ (SCO) और ब्रिक्स (BRICS) में भारत की भागीदारी, रूस के साथ उसके निरंतर आर्थिक संबंध, तथा बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में “अनंत युद्ध” से आगे बढ़कर समाधान की दिशा में बढ़ने की सार्वजनिक अपील है।

रणनीतिक स्वायत्तता क्या है?

रणनीतिक स्वायत्तता से आशय किसी राज्य की उस क्षमता से है, जिसके आधार पर वह विदेश नीति के निर्णय किसी सैन्य या राजनीतिक गुट का स्वतः अनुसरण करने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार ले सके।

भारत के लिए यह अब बढ़ते हुए बहु-संरेखण (multi-alignment) का रूप ले चुका है: एक ओर अमेरिका और यूरोप के साथ सहयोग, दूसरी ओर रूस के साथ साझेदारी बनाए रखना, साथ ही ब्रिक्स और एससीओ में भागीदारी तथा पश्चिम एशिया और वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ सक्रिय संपर्क।

इसका उद्देश्य हर शक्ति से समान दूरी बनाए रखना नहीं, बल्कि विभिन्न मुद्दों पर लचीलापन बनाए रखना है।

रूस अब भी है महत्त्वपूर्ण 

रूस भारत के लिए रक्षा, ऊर्जा, परमाणु सहयोग और कूटनीतिक समन्वय के क्षेत्रों में अब भी महत्त्वपूर्ण है।

आधिकारिक रूप से दोनों देश अपने संबंधों को लंबे समय से चली आ रही साझेदारी और पारस्परिक हितों पर आधारित विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त सामरिक साझेदारी (Special and Privileged Strategic Partnership) के रूप में वर्णित करते हैं।

विशेषकर यूक्रेन संघर्ष के बाद भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद में वृद्धि ने इस संबंध के आर्थिक आयाम को और मजबूत किया है।

लेकिन रक्षा निर्भरता बदल रही है

भारत और रूस के बीच रक्षा संबंध अभी भी महत्त्वपूर्ण हैं, लेकिन निर्भरता पहले की तुलना में कम हुई है।

सिपरी (SIPRI) के अनुसार, भारत के प्रमुख हथियार आयात में रूस की हिस्सेदारी 2011-15 में 70% से घटकर 2021-25 में 40% रह गई, जबकि भारत ने फ्रांस, इज़राइल और अमेरिका से भी अधिक रक्षा उपकरण प्राप्त किए।

इसे रूस से पूर्ण दूरी के रूप में नहीं, बल्कि आपूर्तिकर्ताओं के विविधीकरण (supplier diversification) के रूप में समझना अधिक उपयुक्त है।

ब्रिक्स और एससीओ से बढ़ती जटिलता 

ब्रिक्स और एससीओ भारत को रूस, चीन और अन्य गैर-पश्चिमी शक्तियों के साथ जुड़ने तथा अधिक बहुध्रुवीय अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थन करने का मंच प्रदान करते हैं।

2026 ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा ने विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की पुष्टि की, पश्चिम एशिया में तनाव पर चिंता व्यक्त की और फिलिस्तीनी अधिकारों तथा दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन को दृढ़ता से दोहराया।

लेकिन भारत पश्चिमी देशों के साथ भी घनिष्ठ रणनीतिक संबंध बनाए रखता है। इससे ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं, जहाँ एक संघर्ष पर भारत की स्थिति दूसरे संघर्ष पर उसकी स्थिति से मेल खानी आवश्यक नहीं होती।

संतुलन बनाम पारस्परिक विश्वास

यदि भारत बार-बार सार्वजनिक रूप से रूस की आलोचना करता है, तो मॉस्को में संदेह उत्पन्न हो सकता है। लेकिन भारत और रूस के आधिकारिक दस्तावेज अब भी इस साझेदारी को लचीला, स्थिर और रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण बताते हैं।

इसलिए विश्वास इस बात पर निर्भर नहीं करता कि दोनों देश हर संघर्ष पर बिल्कुल एक जैसी स्थिति लें, बल्कि इस पर निर्भर करता है कि वे दोनों इस संबंध में पर्याप्त रणनीतिक और आर्थिक मूल्य देखते हैं या नहीं।

मूल नीतिगत सीख

भारत की चुनौती अब साधारण संतुलन से आगे बढ़कर मुद्दा-आधारित रणनीतिक स्वायत्तता तक पहुँच चुकी है।

रूस, पश्चिम, ब्रिक्स सदस्य देशों और पश्चिम एशियाई शक्तियों के साथ भारत के संबंध अब अधिक परस्पर जुड़े हुए हैं और कई बार एक-दूसरे से टकरा भी सकते हैं। बहु-संरेखण की स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारत अपने साझेदारों के साथ स्पष्ट संवाद बनाए रखे, आर्थिक और रक्षा साझेदारियों का विविधीकरण करे, और मतभेदों को इस सीमा तक न बढ़ने दे कि वे पूरे संबंध को परिभाषित करने लगें।


संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न

“तेजी से ध्रुवीकृत होती दुनिया में रणनीतिक स्वायत्तता के लिए भारत को प्रमुख शक्तियों से समान दूरी बनाए रखने के बजाय समानांतर साझेदारियों का प्रबंधन करना पड़ता है।” समकालीन भारत-रूस संबंधों के संदर्भ में चर्चा कीजिए।


प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न

भारत-रूस संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. रक्षा सहयोग ऐतिहासिक रूप से द्विपक्षीय संबंधों का एक महत्त्वपूर्ण घटक रहा है।
  2. भारत द्वारा हथियार आपूर्तिकर्ताओं में विविधीकरण का अर्थ आवश्यक रूप से रूस के साथ रक्षा सहयोग की समाप्ति है।
  3. भारत और रूस आधिकारिक रूप से अपने संबंधों को विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त सामरिक साझेदारी के रूप में वर्णित करते हैं।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

A. केवल 1
B. केवल 1 और 3
C. केवल 2 और 3
D. 1, 2 और 3

सही उत्तर: B

व्याख्या: भारत ने रक्षा खरीद के स्रोतों में विविधता लाई है, लेकिन रूस अब भी महत्त्वपूर्ण रक्षा साझेदार बना हुआ है। विविधीकरण का उद्देश्य जोखिम कम करना है, न कि किसी मौजूदा रणनीतिक संबंध को स्वतः समाप्त करना।