2075 तक विश्व की लगभग सभी उथले जल की प्रवाल भित्तियों पर पतन का खतरा
आईयूसीएन ने 22 अक्टूबर 2026 को पारिस्थितिकी तंत्रों की लाल सूची के अंतर्गत उथले जल की प्रवाल भित्तियों का पहला वैश्विक आकलन जारी किया। इसमें 127 पारिस्थितिक क्षेत्रों में से 122 को गंभीर संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया।
वर्ष 2075 तक विश्व के लगभग सभी प्रवाल भित्ति पारितन्त्रों पर विनाश का संकट
अन्तर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने 22 अक्टूबर, 2026 को अपनी पारितन्त्रों की वैश्विक लाल सूची (Red List of Ecosystems) के तहत् पहली वैश्विक प्रवाल भित्ति आकलन रिपोर्ट जारी की। इसके अनुसार वर्ष 2075 तक उथले समुद्री जल की लगभग सभी आकलित प्रवाल भित्तियों के पारितन्त्रों पर अत्यधिक गम्भीर विनाश का खतरा है। यह रिपोर्ट आर्मेनिया की राजधानी येरेवान में जैव विविधता अभिसमय (CBD) के COP17 सम्मेलन के दौरान जारी की गई।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
96% अत्यन्त संकटग्रस्त: 80 से अधिक देशों एवं क्षेत्रों के 127 उष्णकटिबन्धीय एवं उपोष्णकटिबन्धीय प्रवाल भित्ति पारितन्त्रों में से 122 (96%) ‘अत्यन्त संकटग्रस्त’ (Critically Endangered) श्रेणी में हैं। ये आकलित प्रवाल भित्ति क्षेत्र के 99·8% भाग में विस्तृत हैं। अध्ययन में कुल 1,88,362 वर्ग किमी प्रवाल भित्तियाँ शामिल हैं।
वर्तमान एवं भावी जोखिम: केवल पिछले 50 वर्षों के परिवर्तनों के आधार पर 24% पारितन्त्र अत्यन्त संकटग्रस्त हैं, जबकि भविष्य के जलवायु अनुमानों को शामिल करने पर यह आँकड़ा 96% हो जाता है।
पहले ही विनष्ट: पश्चिमी गैलापागोस द्वीपसमूह का प्रवाल भित्ति पारितन्त्र ‘विनष्ट’ (Collapsed) श्रेणी में है, जबकि चार पारितन्त्रों के आँकड़े अपर्याप्त हैं।
जलवायु परिदृश्य: अध्ययन में IPCC के SSP2-4.5 परिदृश्य का उपयोग किया गया है, जिसके अनुसार वर्ष 2100 तक तापमान में लगभग 2·7°C की वृद्धि अनुमानित है।
प्रजातियों पर संकट: IUCN के एक अन्य आकलन के अनुसार पर्याप्त आँकड़ों वाली 44% भित्ति-निर्माणकारी प्रवाल प्रजातियाँ विलुप्ति के खतरे का सामना कर रही हैं।
प्रवाल भित्तियाँ एवं पारिस्थितिक महत्व
प्रवाल निडेरिया (Cnidaria) संघ के समुद्री अकशेरुकी जीव हैं। भित्ति-निर्माणकारी प्रवाल कैल्शियम कार्बोनेट का कंकाल बनाते हैं तथा इनके ऊतकों में जूजैन्थेली (Zooxanthellae) नामक प्रकाश-संश्लेषी शैवाल सहजीवी रूप में रहते हैं।
समुद्र तल के 1% से भी कम क्षेत्र में विस्तृत प्रवाल भित्तियाँ लगभग 25% समुद्री मछली प्रजातियों को आश्रय देती हैं। ये मत्स्य पालन, पर्यटन, तटीय आजीविका तथा तूफानों एवं तटीय कटाव से सुरक्षा में महत्वपूर्ण हैं।
प्रमुख खतरे
समुद्री तापवृद्धि: समुद्री ऊष्मा तरंगों के कारण सहजीवी शैवालों के नष्ट होने या बाहर निकलने से प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching) होता है। लम्बे समय तक तापीय तनाव से प्रवाल मर सकते हैं।
अत्यधिक मत्स्यन: पैरटफिश एवं ग्रूपर जैसी मछलियों में कमी पारिस्थितिक सन्तुलन बिगाड़ती है, जिससे 63% प्रवाल भित्ति पारितन्त्र प्रभावित हैं।
प्रदूषण एवं विकास: अवसादन, तटीय निर्माण, जलीय कृषि तथा अत्यधिक पर्यटन प्रवालों के क्षरण को बढ़ाते हैं।
अन्य खतरे: तीव्र तूफान, मीठे पानी की बाढ़, महासागरीय अम्लीकरण तथा क्राउन-ऑफ-थॉर्न्स स्टारफिश का प्रकोप प्रवाल भित्तियों की अनुकूलन क्षमता को प्रभावित करते हैं।
पारितन्त्र के विनाश की स्थिति में जीवित कठोर प्रवालों का स्थान शैवाल, मलबे एवं स्पंज ले लेते हैं, जिससे पारिस्थितिक कार्य बाधित होते हैं।
भारत के लिए महत्व एवं आगे की राह
भारत में प्रमुख प्रवाल भित्तियाँ मन्नार की खाड़ी, कच्छ की खाड़ी, लक्षद्वीप तथा अण्डमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में पाई जाती हैं। इनके क्षरण से समुद्री जैव विविधता, मत्स्य संसाधन, तटीय आजीविका तथा द्वीपीय सुरक्षा प्रभावित होती है।
समाधान के लिए पेरिस समझौते के लक्ष्यों का क्रियान्वयन, समुद्री संरक्षित क्षेत्रों का सुदृढ़ीकरण, तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) नियमों का प्रभावी प्रवर्तन, प्रदूषण एवं विनाशकारी मत्स्यन पर नियन्त्रण, प्रवाल पुनर्स्थापन तथा समुदाय-आधारित निगरानी आवश्यक हैं।
MCQ
प्रश्न. IUCN की वैश्विक प्रवाल भित्ति पारितन्त्र लाल सूची आकलन रिपोर्ट (2026) के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
इस आकलन में 127 उष्णकटिबन्धीय एवं उपोष्णकटिबन्धीय प्रवाल भित्ति पारितन्त्र शामिल थे।
लगभग 96% आकलित पारितन्त्रों को अत्यन्त संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया।
पश्चिमी गैलापागोस द्वीपसमूह के प्रवाल भित्ति पारितन्त्र को विनष्ट श्रेणी में रखा गया।
इस आकलन में गहरे समुद्र एवं ठण्डे जल के सभी प्रवाल पारितन्त्र भी शामिल थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौनसे सही हैं?
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 1, 2 और 3
(C) केवल 2, 3 और 4
(D) 1, 2, 3 और 4
उत्तर—(B)
व्याख्या: IUCN ने उथले समुद्री जल के 127 प्रवाल भित्ति पारितन्त्रों का आकलन किया, जिनमें 122 अत्यन्त संकटग्रस्त पाए गए। पश्चिमी गैलापागोस का प्रवाल पारितन्त्र पहले ही विनष्ट श्रेणी में है। गहरे समुद्र तथा ठण्डे जल के प्रवाल पारितन्त्र इस अध्ययन में शामिल नहीं थे।