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Current Affairs - Daily 29 अक्टूबर 2026

केरल की बढ़ती बुजुर्ग आबादी: अधिकार, देखभाल और सिल्वर इकोनॉमी की संभावनाएँ

केरल विधानसभा ने ‘केरलम वरिष्ठ नागरिक (देखभाल और अधिकारों का संरक्षण) विधेयक, 2026’ सर्वसम्मति से पारित किया। यह बुजुर्गों को केवल कल्याणकारी सहायता के लाभार्थियों के रूप में देखने के बजाय उनके अधिकारों, देखभाल संबंधी जरूरतों और स्वैच्छिक आर्थिक भागीदारी को मान्यता देने का प्रस्ताव करता है। यह दृष्टिकोण बुजुर्ग आबादी की जरूरतों और भागीदारी से जुड़ी सिल्वर इकोनॉमी की चर्चा को आगे बढ़ाता है।

केरल में वृद्धजन आबादी और सिल्वर इकोनॉमी

  • हाल ही में केरल विधानसभा ने ‘केरलम वरिष्ठ नागरिक (देखभाल एवं अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2026’ सर्वसम्मति से पारित किया। यह पहल वृद्धजनों को केवल कल्याण योजनाओं के लाभार्थी मानने के बजाय उनके अधिकारों, देखभाल की आवश्यकताओं और स्वैच्छिक आर्थिक सहभागिता को मान्यता देने की दिशा में महत्त्वपूर्ण है। ध्यान रहे कि 28 अक्टूबर तक विधानसभा में पारित होना, राज्यपाल की स्वीकृति के बाद कानून बन जाने के समान नहीं है।

सिल्वर इकोनॉमी क्या है?

  • सिल्वर इकोनॉमी वृद्धजनों की आवश्यकताओं और क्षमताओं से जुड़ी वस्तुओं, सेवाओं, रोजगार तथा नवाचार की अर्थव्यवस्था है। इसमें घर पर चिकित्सा, फिजियोथेरेपी, सहायताप्राप्त आवास, सुगम भवन, चलने-फिरने के सहायक उपकरण, वृद्धजन-अनुकूल परिवहन, डिजिटल सेवाएँ और आजीवन शिक्षा शामिल हैं। 
  • यह दृष्टिकोण वृद्धजनों को उपभोक्ता, मार्गदर्शक, स्वयंसेवक, श्रमिक और नागरिक के रूप में पहचानता है। किन्तु आर्थिक सहभागिता स्वैच्छिक होनी चाहिए; इसके नाम पर पेंशन घटाना या देखभाल का पूरा बोझ परिवारों पर डालना उचित नहीं होगा।

संवैधानिक एवं कानूनी पृष्ठभूमि

  • अनुच्छेद 21 गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार से सम्बन्धित है; अनुच्छेद 41 राज्य की आर्थिक क्षमता के भीतर वृद्धावस्था में सार्वजनिक सहायता का प्रावधान करने का निर्देश देता है, जबकि अनुच्छेद 47 लोक स्वास्थ्य के सुधार से जुड़ा है। माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 भरण-पोषण के दावे और कल्याण के उपाय उपलब्ध कराता है। 
  • केरल ने राज्य वृद्धजन आयोग अधिनियम, 2025 बनाया। वर्ष 2026 के विधेयक में उपेक्षा एवं दुर्व्यवहार से संरक्षण, देखभाल केन्द्रों का विनियमन, देखभालकर्मियों का प्रमाणन, डिजिटल पहुँच और वृद्धजनों की सहभागिता जैसे उपाय प्रस्तावित हैं। अपेक्षित कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी होने तक इन्हें लागू प्रावधान नहीं माना जाना चाहिए।

जनांकिकीय आँकड़े

  • केरल स्वास्थ्य विभाग के अनुमान के अनुसार वर्ष 2026 में 60 वर्ष या अधिक आयु के लगभग 67·68 लाख व्यक्ति राज्य की आबादी के करीब 19% हैं; वर्ष 2036 में इनकी संख्या 84·18 लाख अर्थात् लगभग 23% होने का अनुमान है। 
  • भारत के लिए वर्ष 2036 में यह अनुपात 14·9% अनुमानित है। केरल विकास रिपोर्ट 2026 के अनुसार 15–59 वर्ष के प्रति 100 व्यक्तियों पर वृद्धजनों की संख्या, अर्थात् वृद्धावस्था आश्रितता अनुपात, वर्ष 2011 में 19·6, वर्ष 2021 में 26·1 और वर्ष 2031 में अनुमानतः 34·3 होगी। ये अनुमान हैं, नई जनगणना के आँकड़े नहीं।
  • केरल में 60+ आबादी: 2026 में 67·68 लाख (लगभग 19%); 2036 में 84·18 लाख (लगभग 23%) अनुमानित। वृद्धावस्था आश्रितता अनुपात = 15–59 वर्ष के प्रति 100 लोगों पर 60+ वर्ष के व्यक्तियों की संख्या; 2021 में 26·1 और 2031 में अनुमानतः 34·3।

 

कारण एवं प्रमुख समस्याएँ

  • प्रजनन दर में गिरावट, जीवन प्रत्याशा में वृद्धि तथा कार्यशील आयु वर्ग के लोगों का पलायन वृद्धावस्था की गति बढ़ाते हैं और केवल वरिष्ठ नागरिकों वाले परिवारों की संख्या भी बढ़ाते हैं। इससे असंचारी रोगों के उपचार, दीर्घकालिक देखभाल और डिमेन्शिया सम्बन्धी सेवाओं की माँग बढ़ती है। दूसरी ओर कामकाजी आयु के अपेक्षाकृत कम लोग परिवार की देखभाल तथा कर-आधार को प्रभावित कर सकते हैं। पर्याप्त बचत या सम्पत्ति के बिना अकेली रहने वाली वृद्ध महिलाओं की असुरक्षा अधिक हो सकती है। डिजिटल विभाजन और साइबर धोखाधड़ी पेंशन, बैंकिंग तथा टेलीमेडिसिन तक पहुँच में नई बाधाएँ उत्पन्न करते हैं।

महत्त्व एवं बहुआयामी विश्लेषण

  • केरल भारत के भावी जनांकिकीय परिवर्तन का अग्रिम उदाहरण है। आर्थिक दृष्टि से विश्वसनीय देखभाल क्षेत्र नर्सों, वृद्धजन सहायकों और पुनर्वास विशेषज्ञों के लिए कौशल-आधारित रोजगार पैदा कर सकता है। सामाजिक स्तर पर डे-केयर केन्द्र अकेलापन कम कर सकते हैं और सेवानिवृत्त शिक्षक तथा विशेषज्ञ युवाओं का मार्गदर्शन कर सकते हैं। 
  • लैंगिक दृष्टि से सार्वजनिक देखभाल सेवाएँ महिलाओं पर पड़ने वाले अवैतनिक देखभाल-कार्य के बोझ को कम कर सकती हैं। किन्तु अत्यधिक महँगी निजी देखभाल, कम वेतन पाने वाले देखभालकर्मी और कमजोर सेवा-मानक सामाजिक असमानता बढ़ा भी सकते हैं।

उदाहरण एवं सरकारी पहल

  • केरल की ‘वयोमित्रम’ योजना शहरी वृद्धजनों को चिकित्सा एवं पहुँच-आधारित सहायता देती है, जबकि ‘सायंप्रभा’ डे-केयर केन्द्र और कुदुम्बश्री की ‘हर्षम’ वृद्धजन देखभाल सेवाएँ समुदाय-आधारित मॉडल के उदाहरण हैं। 
  • केरल विकास रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय स्वशासी संस्थाएँ अपने विकास कोष का 5% वृद्धजन कल्याण एवं प्रशामक देखभाल के लिए निर्धारित करती हैं। राष्ट्रीय स्तर पर अटल वयो अभ्युदय योजना, वृद्धजनों की स्वास्थ्य देखभाल हेतु राष्ट्रीय कार्यक्रम तथा सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना 70 वर्ष या अधिक आयु वालों को AB-PMJAY के अन्तर्गत स्वास्थ्य कवर, पूरक सहायता प्रदान करते हैं।
  • अनुच्छेद 41: राज्य की आर्थिक क्षमता के भीतर वृद्धावस्था में सार्वजनिक सहायता। केन्द्रीय कानून: माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007। केरल का 2026 विधेयक 26 अक्टूबर को विधानसभा से पारित हुआ; इसे स्वीकृति के बिना लागू कानून नहीं माना जाना चाहिए। AB-PMJAY: 70+ आयु के लोगों को सामाजिक-आर्थिक स्थिति से निरपेक्ष वार्षिक ₹5 लाख स्वास्थ्य कवर।

 

आगे की राह

  • राज्य को सुनिश्चित सार्वजनिक वित्तपोषण के साथ जिला स्तर पर स्वास्थ्य, आय, गतिशीलता और देखभाल की आवश्यकताओं का आकलन करना चाहिए। प्रमाणित देखभालकर्मियों के प्रशिक्षण के साथ उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और लागू करने योग्य सेवा-मानक आवश्यक हैं। किफायती घरेलू देखभाल, डिमेन्शिया सेवाएँ, सुगम परिवहन, सहायक तकनीक और गैर-डिजिटल विकल्प निर्धन तथा ग्रामीण परिवारों तक पहुँचने चाहिए। 
  • स्थानीय निकाय इच्छुक वृद्धजनों को मार्गदर्शन और लचीले आजीविका अवसरों से जोड़ सकते हैं, किन्तु रोजगार को सहायता पाने की शर्त नहीं बनाया जाना चाहिए। सफलता का आकलन केन्द्रों की संख्या के बजाय सुरक्षा, स्वायत्तता और देखभाल की गुणवत्ता से किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

  • लम्बा जीवन विकास की उपलब्धि है, जनांकिकीय असफलता नहीं। केरल की सिल्वर इकोनॉमी तभी सफल होगी, जब आर्थिक अवसरों को अधिकार-आधारित देखभाल से जोड़ा जाए, कमजोर वृद्धजनों को संरक्षण मिले और सक्रिय वृद्धावस्था विकल्प बनी रहे, बाध्यता नहीं। लक्ष्य जीवन में केवल वर्ष जोड़ना नहीं, बल्कि उन वर्षों में गरिमा, स्वतन्त्रता और सहभागिता सुनिश्चित करना है।

प्रश्न . जनांकिकीय वृद्धावस्था के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - 

  1. केरल विकास रिपोर्ट 2026 में वृद्धावस्था आश्रितता अनुपात की गणना 15–59 वर्ष के प्रति 100 लोगों पर 60 वर्ष या अधिक आयु के व्यक्तियों के आधार पर की गई है।
  2. वृद्धावस्था आश्रितता अनुपात, कुल आबादी में वृद्धजनों के प्रतिशत के समान होता है।
  3. आधिकारिक अनुमानों के अनुसार वर्ष 2036 में केरल में वृद्धजनों का अनुपात उसी वर्ष के अखिल भारतीय अनुमान से अधिक होगा।

उपर्युक्त में से कौनसे कथन सही हैं?

(A) केवल 1 और 2

(B) केवल 1 और 3

(C) केवल 2 और 3

(D) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर - (B)

व्याख्या - कथन 2 गलत है। आश्रितता अनुपात और कुल आबादी में वृद्धजनों की हिस्सेदारी अलग माप हैं। वर्ष 2036 में केरल के लिए लगभग 23% तथा भारत के लिए 14·9% का अनुमान है।

 

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भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर को संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति ने वीरता के लिए सम्मानित किया
  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने 27 अक्टूबर, 2026 को भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर और फ्लाईदुबई के अन्य चालक दल सदस्यों को ‘फर्स्ट क्लास ऑर्डर ऑफ जायद-II’ (First Class Order of Zayed II) से सम्मानित किया. यह सम्मान उड़ान के दौरान आपातस्थिति में साहस और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रदान किया गया. घटना 30 सितम्बर, 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में हुई थी. 
  • सह-पायलट के हमले में कैप्टन मच्छर गम्भीर रूप से घायल हो गए थे. चालक दल, यात्रियों और विमान में उपस्थित अन्य पायलटों के सहयोग से स्थिति पर नियन्त्रण पाया गया. इसके बाद विमान को सऊदी अरब के ताबुक हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतारा गया. 
  • UAE के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने सम्मान प्रदान किए. यह UAE का प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान है.
2प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन 2026 का उद्घाटन किया
  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 27 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली के भारत मण्डपम में ‘इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एण्ड इनोवेशन कॉन्क्लेव’ (ESTIC) 2026 का उद्घाटन किया. यह तीन दिवसीय सम्मेलन 27–29 अक्टूबर, 2026 तक आयोजित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत, नीति-निर्माताओं और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग बढ़ाकर भारत की नवाचार क्षमताओं को मजबूत करना है. 
  • सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री, विनिर्माण, स्वास्थ्य, ऊर्जा, जलवायु तथा महासागर विज्ञान सहित 12 प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है. उद्घाटन कार्यक्रम में 5,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया. 
  • प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों से अगले तीन वर्षों के लिए मापनीय तकनीकी उपलब्धियों के लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया. सम्मेलन में लगभग 150 डीप-टेक स्टार्टअप्स की प्रदर्शनी तथा 300 से अधिक प्रतिभागियों वाला ‘ग्लोबल कनेक्ट नेटवर्किंग इवेंट’ भी शामिल है.
3केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल ने ₹1,856·67 करोड़ की खेलो इण्डिया खेल सामग्री विनिर्माण योजना को स्वीकृति दी
  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल ने 28 अक्टूबर, 2026 को खेलो इण्डिया खेल सामग्री विनिर्माण योजना को स्वीकृति प्रदान की. वर्ष 2033-34 तक की अवधि के लिए इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय ₹1,856·67 करोड़ है. 
  • केन्द्रीय बजट 2026-27 में घोषित इस योजना का उद्देश्य घरेलू खेल सामग्री विनिर्माण, निवेश, तकनीकी नवाचार, कौशल विकास और निर्यात को प्रोत्साहित करना है. इसके अन्तर्गत विशेष खेल सामग्री विनिर्माण क्षेत्र (SGMZs) विकसित किए जाएँगे, जिनमें उत्पादन इकाइयों, आपूर्तिकर्ताओं, परीक्षण सुविधाओं और डिजाइन केन्द्रों को एकीकृत किया जाएगा. 
  • इन क्षेत्रों का विकास BHAVYA योजना और NICDC औद्योगिक पार्कों के समन्वय से होगा. एंकर निवेश सहायता तथा टर्नओवर आधारित सहायता के लिए संयुक्त रूप से ₹1,130 करोड़ निर्धारित किए गए हैं. अन्तर्राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन के लिए ₹105 करोड़ का प्रावधान है. यह योजना ‘खेलो भारत नीति 2025’, ‘मेक इन इण्डिया’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ के अनुरूप है.
4विद्यालयों में स्वच्छ खेल मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए दो केन्द्रीय मंत्रालयों और यूनेस्को के बीच समझौता
  • युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय तथा यूनेस्को ने 28 अक्टूबर, 2026 को विद्यालयों में स्वच्छ एवं नैतिक खेल मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) का आदान-प्रदान किया. यह समझौता नई दिल्ली में राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी एजेंसी (NADA) के ‘क्लीन स्पोर्ट कॉन्क्लेव’ के दौरान हुआ. 
  • इसके अन्तर्गत ‘स्पोर्ट्स वैल्यूज इन एवरी क्लासरूम टूलकिट’ के माध्यम से विद्यार्थियों में ईमानदारी, निष्पक्षता, सम्मान और नैतिक आचरण जैसे मूल्य विकसित किए जाएँगे. टूलकिट के शैक्षिक वीडियो 13 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराए जाएँगे. 
  • केन्द्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख माण्डविया और शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने खेल शिक्षा तथा नैतिक मूल्यों के समन्वय पर बल दिया. खेल मंत्री के अनुसार वर्ष 2025-26 के दौरान NADA ने 7,000 से अधिक डोपिंग-रोधी परीक्षण तथा 350 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए, जिनसे लगभग 27,000 प्रतिभागी लाभान्वित हुए. यह पहल ‘खेलो भारत नीति 2025’ के अनुरूप है.
5यूनेस्को–इकोमोस विशेषज्ञ दल ने हम्पी के विरुपाक्ष मन्दिर एवं विजयनगरकालीन स्मारकों का निरीक्षण किया
  • यूनेस्को और अन्तर्राष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल परिषद् (ICOMOS) के विशेषज्ञों ने अक्टूबर 2026 में कर्नाटक स्थित विश्व धरोहर स्थल हम्पी के ऐतिहासिक स्मारकों का निरीक्षण किया. 28 अक्टूबर को प्रकाशित समाचारों के अनुसार दल ने विरुपाक्ष मन्दिर, कृष्ण मन्दिर, विजय विट्ठल मन्दिर, लोटस महल तथा अन्य विजयनगरकालीन संरचनाओं के संरक्षण का आकलन किया. 
  • विशेषज्ञों ने ऐतिहासिक भवनों की स्थिति, पर्यटक सुविधाओं, भीड़ प्रबन्धन, आसपास के निर्माण कार्यों और प्राचीन सिंचाई व्यवस्था का अध्ययन किया. भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) तथा स्थानीय प्रशासन के साथ विरासत संरक्षण और पर्यटन पर निर्भर समुदायों की आजीविका पर भी चर्चा हुई. विशेषज्ञों की मूल्यांकन रिपोर्ट लगभग छह सप्ताह में प्रस्तुत होने की सम्भावना है. 
  • ‘ग्रुप ऑफ मॉन्यूमेंट्स एट हम्पी’ को वर्ष 1986 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था. तुंगभद्रा नदी के बेसिन में स्थित हम्पी 14वीं से 16वीं शताब्दी के विजयनगर साम्राज्य की समृद्ध स्थापत्य विरासत का प्रमुख केन्द्र है.
6वैज्ञानिकों ने लगभग 23·7 करोड़ वर्ष पुराने पूर्णतः समुद्री जीवन वाले उभयचर की पहचान की
  • वैज्ञानिकों ने लगभग 23·7 करोड़ वर्ष पूर्व समुद्र में रहने वाले एक प्राचीन उभयचर की नई प्रजाति ‘गेरोथोरैक्स मैरिटिमस’ (Gerrothorax maritimus) की पहचान की है. यह शोध 26 अक्टूबर, 2026 को Nature Ecology & Evolution पत्रिका में प्रकाशित हुआ. चीन के गुइझोउ प्रान्त की समुद्री अवसादी चट्टानों में मिले लगभग पूर्ण दो जीवाश्म कंकालों के अध्ययन से यह खोज हुई. लगभग 74 सेमी लम्बा यह जीव ट्रायसिक काल के उत्तरार्द्ध में पाया जाता था. 
  • इसका शरीर चपटा, सिर चौड़ा और अधिकांश शरीर अस्थिमय कवच से ढका हुआ था. आधुनिक उभयचरों की कोई भी ज्ञात प्रजाति पूर्णतः समुद्री नहीं है, जबकि यह प्राचीन आदिम उभयचर समुद्री जीवन के अनुकूल विकसित हुआ था. 
  • वैज्ञानिकों के अनुसार इसका कवच त्वचा के माध्यम से जल और लवण के आदान-प्रदान को सीमित करता रहा होगा. जीवाश्मों में स्ट्रॉन्शियम समस्थानिकों के विश्लेषण से भी इसके समुद्री वातावरण में विकसित होने के प्रमाण मिले हैं.