केरल की बढ़ती बुजुर्ग आबादी: अधिकार, देखभाल और सिल्वर इकोनॉमी की संभावनाएँ
केरल विधानसभा ने ‘केरलम वरिष्ठ नागरिक (देखभाल और अधिकारों का संरक्षण) विधेयक, 2026’ सर्वसम्मति से पारित किया। यह बुजुर्गों को केवल कल्याणकारी सहायता के लाभार्थियों के रूप में देखने के बजाय उनके अधिकारों, देखभाल संबंधी जरूरतों और स्वैच्छिक आर्थिक भागीदारी को मान्यता देने का प्रस्ताव करता है। यह दृष्टिकोण बुजुर्ग आबादी की जरूरतों और भागीदारी से जुड़ी सिल्वर इकोनॉमी की चर्चा को आगे बढ़ाता है।
केरल में वृद्धजन आबादी और सिल्वर इकोनॉमी
- हाल ही में केरल विधानसभा ने ‘केरलम वरिष्ठ नागरिक (देखभाल एवं अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2026’ सर्वसम्मति से पारित किया। यह पहल वृद्धजनों को केवल कल्याण योजनाओं के लाभार्थी मानने के बजाय उनके अधिकारों, देखभाल की आवश्यकताओं और स्वैच्छिक आर्थिक सहभागिता को मान्यता देने की दिशा में महत्त्वपूर्ण है। ध्यान रहे कि 28 अक्टूबर तक विधानसभा में पारित होना, राज्यपाल की स्वीकृति के बाद कानून बन जाने के समान नहीं है।
सिल्वर इकोनॉमी क्या है?
- सिल्वर इकोनॉमी वृद्धजनों की आवश्यकताओं और क्षमताओं से जुड़ी वस्तुओं, सेवाओं, रोजगार तथा नवाचार की अर्थव्यवस्था है। इसमें घर पर चिकित्सा, फिजियोथेरेपी, सहायताप्राप्त आवास, सुगम भवन, चलने-फिरने के सहायक उपकरण, वृद्धजन-अनुकूल परिवहन, डिजिटल सेवाएँ और आजीवन शिक्षा शामिल हैं।
- यह दृष्टिकोण वृद्धजनों को उपभोक्ता, मार्गदर्शक, स्वयंसेवक, श्रमिक और नागरिक के रूप में पहचानता है। किन्तु आर्थिक सहभागिता स्वैच्छिक होनी चाहिए; इसके नाम पर पेंशन घटाना या देखभाल का पूरा बोझ परिवारों पर डालना उचित नहीं होगा।
संवैधानिक एवं कानूनी पृष्ठभूमि
- अनुच्छेद 21 गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार से सम्बन्धित है; अनुच्छेद 41 राज्य की आर्थिक क्षमता के भीतर वृद्धावस्था में सार्वजनिक सहायता का प्रावधान करने का निर्देश देता है, जबकि अनुच्छेद 47 लोक स्वास्थ्य के सुधार से जुड़ा है। माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 भरण-पोषण के दावे और कल्याण के उपाय उपलब्ध कराता है।
- केरल ने राज्य वृद्धजन आयोग अधिनियम, 2025 बनाया। वर्ष 2026 के विधेयक में उपेक्षा एवं दुर्व्यवहार से संरक्षण, देखभाल केन्द्रों का विनियमन, देखभालकर्मियों का प्रमाणन, डिजिटल पहुँच और वृद्धजनों की सहभागिता जैसे उपाय प्रस्तावित हैं। अपेक्षित कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी होने तक इन्हें लागू प्रावधान नहीं माना जाना चाहिए।
जनांकिकीय आँकड़े
- केरल स्वास्थ्य विभाग के अनुमान के अनुसार वर्ष 2026 में 60 वर्ष या अधिक आयु के लगभग 67·68 लाख व्यक्ति राज्य की आबादी के करीब 19% हैं; वर्ष 2036 में इनकी संख्या 84·18 लाख अर्थात् लगभग 23% होने का अनुमान है।
- भारत के लिए वर्ष 2036 में यह अनुपात 14·9% अनुमानित है। केरल विकास रिपोर्ट 2026 के अनुसार 15–59 वर्ष के प्रति 100 व्यक्तियों पर वृद्धजनों की संख्या, अर्थात् वृद्धावस्था आश्रितता अनुपात, वर्ष 2011 में 19·6, वर्ष 2021 में 26·1 और वर्ष 2031 में अनुमानतः 34·3 होगी। ये अनुमान हैं, नई जनगणना के आँकड़े नहीं।
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कारण एवं प्रमुख समस्याएँ
- प्रजनन दर में गिरावट, जीवन प्रत्याशा में वृद्धि तथा कार्यशील आयु वर्ग के लोगों का पलायन वृद्धावस्था की गति बढ़ाते हैं और केवल वरिष्ठ नागरिकों वाले परिवारों की संख्या भी बढ़ाते हैं। इससे असंचारी रोगों के उपचार, दीर्घकालिक देखभाल और डिमेन्शिया सम्बन्धी सेवाओं की माँग बढ़ती है। दूसरी ओर कामकाजी आयु के अपेक्षाकृत कम लोग परिवार की देखभाल तथा कर-आधार को प्रभावित कर सकते हैं। पर्याप्त बचत या सम्पत्ति के बिना अकेली रहने वाली वृद्ध महिलाओं की असुरक्षा अधिक हो सकती है। डिजिटल विभाजन और साइबर धोखाधड़ी पेंशन, बैंकिंग तथा टेलीमेडिसिन तक पहुँच में नई बाधाएँ उत्पन्न करते हैं।
महत्त्व एवं बहुआयामी विश्लेषण
- केरल भारत के भावी जनांकिकीय परिवर्तन का अग्रिम उदाहरण है। आर्थिक दृष्टि से विश्वसनीय देखभाल क्षेत्र नर्सों, वृद्धजन सहायकों और पुनर्वास विशेषज्ञों के लिए कौशल-आधारित रोजगार पैदा कर सकता है। सामाजिक स्तर पर डे-केयर केन्द्र अकेलापन कम कर सकते हैं और सेवानिवृत्त शिक्षक तथा विशेषज्ञ युवाओं का मार्गदर्शन कर सकते हैं।
- लैंगिक दृष्टि से सार्वजनिक देखभाल सेवाएँ महिलाओं पर पड़ने वाले अवैतनिक देखभाल-कार्य के बोझ को कम कर सकती हैं। किन्तु अत्यधिक महँगी निजी देखभाल, कम वेतन पाने वाले देखभालकर्मी और कमजोर सेवा-मानक सामाजिक असमानता बढ़ा भी सकते हैं।
उदाहरण एवं सरकारी पहल
- केरल की ‘वयोमित्रम’ योजना शहरी वृद्धजनों को चिकित्सा एवं पहुँच-आधारित सहायता देती है, जबकि ‘सायंप्रभा’ डे-केयर केन्द्र और कुदुम्बश्री की ‘हर्षम’ वृद्धजन देखभाल सेवाएँ समुदाय-आधारित मॉडल के उदाहरण हैं।
- केरल विकास रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय स्वशासी संस्थाएँ अपने विकास कोष का 5% वृद्धजन कल्याण एवं प्रशामक देखभाल के लिए निर्धारित करती हैं। राष्ट्रीय स्तर पर अटल वयो अभ्युदय योजना, वृद्धजनों की स्वास्थ्य देखभाल हेतु राष्ट्रीय कार्यक्रम तथा सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना 70 वर्ष या अधिक आयु वालों को AB-PMJAY के अन्तर्गत स्वास्थ्य कवर, पूरक सहायता प्रदान करते हैं।
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आगे की राह
- राज्य को सुनिश्चित सार्वजनिक वित्तपोषण के साथ जिला स्तर पर स्वास्थ्य, आय, गतिशीलता और देखभाल की आवश्यकताओं का आकलन करना चाहिए। प्रमाणित देखभालकर्मियों के प्रशिक्षण के साथ उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और लागू करने योग्य सेवा-मानक आवश्यक हैं। किफायती घरेलू देखभाल, डिमेन्शिया सेवाएँ, सुगम परिवहन, सहायक तकनीक और गैर-डिजिटल विकल्प निर्धन तथा ग्रामीण परिवारों तक पहुँचने चाहिए।
- स्थानीय निकाय इच्छुक वृद्धजनों को मार्गदर्शन और लचीले आजीविका अवसरों से जोड़ सकते हैं, किन्तु रोजगार को सहायता पाने की शर्त नहीं बनाया जाना चाहिए। सफलता का आकलन केन्द्रों की संख्या के बजाय सुरक्षा, स्वायत्तता और देखभाल की गुणवत्ता से किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
- लम्बा जीवन विकास की उपलब्धि है, जनांकिकीय असफलता नहीं। केरल की सिल्वर इकोनॉमी तभी सफल होगी, जब आर्थिक अवसरों को अधिकार-आधारित देखभाल से जोड़ा जाए, कमजोर वृद्धजनों को संरक्षण मिले और सक्रिय वृद्धावस्था विकल्प बनी रहे, बाध्यता नहीं। लक्ष्य जीवन में केवल वर्ष जोड़ना नहीं, बल्कि उन वर्षों में गरिमा, स्वतन्त्रता और सहभागिता सुनिश्चित करना है।
प्रश्न . जनांकिकीय वृद्धावस्था के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए -
- केरल विकास रिपोर्ट 2026 में वृद्धावस्था आश्रितता अनुपात की गणना 15–59 वर्ष के प्रति 100 लोगों पर 60 वर्ष या अधिक आयु के व्यक्तियों के आधार पर की गई है।
- वृद्धावस्था आश्रितता अनुपात, कुल आबादी में वृद्धजनों के प्रतिशत के समान होता है।
- आधिकारिक अनुमानों के अनुसार वर्ष 2036 में केरल में वृद्धजनों का अनुपात उसी वर्ष के अखिल भारतीय अनुमान से अधिक होगा।
उपर्युक्त में से कौनसे कथन सही हैं?
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 1 और 3
(C) केवल 2 और 3
(D) 1, 2 और 3 सभी
उत्तर - (B)
व्याख्या - कथन 2 गलत है। आश्रितता अनुपात और कुल आबादी में वृद्धजनों की हिस्सेदारी अलग माप हैं। वर्ष 2036 में केरल के लिए लगभग 23% तथा भारत के लिए 14·9% का अनुमान है।
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