Current Affairs - Daily
26 अक्टूबर 2026
नीलगिरि तहर: आवास विखंडन और आक्रामक प्रजातियों से बढ़ती संरक्षण चुनौतियाँ
केरल और तमिलनाडु में पाया जाने वाला नीलगिरि तहर संकटग्रस्त पर्वतीय स्तनधारी है। प्राकृतिक घासभूमियों का क्षरण और मानवीय गतिविधियाँ इसके संरक्षण की प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
- संरक्षण संबंधी रिपोर्टों में नीलगिरि तहर के लिए आवास विखंडन, आक्रामक प्रजातियों और मानवीय गतिविधियों से उत्पन्न खतरों को रेखांकित किया गया है।
- ये दबाव उन पर्वतीय घासभूमियों की सुरक्षा की आवश्यकता दर्शाते हैं, जिन पर यह प्रजाति निर्भर है। अवसंरचना विकास, पशुधन की चराई, वनाग्नि और जलवायु परिवर्तन भी इसके अस्तित्व के लिए खतरा हैं।
प्रजाति का परिचय
- नीलगिरि तहर (Nilgiritragus hylocrius) एक खुरदार पर्वतीय स्तनधारी है, जो दक्षिणी पश्चिमी घाट की स्थानिक प्रजाति है।
- स्थानिक प्रजाति का अर्थ ऐसी प्रजाति से है, जो प्राकृतिक रूप से किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में पाई जाती है। स्थानीय रूप से इसे वरयाडु कहा जाता है। यह खड़ी और चट्टानी ढलानों पर रहने के अनुकूल है।
आवास और वितरण
- यह मुख्यतः शोला वनों के बीच फैली पर्वतीय घासभूमियों में, सामान्यतः 1,200–2,600 मीटर की ऊँचाई पर पाया जाता है।
- इसका वितरण केरल और तमिलनाडु में पश्चिमी घाट के लगभग 400 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में है।
- केरल के एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान में इसकी सबसे बड़ी जीवित आबादी पाई जाती है। घासभूमियों से सटी खड़ी चट्टानें इसे महत्त्वपूर्ण आश्रय प्रदान करती हैं।
संरक्षण के प्रमुख खतरे
- आवास की हानि और विखंडन: प्राकृतिक आवासों में परिवर्तन और व्यवधान से इसकी आबादियाँ छोटे तथा अलग-थलग समूहों में बँट जाती हैं।
- आक्रामक प्रजातियाँ और वृक्षारोपण: आक्रामक पौधों का प्रसार और प्राकृतिक घासभूमियों को वृक्षारोपण क्षेत्रों में बदलना इसके उपयुक्त आवास को कम करता है।
- मानवीय दबाव: अवसंरचना विस्तार, अतिक्रमण और पशुधन की चराई से आवास प्रभावित होते हैं तथा संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। रोग और वनाग्नि भी अतिरिक्त जोखिम उत्पन्न करते हैं।
- जलवायु परिवर्तन: तापमान और वर्षा में बदलाव ऊँचाई वाले क्षेत्रों में रहने वाली इस प्रजाति तथा इसके आवास के लिए अतिरिक्त चुनौतियाँ पैदा करते हैं।
संरक्षण स्थिति और प्राथमिकताएँ
- नीलगिरि तहर को IUCN की लाल सूची में संकटग्रस्त (Endangered) श्रेणी में रखा गया है। इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के अंतर्गत संरक्षण प्राप्त है।
- संरक्षण की प्राथमिकताओं में प्राकृतिक घासभूमियों की बहाली, आक्रामक पौधों का नियंत्रण, आवासों के बीच संपर्क बनाए रखना और आबादी की नियमित निगरानी शामिल हैं। इस प्रजाति की सुरक्षा के लिए व्यापक घासभूमि–शोला पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण भी आवश्यक है।
MCQ - HINDI
प्रश्न : नीलगिरि तहर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह दक्षिणी पश्चिमी घाट की स्थानिक प्रजाति है।
2. एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान में इसकी सबसे बड़ी जीवित आबादी पाई जाती है।
3. इसे IUCN की लाल सूची में गंभीर रूप से संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a)
व्याख्या:
- नीलगिरि तहर दक्षिणी पश्चिमी घाट की स्थानिक प्रजाति है। एराविकुलम में इसकी सबसे बड़ी जीवित आबादी है। इसकी IUCN श्रेणी संकटग्रस्त है।