यूनाइटेड किंगडम की एकता पर सवाल: संघ कैसे बना और अलगाव कैसे संभव है?
स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड में संवैधानिक बदलाव और आत्मनिर्णय की मांग ने यूनाइटेड किंगडम के भविष्य पर बहस को फिर तेज किया है। लेकिन स्वतंत्रता या संवैधानिक स्थिति बदलने की कानूनी प्रक्रिया तीनों क्षेत्रों में समान नहीं है।
क्या टूट सकता है यूनाइटेड किंगडम?
पाठ्यक्रम मानचित्रण: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — भारतीय संवैधानिक व्यवस्था की अन्य देशों से तुलना; संघवाद; शक्तियों का हस्तांतरण; संवैधानिक परिवर्तन; अंतरराष्ट्रीय संबंध।
स्रोत एवं तिथि: ब्रिटेन की संसद, ब्रिटेन का सुप्रीम कोर्ट, आधिकारिक सरकारी स्रोत तथा 14 सितंबर 2026 को कार्डिफ में हुए समकालीन राजनीतिक घटनाक्रम से संबंधित रिपोर्टिंग।
एक बार फिर चर्चा में क्यों?
14 सितंबर 2026 को स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के स्वतंत्रता-समर्थक राजनीतिक नेताओं ने कार्डिफ में बैठक की और संवैधानिक बदलाव तथा अपनी-अपनी आबादी को राजनीतिक भविष्य निर्धारित करने का अवसर देने की मांग वाला एक समझौता-पत्र प्रस्तुत किया। समकालीन रिपोर्टिंग के अनुसार प्रतिभागियों की भूमिका और प्रतिनिधित्व को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया, विशेषकर उत्तरी आयरलैंड के संदर्भ में।
इस घटनाक्रम ने एक मूल संवैधानिक प्रश्न को फिर सामने ला दिया:
क्या स्कॉटलैंड, वेल्स या उत्तरी आयरलैंड अपनी ओर से जनमत-संग्रह कराकर यूनाइटेड किंगडम से अलग हो सकते हैं?
इसका उत्तर तीनों क्षेत्रों के लिए समान नहीं है।
1707 के संघ अधिनियमों के परिणामस्वरूप इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के बीच नया राजनीतिक संघ बना और ग्रेट ब्रिटेन की स्थापना हुई। स्कॉटलैंड ने अपनी कुछ विशिष्ट संस्थाएँ, विशेषकर अपनी अलग कानूनी व्यवस्था, बनाए रखीं।
आयरलैंड के साथ संघ 1 जनवरी 1801 से प्रभावी हुआ और यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड आयरलैंड अस्तित्व में आया।
बाद में आयरलैंड का अधिकांश भाग संघ से बाहर हो गया, जबकि उत्तरी आयरलैंड यूनाइटेड किंगडम में बना रहा।
शक्ति हस्तांतरण का अर्थ संप्रभुता नहीं
आधुनिक शक्ति-हस्तांतरण व्यवस्था के तहत स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड को महत्त्वपूर्ण विधायी और कार्यकारी अधिकार दिए गए हैं।
लेकिन एक महत्त्वपूर्ण अंतर है:
शक्ति हस्तांतरण ≠ संघीय संप्रभुता ≠ अलग होने का स्वतः अधिकार
ब्रिटेन की संवैधानिक व्यवस्था में संसद की केंद्रीय भूमिका बनी हुई है और संघ से संबंधित कुछ विषय आरक्षित मामलों के रूप में केंद्र स्तर पर रहते हैं।
इसलिए स्थानीय विधानमंडल को व्यापक अधिकार मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उसे स्वतः संघ से अलग होने का कानूनी अधिकार भी प्राप्त हो जाता है।
स्कॉटलैंड: वेस्टमिंस्टर की सहमति क्यों महत्त्वपूर्ण है?
स्कॉटलैंड में 18 सितंबर 2014 को स्वतंत्रता पर जनमत-संग्रह आयोजित किया गया था।
यह जनमत-संग्रह स्कॉटलैंड अधिनियम, 1998 की आरक्षित-विषय व्यवस्था में अस्थायी बदलाव करने वाले धारा 30 आदेश के बाद संभव हुआ था। ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक निर्णय में भी यह दर्ज है कि 2013 के आदेश ने स्वतंत्रता जनमत-संग्रह के लिए आरक्षित मामलों की परिभाषा को अस्थायी रूप से बदला था।
जनमत-संग्रह का परिणाम था:
स्वतंत्रता के विरुद्ध: 55.3 प्रतिशत | स्वतंत्रता के पक्ष में: 44.7 प्रतिशत
इसके बाद 2022 में ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मति से निर्णय दिया कि स्कॉटिश संसद अपनी ओर से नया स्वतंत्रता जनमत-संग्रह कराने के लिए कानून नहीं बना सकती, क्योंकि ऐसा जनमत-संग्रह इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के संघ तथा ब्रिटेन की संसद जैसे आरक्षित विषयों से संबंधित होगा।
इसलिए वर्तमान कानूनी ढाँचे में:
स्कॉटिश स्वतंत्रता जनमत-संग्रह → वेस्टमिंस्टर द्वारा सक्षम कानूनी अधिकार आवश्यक
उत्तरी आयरलैंड: अलग संवैधानिक मार्ग
उत्तरी आयरलैंड की स्थिति स्कॉटलैंड और वेल्स से भिन्न है।
बेलफास्ट/गुड फ्राइडे समझौते से संबंधित संवैधानिक व्यवस्था और उत्तरी आयरलैंड अधिनियम, 1998 में यह कानूनी व्यवस्था मौजूद है कि उत्तरी आयरलैंड की संवैधानिक स्थिति पर जनमत कराया जा सकता है।
कानून के अनुसार ब्रिटेन के उत्तरी आयरलैंड मामलों के मंत्री जनमत-संग्रह का आदेश दे सकते हैं। यदि उन्हें यह संभावित लगे कि मतदान करने वालों का बहुमत उत्तरी आयरलैंड के यूनाइटेड किंगडम से अलग होकर संयुक्त आयरलैंड का हिस्सा बनने का समर्थन करेगा, तो कानून उन्हें जनमत कराने की शक्ति का प्रयोग करने के लिए बाध्य करता है।
इसलिए उत्तरी आयरलैंड के पास संवैधानिक स्थिति बदलने का एक परिभाषित वैधानिक मार्ग मौजूद है, जो स्कॉटलैंड और वेल्स के लिए उसी रूप में उपलब्ध नहीं है।
वेल्स: समान जनमत-संग्रह व्यवस्था नहीं
वेल्स के पास अपना शक्ति-हस्तांतरित विधानमंडल और सरकार है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में उत्तरी आयरलैंड के सीमा-जनमत जैसी समान वैधानिक स्वतंत्रता-जनमत प्रणाली उपलब्ध नहीं है।
इसलिए वेल्स की स्वतंत्रता को कानूनी प्रभाव देने वाले मार्ग के लिए वेस्टमिंस्टर स्तर पर महत्त्वपूर्ण संवैधानिक और विधायी बदलाव की आवश्यकता होगी।
यह मुद्दा क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह बहस दो संवैधानिक विचारों के बीच तनाव को दिखाती है:
- राजनीतिक आत्मनिर्णय की मांग और
- संवैधानिक अधिकारों का कानूनी वितरण
यह भी स्पष्ट होता है कि यूनाइटेड किंगडम एक अत्यधिक शक्ति-हस्तांतरित, लेकिन असममित संवैधानिक संघ है।
स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड को समान प्रकार या समान मात्रा के संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं हैं और संवैधानिक स्थिति में बदलाव की कानूनी प्रक्रिया भी अलग-अलग है।
2026 के कार्डिफ घटनाक्रम का तात्कालिक राजनीतिक महत्त्व संवैधानिक बदलाव के लिए समन्वित दबाव में है; लेकिन वर्तमान कानूनी व्यवस्था में तीनों क्षेत्रों के रास्ते अलग बने हुए हैं।


संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न
“यूनाइटेड किंगडम यह दर्शाता है कि व्यापक शक्ति हस्तांतरण आवश्यक रूप से अलग होने के संघीय अधिकार के समान नहीं होता।” स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।
प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न
प्रश्न 1
यूनाइटेड किंगडम के संवैधानिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1707 के संघ अधिनियमों ने इंग्लैंड और स्कॉटलैंड को मिलाकर ग्रेट ब्रिटेन बनाया।
- आयरलैंड 1801 में ग्रेट ब्रिटेन के साथ राजनीतिक संघ का हिस्सा बना।
- एंग्लो-आयरिश समझौते के बाद उत्तरी आयरलैंड भी यूनाइटेड किंगडम से अलग हो गया।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A. केवल 1
B. केवल 1 और 2
C. केवल 2 और 3
D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B
व्याख्या: पहले दो कथन सही हैं। आयरलैंड का अधिकांश भाग यूनाइटेड किंगडम से अलग हुआ, लेकिन उत्तरी आयरलैंड उसमें बना रहा।
भ्रम-बिंदु: आयरलैंड के अलग होने में उत्तरी आयरलैंड शामिल नहीं था।
प्रश्न 2
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- स्कॉटिश संसद के पास वर्तमान में स्वतंत्रता जनमत-संग्रह के लिए कानून बनाने की असीमित शक्ति है।
- वर्ष 2014 का स्कॉटिश स्वतंत्रता जनमत-संग्रह आरक्षित-विषय व्यवस्था में अस्थायी बदलाव के बाद आयोजित हुआ था।
- उत्तरी आयरलैंड में उसकी संवैधानिक स्थिति पर जनमत-संग्रह कराने की वैधानिक व्यवस्था मौजूद है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A. केवल 1
B. केवल 2
C. केवल 2 और 3
D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C
व्याख्या: वर्ष 2022 में ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया कि स्कॉटिश संसद संघ जैसे आरक्षित विषय से संबंधित स्वतंत्रता जनमत-संग्रह के लिए एकतरफा कानून नहीं बना सकती। 2014 का मतदान धारा 30 व्यवस्था के माध्यम से संभव हुआ था। दूसरी ओर, उत्तरी आयरलैंड के लिए एक अलग वैधानिक सीमा-जनमत व्यवस्था मौजूद है।


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