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Current Affairs - Daily 21 सितमबर 2026

भारत पर सुपर अल नीनो का खतरा, वैज्ञानिकों ने तैयारी की अपील की

वैज्ञानिकों ने 2026 में संभावित शक्तिशाली अल नीनो के कारण भारत में कमजोर मानसून, अत्यधिक गर्मी, सूखा, जंगलों की आग और पारिस्थितिक नुकसान की आशंका जताई है।

वैज्ञानिकों ने भारत पर मजबूत अल नीनो के प्रभाव की चेतावनी दी

चर्चा में क्यों?

  • वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि 2026 का अल नीनो एक मजबूत या “सुपर” घटना का रूप ले सकता है और भारत के मौसम तथा प्राकृतिक प्रणालियों को प्रभावित कर सकता है। इसके 2027 की शुरुआत तक बने रहने की संभावना भी जताई गई है। 
  • अल नीनो आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर करता है और भारत में गर्मी तथा सूखे का खतरा बढ़ा सकता है। 

अल नीनो क्या है?

  • अल नीनो मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के समुद्री जल के असामान्य रूप से गर्म होने की घटना है। 
  • यह तब विकसित होता है जब प्रशांत महासागर की सामान्य व्यापारिक हवाएं कमजोर पड़ती हैं और गर्म पानी पूर्व की ओर बढ़ने लगता है। 
  • इससे दुनिया के विभिन्न हिस्सों में वर्षा और हवाओं के सामान्य पैटर्न में बदलाव आता है। 
  • जब प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो बहुत शक्तिशाली अल नीनो को अक्सर “सुपर अल नीनो” कहा जाता है। 

भारत पर संभावित प्रभाव

  • कमजोर मानसून: कम वर्षा से सूखे का खतरा बढ़ सकता है और वर्षा आधारित कृषि प्रभावित हो सकती है। 
  • अत्यधिक गर्मी: कम बारिश और अधिक तापमान से हीटवेव की स्थिति गंभीर हो सकती है। 
  • कृषि पर असर: पानी की कमी से फसल उत्पादन घट सकता है और खाद्य कीमतों तथा ग्रामीण आय पर दबाव बढ़ सकता है। 
  • जल संसाधन: कम वर्षा से जलाशयों का स्तर और भूजल का पुनर्भरण घट सकता है। 
  • वन: लंबे समय तक गर्म और शुष्क मौसम से जंगलों में आग का खतरा बढ़ सकता है तथा बड़े पेड़ों पर दबाव पड़ सकता है। 
  • समुद्री पारिस्थितिकी: समुद्र के अधिक गर्म होने से कोरल ब्लीचिंग और मत्स्य संसाधनों पर असर पड़ सकता है। 
  • आजीविका: किसान, मछुआरे और पशुपालक विशेष रूप से प्रभावित हो सकते हैं। 

वैश्विक प्रभाव

  • अल नीनो के कारण कुछ क्षेत्रों में सूखा, जबकि अन्य क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा हो सकती है। 
  • इससे हीटवेव, जंगलों की आग, बाढ़ और तूफानों के पैटर्न में बदलाव का खतरा बढ़ सकता है। 
  • समुद्र के गर्म होने से मछलियों के वितरण और प्रवाल भित्तियों पर भी प्रभाव पड़ सकता है। 

आगे की रणनीति

  • पूर्व चेतावनी प्रणालियों और जलवायु निगरानी को मजबूत करना। 
  • सूखा-रोधी फसलों और जल-कुशल सिंचाई को बढ़ावा देना। 
  • जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और जलाशय प्रबंधन में सुधार करना। 
  • पारिस्थितिक बदलावों का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण कर जलवायु-लचीली नीतियां विकसित करना।

अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न. अल नीनो और भारत पर इसके संभावित प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  • अल नीनो में मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के सतही जल का असामान्य गर्म होना शामिल है। 
  • प्रशांत महासागर की व्यापारिक हवाओं के कमजोर होने से गर्म जल पूर्व की ओर बढ़ता है, जिससे वैश्विक वर्षा और पवन पैटर्न प्रभावित होते हैं। 
  • अल नीनो भारत के सभी क्षेत्रों में अनिवार्य रूप से सूखा पैदा करता है क्योंकि यह दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर करता है। 
  • इसका प्रभाव कृषि के अलावा जल संसाधन, वन, समुद्री पारिस्थितिकी और आजीविका पर भी पड़ सकता है। 

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

A. केवल 1, 2 और 4
 B. केवल 1 और 3
 C. केवल 2, 3 और 4
 D. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: A

व्याख्या:

  • कथन 1, 2 और 4 सही हैं। 
  • कथन 3 गलत है क्योंकि अल नीनो सामान्यतः भारतीय मानसून को कमजोर करता है और सूखे का जोखिम बढ़ाता है, लेकिन इसका प्रभाव क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकता है और यह पूरे भारत में अनिवार्य रूप से सूखा नहीं लाता।