Current Affairs - Daily
8 अक्टूबर 2026
रूसी और चीनी क्रांति: आधुनिक विश्व को बदलने वाली दो क्रांतियाँ
1917 की रूसी क्रांति और 1949 की चीनी क्रांति ने समाजवाद, साम्राज्यवाद, श्रमिक राजनीति और राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलनों को प्रभावित करते हुए आधुनिक विश्व राजनीति को गहराई से बदला।
चर्चा में क्यों?
- आधुनिक विश्व के इतिहास में अक्टूबर का विशेष महत्व है क्योंकि इस महीने से दो प्रमुख क्रांतियाँ जुड़ी हैं:
- 1917 की बोल्शेविक क्रांति।
- 1949 में चीन के जनवादी गणराज्य की स्थापना।
- दोनों क्रांतियों ने अपने-अपने देशों की राजनीति को बदला और समाजवाद, साम्राज्यवाद तथा राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलनों से जुड़ी वैश्विक बहसों को प्रभावित किया।
रूसी क्रांति, 1917
- रूस प्रथम विश्व युद्ध में पहले से मौजूद सामाजिक और आर्थिक असमानता, कृषि संबंधी समस्याओं और जारशाही के प्रति असंतोष के बीच शामिल हुआ।
- सैन्य पराजय, बड़ी संख्या में सैनिकों की मृत्यु, खाद्य संकट और महँगाई ने जार निकोलस द्वितीय की सत्ता को कमजोर किया।
- फरवरी 1917 की क्रांति ने रोमानोव वंश का अंत किया और एक अस्थायी सरकार बनी।
- लेकिन अस्थायी सरकार ने युद्ध जारी रखा और भूमि संबंधी समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं किया।
- इसी दौरान मजदूरों और सैनिकों की सोवियत परिषदें सत्ता के वैकल्पिक केंद्र के रूप में उभरीं।
- व्लादिमीर लेनिन निर्वासन से लौटे और युद्ध समाप्त करने तथा सत्ता सोवियतों को देने की मांग की
- अक्टूबर में बोल्शेविकों ने पेट्रोग्राद के महत्वपूर्ण स्थानों पर कब्जा कर विंटर पैलेस पर नियंत्रण स्थापित किया।
- नई सरकार ने शांति और भूमि से संबंधित घोषणाएँ कीं।
- इस क्रांति ने मार्क्सवादी समाजवाद पर आधारित एक स्थायी राज्य की स्थापना की और श्रमिक अधिकार, भूमि पुनर्वितरण, सार्वजनिक स्वामित्व, शिक्षा तथा कल्याण जैसे मुद्दों को वैश्विक राजनीति के केंद्र में ला दिया।
- इसने एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई औपनिवेशिक-विरोधी आंदोलनों को वैचारिक प्रभाव प्रदान किया।
चीनी क्रांति, 1949
- चीन में क्रांति की पृष्ठभूमि में चिंग राजवंश का पतन, राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध सरदारों का प्रभाव, विदेशी हस्तक्षेप और असमान संधियाँ शामिल थीं।
- 1919 के मई चौथा आंदोलन ने चीनी बुद्धिजीवियों के बीच राजनीतिक चेतना और कट्टरपंथी विचारों को बढ़ावा दिया।
- चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) की स्थापना 1921 में हुई।
- 1927 में च्यांग काई-शेक और कम्युनिस्टों के बीच संघर्ष बढ़ने के बाद कम्युनिस्ट आंदोलन का आधार धीरे-धीरे ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत हुआ।
- माओ त्से-तुंग ने किसानों को क्रांतिकारी आंदोलन के केंद्र में रखा।
- भूमि सुधार, ग्रामीण संगठन और गुरिल्ला युद्ध इसकी रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से बने।
- लॉन्ग मार्च (1934–35) ने कम्युनिस्ट सेना के अस्तित्व को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और माओ के नेतृत्व को मजबूत किया।
- जापानी आक्रमण के खिलाफ संघर्ष ने कम्युनिस्टों की राष्ट्रवादी छवि को मजबूत किया।
- बाद में गृहयुद्ध में कुओमिन्तांग की हार हुई और वह ताइवान चला गया।
- 1 अक्टूबर 1949 को माओ त्से-तुंग ने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की घोषणा की।
- चीनी क्रांति ने दिखाया कि मार्क्सवाद को मुख्यतः कृषि-प्रधान एशियाई समाज की परिस्थितियों के अनुसार ढाला जा सकता है और किसान क्रांतिकारी आंदोलन की महत्वपूर्ण शक्ति बन सकते हैं।
रूस और चीन: समानताएँ एवं अंतर
- रूसी क्रांति में औद्योगिक मजदूरों, सैनिकों और सोवियतों की भूमिका प्रमुख थी।
- चीनी क्रांति में किसानों, ग्रामीण संगठन और लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण थी।
- दोनों ने साम्राज्यवाद और मौजूदा राजनीतिक-आर्थिक व्यवस्था को चुनौती दी।
- हालांकि, दोनों ने अलग-अलग क्रांतिकारी रास्ते अपनाए, जिसके कारण आगे चलकर सिनो-सोवियत विभाजन भी हुआ।
भारत पर प्रभाव
- रूसी क्रांति ने भारत में समाजवादी विचारों और राजनीतिक बहस को प्रभावित किया।
- एम. एन. रॉय ने लेनिन के साथ औपनिवेशिक रणनीति पर चर्चा की, जबकि भगत सिंह ने समाजवादी साहित्य का अध्ययन किया।
- जवाहरलाल नेहरू की 1927 की सोवियत संघ यात्रा ने योजना और विकास संबंधी उनके विचारों को प्रभावित किया।
- भारत ने चीन में नई कम्युनिस्ट सरकार की स्थापना के बाद उसे शीघ्र ही मान्यता दी।
- बाद में भारत और चीन ने पंचशील के सिद्धांतों को अपनाया, लेकिन 1962 के भारत-चीन युद्ध से संबंधों में गंभीर बदलाव आया।
- भारत ने सोवियत या चीनी राजनीतिक मॉडल को नहीं अपनाया और संसदीय लोकतंत्र तथा मिश्रित अर्थव्यवस्था का मार्ग चुना।
- फिर भी योजना, भूमि सुधार, सार्वजनिक क्षेत्र, श्रम और शिक्षा से जुड़ी भारतीय बहसें इन वैश्विक घटनाओं से प्रभावित हुईं।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: 1917 की रूसी क्रांति और 1949 की चीनी क्रांति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- फरवरी क्रांति ने रूस में रोमानोव वंश का अंत कर दिया, लेकिन अस्थायी सरकार ने प्रथम विश्व युद्ध में रूस की भागीदारी जारी रखी।
- चीनी कम्युनिस्ट आंदोलन ने धीरे-धीरे किसानों, ग्रामीण लामबंदी और गुरिल्ला युद्ध पर अधिक निर्भरता विकसित की।
- दोनों क्रांतियों ने मूलतः एक जैसी क्रांतिकारी रणनीति अपनाई, जिसमें औद्योगिक मजदूर क्रांतिकारी आंदोलनों का प्रमुख सामाजिक आधार थे।
- चीनी क्रांति ने प्रदर्शित किया कि मुख्यतः कृषि-प्रधान एशियाई समाज की परिस्थितियों के अनुरूप मार्क्सवाद को ढाला जा सकता है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(a). केवल 1, 2 और 4
(b). केवल 1 और 3
(c). केवल 2, 3 और 4
(d). 1, 2, 3 और 4
उत्तर: (a) केवल 1, 2 और 4
व्याख्या
- फरवरी क्रांति ने रोमानोव वंश का अंत कर दिया और अस्थायी सरकार की स्थापना हुई। लेकिन अस्थायी सरकार ने प्रथम विश्व युद्ध जारी रखा। अतः कथन 1 सही है।
- चीनी कम्युनिस्ट आंदोलन धीरे-धीरे ग्रामीण क्षेत्रों की ओर बढ़ा और किसानों, ग्रामीण लामबंदी तथा गुरिल्ला युद्ध पर निर्भर हुआ। अतः कथन 2 सही है।
- दोनों क्रांतियों की रणनीति एक जैसी नहीं थी। रूसी क्रांति में औद्योगिक मजदूरों, सैनिकों और सोवियतों की भूमिका प्रमुख थी, जबकि चीनी क्रांति में किसानों और ग्रामीण लामबंदी को अधिक महत्व दिया गया। अतः कथन 3 गलत है।
- चीनी क्रांति ने दिखाया कि मुख्यतः कृषि-प्रधान एशियाई समाज की परिस्थितियों के अनुसार मार्क्सवाद को ढाला जा सकता है, जिसमें किसान क्रांतिकारी आंदोलन की महत्वपूर्ण शक्ति बन सकते हैं। अतः कथन 4 सही है।
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