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Current Affairs - Daily 8 अक्टूबर 2026

रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार 2026: चिरलिटी और ऑटोकैटेलिसिस

रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार 2026 हेनरी बी. कागन और केन्सो सोई को असममित कार्बनिक संश्लेषण में गैर-रैखिक प्रभावों और ऑटोकैटेलिसिस की खोज के लिए प्रदान किया गया।

चर्चा में क्यों?

  • रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार 2026 हेनरी बी. कागन और केन्सो सोई को असममित कार्बनिक संश्लेषण में गैर-रैखिक प्रभावों और ऑटोकैटेलिसिस पर उनके कार्य के लिए दिया गया है।
  • उनके शोध से यह समझने में मदद मिलती है कि रासायनिक अभिक्रियाओं में किसी अणु के एक रूप का उत्पादन उसके दर्पण प्रतिबिंब वाले रूप की तुलना में अधिक कैसे हो सकता है।

चिरल अणु क्या हैं?

  • कुछ अणु दो ऐसे रूपों में पाए जाते हैं जो एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब होते हैं। इन्हें एनैंटियोमर कहा जाता है।
  • इनका रासायनिक संघटन समान होता है, लेकिन उनकी त्रि-आयामी संरचना अलग होती है।
  • जैविक तंत्र इन दोनों रूपों के प्रति अलग-अलग प्रतिक्रिया कर सकते हैं।

इस समस्या की शुरुआत

  • 19वीं शताब्दी में लुई पाश्चर ने टार्टरिक अम्ल के दो दर्पण-प्रतिबिंब रूपों का अध्ययन किया।
  • इससे यह प्रश्न उठा कि जीवन में कई अणुओं के केवल एक रूप को ही प्राथमिकता क्यों मिलती है
  • उदाहरण के लिए, प्राकृतिक अमीनो अम्ल मुख्यतः एक ही रूप में पाए जाते हैं, जबकि DNA में पाए जाने वाले शर्करा एक अलग दिशा की प्राथमिकता दिखाते हैं।

कागन का योगदान

  • 1980 के दशक में हेनरी कागन ने असममित रासायनिक अभिक्रियाओं में गैर-रैखिक प्रभावों की पहचान की।
  • उन्होंने दिखाया कि अलग-अलग चिरल अणुओं से बने उत्प्रेरक अलग तरीके से काम कर सकते हैं।
  • इससे यह समझने में मदद मिली कि किसी छोटे प्रारंभिक अंतर को बढ़ाया जा सकता है।

सोई का योगदान

  • केन्सो सोई ने इस विचार को ऑटोकैटेलिसिस के माध्यम से आगे बढ़ाया।
  • ऑटोकैटेलिसिस में अभिक्रिया से बना उत्पाद उसी अभिक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद करता है।
  • सोई के प्रयोगों ने दिखाया कि किसी एक आणविक रूप की थोड़ी-सी अधिकता को इस प्रक्रिया द्वारा काफी बढ़ाया जा सकता है।
  • यह कार्य सोई अभिक्रिया (Soai reaction) से जुड़ा है।

महत्व

  • इस शोध से अधिक शुद्ध एनैंटियोमर तैयार करने में मदद मिलती है।
  • इसका महत्व दवाओं, स्वाद एवं सुगंध पदार्थों तथा कृषि रसायनों के निर्माण में है।
  • यह शोध जीवों में एक ही प्रकार के अणुओं की प्रमुखता, जिसे होमोचिरैलिटी कहा जाता है, को समझने में भी उपयोगी है। 

 

चिरैलिटी (Chirality)

 

  • चिरैलिटी किसी वस्तु या अणु का वह गुण है जिसमें वह अपने दर्पण प्रतिबिंब पर अध्यारोपित (superimposable) नहीं हो सकता। 
  • चिरल अणुओं में सामान्यतः एक स्टीरियोजेनिक केंद्र (stereogenic centre) होता है, जिसमें प्रायः कार्बन चार अलग-अलग समूहों से जुड़ा होता है। 
  • इसके दो दर्पण-प्रतिबिंब रूपों को एनैंटियोमर्स (Enantiomers) कहा जाता है।
  • जैविक तंत्रों में चिरैलिटी महत्वपूर्ण है, क्योंकि विभिन्न एनैंटियोमर्स की जैविक गतिविधियाँ अलग-अलग हो सकती हैं। 

 

असममित संश्लेषण (Asymmetric Synthesis)

 

  • असममित संश्लेषण एक ऐसी रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें एक एनैंटियोमर या स्टीरियोआइसोमर दूसरे की अपेक्षा अधिक मात्रा में बनता है। 
  • इसमें स्टीरियोरसायन को नियंत्रित करने के लिए चिरल उत्प्रेरक, अभिकर्मक, एंजाइम या सहायक (auxiliaries) का प्रयोग किया जाता है। 
  • इसका प्रमुख उद्देश्य उच्च एनैंटियोचयनात्मकता (enantioselectivity) वाले अणु प्राप्त करना है। 
  • यह विशेष रूप से औषधि तथा प्राकृतिक उत्पादों के संश्लेषण में महत्वपूर्ण है। 

 

असममित अभिक्रियाएँ (Asymmetric Reactions)

 

  • असममित अभिक्रियाएँ वे रासायनिक अभिक्रियाएँ हैं जिनमें स्टीरियोआइसोमर्स, विशेषकर एनैंटियोमर्स, असमान मात्रा में बनते हैं। 
  • इनमें बंध निर्माण या रासायनिक परिवर्तन के दौरान स्टीरियोकेमिकल नियंत्रण होता है। 
  • चिरल उत्प्रेरक, लिगैंड, एंजाइम या अभिकर्मक इस चयनात्मकता को नियंत्रित कर सकते हैं। 
  • इसके उदाहरणों में असममित हाइड्रोजनीकरण, एपॉक्सीडेशन और अपचयन अभिक्रियाएँ शामिल हैं। 

 

ऑटोकैटेलिसिस (Autocatalysis)

 

  • ऑटोकैटेलिसिस वह प्रक्रिया है जिसमें रासायनिक अभिक्रिया का उत्पाद उसी अभिक्रिया के लिए उत्प्रेरक का कार्य करता है। 
  • इसलिए जैसे-जैसे उत्पाद की मात्रा बढ़ती है, अभिक्रिया की गति भी बढ़ सकती है।
  • कुछ प्रणालियों में ऑटोकैटेलिसिस प्रारंभिक छोटे अंतर को अत्यधिक बढ़ा सकता है। 
  • असममित ऑटोकैटेलिसिस में बहुत छोटे चिरल असंतुलन से महत्वपूर्ण एनैंटियो-समृद्धि (enantioenrichment) उत्पन्न हो सकती है।

अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न: चिरैलिटी, असममित संश्लेषण और ऑटोकैटेलिसिस के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. एनैंटियोमर की त्रि-आयामी संरचना समान होती है, लेकिन उनका रासायनिक संघटन अलग होता है। 
  2. असममित संश्लेषण में चिरल उत्प्रेरकों या अभिकर्मकों का प्रयोग करके एक एनैंटियोमर का दूसरे की तुलना में अधिक उत्पादन किया जा सकता है। 
  3. ऑटोकैटेलिसिस में रासायनिक अभिक्रिया से बना उत्पाद उसी अभिक्रिया के लिए उत्प्रेरक का कार्य करता है। 
  4. असममित ऑटोकैटेलिसिस एक छोटे प्रारंभिक चिरल असंतुलन को बढ़ाकर किसी एक एनैंटियोमर की अधिकता उत्पन्न कर सकता है। 

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

(a). केवल 1 और 2
(b). केवल 2, 3 और 4
(c). केवल 1, 3 और 4
(d). केवल 2 और 4

उत्तर: (b) केवल 2, 3 और 4

व्याख्या

  • एनैंटियोमर का रासायनिक संघटन समान होता है, लेकिन उनकी त्रि-आयामी व्यवस्था अलग होती है। अतः कथन 1 गलत है। 
  • असममित संश्लेषण में चिरल उत्प्रेरक, अभिकर्मक, एंजाइम या सहायक पदार्थ का प्रयोग करके एक एनैंटियोमर को प्राथमिकता दी जाती है। अतः कथन 2 सही है। 
  • ऑटोकैटेलिसिस में अभिक्रिया का उत्पाद उसी अभिक्रिया के लिए उत्प्रेरक का कार्य करता है। अतः कथन 3 सही है। 
  • असममित ऑटोकैटेलिसिस किसी छोटे प्रारंभिक चिरल असंतुलन को बढ़ाकर एक एनैंटियोमर की अधिकता पैदा कर सकता है। अतः कथन 4 सही है।