भारत का डिजिटल पर्यटन अभियान: राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन स्टैक और देखो अपना देश 2.0
राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन स्टैक पर्यटन सेवाओं को साझा डिजिटल अवसंरचना से जोड़ने का प्रयास है, जबकि देखो अपना देश 2.0 का लक्ष्य पर्यटकों को अत्यधिक भीड़ वाले स्थलों से कम-ज्ञात और पर्यटन-तैयार गंतव्यों की ओर आकर्षित करना है।
भारत का डिजिटल पर्यटन अभियान: राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन स्टैक और देखो अपना देश 2.0
पाठ्यक्रम मानचित्रण: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — सरकारी नीतियाँ, डिजिटल शासन और सहकारी संघवाद; सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — पर्यटन, अवसंरचना, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, रोजगार और सतत विकास।
स्रोत एवं तिथि: पर्यटन मंत्रालय और पत्र सूचना कार्यालय, विश्व पर्यटन दिवस, 27 सितंबर 2026; साथ में उपलब्ध समकालीन रिपोर्टिंग।
भारत ने क्या शुरू किया है?
भारत ने पर्यटन क्षेत्र में दो परस्पर पूरक पहलें शुरू की हैं:
- राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन स्टैक — पर्यटन सेवाओं की खोज, पहुँच, सत्यापन और लेन-देन के लिए साझा डिजिटल अवसंरचना
- देखो अपना देश 2.0 — कम-ज्ञात लेकिन पर्यटन के लिए तैयार गंतव्यों को बढ़ावा देकर पर्यटक दबाव का अधिक संतुलित वितरण
दोनों पहलें इस बदलाव को दर्शाती हैं:
केवल पर्यटन स्थल का प्रचार → एकीकृत पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र का प्रबंधन
इस नए दृष्टिकोण में तीन प्रमुख तत्व हैं:
प्रौद्योगिकी + गंतव्य प्रबंधन + सामुदायिक भागीदारी
राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन स्टैक क्या है?
राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन स्टैक को पर्यटन क्षेत्र के लिए खुली डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में विकसित करने की परिकल्पना है।
यह केवल एक नई सरकारी वेबसाइट या यात्रा पोर्टल नहीं है।
उद्देश्य ऐसा साझा डिजिटल ढाँचा बनाना है जिसके माध्यम से अलग-अलग पर्यटन सेवा प्रदाता:
- डिजिटल रूप से खोजे जा सकें,
- सत्यापित किए जा सकें,
- एक-दूसरे से जुड़ सकें,
- और यात्रियों को एकीकृत सेवाएँ दे सकें।
इसके विकास में ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स तथा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना नवाचार से जुड़ी संस्थागत सहायता शामिल है।
पर्यटन स्टैक के प्रमुख घटक
प्रस्तावित डिजिटल ढाँचे में निम्न तत्व शामिल हो सकते हैं:
सत्यापित सेवा प्रदाता पहचान + खोज और सूचना सेवाएँ + भुगतान + रेटिंग + शिकायत निवारण
इसे एक यात्री की यात्रा के रूप में समझा जा सकता है:
गंतव्य की खोज → सत्यापित सेवा प्रदाता → बुकिंग → भुगतान → यात्रा अनुभव → रेटिंग → शिकायत निवारण
इस प्रकार यात्री को अलग-अलग बंद मंचों पर निर्भर रहने के बजाय एक अधिक परस्पर-संचालनीय डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र मिल सकता है।
डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का अर्थ क्या है?
डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का अर्थ यह नहीं है कि सरकार स्वयं हर सेवा प्रदान करेगी।
इसके बजाय सरकार या सार्वजनिक व्यवस्था साझा डिजिटल मानक और आधारभूत संरचना उपलब्ध करा सकती है, जिन पर:
सरकारी + निजी + सामुदायिक सेवा प्रदाता
अपनी सेवाएँ विकसित कर सकें।
इस दृष्टिकोण में:
साझा डिजिटल रेल + अनेक सेवा प्रदाता + परस्पर-संचालनीयता
मुख्य तत्व होते हैं।
पर्यटन के संदर्भ में इसका अर्थ यह हो सकता है कि होटल, होमस्टे, स्थानीय गाइड, परिवहन संचालक, हस्तशिल्प अनुभव और अन्य छोटे प्रदाता भी समान डिजिटल ढाँचे के माध्यम से खोजे जा सकें।
छोटे सेवा प्रदाताओं के लिए इसका महत्त्व
भारत का पर्यटन क्षेत्र केवल बड़े होटल और ऑनलाइन यात्रा मंचों तक सीमित नहीं है।
एक बड़ी संख्या में सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं:
- छोटे होटल,
- होमस्टे,
- स्थानीय गाइड,
- टैक्सी संचालक,
- हस्तशिल्प विक्रेता,
- स्थानीय भोजन प्रदाता,
- अनुभव-आधारित पर्यटन उद्यम।
इनमें से अनेक डिजिटल रूप से कम दिखाई देते हैं।
राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन स्टैक ऐसे छोटे प्रदाताओं को साझा डिजिटल प्रणाली के माध्यम से अधिक खोजयोग्य बना सकता है।
इसका संभावित लाभ है:
डिजिटल दृश्यता + अधिक प्रतिस्पर्धा + स्थानीय उद्यमिता
यह किसी बंद निजी मंच से कैसे अलग है?
एक बंद निजी मंच अपने उपयोगकर्ताओं, भुगतान प्रणाली, रेटिंग और सेवा प्रदाताओं को अपने नियंत्रित पारिस्थितिकी तंत्र में रख सकता है।
इसके विपरीत खुली डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का उद्देश्य है:
परस्पर-संचालनीयता
अर्थात एक ही डिजिटल ढाँचे पर अनेक सार्वजनिक और निजी प्रतिभागी काम कर सकें।
यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो इससे बड़े मंचों पर निर्भरता कम हो सकती है और छोटे प्रदाताओं के लिए बाजार तक पहुँच बढ़ सकती है।
कब तक लागू होने की योजना है?
डिजिटल पर्यटन स्टैक को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है।
उपलब्ध सामग्री के अनुसार इसका प्रारंभिक परीक्षण जनवरी 2027 में अपेक्षित है।
इसलिए इसे अभी पूर्ण रूप से स्थापित राष्ट्रीय प्रणाली नहीं समझना चाहिए।
अर्थात:
घोषित डिजिटल ढाँचा ≠ पूर्ण राष्ट्रीय क्रियान्वयन
यह चरणबद्ध विकास प्रक्रिया में है।
भारत में पहले से कौन-सी डिजिटल पर्यटन प्रणालियाँ हैं?
राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन स्टैक शून्य से शुरू नहीं हो रहा है।
भारत में पहले से कई डिजिटल पर्यटन प्रणालियाँ मौजूद हैं।
इनक्रेडिबल इंडिया डिजिटल प्लेटफॉर्म
यह मंच:
- पर्यटन स्थलों की जानकारी,
- यात्रा योजना,
- डिजिटल अनुभव,
- पर्यटन सेवाओं
से संबंधित सुविधाएँ प्रदान करता है।
इसका मुख्य कार्य पर्यटक को गंतव्य खोज और यात्रा योजना में सहायता देना है।
निधि प्लस
निधि प्लस पर्यटन क्षेत्र के सेवा प्रदाताओं के:
- पंजीकरण,
- मान्यता,
- वर्गीकरण
से जुड़ी डिजिटल व्यवस्था का हिस्सा है।
इससे पर्यटन व्यवसायों की औपचारिक डिजिटल पहचान और डेटाबेस विकसित करने में सहायता मिलती है।
नया स्टैक इनसे कैसे अलग होगा?
नई व्यवस्था इन मौजूदा मंचों को समाप्त करने के बजाय उनके ऊपर या बीच में एक जोड़ने वाली डिजिटल परत का कार्य कर सकती है।
संभावित श्रृंखला होगी:
जानकारी → सेवा प्रदाता सत्यापन → बुकिंग → भुगतान → अनुभव → प्रतिक्रिया → शिकायत निवारण
इसलिए:
मौजूदा डिजिटल मंच + साझा परस्पर-संचालनीय ढाँचा = व्यापक पर्यटन डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र

देखो अपना देश 2.0 क्या है?
देखो अपना देश 2.0 का उद्देश्य पर्यटकों को केवल प्रसिद्ध और अत्यधिक भीड़ वाले स्थलों तक सीमित रखने के बजाय:
कम-ज्ञात लेकिन पर्यटन के लिए तैयार गंतव्यों
की ओर आकर्षित करना है।
संभावित प्राथमिक श्रेणियों में शामिल हैं:
- पर्वतीय और पहाड़ी गंतव्य,
- तटीय क्षेत्र,
- जलप्रपात,
- विरासत नगर,
- सांस्कृतिक केंद्र,
- क्षेत्रीय तीर्थस्थल।
इसका लक्ष्य केवल प्रचार सामग्री बनाना नहीं है, बल्कि ऐसे गंतव्यों को वास्तविक यात्रा उत्पाद के रूप में विकसित करना है।

पर्यटन-तैयार गंतव्य का अर्थ क्या है?
किसी स्थान का सुंदर या सांस्कृतिक रूप से महत्त्वपूर्ण होना पर्याप्त नहीं है।
पर्यटन-तैयार गंतव्य के लिए आवश्यक हो सकता है:
परिवहन + आवास + भोजन + स्थानीय अनुभव + स्वच्छता + सुरक्षा + डिजिटल जानकारी
इसलिए देखो अपना देश 2.0 का उद्देश्य केवल पर्यटकों को नए नाम बताना नहीं, बल्कि ऐसे गंतव्यों के लिए बुक करने योग्य यात्रा अनुभव तैयार करना है।
अत्यधिक पर्यटन दबाव की समस्या क्या है?
जब बहुत बड़ी संख्या में पर्यटक कुछ ही लोकप्रिय स्थलों पर केंद्रित हो जाते हैं, तो कई समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं:
यातायात जाम + जल संसाधनों पर दबाव + कचरा संकट + पर्यावरणीय क्षरण + स्थानीय कीमतों में वृद्धि + खराब पर्यटक अनुभव
उदाहरण के रूप में प्रसिद्ध पर्वतीय, तटीय और धार्मिक गंतव्यों पर मौसमी भीड़ स्थानीय अवसंरचना की क्षमता से अधिक हो सकती है।
इस स्थिति को व्यापक रूप से अत्यधिक पर्यटन दबाव के रूप में समझा जा सकता है।
पर्यटन दबाव का पुनर्वितरण क्यों आवश्यक है?
भारत में कई लोकप्रिय पर्यटन केंद्र अत्यधिक भीड़ का सामना करते हैं, जबकि आसपास के तुलनीय गंतव्यों को बहुत कम पर्यटक मिलते हैं।
इसलिए नीति का उद्देश्य हो सकता है:
कुछ केंद्रों पर अत्यधिक पर्यटन → व्यापक क्षेत्रों में वितरित पर्यटन
इससे दोहरे लाभ हो सकते हैं:
- लोकप्रिय स्थलों पर दबाव कम,
- कम-ज्ञात क्षेत्रों में आय और रोजगार बढ़े।
वहन क्षमता क्या है?
पर्यटन प्रबंधन में वहन क्षमता का अर्थ उस सीमा से है जिसके भीतर कोई गंतव्य पर्यटकों को इस प्रकार समायोजित कर सकता है कि:
- पर्यावरण गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त न हो,
- स्थानीय जीवन अत्यधिक बाधित न हो,
- मूलभूत सेवाएँ चरमराएँ नहीं,
- पर्यटक अनुभव बहुत खराब न हो।
अर्थात:अधिक पर्यटक हमेशा बेहतर पर्यटन नहीं होते।
यदि किसी स्थान की क्षमता से अधिक पर्यटक पहुँचते हैं, तो अतिरिक्त आगंतुक आर्थिक लाभ से अधिक सामाजिक और पर्यावरणीय लागत पैदा कर सकते हैं।
पर्यटन आँकड़े कैसे मदद कर सकते हैं?
डिजिटल बुकिंग, यात्रा व्यवहार और आगंतुक प्रतिक्रिया से प्राप्त आँकड़े प्रशासन को यह समझने में सहायता कर सकते हैं कि:
- कौन-से स्थल तेजी से भीड़भाड़ वाले हो रहे हैं,
- किस मौसम में दबाव सबसे अधिक है,
- कौन-से वैकल्पिक स्थल कम उपयोग में हैं,
- किस क्षेत्र में अतिरिक्त परिवहन या स्वच्छता की आवश्यकता है।
इस प्रकार डिजिटल पर्यटन केवल यात्री सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि: गंतव्य प्रबंधन का आँकड़ा-आधारित उपकरण भी बन सकता है।
सामुदायिक पर्यटन क्यों महत्त्वपूर्ण है?
देखो अपना देश 2.0 की वैकल्पिक गंतव्य रणनीति में स्थानीय समुदायों को पर्यटन मूल्य श्रृंखला से जोड़ना महत्त्वपूर्ण है।
इसमें शामिल हो सकते हैं:
कारीगर + स्वयं सहायता समूह + होमस्टे + स्थानीय गाइड + महिलाएँ + युवा + छोटे उद्यमी
पर्यटन की सफलता केवल इस बात से नहीं मापी जानी चाहिए कि कितने पर्यटक आए।
अधिक महत्त्वपूर्ण प्रश्न है:
पर्यटक द्वारा खर्च किया गया कितना धन स्थानीय अर्थव्यवस्था में बना रहा?
स्थानीय गुणक प्रभाव क्या है?
मान लीजिए कोई पर्यटक स्थानीय होमस्टे में रहता है।
होमस्टे संचालक स्थानीय किसान से भोजन खरीदता है।
पर्यटक स्थानीय गाइड को भुगतान करता है।
वह स्थानीय हस्तशिल्प खरीदता है।
इससे एक ही पर्यटन व्यय कई स्थानीय लोगों की आय बन सकता है।
इसे समझा जा सकता है:
पर्यटक व्यय → स्थानीय व्यवसाय → स्थानीय आय → नया स्थानीय व्यय
यही स्थानीय गुणक प्रभाव है।
इसलिए सामुदायिक पर्यटन का लक्ष्य होना चाहिए:
अधिक पर्यटक संख्या नहीं, बल्कि अधिक स्थानीय आर्थिक मूल्य
महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों की भूमिका
पर्यटन क्षेत्र में महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों के लिए अनेक संभावनाएँ हैं:
- स्थानीय भोजन,
- हस्तशिल्प,
- होमस्टे,
- सांस्कृतिक अनुभव,
- स्थानीय उत्पाद,
- गाइड सेवाएँ।
यदि डिजिटल स्टैक इन्हें औपचारिक डिजिटल पहचान और बाजार तक पहुँच देता है, तो पर्यटन महिला आर्थिक भागीदारी को भी मजबूत कर सकता है।
इससे पर्यटन नीति का संबंध:
स्थानीय विकास + महिला सशक्तीकरण + सूक्ष्म उद्यमिता
से जुड़ता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्या भूमिका हो सकती है?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर्यटन सेवाओं में कई स्तरों पर उपयोगी हो सकती है:
व्यक्तिगत यात्रा कार्यक्रम + बहुभाषी सहायता + मांग पूर्वानुमान + आगंतुक प्रवाह विश्लेषण + नए गंतव्यों की खोज + प्रतिक्रिया विश्लेषण
उदाहरण के लिए किसी यात्री की:
- यात्रा अवधि,
- बजट,
- रुचि,
- मौसम,
- परिवहन उपलब्धता
के आधार पर व्यक्तिगत यात्रा कार्यक्रम तैयार किया जा सकता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता गंतव्य प्रबंधन में कैसे मदद कर सकती है?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल आँकड़ों से प्रशासन अनुमान लगा सकता है कि:
- किस सप्ताह पर्यटक दबाव बढ़ सकता है,
- किस मार्ग पर जाम हो सकता है,
- किस गंतव्य पर होटल क्षमता भरने वाली है,
- कहाँ वैकल्पिक गंतव्य सुझाए जा सकते हैं।
इससे: भीड़ होने के बाद प्रतिक्रिया → भीड़ से पहले प्रबंधन की ओर बदलाव संभव है।
डिजिटल पर्यटन के जोखिम क्या हैं?
डिजिटल प्रणाली अपने साथ नई चुनौतियाँ भी लाती है।
इनमें शामिल हैं:
- गोपनीयता,
- साइबर सुरक्षा,
- एल्गोरिद्मिक पक्षपात,
- बड़े मंचों का बाजार प्रभुत्व,
- छोटे सेवा प्रदाताओं का डिजिटल बहिष्करण,
- गलत या नकली रेटिंग।
इसलिए: डिजिटलीकरण ≠ स्वतः समावेशी पर्यटन
यदि छोटे होमस्टे या स्थानीय गाइड तकनीकी रूप से मंच का उपयोग नहीं कर पाते, तो बड़ी डिजिटल व्यवस्था उनके बजाय बड़े संगठित प्रदाताओं को अधिक लाभ पहुँचा सकती है।
डिजिटल विभाजन का समाधान
छोटे पर्यटन सेवा प्रदाताओं के लिए केवल ऐप या पोर्टल उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा।
उन्हें आवश्यकता हो सकती है:
- डिजिटल प्रशिक्षण,
- आसान पंजीकरण,
- स्थानीय भाषा इंटरफेस,
- कम लागत वाले भुगतान साधन,
- सत्यापन सहायता,
- शिकायत निवारण।
इसलिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की सफलता निर्भर करेगी:
प्रौद्योगिकी + क्षमता निर्माण + समावेशन
पर।
इनक्रेडिबल इंडिया डिजिटल प्लेटफॉर्म से संबंध
इनक्रेडिबल इंडिया डिजिटल प्लेटफॉर्म यात्रियों को गंतव्यों और यात्रा विकल्पों की जानकारी देता है।
नया स्टैक इससे आगे जाकर: जानकारी → वास्तविक सेवा खोज → लेन-देन → प्रतिक्रिया की पूरी श्रृंखला जोड़ सकता है।
इसलिए नया स्टैक मौजूदा मंच का साधारण प्रतिस्थापन नहीं, बल्कि व्यापक डिजिटल संपर्क व्यवस्था हो सकता है।
सहकारी संघवाद क्यों महत्त्वपूर्ण है?
पर्यटन केवल केंद्र सरकार का विषय नहीं है।
गंतव्य विकास में राज्यों और स्थानीय निकायों की प्रमुख भूमिका होती है।
उन्हें संभालना पड़ता है:
- स्थानीय सड़कें,
- कचरा प्रबंधन,
- पानी,
- परिवहन,
- स्थानीय पर्यटन स्थल,
- सुरक्षा,
- नगर सेवाएँ।
इसलिए राष्ट्रीय डिजिटल ढाँचा तभी सफल होगा जब: केंद्र + राज्य + स्थानीय निकाय + निजी क्षेत्र + समुदाय के बीच समन्वय हो।
गंतव्य प्रबंधन केवल विपणन क्यों नहीं है?
पारंपरिक पर्यटन नीति अक्सर किसी स्थल को अधिक प्रसिद्ध बनाने पर केंद्रित रहती थी।
लेकिन केवल विपणन सफल हो जाए और स्थानीय अवसंरचना तैयार न हो, तो परिणाम हो सकता है:
अधिक पर्यटक + अधिक भीड़ + अधिक पर्यावरणीय दबाव
इसलिए नई नीति का केंद्रीय परिवर्तन है:
गंतव्य का प्रचार → गंतव्य का प्रबंधन
इसमें पर्यटकों की संख्या के साथ-साथ यह भी देखना होगा:
- कचरा कितना उत्पन्न हो रहा है,
- जल उपयोग कितना है,
- स्थानीय परिवहन क्षमता क्या है,
- स्थानीय समुदाय को कितना आर्थिक लाभ मिल रहा है।
पर्यटन और रोजगार
पर्यटन श्रम-प्रधान क्षेत्र है।
इससे रोजगार पैदा हो सकते हैं:
- होटल,
- रेस्तराँ,
- परिवहन,
- गाइड सेवाएँ,
- मनोरंजन,
- हस्तशिल्प,
- स्थानीय भोजन,
- सांस्कृतिक गतिविधियाँ।
विशेष रूप से वैकल्पिक गंतव्यों के विकास से रोजगार उन क्षेत्रों तक पहुँच सकता है जो अभी प्रमुख पर्यटन मानचित्र से बाहर हैं।
इसलिए:
पर्यटन विविधीकरण → क्षेत्रीय रोजगार विविधीकरण
सतत पर्यटन का मूल प्रश्न
सतत पर्यटन का अर्थ पर्यटकों की संख्या अधिकतम करना नहीं है।
इसके तीन प्रमुख आयाम हैं:
आर्थिक व्यवहार्यता + सामाजिक समावेशन + पर्यावरणीय स्थिरता
यदि पर्यटन से आय तो बढ़े लेकिन:
- जल संकट बढ़ जाए,
- स्थानीय लोग विस्थापित हों,
- कचरा बढ़ जाए,
- सांस्कृतिक पहचान व्यावसायिक दबाव में कमजोर हो,
तो उसे पूर्णतः सतत नहीं कहा जा सकता।
डिजिटल पर्यटन स्टैक की सफलता कैसे मापी जानी चाहिए?
सफलता केवल इस आधार पर नहीं मापी जानी चाहिए कि:
कितनी बुकिंग हुईं
बल्कि यह भी देखना चाहिए:
- कितने छोटे प्रदाता जुड़े,
- कितने कम-ज्ञात गंतव्य लाभान्वित हुए,
- स्थानीय आय में कितना सुधार हुआ,
- लोकप्रिय स्थलों पर दबाव कम हुआ या नहीं,
- शिकायत निवारण कितना प्रभावी रहा,
- डिजिटल प्रतिस्पर्धा निष्पक्ष रही या नहीं।
इसलिए नीति परिणाम का सही परीक्षण होगा:
यात्री सुविधा + स्थानीय आजीविका + प्रतिस्पर्धा + पर्यावरणीय वहन क्षमता + गंतव्य स्थिरता
मूल नीतिगत परिवर्तन
भारत की पर्यटन नीति धीरे-धीरे इस दिशा में बढ़ रही है:
गंतव्य प्रचार → गंतव्य पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन
राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन स्टैक इस पारिस्थितिकी तंत्र को डिजिटल रूप से जोड़ सकता है।
देखो अपना देश 2.0 पर्यटन मांग को भौगोलिक रूप से अधिक संतुलित कर सकता है।
सामुदायिक भागीदारी यह सुनिश्चित कर सकती है कि पर्यटन आय स्थानीय अर्थव्यवस्था में अधिक समय तक बनी रहे।
इसलिए इन पहलों का व्यापक उद्देश्य है:
डिजिटल सुविधा + वितरित पर्यटन + स्थानीय रोजगार + सतत गंतव्य प्रबंधन
संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न
“डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पर्यटन को तभी रूपांतरित कर सकती है जब यात्री सुविधा को गंतव्य की स्थिरता और सामुदायिक भागीदारी के साथ जोड़ा जाए।” राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन स्टैक और देखो अपना देश 2.0 के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास
प्रश्न 1
भारत की पर्यटन पहलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन स्टैक को पर्यटन सेवाओं के लिए खुली डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में विकसित करने की परिकल्पना है।
- देखो अपना देश 2.0 का उद्देश्य कम-ज्ञात लेकिन पर्यटन-तैयार गंतव्यों को बढ़ावा देना है।
- स्वदेश दर्शन 2.0 मुख्यतः सतत और गंतव्य-केंद्रित पर्यटन विकास दृष्टिकोण अपनाता है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A. केवल 1
B. केवल 1 और 2
C. केवल 2 और 3
D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: D
व्याख्या: राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन स्टैक का उद्देश्य पर्यटन सेवाओं के लिए परस्पर-संचालनीय डिजिटल ढाँचा विकसित करना है। देखो अपना देश 2.0 पर्यटन का भौगोलिक विविधीकरण चाहता है, जबकि स्वदेश दर्शन 2.0 सतत और गंतव्य-केंद्रित विकास पर केंद्रित है।
प्रश्न 2
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- निधि प्लस पर्यटन सेवा प्रदाताओं के पंजीकरण और वर्गीकरण से जुड़ा है।
- प्रसाद योजना तीर्थ और विरासत पर्यटन अवसंरचना से संबंधित है।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का अर्थ है कि पर्यटन की सभी सेवाएँ केवल सरकार द्वारा ही प्रदान की जानी चाहिए।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A. केवल 1
B. केवल 1 और 2
C. केवल 2 और 3
D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: B
व्याख्या: निधि प्लस पर्यटन सेवा प्रदाताओं की डिजिटल पहचान, पंजीकरण और वर्गीकरण से जुड़ा है, जबकि प्रसाद तीर्थ और विरासत पर्यटन अवसंरचना पर केंद्रित है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना साझा डिजिटल आधार उपलब्ध करा सकती है जिस पर सरकारी और निजी दोनों प्रतिभागी सेवाएँ प्रदान कर सकते हैं।

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