IIT मद्रास ने विमान के पंखों के लिए 'मॉर्फिंग स्किन' तकनीक विकसित की
IIT मद्रास के शोधकर्ताओं ने एक अभिनव 'मॉर्फिंग स्किन' (Morphing Skin) तकनीक विकसित की है, जो उड़ान के दौरान विमान के पंखों के आकार को गतिशील रूप से बदल सकती है। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य स्टाल (stall) के जोखिम को कम करना, लिफ्ट को बढ़ाना और विमान की समग्र ईंधन दक्षता (fuel efficiency) में सुधार करना है, जिससे भविष्य में विमान यात्रा अधिक सुरक्षित और किफायती हो सकेगी।

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IIT मद्रास के शोधकर्ताओं ने पक्षियों की उड़ान से प्रेरित एक अनुकूली ‘मॉर्फिंग स्किन’ तकनीक विकसित की है। यह तकनीक वायु प्रवाह में होने वाले बदलाव के अनुसार पंख का आकार बदल सकती है, जिससे लिफ्ट बढ़ाने, ड्रैग कम करने और विमान की सुरक्षा व ईंधन दक्षता में सुधार की संभावना है।
महत्वपूर्ण बिन्दु:
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT मद्रास) के शोधकर्ताओं ने विमान के पंखों के लिए पक्षियों की उड़ान से प्रेरित एक अनुकूली ‘मॉर्फिंग स्किन’ तकनीक विकसित की है।
- इस तकनीक में एक अतिरिक्त लचीला विंग असेंबली शामिल है, जो पंख के ऊपर वायु प्रवाह अलग होने की स्थिति में गतिशील रूप से अपना आकार बदल सकता है।
- एयरोडायनामिक स्टॉल उस स्थिति को कहा जाता है जब पंख के ऊपर से गुजरने वाला वायु प्रवाह अलग हो जाता है। इससे लिफ्ट में अचानक कमी और ड्रैग में वृद्धि हो सकती है।
- मॉर्फिंग स्किन बदलते वायु प्रवाह के अनुसार अपना आकार समायोजित करके पंख के ऊपर वायु प्रवाह को बनाए रखने में मदद करती है।
- इससे विशेष रूप से अधिक एंगल ऑफ अटैक और चुनौतीपूर्ण उड़ान परिस्थितियों में विमान की स्थिरता और नियंत्रण में सुधार की संभावना है।
- शोधकर्ताओं ने अवधारणा को परखने के लिए कम्प्यूटेशनल मॉडलिंग, विंड-टनल प्रयोग और वास्तविक समय में आकार नियंत्रण जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया।
- प्रणाली में मैक्रो फाइबर कंपोजिट (MFC) स्ट्रिप्स भी शामिल हैं, जो पंख के आकार में बदलाव को महसूस करने और उसे नियंत्रित करने में मदद करती हैं।
- शोध टीम के अनुसार, यह तकनीक लिफ्ट बढ़ाने और ड्रैग कम करने में मदद कर सकती है, जिससे ईंधन दक्षता में सुधार और उत्सर्जन में कमी की संभावना है।
- इसका संभावित उपयोग वाणिज्यिक विमानों में विशेष रूप से टेक-ऑफ, लैंडिंग और प्रतिकूल उड़ान परिस्थितियों के दौरान किया जा सकता है।
- रक्षा और उच्च-प्रदर्शन वाले विमानों में यह तकनीक अत्यधिक युद्धाभ्यास और अशांत परिस्थितियों के दौरान स्थिर वायु प्रवाह बनाए रखने में मदद कर सकती है।
- इस अवधारणा का परीक्षण NACA 4415 एयरफॉइल कॉन्फिगरेशन वाले 3D विंग पर किया गया।
- शोधकर्ताओं के अनुसार, इस बाहरी स्किन को मौजूदा विमानों में रेट्रोफिट किए जाने की संभावना है, जिससे पूरे विंग को दोबारा डिजाइन करने की आवश्यकता कम हो सकती है।
मैक्रो फाइबर कंपोजिट (MFC) क्या है?
- मैक्रो फाइबर कंपोजिट (MFC) एक उन्नत स्मार्ट मटेरियल है, जिसका उपयोग सेंसर, एक्ट्यूएटर और ऊर्जा संग्रहण के लिए किया जाता है।
- यह एक उच्च-प्रदर्शन वाले पीजोइलेक्ट्रिक एक्ट्यूएटर और सेंसर के रूप में काम करता है, जो यांत्रिक विकृति को महसूस करने और उत्पन्न करने में सक्षम है।
- MFC तकनीक को मूल रूप से NASA ने 1999 में विकसित किया था।
- इसमें आमतौर पर लीड जिरकोनेट टाइटेनेट (PZT) से बने आयताकार पीजोइलेक्ट्रिक सिरेमिक फाइबर होते हैं।
- MFC विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक गति में और कुछ परिस्थितियों में यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित कर सकता है।
- इन विशेषताओं के कारण इसका उपयोग एयरोस्पेस, रोबोटिक्स, संरचनात्मक स्वास्थ्य निगरानी, कंपन नियंत्रण और अनुकूली संरचनाओं में किया जाता है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. IIT मद्रास द्वारा विकसित ‘मॉर्फिंग स्किन’ तकनीक के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
इसमें एक अनुकूली बाहरी विंग असेंबली का उपयोग किया जाता है, जो वायु प्रवाह के अलगाव के अनुसार गतिशील रूप से प्रतिक्रिया करती है।
इसमें प्रयुक्त मैक्रो फाइबर कंपोजिट (MFC) स्ट्रिप्स पंख के आकार में बदलाव को महसूस करने और उसे नियंत्रित करने, दोनों में सक्षम हैं।
इस अवधारणा का परीक्षण NACA 4415 एयरफॉइल पर आधारित 3D विंग पर किया गया तथा इसका उपयोग वाणिज्यिक और रक्षा विमानन दोनों में हो सकता है।
MFC तकनीक को मूल रूप से IIT मद्रास ने इसी विमानन अनुसंधान के तहत विकसित किया था।
उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A. केवल 1, 2 और 3
B. केवल 1 और 4
C. केवल 2, 3 और 4
D. 1, 2, 3 और 4
उत्तर: A. केवल 1, 2 और 3
व्याख्या:
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। IIT मद्रास की मॉर्फिंग स्किन वायु प्रवाह के अलगाव के अनुसार अपना आकार बदल सकती है। MFC स्ट्रिप्स पंख के आकार में बदलाव को महसूस करने और उसे नियंत्रित करने में सक्षम हैं। इसका परीक्षण NACA 4415 आधारित 3D विंग पर किया गया है और इसके वाणिज्यिक तथा रक्षा विमानन में संभावित उपयोग हैं। कथन 4 गलत है, क्योंकि MFC तकनीक को मूल रूप से NASA ने 1999 में विकसित किया था।
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