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Current Affairs - Daily 24 सितमबर 2026

वैश्विक व्यवस्था पर दबाव, सुधारित बहुपक्षवाद और 4F संकट

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक व्यवस्था पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और प्रतिस्पर्धा के बीच सुधारित बहुपक्षवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने ईंधन, खाद्य, उर्वरक और वित्त से जुड़े 4F संकट के परस्पर संबंधों तथा आवश्यक आपूर्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय ढाँचे और सुरक्षा-उपायों की आवश्यकता को रेखांकित किया।

वैश्विक व्यवस्था पर दबाव: सुधारित बहुपक्षवाद और 4F संकट

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भू-राजनीतिक तनावों, बढ़ती प्रतिस्पर्धा तथा वैश्विक आपूर्ति में उत्पन्न व्यवधानों को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सुधारित बहुपक्षवाद (Reformed Multilateralism) की आवश्यकता पर जोर देते हुए आवश्यक वस्तुओं, विशेषकर ईंधन और खाद्य पदार्थों की आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उचित ढाँचे और सुरक्षा-उपाय विकसित करने की बात कही। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी एक क्षेत्र में उत्पन्न व्यवधान खाद्य, ऊर्जा, उर्वरक और वित्तीय बाजारों के माध्यम से अन्य क्षेत्रों को भी प्रभावित कर सकता है।

बहुपक्षवाद (Multilateralism) क्या है?

बहुपक्षवाद से आशय तीन या अधिक देशों द्वारा साझा नियमों, संस्थाओं और सहमत ढाँचों के माध्यम से साझा अंतरराष्ट्रीय समस्याओं का समाधान करने के लिए सहयोग से है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित संयुक्त राष्ट्र बहुपक्षवाद की प्रमुख संस्थागत अभिव्यक्ति है।

सुधारित बहुपक्षवाद का व्यापक अर्थ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, वैध, समावेशी और प्रभावी बनाना है। इसका उद्देश्य मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और वर्तमान भू-राजनीतिक एवं आर्थिक वास्तविकताओं के बीच मौजूद अंतर को कम करना है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) क्या है?

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख विचार-विमर्श, नीति-निर्माण और प्रतिनिधित्व वाला अंग है। इसमें संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देश शामिल हैं और प्रत्येक देश के पास एक वोट होता है।

महासभा अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा, विकास, मानवाधिकार, मानवीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय कानून सहित विभिन्न मुद्दों पर विचार करती है।

प्रमुख कार्य

  • संयुक्त राष्ट्र के बजट को मंजूरी देना।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्यों का चुनाव करना।
  • संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न अन्य अंगों के सदस्यों का चुनाव करना।
  • सुरक्षा परिषद की सिफारिश पर महासचिव की नियुक्ति करना।
  • अंतरराष्ट्रीय मुद्दों एवं सहयोग से संबंधित सिफारिशें करना।

UNGA की मतदान प्रणाली

संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रत्येक सदस्य देश का एक वोट होता है।

महत्वपूर्ण प्रश्नों, जैसे अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा से संबंधित सिफारिशों, नए सदस्यों के प्रवेश और बजट संबंधी मामलों में सामान्यतः उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।

अन्य मामलों में सामान्यतः साधारण बहुमत पर्याप्त होता है। व्यवहार में महासभा की अनेक प्रस्तावों को व्यापक वार्ता और सहमति के बाद सर्वसम्मति से भी अपनाया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद: तुलना

आधार

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA)

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC)

सदस्यता193 सदस्य देश15 सदस्य
मतदानप्रत्येक देश का एक वोटस्थायी सदस्यों के पास वीटो अधिकार
प्रमुख भूमिकाविचार-विमर्श, सिफारिशें और नीति-निर्माणअंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी
प्रतिनिधित्वसार्वभौमिक प्रतिनिधित्वसीमित सदस्यता
निर्णयों की प्रकृतिसामान्यतः सिफारिशात्मककुछ निर्णय संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत बाध्यकारी हो सकते हैं

UNGA की वार्षिक आम बहस का महत्व

वार्षिक आम बहस (General Debate) ऐसा वैश्विक मंच है जहाँ राष्ट्राध्यक्ष, शासनाध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधि प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपने देशों के विचार एवं प्राथमिकताएँ प्रस्तुत करते हैं।

सितंबर 2026 में आयोजित 81वें सत्र की उच्च-स्तरीय गतिविधियों के दौरान भी आम बहस महत्वपूर्ण रही। यह देशों को अपनी प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रखने, राजनयिक समर्थन जुटाने और उभरते वैश्विक मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में शामिल करने का अवसर प्रदान करती है।

‘4F संकट’ क्या है?

4F संकट चार परस्पर जुड़े क्षेत्रों से संबंधित संकट को दर्शाता है—

Fuel + Food + Fertiliser + Finance
ईंधन + खाद्य + उर्वरक + वित्त

ये चारों क्षेत्र आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।

ईंधन और खाद्य

ईंधन की कीमतों में वृद्धि से परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ जाती है। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी दबाव पड़ सकता है।

ईंधन और उर्वरक

उर्वरक उत्पादन में बड़ी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसलिए ऊर्जा की कीमतों या आपूर्ति में व्यवधान से उर्वरकों की कीमत बढ़ सकती है।

उर्वरक और खाद्य

महंगे उर्वरक कृषि उत्पादन की लागत बढ़ाते हैं। इससे किसानों की लागत बढ़ सकती है और अंततः खाद्य पदार्थों की कीमतों एवं उपलब्धता पर प्रभाव पड़ सकता है।

वित्त और 4F संकट

उच्च वस्तु कीमतें, बढ़ता ऋण और कड़ी वित्तीय परिस्थितियाँ विकासशील एवं कमजोर अर्थव्यवस्थाओं के लिए वित्त तक पहुँच को कठिन बना सकती हैं। इस प्रकार वित्तीय दबाव खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े संकट को और गहरा कर सकता है।

इसलिए 4F संकट को अलग-अलग समस्याओं के रूप में नहीं, बल्कि परस्पर जुड़े वैश्विक आर्थिक एवं सुरक्षा संकट के रूप में समझना आवश्यक है।

आगे की राह

21वीं सदी में संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता केवल इस बात से निर्धारित नहीं होगी कि उसने कितने प्रस्ताव पारित किए हैं, बल्कि इस बात से होगी कि वह कितनी वैध, प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी सामूहिक कार्रवाई सुनिश्चित कर सकता है।

सुधारित बहुपक्षवाद के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में व्यापक प्रतिनिधित्व, अधिक प्रभावी संस्थागत व्यवस्था, मजबूत आपूर्ति शृंखलाएँ, संकट के समय बेहतर अंतरराष्ट्रीय समन्वय तथा विकासशील देशों की अधिक भागीदारी पर ध्यान दिया जा सकता है।

भारत के लिए यह दृष्टिकोण रणनीतिक स्वायत्तता, विविधीकृत आपूर्ति शृंखला, ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा और अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

मुख्य चुनौती यह है कि बहुपक्षीय मंचों पर बनी सहमति को ऐसी व्यावहारिक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी में बदला जाए, जो परस्पर जुड़े वैश्विक संकटों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके।

MCQ Hindi

प्रश्न 1. समकालीन वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के संदर्भ में चर्चित ‘4F संकट’ के संबंध में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

  1. ईंधन — ऊर्जा एवं परिवहन लागत
  2. खाद्य — खाद्य सुरक्षा एवं कीमतें
  3. उर्वरक — कृषि इनपुट लागत
  4. वित्त — वित्तीय संसाधनों तक पहुँच

उपर्युक्त में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?

(A) केवल 1, 2 और 3
(B) केवल 2, 3 और 4
(C) केवल 1, 3 और 4
(D) 1, 2, 3 और 4

उत्तर: (D) 1, 2, 3 और 4

व्याख्या:

  • 4F संकट से आशय ईंधन (Fuel), खाद्य (Food), उर्वरक (Fertiliser) और वित्त (Finance) से जुड़ी परस्पर संबंधित चुनौतियों से है।
  • ईंधन की कीमतें परिवहन और उत्पादन लागत को प्रभावित करती हैं।
  • उर्वरक की कीमत एवं उपलब्धता कृषि उत्पादन लागत और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करती है।
  • वित्तीय दबाव विशेष रूप से कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में वित्तीय संसाधनों तक पहुँच को प्रभावित कर सकता है।
  • इसलिए चारों युग्म सही सुमेलित हैं।