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Current Affairs - Daily 17 सितमबर 2026

जनगणना 2027: भारत की पहली डिजिटल जनगणना और शासन की नई डेटा नींव

जनगणना 2027 पहली बार डिजिटल माध्यम से आयोजित की जा रही है। यह नई जनसांख्यिकीय जानकारी, जाति गणना, कल्याण योजना, परिसीमन और महिला आरक्षण के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

जनगणना 2027: भारत की पहली डिजिटल जनगणना

  • जनगणना 2027 भारत की 16वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना है। इसका पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू हुआ। पहली बार जनगणना संबंधी आँकड़े मोबाइल अनुप्रयोगों के माध्यम से डिजिटल रूप से एकत्र किए जा रहे हैं। साथ ही नागरिकों को वैकल्पिक स्व-गणना सुविधा भी उपलब्ध है।

  • यह प्रक्रिया विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है क्योंकि भारत की पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। इसके कारण अनेक नीतियाँ ऐसे जनसांख्यिकीय आँकड़ों पर निर्भर रही हैं जो हाल के प्रवास, शहरीकरण और जनसंख्या परिवर्तन को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करते।

संवैधानिक और वैधानिक ढाँचा

भारत में जनगणना जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के अंतर्गत आयोजित की जाती है।

यह संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची की प्रविष्टि 69 के अंतर्गत संघ का विषय है। इसका प्रशासन गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय द्वारा किया जाता है।

व्यक्तिगत जनगणना जानकारी गोपनीय होती है और आधिकारिक आँकड़े समेकित रूप में जारी किए जाते हैं।

दो चरणों में गणना

चरण

प्रमुख जानकारी

मकान सूचीकरण एवं आवास जनगणना

आवास की स्थिति, सुविधाएँ, परिवार संबंधी विवरण और परिसंपत्तियाँ

जनसंख्या गणना

जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, शैक्षणिक, प्रवास तथा अन्य व्यक्तिगत विशेषताएँ

पहला चरण राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच निर्धारित था। जनसंख्या गणना मुख्यतः फरवरी 2027 में निर्धारित है, जबकि कुछ हिमाच्छादित क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था की गई है।

सरकार ने जनसंख्या गणना चरण के दौरान जाति गणना कराने का भी निर्णय लिया है।

इस जनगणना को अलग क्या बनाता है?

गणनाकर्मी स्मार्टफोन अनुप्रयोगों के माध्यम से आँकड़े दर्ज करते हैं। इस प्रक्रिया को जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली का समर्थन प्राप्त है।

स्व-गणना ऑनलाइन उपलब्ध है, जिसके बाद गणनाकर्मियों द्वारा सत्यापन किया जाता है।

मोबाइल अनुप्रयोग और स्व-गणना सुविधा 16 भाषाओं में उपलब्ध हैं। इसके लिए स्वीकृत वित्तीय व्यय ₹11,718.24 करोड़ है और लगभग 30 लाख मैदानी कर्मी इस प्रक्रिया में शामिल हैं।

डिजिटलीकरण आँकड़ों की प्रक्रिया को तेज कर सकता है और निगरानी को बेहतर बना सकता है, लेकिन इससे साइबर सुरक्षा, गोपनीयता, डिजिटल पहुँच और आँकड़ों की गुणवत्ता की पुष्टि जैसे शासन संबंधी मुद्दे भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं।

अद्यतन जनगणना आँकड़े क्यों आवश्यक हैं?

विश्वसनीय जनसंख्या आँकड़े स्वास्थ्य, शिक्षा, कल्याण, आवास, प्रवास और अवसंरचना नियोजन के लिए आधार प्रदान करते हैं।

दो जनगणनाओं के बीच लंबा अंतर लाभार्थियों के अनुमान, शहरी नियोजन, आपदा तैयारी और जनसांख्यिकीय बदलावों की निगरानी को कमजोर कर सकता है।

इसलिए जनगणना केवल जनसंख्या की गिनती नहीं है; यह साक्ष्य-आधारित लोक प्रशासन की सांख्यिकीय नींव है।

परिसीमन और प्रतिनिधित्व

अनुच्छेद 82 के तहत संसद जनगणना के बाद परिसीमन संबंधी कानून के माध्यम से लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्समायोजन का प्रावधान करती है।

संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से राज्यों के बीच सीटों का मौजूदा आवंटन 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना तक स्थिर रखा गया है।

इसलिए जनगणना 2027 भविष्य की परिसीमन प्रक्रिया के लिए महत्त्वपूर्ण है। किसी भी ऐसी प्रक्रिया की सटीक रूपरेखा और उसके राजनीतिक परिणाम बाद के संवैधानिक और विधायी निर्णयों पर निर्भर करेंगे।

यह मुद्दा इसलिए भी बहस का विषय है क्योंकि अलग-अलग राज्यों की जनसंख्या वृद्धि की दर भिन्न रही है, जिससे जनसंख्या-आधारित प्रतिनिधित्व और संघीय संतुलन के बीच प्रतिस्पर्धी चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।

महिला आरक्षण से संबंध

  • संविधान (106वाँ संशोधन) अधिनियम, 2023 लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए लगभग एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है।

  • अनुच्छेद 334क के तहत ये प्रावधान उस परिसीमन प्रक्रिया के बाद लागू होंगे जो संशोधन लागू होने के बाद आयोजित पहली जनगणना से संबंधित आँकड़ों के प्रकाशन के पश्चात की जाएगी।

  • इसलिए जनगणना के आँकड़ों का प्रकाशन एक महत्त्वपूर्ण संवैधानिक पूर्वापेक्षा है, लेकिन इससे महिला आरक्षण स्वतः और तत्काल लागू नहीं हो जाता।

संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न

“जनगणना के आँकड़े केवल जनसांख्यिकीय सांख्यिकी नहीं, बल्कि शासन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की आधारभूत संरचना हैं।” जनगणना 2027, डिजिटल गणना, कल्याण नियोजन और परिसीमन के संदर्भ में चर्चा कीजिए।


प्रारंभिक परीक्षा 

प्रश्न 1

भारत की जनगणना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1-जनगणना सातवीं अनुसूची की संघ सूची का विषय है।
  2. 2-जनगणना 2027 डिजिटल स्व-गणना की सुविधा देने वाली भारत की पहली जनगणना है।
  3. 3-स्व-गणना से गणनाकर्मियों की घर-घर जाकर की जाने वाली गणना पूरी तरह समाप्त हो जाती है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

A. केवल 1
B. केवल 1 और 2
C. केवल 2 और 3
D. 1, 2 और 3

सही उत्तर: B

व्याख्या: जनगणना संघ का विषय है और जनगणना 2027 डिजिटल स्व-गणना की सुविधा प्रस्तुत करती है। हालांकि, गणनाकर्मी घर-घर जाकर मैदानी दौरे और सत्यापन जारी रखते हैं।

प्रश्न 2

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. अनुच्छेद 82 जनगणना के बाद लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्समायोजन से संबंधित है।
  2. जनगणना 2027 के आँकड़ों के प्रकाशन से निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएँ अपने-आप पुनर्निर्धारित हो जाएँगी।
  3. महिलाओं के लिए सीट आरक्षण संबंधी संवैधानिक प्रावधान 106वें संविधान संशोधन के बाद पहली जनगणना के प्रासंगिक आँकड़ों के प्रकाशन के पश्चात होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जुड़े हैं।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

A. केवल 1
B. केवल 1 और 3
C. केवल 2 और 3
D. 1, 2 और 3

सही उत्तर:B

व्याख्या: अनुच्छेद 82 जनगणना के बाद पुनर्समायोजन का संवैधानिक आधार प्रदान करता है, लेकिन परिसीमन के लिए अलग कानूनी और संस्थागत प्रक्रिया आवश्यक है। अनुच्छेद 334क महिला आरक्षण के क्रियान्वयन को संशोधन के बाद पहली जनगणना के प्रासंगिक आँकड़ों के प्रकाशन के पश्चात होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ता है।