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Current Affairs - Daily 19 सितमबर 2026

अफ्रीका का महाद्वीपीय विभाजन: तुर्काना रिफ्ट से नए महासागर तक

तुर्काना रिफ्ट में महाद्वीपीय पपड़ी लगभग 13 किमी मोटी रह गई है, जो सक्रिय पपड़ी-संकुचन की उन्नत अवस्था का संकेत है। नई खोज बताती है कि पूर्वी अफ्रीका के कुछ भागों में महाद्वीपीय विभाजन पहले की समझ से अधिक उन्नत अवस्था में पहुँच चुका है।

अफ्रीका का महाद्वीपीय विभाजन: तुर्काना रिफ्ट से नए महासागर तक

पाठ्यक्रम मानचित्रण: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I — भौतिक भूगोल; प्रमुख प्राकृतिक विशेषताओं का वितरण; भूकंप, ज्वालामुखीयता और भूभौतिकीय घटनाएँ।

स्रोत एवं तिथि: नेचर कम्युनिकेशंस, 23 अप्रैल 2026; अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण। 2026 के अध्ययन ने केन्या के तुर्काना रिफ्ट क्षेत्र में सक्रिय पपड़ी-संकुचन की पहचान की है।

हालिया अध्ययन में क्या मिला?

  • केन्या के तुर्काना रिफ्ट क्षेत्र का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों ने पाया कि रिफ्ट अक्ष के पास स्फटिकीय महाद्वीपीय पपड़ी की मोटाई घटकर लगभग 12.7 ± 2.8 किमी, अर्थात लगभग 13 किमी, रह गई है। रिफ्ट के किनारों पर यही पपड़ी 35 किमी से अधिक मोटी है।
  • यह स्थिति तुर्काना को महाद्वीपीय रिफ्टिंग की पपड़ी-संकुचन अवस्था में रखती है। इस चरण में विवर्तनिक विकृति रिफ्ट के अक्ष पर अधिक केंद्रित हो जाती है और पपड़ी तेजी से पतली होने लगती है। अध्ययन के अनुसार तुर्काना में यह अवस्था लगभग 40 लाख वर्ष पहले शुरू हुई।
  • सबसे महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष यह नहीं है कि अफ्रीका शीघ्र दो भागों में टूट जाएगा, बल्कि यह है कि पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट प्रणाली का कम-से-कम एक भाग महाद्वीपीय विखंडन की दिशा में पहले की अपेक्षा अधिक उन्नत अवस्था में है।

महाद्वीप कैसे टूटता है?

इस प्रक्रिया को प्लेट विवर्तनिकी के माध्यम से समझा जाता है।

जब विवर्तनिक प्लेटें एक-दूसरे से दूर खिसकती हैं:

पपड़ी में खिंचाव → भ्रंशों का निर्माण → पपड़ी पतली → मैग्मा का ऊपर उठना → महाद्वीपीय पपड़ी का विखंडन → नई महासागरीय पपड़ी का निर्माण

मुख्य चरण हैं:

खिंचाव → पपड़ी-संकुचन → महासागरीकरण → समुद्री तल प्रसार

पपड़ी-संकुचन अवस्था में रिफ्ट के अक्ष के आसपास विकृति केंद्रित हो जाती है और स्फटिकीय पपड़ी की मोटाई लगभग 10–15 किमी तक कम हो सकती है। इसी कारण तुर्काना में लगभग 13 किमी मोटी पपड़ी अत्यंत महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।

महत्त्वपूर्ण अंतर:

पपड़ी-संकुचन ≠ महासागरीकरण

पपड़ी-संकुचन उन्नत महाद्वीपीय पतलापन है, जबकि महासागरीकरण वह अवस्था है जिसमें मैग्माई अभिवृद्धि और गहरे पदार्थों के ऊपर आने के साथ समुद्री तल प्रसार तथा पूर्ण महाद्वीपीय विखंडन की प्रक्रिया शुरू होती है।

पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट प्रणाली

पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट प्रणाली विश्व की प्रमुख सक्रिय महाद्वीपीय रिफ्ट प्रणालियों में से एक है।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार यह लगभग 3,000 किमी तक फैली है और उत्तर में अफार त्रिसंगम से दक्षिण में पश्चिमी मोज़ाम्बिक तक विस्तृत है।

यह मुख्यतः नूबियन प्लेट और सोमाली प्लेट के क्रमिक अलगाव से जुड़ी है।

  • नूबियन प्लेट: अफ्रीकी भूभाग का बड़ा पश्चिमी भाग
  • सोमाली प्लेट: पूर्वी अफ्रीका से जुड़ा पूर्वी प्लेटीय भाग

यह अलगाव बहुत धीमी गति से होता है। इसलिए महाद्वीपीय विखंडन और संभावित नए महासागर का निर्माण लाखों वर्षों की भूवैज्ञानिक प्रक्रिया है, न कि निकट भविष्य की घटना।

तुर्काना रिफ्ट इतना महत्त्वपूर्ण क्यों है?

  • 2026 के अध्ययन का विशेष महत्त्व यह है कि शोधकर्ताओं के अनुसार इससे पहले किसी सक्रिय महाद्वीपीय रिफ्ट में पपड़ी-संकुचन अवस्था को इतनी स्पष्टता से पहचाना नहीं गया था। तुर्काना इसलिए इस संक्रमण को प्रत्यक्ष रूप से समझने के लिए एक महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक प्रयोगशाला बन गया है।
  • अध्ययन के अनुसार पपड़ी-संकुचन लगभग 40 लाख वर्ष पहले आरंभ हुआ। इसके बाद रिफ्ट अक्ष के पास विकृति अधिक केंद्रित हुई।
  • पुनर्निर्मित आँकड़ों के अनुसार ऊपरी पपड़ी में लगभग 15.4 किमी का कुल विस्तार हुआ, जिसमें लगभग 7.1 किमी, अर्थात करीब 46 प्रतिशत, पिछले 40 लाख वर्षों में हुआ।
  • यह बताता है कि किसी रिफ्ट की परिपक्वता केवल वर्तमान प्लेट गति पर निर्भर नहीं करती। पहले से मौजूद कमजोर भूवैज्ञानिक क्षेत्र, पुरानी रिफ्ट संरचनाएँ और मैग्माई प्रक्रियाएँ भी कुछ हिस्सों में विखंडन को तेज कर सकती हैं।

अफार: जहाँ महासागरीकरण की शुरुआत हो चुकी है

तुर्काना के उत्तर में अफार क्षेत्र स्थित है।

अफार व्यापक रूप से एक त्रिसंगम क्षेत्र से जुड़ा है, जहाँ:

  • लाल सागर रिफ्ट
  • अदन की खाड़ी रिफ्ट
  • पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट

परस्पर मिलते हैं।

यह क्षेत्र अरबी, नूबियन और सोमाली प्लेटों की परस्पर अपसारी गति से जुड़ा है।

2026 का अध्ययन अफार को पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट प्रणाली के सबसे परिपक्व भागों में रखता है और वहाँ आरंभिक महासागरीकरण की अवस्था का उल्लेख करता है। इसके विपरीत तुर्काना सक्रिय पपड़ी-संकुचन अवस्था में है।

इससे एक महत्त्वपूर्ण भूगर्भीय अवधारणा स्पष्ट होती है:

एक ही रिफ्ट प्रणाली के सभी भाग समान विकास अवस्था में नहीं होते।

नया महासागर कैसे बन सकता है?

यदि रिफ्टिंग लाखों वर्षों तक जारी रहती है, तो संभावित क्रम होगा:

महाद्वीपीय पपड़ी अत्यधिक पतली → स्थलमंडल का टूटना → मैग्मा द्वारा नई महासागरीय पपड़ी का निर्माण → समुद्री तल प्रसार → विकसित बेसिन में समुद्री जल का प्रवेश

इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप भूवैज्ञानिक समय में नया महासागरीय बेसिन बन सकता है।

लेकिन यह ध्यान रखना आवश्यक है कि 2026 का अध्ययन भविष्य की निश्चित तटरेखा या देशों की निश्चित सूची नहीं बताता।

इसलिए ऐसे दावे कि वर्तमान अफ्रीकी देश निश्चित रूप से दो स्पष्ट भूभागों में विभाजित होंगे, वैज्ञानिक निष्कर्ष की तुलना में अधिक अनुमानात्मक हैं।

मानव विकास से इसका संबंध

तुर्काना क्षेत्र प्रारंभिक मानव पूर्वजों के जीवाश्मों के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

  • अध्ययन एक रोचक भूवैज्ञानिक संबंध प्रस्तुत करता है: लगभग 40 लाख वर्ष पहले पपड़ी-संकुचन और रिफ्ट अक्ष पर विकृति के केंद्रित होने से बेसिन में धँसाव और अवसाद संचय बढ़ा। इससे जीवाश्मों के संरक्षण के लिए अधिक अनुकूल परिस्थितियाँ बनीं।
  • अध्ययन के अनुसार तुर्काना के प्लायो-प्लीस्टोसीन निक्षेपों में बड़ी संख्या में मानव पूर्वजों और पुरातात्त्विक अवशेष संरक्षित हैं। इससे संकेत मिलता है कि तुर्काना का समृद्ध जीवाश्म अभिलेख केवल प्राचीन मानव आबादी की अधिकता का परिणाम नहीं, बल्कि अनुकूल भूवैज्ञानिक संरक्षण परिस्थितियों से भी संबंधित हो सकता है।


संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न

महाद्वीपीय रिफ्टिंग किन भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से एक नए महासागरीय बेसिन में विकसित हो सकती है? पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट प्रणाली से प्राप्त हालिया निष्कर्षों के संदर्भ में समझाइए।


प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास

प्रश्न 1

पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. यह नूबियन और सोमाली प्लेटों के अपसरण से जुड़ी है।
  2. तुर्काना रिफ्ट में सक्रिय पपड़ी-संकुचन की पहचान की गई है।
  3. पपड़ी-संकुचन का अर्थ है कि पूर्ण विकसित महासागरीय पपड़ी और समुद्री तल प्रसार पहले ही बन चुके हैं।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

A. केवल 1

B. केवल 1 और 2

C. केवल 2 और 3

D. 1, 2 और 3

सही उत्तर: B

व्याख्या: कथन 1 और 2 सही हैं। पपड़ी-संकुचन महाद्वीपीय पपड़ी के उन्नत पतलेपन की अवस्था है और यह पूर्ण महासागरीकरण तथा समुद्री तल प्रसार से पहले आती है।

भ्रम-बिंदु: पपड़ी-संकुचन ≠ महासागरीकरण।

प्रश्न 2

निम्नलिखित रिफ्ट प्रणालियों पर विचार कीजिए:

  1. लाल सागर रिफ्ट
  2. अदन की खाड़ी रिफ्ट
  3. पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट

उपर्युक्त में से कौन-सी व्यापक अफार त्रिसंगम क्षेत्र से संबंधित हैं?

A. केवल 1 और 2

B. केवल 2 और 3

C. केवल 1 और 3

D. 1, 2 और 3

सही उत्तर: D

व्याख्या: अफार क्षेत्र लाल सागर, अदन की खाड़ी और पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट प्रणालियों के परस्पर संपर्क का प्रमुख क्षेत्र है तथा यह अरबी, नूबियन और सोमाली प्लेटों की विवर्तनिक गतिविधियों से जुड़ा है। पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट प्रणाली का विस्तार अफार से पश्चिमी मोज़ाम्बिक तक लगभग 3,000 किमी है।

भ्रम-बिंदु: अफार केवल पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट का एक सामान्य भाग नहीं, बल्कि एक महत्त्वपूर्ण त्रिसंगम क्षेत्र है।