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Current Affairs - Daily 16 सितमबर 2026

एम. विश्वेश्वरैया: इंजीनियरिंग और राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान

एम. विश्वेश्वरैया के जीवन, इंजीनियरिंग उपलब्धियों, प्रशासनिक योगदान, सम्मान और भारत के लिए आर्थिक योजना के उनके विजन के बारे में जानें।

  • भारत के महान अभियंता, प्रशासक और राजनेता एम. विश्वेश्वरैया ने सिंचाई, जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण, औद्योगिक विकास और आर्थिक नियोजन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके सम्मान में हर वर्ष 15 सितंबर को भारत में इंजीनियर्स डे मनाया जाता है।

महत्वपूर्ण बिन्दु:

  • मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया, जिन्हें सर एम. विश्वेश्वरैया के नाम से जाना जाता है, भारत के अग्रणी सिविल इंजीनियर, प्रशासक और राजनेता थे। 
  • उनका जन्म 15 सितंबर 1861 को कर्नाटक के मुद्देनहल्ली में हुआ था। 
  • उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और बाद में पुणे के कॉलेज ऑफ साइंस से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। 
  • उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत बॉम्बे प्रेसीडेंसी के लोक निर्माण विभाग (PWD) से की। 
  • उनके इंजीनियरिंग कार्यों का प्रमुख फोकस सिंचाई, जल आपूर्ति, जल निकासी और बाढ़ नियंत्रण पर था। 
  • उन्होंने ब्लॉक सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा दिया और स्वचालित जल द्वारों की तकनीक विकसित एवं पेटेंट कराई। इनका शुरुआती प्रयोग 1903 में पुणे के खड़कवासला जलाशय में किया गया था। 
  • उन्होंने हैदराबाद और विशाखापत्तनम में जल प्रबंधन एवं बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं में योगदान दिया। 
  • उन्होंने अदन में जल आपूर्ति और जल निकासी से संबंधित परियोजनाओं पर भी काम किया। 
  • बाद में उन्हें मैसूर राज्य का मुख्य अभियंता नियुक्त किया गया। 
  • उन्होंने 1912 से 1918 तक मैसूर के दीवान के रूप में कार्य किया और औद्योगीकरण, तकनीकी शिक्षा तथा बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा दिया। 
  • उनके कार्यकाल के दौरान स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, मैसूर सोप फैक्ट्री और मैसूर आयरन एंड स्टील वर्क्स जैसी संस्थाओं एवं उद्योगों के विकास को बढ़ावा मिला। 
  • उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय और बेंगलुरु के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 
  • वे भारत में आर्थिक नियोजन के शुरुआती समर्थकों में शामिल थे। उन्होंने Reconstructing India (1920) और Planned Economy for India (1934) में अपने विचार प्रस्तुत किए। 
  • सार्वजनिक सेवा में योगदान के लिए उन्हें 1915 में KCIE की उपाधि प्रदान की गई। 
  • वर्ष 1955 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 
  • उनकी जयंती के अवसर पर भारत में हर वर्ष 15 सितंबर को इंजीनियर्स डे मनाया जाता है। 
  • उनका निधन 14 अप्रैल 1962 को 100 वर्ष की आयु में हुआ।

 

 

अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न. सर एम. विश्वेश्वरैया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

विश्वेश्वरैया ने ब्लॉक सिंचाई प्रणाली शुरू की, जिसका उद्देश्य अधिक संख्या में गांवों तक सिंचाई के लाभ पहुंचाना था। 

उनके द्वारा पेटेंट कराए गए स्वचालित जल द्वारों को पहली बार मैसूर के कृष्ण राज सागर बांध में स्थापित किया गया था। 

मैसूर के दीवान के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने औद्योगिक विकास, तकनीकी शिक्षा और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा दिया। 

आर्थिक नियोजन के संबंध में उनके विचार Reconstructing India और Planned Economy for India में व्यक्त हुए।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

A. केवल 1, 3 और 4

 B. केवल 1 और 2

 C. केवल 2, 3 और 4

 D. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: A. केवल 1, 3 और 4

व्याख्या:

 कथन 1, 3 और 4 सही हैं। विश्वेश्वरैया ने अधिक संख्या में गांवों को सिंचाई का लाभ पहुंचाने के लिए ब्लॉक सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा दिया। उन्होंने 1912–1918 तक मैसूर के दीवान के रूप में औद्योगिक विकास, तकनीकी शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर जोर दिया। आर्थिक नियोजन संबंधी उनके विचार Reconstructing India और Planned Economy for India में मिलते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि स्वचालित जल द्वार पहली बार 1903 में पुणे के खड़कवासला जलाशय में स्थापित किए गए थे।