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19 सितमबर 2026
रूसी तेल खरीद पर भारत पर अमेरिकी टैरिफ का खतरा
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंधों से संबंधित विधेयक पारित किया है। इसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की संभावना है। भारत, जो रूसी कच्चे तेल का एक बड़ा खरीदार है, इससे प्रभावित हो सकता है
अमेरिकी रूस प्रतिबंध विधेयक और भारत पर प्रभाव
चर्चा में क्यों?
- अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस के ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाने वाला एक विधेयक पारित किया है।
- इसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को देने का प्रावधान है।
- विधेयक 262–159 मतों से पारित हुआ है और अब राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया है।
विधेयक में क्या प्रावधान हैं?
- रूस के कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों को संभावित रूप से निशाना बनाया जा सकता है, यदि वे निर्धारित अवधि के बाद भी रूस से नई खरीद जारी रखते हैं।
- रूस को प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों पर भी टैरिफ लगाया जा सकता है।
- US Trade Representative हर 180 दिन में संभावित लक्षित देशों की समीक्षा करेगा।
- ऐसे देश जो रूस से अपनी प्राकृतिक गैस का 15% से कम आयात करते हैं और आयात घटाने के कदम उठा रहे हैं, उन्हें छूट मिल सकती है।
- मूल प्रस्ताव में 500% तक टैरिफ का विचार था, लेकिन मौजूदा विधेयक में अधिकतम सीमा 100% है।
- अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हित में प्रतिबंधों से छूट देने का अधिकार भी मिलेगा।
भारत के लिए रूसी तेल का महत्व
- 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद रूस ने अपने कच्चे तेल पर छूट दी, जिससे भारतीय रिफाइनरियों ने खरीद बढ़ाई।
- रूसी कच्चा तेल भारत के प्रमुख आयात स्रोतों में शामिल हो गया और पारंपरिक पश्चिम एशियाई आपूर्तिकर्ताओं की हिस्सेदारी प्रभावित हुई।
- अगस्त 2026 में भारत ने लगभग 20.8 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी कच्चा तेल आयात किया, जो उसके कुल तेल आयात का लगभग 45% था।
- पश्चिम एशिया में आपूर्ति बाधित होने के दौरान रूसी तेल ने भारत के लिए एक वैकल्पिक स्रोत के रूप में भी भूमिका निभाई।
भारत पर संभावित प्रभाव
- ऊर्जा लागत: रूसी तेल की जगह महंगा तेल खरीदने से भारत का आयात बिल और महंगाई बढ़ सकती है।
- रिफाइनरी पर असर: कच्चे तेल की लागत बढ़ने से रिफाइनरियों के लाभ पर दबाव पड़ सकता है।
- भारत-अमेरिका व्यापार: यह मुद्दा दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं को प्रभावित कर सकता है।
- रणनीतिक स्वायत्तता: ऊर्जा खरीद को लेकर बाहरी दबाव भारत की स्वतंत्र विदेश नीति के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।
- वैश्विक तेल बाजार: रूसी तेल की आपूर्ति कम होने से वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता घट सकती है और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
भारत के लिए आगे की राह
- मध्य-पूर्व, अफ्रीका और अमेरिका सहित विभिन्न क्षेत्रों से तेल आयात बढ़ाना।
- Strategic Petroleum Reserves (SPR) का विस्तार और बेहतर प्रबंधन।
- घरेलू रिफाइनिंग क्षमता तथा ऊर्जा दक्षता को मजबूत करना।
- प्रमुख तेल उत्पादक और उपभोक्ता देशों के साथ ऊर्जा सहयोग बढ़ाना।
- अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत जारी रखते हुए ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय आर्थिक हितों की रक्षा करना।
व्यापक ऊर्जा-सुरक्षा संदर्भ
- भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 89% आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों और आपूर्ति में बदलाव का सीधा असर पड़ता है।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल व्यापार का एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है और यहां किसी भी व्यवधान से भारत प्रभावित हो सकता है।
- ऊर्जा परिवर्तन नई निर्भरताएं पैदा हो रही हैं, क्योंकि बैटरी और नवीकरणीय ऊर्जा तकनीकों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की आवश्यकता होती है।
- इसलिए भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा का आधार आयात विविधीकरण, रणनीतिक भंडार, सुरक्षित समुद्री मार्ग और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता में कमी होना चाहिए।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न- प्रस्तावित अमेरिकी रूस प्रतिबंध विधेयक (US Russia Sanctions Bill) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- प्रस्तावित टैरिफ व्यवस्था रूस के कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े आयातकों पर लागू हो सकती है, यदि वे निर्धारित अवधि के बाद भी नई खरीद जारी रखते हैं।
- रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों से बचने में उसकी सहायता करने वाले देश भी प्रस्तावित टैरिफ के दायरे में आ सकते हैं।
- संभावित रूप से लक्षित देशों की समीक्षा अमेरिकी Trade Representative द्वारा प्रत्येक छह महीने में की जाएगी।
- विधेयक रूस से ऊर्जा आयात करने वाले सभी देशों पर अनिवार्य रूप से 100% टैरिफ निर्धारित करता है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 1, 2 और 3
C. केवल 2, 3 और 4
D. 1, 2, 3 और 4
उत्तर: B. केवल 1, 2 और 3
व्याख्या:
- रूस के कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े आयातक निर्धारित अवधि के बाद नई खरीद जारी रखने पर संभावित रूप से लक्षित हो सकते हैं। अतः कथन 1 सही है।
- रूस को प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देश भी टैरिफ के दायरे में आ सकते हैं। अतः कथन 2 सही है।
- संभावित लक्षित देशों की समीक्षा प्रत्येक 180 दिन में की जाएगी। अतः कथन 3 सही है।
- विधेयक प्रत्येक रूसी ऊर्जा आयातक पर अनिवार्य 100% टैरिफ नहीं लगाता। यह अधिकतम 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है और अंतिम निर्णय में राष्ट्रपति को विवेकाधिकार प्राप्त है। अतः कथन 4 गलत है।
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