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21 अक्टूबर 2026
पश्चिमी घाट में सेंटीपीड की तीन नई प्रजातियों की खोज
जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और मालाबार क्रिश्चियन कॉलेज के शोधकर्ताओं ने पश्चिमी घाट में सेंटीपीड की तीन नई प्रजातियों की पहचान की है। यह खोज क्षेत्र की समृद्ध लेकिन अभी भी पूरी तरह ज्ञात न हुई जैव विविधता को दर्शाती है।
पश्चिमी घाट में सेंटीपीड की तीन नई प्रजातियों की खोज
समाचार में क्यों?
- जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के पश्चिमी घाट क्षेत्रीय केंद्र और मालाबार क्रिश्चियन कॉलेज, कोझिकोड के शोधकर्ताओं ने केरल और कर्नाटक के पश्चिमी घाटों में सेंटीपीड की तीन नई प्रजातियों की खोज की है।
- ये तीनों प्रजातियां Rhysida वंश से संबंधित हैं।
- इनके नाम हैं:
- Rhysida quadrispinosa
- Rhysida coorgensis
- Rhysida neyyarensis
- इस खोज के बाद भारत में ज्ञात Rhysida प्रजातियों की संख्या 23 हो गई है।
नई प्रजातियों की पहचान कैसे हुई?
- सेंटीपीड की नई प्रजातियों की पहचान कठिन होती है क्योंकि समान प्रजातियों में बहुत छोटे अंतर हो सकते हैं।
- वैज्ञानिकों ने माइक्रोस्कोप और डिजिटल कैमरों की सहायता से उनके शरीर की बारीक संरचनाओं का अध्ययन किया।
- उन्होंने मुख्य रूप से पैरों के कांटों, शरीर के खंडों, एंटीना, तथा अन्य शारीरिक विशेषताओं का अध्ययन किया।
- जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के National Zoological Collection में सुरक्षित पहले से पहचाने न गए नमूनों की भी जांच की गई।
- इन नमूनों की तुलना वैज्ञानिक रिकॉर्ड और Chilobase 2.0 जैसे वैश्विक डेटाबेस से की गई।
प्रजातियों के नामों का आधार
- Rhysida quadrispinosa का नाम इसके पिछले पैरों पर पाए गए चार विशिष्ट कांटों के आधार पर रखा गया।
- Rhysida coorgensis का नाम कर्नाटक के कूर्ग (कोडागु) क्षेत्र के नाम पर रखा गया, जहां इसका नमूना मिला।
- Rhysida neyyarensis का नाम केरल के नेय्यार वन्यजीव अभयारण्य के नाम पर रखा गया।
प्रमुख पहचान विशेषताएं
- R. quadrispinosa में एंटीना के 18 खंड पाए गए। इसके शरीर के कुछ हिस्सों और पिछले पैरों के कांटों की बनावट भी विशिष्ट है।
- R. coorgensis की पहचान उसकी पीठ पर मौजूद विशेष निशानों और शरीर के पिछले हिस्से के कांटों की संरचना से हुई।
- R. neyyarensis की पहचान पैरों पर मौजूद छोटे कांटों की संख्या और उनकी व्यवस्था से की गई।
खोज का महत्व
- पश्चिमी घाट दुनिया के प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट में शामिल है।
- यहां के घने जंगल और अनुकूल प्राकृतिक परिस्थितियां अनेक जीवों को आवास प्रदान करती हैं।
- पश्चिमी घाट में अभी भी कई जीवों और प्रजातियों का वैज्ञानिक अध्ययन सीमित है।
- सेंटीपीड शिकारी जीव हैं, जो छोटे कीटों और अन्य अकशेरुकी जीवों को खाते हैं।
- इस प्रकार वे खाद्य श्रृंखला और मृदा पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं।
- नई प्रजातियों की पहचान से जैव विविधता, प्रजातियों के विकास, भौगोलिक वितरण और पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर समझने में मदद मिलेगी।
- यह खोज इस बात को भी रेखांकित करती है कि जैव विविधता संरक्षण केवल बड़े या प्रसिद्ध जीवों तक सीमित नहीं होना चाहिए।
पश्चिमी घाट: भौगोलिक स्थिति
- पश्चिमी घाट प्रायद्वीपीय भारत के पश्चिमी भाग में उत्तर-दक्षिण दिशा में फैली पर्वत श्रृंखला है।
- यह मुख्य रूप से छह राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु
- से होकर गुजरती है।
- यह श्रृंखला अरब सागर के समानांतर स्थित है और पश्चिमी तटीय क्षेत्र तथा आंतरिक दक्कन के पठार के बीच संक्रमण क्षेत्र बनाती है।
- लंबाई: लगभग 1,600 किमी।
- यह सामान्यतः पश्चिमी तट से 30–50 किमी अंदर स्थित है।
- पश्चिमी ढाल अधिक खड़ी है, जबकि पूर्वी ढाल धीरे-धीरे दक्कन के पठार से मिलती है।
- पश्चिमी घाट, पूर्वी घाटों की तुलना में सामान्यतः अधिक ऊंचे और निरंतर हैं।
- पालघाट गैप इस पर्वत श्रृंखला में एक प्रमुख प्राकृतिक दर्रा/अंतराल है।
- पश्चिमी घाट प्रायद्वीपीय भारत की कई प्रमुख नदियों के लिए महत्वपूर्ण जल विभाजक का कार्य करते हैं।
- पश्चिमी घाट में सह्याद्रि, नीलगिरि, अनामलाई, कार्डमम, अगस्त्यमलाई और कुद्रेमुख पहाड़ियां शामिल हैं, जबकि अनामुडी (2,695 मीटर) इसकी सबसे ऊंची चोटी है।
जैव विविधता हॉटस्पॉट
- जैव विविधता हॉटस्पॉट ऐसे क्षेत्र हैं जहां स्थानिक प्रजातियों की संख्या बहुत अधिक होती है और प्राकृतिक आवास पर गंभीर खतरा होता है।
- इस अवधारणा को नॉर्मन मायर्स ने 1988 में प्रस्तुत किया था।
- बाद में Conservation International ने इसके विकास और पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- स्रोत में दिए गए मानदंडों के अनुसार किसी क्षेत्र को हॉटस्पॉट बनने के लिए:
- कम से कम 1,500 स्थानिक संवहनी पौधों की प्रजातियां होनी चाहिए।
- मूल प्राकृतिक वनस्पति का कम से कम 70% नष्ट हो चुका होना चाहिए।
- प्रजातियों की समृद्धि और स्थानिकता अधिक होनी चाहिए।
- वनों की कटाई, आवास विनाश, विखंडन, जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और प्रदूषण जैसे खतरे मौजूद होने चाहिए।
- संरक्षण के लिए तत्काल प्रयासों की आवश्यकता होनी चाहिए।
भारत के जैव विविधता हॉटस्पॉट
- भारत दुनिया के 17 मेगाडाइवर्स देशों में शामिल है।
- भारत से संबंधित चार प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं:
- हिमालय
- इंडो-बर्मा
- पश्चिमी घाट–श्रीलंका
- सुंडालैंड
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण
- भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) भारत में प्राणी विविधता के अध्ययन और दस्तावेजीकरण की प्रमुख संस्था है।
- इसकी स्थापना 1 जुलाई 1916 को हुई और इसका मुख्यालय कोलकाता में है।
- इसके प्रमुख कार्य हैं:
- प्राणी विविधता का सर्वेक्षण।
- नई प्रजातियों की पहचान और वर्गीकरण।
- भारत के जीव-जंतुओं का दस्तावेजीकरण।
- जैव विविधता से संबंधित वैज्ञानिक शोध।
- संरक्षण योजनाओं में सहयोग।
- ZSI की नींव 1875 में कलकत्ता के Indian Museum के Zoological Section की स्थापना से जुड़ी है।
- यह National Zoological Collection का महत्वपूर्ण संरक्षक है।
- भारत की विशाल प्राणी विविधता और जैव विविधता हॉटस्पॉट के कारण ZSI की भूमिका महत्वपूर्ण है।
- यह प्रजातियों की पहचान, जैव विविधता का आकलन, संरक्षण और जैव संसाधनों के सतत उपयोग से संबंधित कार्य भी करता है।
ZSI के प्रमुख प्रकाशन
- Fauna of India Series: भारतीय प्राणी समूहों की वर्गीकरण, वितरण और जैविक विशेषताओं की जानकारी।
- Fauna of States and Conservation Areas: राज्यों, राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों और संरक्षण क्षेत्रों की प्राणी विविधता की जानकारी।
- Red Data Book on Indian Animals: संकटग्रस्त और विलुप्ति के खतरे वाली प्रजातियों तथा उनकी संरक्षण स्थिति की जानकारी।
- Animal Discoveries Reports: भारत में खोजी गई नई प्रजातियों और नए प्राणी रिकॉर्ड का विवरण।
- Faunal Survey: A Methodology: प्राणी सर्वेक्षण और जैव विविधता आकलन के लिए वैज्ञानिक पद्धतियां।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. पश्चिमी घाट, जैव विविधता हॉटस्पॉट और भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- पालघाट गैप पश्चिमी घाट की पर्वत श्रृंखला में एक प्रमुख अंतराल है।
- जैव विविधता हॉटस्पॉट की अवधारणा नॉर्मन मायर्स ने 1988 में प्रस्तुत की थी।
- भारत चार जैव विविधता हॉटस्पॉट से संबंधित है- हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट-श्रीलंका और सुंडालैंड।
- भारतीय प्राणी सर्वेक्षण का मुख्यालय मुंबई में है और इसकी स्थापना 1875 में हुई थी।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 1, 2 और 3
C. केवल 2 और 4
D. केवल 1, 3 और 4
सही उत्तर: B. केवल 1, 2 और 3
व्याख्या
- पालघाट गैप पश्चिमी घाट की पर्वत श्रृंखला में एक प्रमुख अंतराल है। अतः कथन 1 सही है।
- जैव विविधता हॉटस्पॉट की अवधारणा नॉर्मन मायर्स ने 1988 में प्रस्तुत की थी और बाद में Conservation International ने इसे आगे विकसित किया। अतः कथन 2 सही है।
- भारत चार जैव विविधता हॉटस्पॉट से संबंधित है- हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट-श्रीलंका और सुंडालैंड। अतः कथन 3 सही है।
- भारतीय प्राणी सर्वेक्षण की स्थापना 1 जुलाई 1916 को हुई थी और इसका मुख्यालय कोलकाता में है। 1875 में Indian Museum के Zoological Section की स्थापना हुई थी। अतः कथन 4 गलत है।