Current Affairs - Daily
30 सितमबर 2026
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सुनीता अग्रवाल को न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल सहित तीन हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए सिफारिश की है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 2026 में दूसरी महिला न्यायाधीश की सिफारिश की
चर्चा में क्यों?
- भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की है।
- 2026 में सुप्रीम कोर्ट में किसी महिला न्यायाधीश के लिए यह दूसरी सिफारिश है।
- मई 2026 में वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना को सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया गया था।
अन्य सिफारिशें
- कॉलेजियम ने तीन हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों की सिफारिश की है:
- न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल — गुजरात हाईकोर्ट
- न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय — दिल्ली हाईकोर्ट
- न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह — तेलंगाना हाईकोर्ट
- सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान में चार रिक्तियां हैं और स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या 38 है, जिसमें CJI भी शामिल हैं।
कॉलेजियम प्रणाली क्या है?
- कॉलेजियम प्रणाली सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण की सिफारिश करने की व्यवस्था है।
- इसका संविधान या किसी विशेष कानून में स्पष्ट उल्लेख नहीं है; यह सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के माध्यम से विकसित हुई।
- सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम: CJI और चार वरिष्ठतम सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश।
- हाईकोर्ट कॉलेजियम: संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठतम न्यायाधीश।
- सरकार सिफारिश पर पुनर्विचार के लिए कह सकती है, लेकिन कॉलेजियम द्वारा सिफारिश दोहराने पर सरकार को उसे स्वीकार करना होता है।
संवैधानिक प्रावधान
- अनुच्छेद 124: राष्ट्रपति द्वारा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति; CJI की नियुक्ति को छोड़कर अन्य नियुक्तियों में CJI से परामर्श।
- अनुच्छेद 217: राष्ट्रपति द्वारा हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति; CJI, राज्यपाल और संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श।
- अनुच्छेद 222: CJI से परामर्श के बाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश को एक हाईकोर्ट से दूसरे हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की शक्ति।
कॉलेजियम प्रणाली का विकास — तीन न्यायाधीश मामले
- प्रथम न्यायाधीश मामला (1981) — S.P. Gupta बनाम भारत संघ: न्यायिक नियुक्तियों में कार्यपालिका की प्रधानता मानी गई और परामर्श को सहमति के समान नहीं माना गया।
- द्वितीय न्यायाधीश मामला (1993) — Supreme Court Advocates-on-Record Association बनाम भारत संघ: न्यायपालिका की प्रधानता स्थापित हुई और वरिष्ठ न्यायाधीशों के साथ सामूहिक रूप से CJI की राय को प्रमुखता मिली।
- तृतीय न्यायाधीश मामला (1998) — In re Special Reference No. 1 of 1998: कॉलेजियम की संरचना को स्पष्ट करते हुए CJI और चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों की व्यवस्था स्थापित की गई।
प्रक्रिया ज्ञापन (MoP - Memorandum of Procedure )
- MoP सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया निर्धारित करता है।
- इसे कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच परामर्श के आधार पर विकसित किया गया और 1999 में औपचारिक रूप दिया गया।
- 2015 में NJAC को निरस्त करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए MoP में संशोधन का निर्देश दिया।
- संशोधित MoP को लेकर सरकार और न्यायपालिका के बीच चर्चा जारी रही है।
NJAC, 2014
- 99वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2014 और NJAC अधिनियम, 2014 ने कॉलेजियम प्रणाली को बदलने का प्रयास किया।
- प्रस्तावित NJAC में शामिल थे:
- CJI
- दो वरिष्ठतम सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश
- केंद्रीय कानून मंत्री
- दो प्रतिष्ठित व्यक्ति
- 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने NJAC व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित कर दिया, क्योंकि इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए खतरा माना गया।
कॉलेजियम प्रणाली की प्रमुख चुनौतियां
- स्पष्ट वैधानिक ढांचे का अभाव।
- निर्णय प्रक्रिया में सीमित पारदर्शिता।
- चयन के स्पष्ट और संहिताबद्ध मानदंडों का अभाव।
- जवाबदेही और प्रतिनिधित्व से संबंधित चिंताएं।
- नियुक्तियों में देरी और न्यायिक रिक्तियां।
- न्यायपालिका में महिलाओं और अन्य वर्गों के पर्याप्त प्रतिनिधित्व की चिंता।
सुधार के संभावित उपाय
- MoP को अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनाया जाए।
- न्यायाधीशों के चयन के लिए वस्तुनिष्ठ और स्पष्ट मानदंड विकसित किए जाएं।
- कॉलेजियम की चर्चाओं और निर्णयों का उचित लिखित रिकॉर्ड रखा जाए।
- न्यायिक नियुक्तियों में विविधता और प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाए।
- अनुच्छेद 124(3) में उल्लिखित बार और प्रतिष्ठित विधिवेत्ताओं से योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति को प्रोत्साहित किया जाए।
- न्यायिक स्वतंत्रता और संस्थागत जवाबदेही के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जाए।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. भारत में न्यायिक नियुक्तियों की कॉलेजियम प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- कॉलेजियम प्रणाली संविधान द्वारा स्पष्ट रूप से स्थापित की गई है और इसे सीधे अनुच्छेद 124 से शक्ति प्राप्त होती है।
- द्वितीय न्यायाधीश मामले ने न्यायिक नियुक्तियों में न्यायपालिका की प्रधानता स्थापित की, जबकि तृतीय न्यायाधीश मामले ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की संरचना को स्पष्ट किया।
- मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (MoP) एक संवैधानिक प्रावधान है, जो स्वतंत्र रूप से कॉलेजियम प्रणाली का निर्माण करता है।
- 99वें संविधान संशोधन और राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम, 2014 का उद्देश्य कॉलेजियम प्रणाली को बदलना था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में NJAC व्यवस्था को निरस्त कर दिया।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 2 और 4
(c) केवल 1, 2 और 4
(d) केवल 2, 3 और 4
उत्तर: (b) केवल 2 और 4
व्याख्या:
- कॉलेजियम प्रणाली का संविधान या किसी कानून में स्पष्ट प्रावधान नहीं है; यह सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों, जिन्हें तीन न्यायाधीश मामलों के रूप में जाना जाता है, के माध्यम से विकसित हुई। अतः कथन 1 गलत है।
- द्वितीय न्यायाधीश मामला (1993) ने न्यायिक नियुक्तियों में न्यायपालिका की प्रधानता स्थापित की, जबकि तृतीय न्यायाधीश मामला (1998) ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की संरचना को CJI और चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों के रूप में स्पष्ट किया। अतः कथन 2 सही है।
- मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (MoP) न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया निर्धारित करता है, लेकिन यह स्वयं कॉलेजियम प्रणाली का संवैधानिक स्रोत नहीं है। कॉलेजियम प्रणाली न्यायिक निर्णयों के माध्यम से विकसित हुई। अतः कथन 3 गलत है।
- 99वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2014 और NJAC अधिनियम, 2014 का उद्देश्य कॉलेजियम प्रणाली को बदलना था। सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में NJAC व्यवस्था को निरस्त कर दिया, जिसके बाद कॉलेजियम प्रणाली जारी रही। अतः कथन 4 सही है।
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