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Current Affairs - Daily 14 अक्टूबर 2026

विश्व के वनों की स्थिति रिपोर्ट 2026: वन एवं भूमि पुनर्बहाली पर जोर

FAO की विश्व के वनों की स्थिति रिपोर्ट 2026 में वन एवं भूमि पुनर्बहाली, वैश्विक भूमि क्षरण, भारत की भूमिका और सतत विकास के लिए आवश्यक उपायों का विश्लेषण किया गया है।

विश्व के वनों की स्थिति रिपोर्ट 2026

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने ‘विश्व के वनों की स्थिति रिपोर्ट 2026’ (State of the World’s Forests 2026) जारी की है। इसका विषय ‘वनों और भूदृश्यों की पुनर्बहाली: सतत भविष्य की दिशा’ है। यह द्विवार्षिक रिपोर्ट वन एवं भूमि क्षरण की समस्या और पुनर्बहाली के माध्यम से पर्यावरणीय तथा सामाजिक-आर्थिक लाभ प्राप्त करने के उपायों पर केंद्रित है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

  • वैश्विक क्षरण: विश्व में 46 करोड़ हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र और लगभग 1.56 अरब हेक्टेयर भूमि क्षरित है। जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण, बुनियादी ढाँचे का विस्तार और भूमि उपयोग में बदलाव इसके प्रमुख कारण हैं।

  • क्षेत्रीय स्थिति: वर्ष 2019 के आँकड़ों के अनुसार, एशिया में लगभग 58.3 करोड़ हेक्टेयर, अफ्रीका में 33.4 करोड़ हेक्टेयर और दक्षिण अमेरिका में 24.5 करोड़ हेक्टेयर क्षरित भूमि थी।

  • वैश्विक लक्ष्य: कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा के लक्ष्य 2 के अंतर्गत 2030 तक क्षरित स्थलीय, अंतर्देशीय जल, तटीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों के कम-से-कम 30% हिस्से को प्रभावी पुनर्बहाली के दायरे में लाने का लक्ष्य है।

  • भारत की स्थिति: रिपोर्ट में शामिल देशों के बीच पुनर्बहाली क्षेत्र के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है। भारत में 1.89 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र पुनर्बहाली के अंतर्गत बताया गया है, जबकि चीन 12.74 करोड़ हेक्टेयर के साथ पहले स्थान पर है।

  • आर्थिक लाभ: अनुकूल परिस्थितियों में पुनर्बहाली पर निवेश किए गए प्रत्येक 1 अमेरिकी डॉलर से 30 अमेरिकी डॉलर तक का लाभ प्राप्त हो सकता है। वास्तविक लाभ स्थान, अपनाए गए उपायों और समयावधि पर निर्भर करता है। <Cite refs={["turn981438view0","turn981438search4"]}/>

रिपोर्ट में पुनर्बहाली को गति देने के लिए चार प्रमुख उपाय बताए गए हैं—स्थानीय लोगों को सशक्त बनाना और उनके अधिकारों को मजबूत करना; पूरे भूदृश्य के स्तर पर योजना बनाना; वित्त और उपयुक्त व्यावसायिक मॉडलों को बढ़ावा देना; तथा नीतियों, संस्थाओं और कानूनी ढाँचे में समन्वय स्थापित करना।

वैश्विक वन संसाधन आकलन 2025

  • FAO के वैश्विक वन संसाधन आकलन 2025 के अनुसार, विश्व में लगभग 4.14 अरब हेक्टेयर वन हैं, जो पृथ्वी के कुल स्थलीय क्षेत्र के लगभग 32% हिस्से में फैले हैं। 

  • वर्ष 2015–2025 के दौरान वैश्विक वनों की कटाई की वार्षिक दर लगभग 1.09 करोड़ हेक्टेयर आँकी गई, जो घटने के बावजूद चिंताजनक है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कुल वन क्षेत्र में भारत विश्व में नौवें स्थान पर है। भारत का वन क्षेत्र लगभग 7.274 करोड़ हेक्टेयर है और वार्षिक वन क्षेत्र वृद्धि में यह तीसरे स्थान पर है।

  • रिपोर्ट का प्रमुख संदेश है कि पुनर्बहाली केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसके अंतर्गत पारिस्थितिकी तंत्र के कार्यों को बहाल करना, जैव विविधता का संरक्षण, मिट्टी और जल संसाधनों की सुरक्षा, स्थानीय आजीविका को मजबूत करना तथा आदिवासी समुदायों और स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है। पुनर्बहाली की सफलता का आकलन केवल बहाल किए गए क्षेत्रफल से नहीं, बल्कि वास्तविक पारिस्थितिक परिणामों से किया जाना चाहिए।

 MCQ Hindi

प्रश्न. विश्व के वनों की स्थिति रिपोर्ट 2026 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. यह संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा जारी की जाती है।

  2. पुनर्बहाली क्षेत्र के मामले में भारत रिपोर्ट में शामिल देशों में दूसरे स्थान पर है।

  3. कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा में 2030 तक क्षरित पारिस्थितिकी तंत्रों के कम-से-कम 30% हिस्से की प्रभावी पुनर्बहाली का लक्ष्य शामिल है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 1 और 3
(C) केवल 2 और 3
(D) 1, 2 और 3

उत्तर: (D) 

व्याख्या: FAO यह रिपोर्ट जारी करता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत 1.89 करोड़ हेक्टेयर पुनर्बहाली क्षेत्र के साथ चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा के लक्ष्य 2 में वर्ष 2030 तक क्षरित पारिस्थितिकी तंत्रों के कम-से-कम 30% हिस्से को प्रभावी पुनर्बहाली के दायरे में लाने का लक्ष्य निर्धारित है।