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Current Affairs - Daily 10 अक्टूबर 2026

BNSS की धारा 163 क्या है? इसकी शक्तियां, प्रतिबंध और विरोध-प्रदर्शनों पर प्रभाव

BNSS की धारा 163 कार्यपालिका मजिस्ट्रेट को सार्वजनिक शांति, सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए तत्काल निवारक आदेश जारी करने की शक्ति देती है। यह CrPC की धारा 144 का स्थान लेती है।

खबरों में क्यों?

  • दिल्ली पुलिस ने 10 और 11 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में Cockroach Janta Party (CJP) द्वारा प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शनों को अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इन प्रदर्शनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जानी थी।

  • अधिकारियों ने नई दिल्ली जिले के कुछ हिस्सों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 भी लागू की है। 

  • BNSS के 2024 में लागू होने के बाद इस प्रावधान ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 का स्थान लिया। 

BNSS की धारा 163 क्या है?

  • धारा 163 एक निवारक प्रावधान है, जो कार्यपालिका मजिस्ट्रेट को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरे को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई आवश्यक होने पर लिखित आदेश जारी करने की अनुमति देता है। 

  • इसका उपयोग निम्नलिखित स्थितियों को रोकने के लिए किया जा सकता है: 

    • दंगा और गैर-कानूनी जमावड़ा। 

    • सार्वजनिक शांति में बाधा। 

    • मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरा। 

    • अवरोध या गंभीर सार्वजनिक उपद्रव। 

  • आदेश के माध्यम से व्यक्तियों या समूहों के आचरण अथवा कुछ संपत्तियों के उपयोग को नियंत्रित किया जा सकता है। 

  • आपात स्थिति में प्रभावित व्यक्तियों को पूर्व सूचना दिए बिना भी आदेश जारी किया जा सकता है। 

आदेश की अवधि

  • धारा 163 के तहत जारी आदेश सामान्यतः अधिकतम दो महीने तक प्रभावी रहता है। 

  • राज्य सरकार कानून में निर्धारित सीमाओं के अधीन इसकी अवधि को आगे बढ़ा सकती है। 

निवासियों पर प्रभाव

  • प्रभावित क्षेत्र के निवासियों को निम्नलिखित पर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है: 

    • सार्वजनिक सभा और विरोध-प्रदर्शन। 

    • आदेश के अनुसार आवाजाही या कुछ विशेष गतिविधियां। 

    • कुछ सार्वजनिक स्थानों या संपत्तियों का उपयोग। 

  • धारा 163 लागू होने का स्वतः यह अर्थ नहीं है कि सभी प्रकार की आवाजाही या सभाओं पर प्रतिबंध लग जाता है। प्रतिबंध सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए विशेष आदेश पर निर्भर करते हैं। 

यह विवादास्पद क्यों है?

  • धारा 163 का उद्देश्य आपात स्थितियों से निपटना है, लेकिन इसके पूर्ववर्ती प्रावधान CrPC की धारा 144 का कभी-कभी नियमित प्रशासनिक कार्यों के लिए भी इस्तेमाल किया गया।

  • दिल्ली में धारा 144 के आदेशों पर 2023 में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि बहुत कम संख्या में आदेश सीधे गैर-कानूनी जमावड़े पर प्रतिबंध से संबंधित थे, जबकि कई आदेश CCTV लगाने, रिकॉर्ड रखने और किरायेदारों के सत्यापन जैसे मामलों से जुड़े थे। 

  • ऐसे आदेशों को बार-बार दोहराए जाने से यह चिंता उत्पन्न हुई है कि कहीं आपातकालीन शक्ति एक नियमित प्रशासनिक व्यवस्था में न बदल जाए। 

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है?

  • Babulal Parate v. State of Maharashtra (1961): सुप्रीम कोर्ट ने धारा 144 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, लेकिन कहा कि इसकी शक्ति असीमित नहीं है और इसका इस्तेमाल कानून में निर्धारित परिस्थितियों से जुड़ा होना चाहिए। 

  • In Re: Ramlila Maidan Incident (2012): कोर्ट ने कहा कि धारा 144 का इस्तेमाल गंभीर और तत्काल परिस्थितियों में किया जाना चाहिए, न कि सामान्य प्रशासनिक उपाय के रूप में। 

  • Mazdoor Kisan Shakti Sangathan v. Union of India (2018): कोर्ट ने जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध को स्वीकार नहीं किया और सार्वजनिक व्यवस्था तथा शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। 

संवैधानिक महत्व

  • धारा 163 के तहत लगाए गए प्रतिबंध मौलिक अधिकारों के अनुरूप होने चाहिए, विशेष रूप से: 

    • अनुच्छेद 19(1)(a): अभिव्यक्ति और वाक् की स्वतंत्रता। 

    • अनुच्छेद 19(1)(b): शांतिपूर्वक और बिना हथियार के एकत्र होने का अधिकार। 

  • ऐसे प्रतिबंधों को आवश्यकता, तर्कसंगतता और आनुपातिकता के सिद्धांतों पर खरा उतरना चाहिए।

 

अभ्यास प्रश्न 

प्र. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. BNSS के लागू होने के बाद इसने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 का स्थान लिया। 

  2. धारा 163 के तहत जारी आदेश प्रभावित क्षेत्र में सभी सार्वजनिक सभाओं और आवाजाही पर स्वतः प्रतिबंध लगा देता है। 

  3. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धारा 144 से संबंधित निवारक शक्ति का प्रयोग गंभीर और तत्काल परिस्थितियों में किया जाना चाहिए, न कि नियमित प्रशासनिक उपाय के रूप में। 

  4. धारा 163 के तहत लगाए गए प्रतिबंध अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं।  

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

(a) केवल 1 और 2
(b) 1, 2 और 4
(c) केवल 2 और 4
(d) केवल 1, 3 और 4

उत्तर: (d) 

व्याख्या

  • कथन 1 सही है। BNSS के लागू होने के बाद धारा 163 ने CrPC की धारा 144 का स्थान लिया। अतः कथन 1 सही है। 

  • कथन 2 गलत है। धारा 163 प्रभावित क्षेत्र में सभी सार्वजनिक सभाओं या आवाजाही पर स्वतः प्रतिबंध नहीं लगाती। प्रतिबंध सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए विशेष आदेश पर निर्भर करते हैं। अतः कथन 2 गलत है। 

  • कथन 3 सही है। In Re: Ramlila Maidan Incident (2012) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 144 का प्रयोग गंभीर और तत्काल परिस्थितियों में किया जाना चाहिए, न कि सामान्य प्रशासनिक उपाय के रूप में। अतः कथन 3 सही है। 

  • कथन 4 सही है। धारा 163 के तहत लगाए गए प्रतिबंध अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा अनुच्छेद 19(1)(b) के तहत शांतिपूर्वक सभा करने के अधिकार को प्रभावित कर सकते हैं। अतः कथन 4 सही है।