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Current Affairs - Daily 3 अक्टूबर 2026

RoDTEP योजना 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाई गई

RoDTEP योजना के तहत निर्यातित वस्तुओं में शामिल ऐसे करों, शुल्कों और उपकरों की भरपाई की जाती है, जिनकी वापसी अन्य माध्यमों से नहीं हो पाती।

चर्चा में क्यों?

  • वाणिज्य विभाग ने निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट (RoDTEP) योजना को 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दिया है। 
  • इस अवधि में RoDTEP की मौजूदा दरें और मूल्य सीमा अपरिवर्तित रहेंगी। 

RoDTEP योजना के बारे में

  • RoDTEP को विदेश व्यापार नीति 2015-20 में संशोधन के माध्यम से शुरू किया गया और यह 1 जनवरी 2021 से प्रभावी हुई। 
  • इसका उद्देश्य निर्यातित वस्तुओं में शामिल केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर के ऐसे करों, शुल्कों और उपकरों की भरपाई करना है, जिनकी वापसी किसी अन्य माध्यम से नहीं होती। 
  • इस योजना ने Merchandise Exports from India Scheme (MEIS) का स्थान लिया। 
  • यह योजना विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के अनुरूप है और डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से लागू की जाती है। 

पात्रता: इस योजना के अंतर्गत शामिल हैं:

  • घरेलू टैरिफ क्षेत्र (DTA) की इकाइयाँ 
  • Advance Authorisation (AA) धारक 
  • विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) की इकाइयाँ 
  • Export Oriented Units (EOUs) 
  • निर्माता और व्यापारी—दोनों प्रकार के निर्यातक पात्र हैं। 
  • कूरियर और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से निर्यात की गई वस्तुएँ भी इसके दायरे में आती हैं
  • वस्तु का मूल देश भारत होना चाहिए। 
  • पुनः निर्यात की गई वस्तुएँ पात्र नहीं हैं। 

योजना कैसे काम करती है?

  • अलग-अलग क्षेत्रों के लिए छूट की दर अलग होती है और सामान्यतः इसे निर्यात के Free on Board (FOB) मूल्य के प्रतिशत के रूप में तय किया जाता है। 
  • लाभ हस्तांतरणीय शुल्क क्रेडिट या इलेक्ट्रॉनिक स्क्रिप (ई-स्क्रिप) के रूप में दिया जाता है। 
  • इन क्रेडिट का रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक रूप से रखा जाता है। 
  • जिन करों या शुल्कों की पहले ही छूट, वापसी या किसी अन्य माध्यम से भरपाई हो चुकी है, उन्हें RoDTEP के तहत दोबारा लाभ नहीं दिया जाता। 

महत्त्व

  • यह निर्यातित वस्तुओं में शामिल ऐसे करों की भरपाई करता है, जिनकी अन्य माध्यमों से वापसी नहीं होती, जिससे भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है।
  • श्रम-प्रधान क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। 
  • इससे निर्यातकों की कार्यशील पूंजी और नकदी प्रवाह को सहायता मिल सकती है। 
  • योजना का विस्तार निर्यातकों को अधिक निश्चितता प्रदान करता है और वैश्विक बाजार में समान अवसर उपलब्ध कराने में मदद करता है।

विश्व व्यापार संगठन (WTO) के बारे में:

  • विश्व व्यापार संगठन (WTO) एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो वैश्विक व्यापार के नियमों को निर्धारित और संचालित करता है। 
    • इसकी स्थापना 15 अप्रैल 1994 को 123 देशों द्वारा हस्ताक्षरित माराकेश समझौते के तहत हुई। 
    • यह समझौता GATT की उरुग्वे दौर की वार्ताओं (1986–1994) के बाद हुआ और 1995 में WTO अस्तित्व में आया। 
    • WTO ने General Agreement on Tariffs and Trade (GATT) का स्थान लिया। 
    • GATT मुख्य रूप से वस्तुओं के व्यापार पर केंद्रित था, जबकि WTO में वस्तुओं, सेवाओं और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित व्यापार शामिल है। 
  • मुख्यालय: जिनेवा, स्विट्जरलैंड 
  • सदस्य: 166 सदस्य, जो वैश्विक व्यापार के लगभग 98% का प्रतिनिधित्व करते हैं। 

प्रमुख निकाय

  • मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (Ministerial Conference): WTO का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है और इसकी बैठक कम-से-कम हर दो वर्ष में होती है। 
  • महासभा/सामान्य परिषद (General Council): WTO के दैनिक कार्यों की देखरेख करती है तथा विवाद निपटान निकाय (DSB) और व्यापार नीति समीक्षा निकाय (TPRB) के रूप में भी कार्य करती है। 
  • क्षेत्रीय परिषदें: इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं: 
    • वस्तुओं के व्यापार की परिषद 
    • सेवाओं के व्यापार की परिषद 
    • TRIPS यानी बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित परिषद 
  • सचिवालय: जिनेवा में स्थित है और संगठन को प्रशासनिक, तकनीकी तथा शोध संबंधी सहायता प्रदान करता है। 
  • निर्णय प्रक्रिया: WTO में निर्णय सामान्यतः सर्वसम्मति (Consensus) से लिए जाते हैं। इससे सभी सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित होती है, लेकिन सुधारों और वार्ताओं की प्रक्रिया धीमी हो सकती है। 

प्रमुख WTO समझौते

  • कृषि समझौता (AoA): कृषि सब्सिडी और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों को नियंत्रित करता है। 
  • व्यापार सुविधा समझौता (TFA): सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार को आसान और तेज बनाने का प्रयास करता है। 
  • सब्सिडी एवं प्रतिकारी उपाय समझौता (SCM): सरकारी सब्सिडी तथा उनके व्यापार पर पड़ने वाले प्रभावों से संबंधित नियम निर्धारित करता है।

अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न. RoDTEP योजना और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. RoDTEP का लाभ निर्माता निर्यातकों और व्यापारी निर्यातकों दोनों को मिलता है, और पुनः निर्यात की गई वस्तुएँ भी इसके दायरे मे आती हैं। 
  2. RoDTEP के तहत छूट की दर सामान्यतः निर्यात के FOB मूल्य के प्रतिशत के रूप में निर्धारित की जाती है और लाभ हस्तांतरणीय शुल्क क्रेडिट या ई-स्क्रिप के माध्यम से दिया जाता है।  
  3. WTO ने 1995 में GATT का स्थान लिया, लेकिन GATT के विपरीत WTO केवल वस्तुओं के व्यापार से संबंधित है तथा सेवाओं और बौद्धिक संपदा अधिकारों को इसके दायरे में शामिल नहीं करता।  
  4. WTO की सामान्य परिषद (General Council), विवाद निपटान निकाय और व्यापार नीति समीक्षा निकाय के रूप में भी कार्य करती है। 

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

(a) केवल 2 और 4
(b) केवल 1 और 3
(c) केवल 2, 3 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4

उत्तर: (a) केवल 2 और 4

व्याख्या

  • RoDTEP के अंतर्गत निर्माता और व्यापारी दोनों प्रकार के निर्यातक पात्र हैं, जबकि पुनः निर्यात की गई वस्तुएँ पात्र नहीं हैं। अतः कथन 1 सही है। 
  • RoDTEP की छूट दर सामान्यतः निर्यात के FOB मूल्य के प्रतिशत के आधार पर तय की जाती है तथा लाभ हस्तांतरणीय शुल्क क्रेडिट या ई-स्क्रिप के रूप में दिया जाता है। अतः कथन 2 सही है। 
  • WTO ने 1995 में GATT का स्थान लिया, लेकिन इसका दायरा केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है। इसमें सेवाओं और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित व्यापार भी शामिल है। अतः कथन 3 गलत है। 
  • WTO की सामान्य परिषद नियमित कार्यों की देखरेख करने के साथ-साथ विवाद निपटान निकाय (DSB) और व्यापार नीति समीक्षा निकाय (TPRB) के रूप में भी कार्य करती है। अतः कथन 4 सही है।