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Current Affairs - Daily 22 अक्टूबर 2026

धर्म परिवर्तन और आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट के फैसले को समझें

तमिलनाडु में हिंदू BC, MBC, DNC और SC पृष्ठभूमि से इस्लाम अपनाने वाले लोगों को BC मुस्लिम प्रमाणपत्र देने से जुड़े सरकारी आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक आधार पर बरकरार नहीं रखा। फैसला SC और पिछड़े वर्गों की संवैधानिक व्यवस्था के बीच अंतर को स्पष्ट करता है।

धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण

 

खबरों में क्यों?

  • 15 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें 9 मार्च 2024 के तमिलनाडु सरकार के आदेश को रद्द किया गया था। 
  • इस आदेश में BC, MBC, विमुक्त समुदाय (DNC) और अनुसूचित जाति (SC) से इस्लाम अपनाने वाले लोगों को BC मुस्लिम प्रमाणपत्र देने और राज्य में BC मुस्लिमों के लिए निर्धारित 3.5% आरक्षण का लाभ देने का प्रावधान किया गया था। 

मामला क्या था?

  • मामले में एक ऐसे व्यक्ति ने आवेदन किया था, जिसका जन्म हिंदू परिवार में हुआ था और जिसने बाद में इस्लाम अपनाया तथा मुस्लिम लेब्बई के रूप में प्रमाणपत्र मांगा।
  • अदालतों ने कहा कि इस्लाम अपनाने मात्र से व्यक्ति किसी विशेष अधिसूचित मुस्लिम समुदाय का सदस्य नहीं बन जाता।
  • तमिलनाडु में सात अधिसूचित पिछड़े मुस्लिम समुदाय हैं, जिनमें अंसार, डेक्कनी मुस्लिम, दुबेकुला, लब्बई, मापिला, शेख और सैयद शामिल हैं।
  • कोई जमात व्यक्ति के धर्म परिवर्तन की पुष्टि कर सकती है, लेकिन वह स्वयं किसी व्यक्ति को कानूनी रूप से आरक्षण श्रेणी में शामिल नहीं कर सकती।
  • सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं कहा कि मुसलमान कभी पिछड़ा वर्ग नहीं हो सकते। किसी मुस्लिम समुदाय को पिछड़ा वर्ग घोषित करने के लिए कानूनी आधार और पर्याप्त प्रमाण आवश्यक होंगे। 

SC और पिछड़े वर्ग की स्थिति में अंतर

संविधान अनुसूचित जाति और सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं अपनाता है।

  • अनुच्छेद 341 अनुसूचित जातियों की पहचान से संबंधित है। वर्तमान संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के अनुसार SC का दर्जा हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म मानने वाले लोगों तक सीमित है।
  • इसलिए मौजूदा व्यवस्था के तहत इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाने पर SC दर्जा समाप्त हो जाता है।
  • पिछड़े वर्गों की पहचान के लिए अलग संवैधानिक आधार अनुच्छेद 15(4) और 16(4) में दिया गया है।
  • अनुच्छेद 342A, जिसे 105वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित किया गया, राज्यों को राज्य स्तर के लिए सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की अपनी सूची बनाए रखने की शक्ति देता है। 

प्रमाण-आधारित पहचान क्यों जरूरी है?

  • किसी व्यक्ति की पूर्व जातिगत पहचान अपने आप किसी अन्य मुस्लिम समुदाय की सदस्यता साबित नहीं करती।
  • दूसरी ओर, धर्म परिवर्तन से सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन अपने आप समाप्त नहीं हो जाता।
  • राज्य यह जांच कर सकता है कि धर्म परिवर्तन के बाद भी व्यक्ति सामाजिक बहिष्कार, शैक्षणिक पिछड़ेपन या अन्य प्रकार की वंचना का सामना कर रहा है या नहीं।
  • किसी नए पिछड़े वर्ग की पहचान स्पष्ट परिभाषा और प्रमाणित सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ेपन पर आधारित होनी चाहिए। 

संबंधित आयोग

  • मंडल आयोग ने पिछड़े वर्गों की पहचान के लिए सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक संकेतकों का उपयोग किया।
  • सच्चर समिति (2005) ने मुसलमानों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का अध्ययन किया।
  • रंगनाथ मिश्रा आयोग (2007) ने SC दर्जे को धर्म से अलग करने की सिफारिश की।
  • के. जी. बालकृष्णन आयोग, जिसका गठन 2022 में हुआ, यह जांच कर रहा है कि ऐतिहासिक रूप से SC पृष्ठभूमि वाले लेकिन वर्तमान में मान्य धर्मों के अलावा अन्य धर्म अपनाने वाले लोगों को SC दर्जा दिया जा सकता है या नहीं। 

आगे का रास्ता

  • तमिलनाडु BC, MBC और विमुक्त समुदायों से इस्लाम अपनाने वाले लोगों की स्थिति पर स्वतंत्र और प्रमाण-आधारित अध्ययन करा सकता है। 
  • इसमें शिक्षा, सरकारी रोजगार में प्रतिनिधित्व, सामाजिक स्वीकार्यता और निरंतर वंचना जैसे पहलुओं का अध्ययन किया जा सकता है। किसी भी नई श्रेणी को संवैधानिक मानकों के अनुरूप होना चाहिए और सभी धर्मांतरित लोगों को एक समान समूह नहीं माना जाना चाहिए।

भारत में आरक्षण के प्रकार

  • ऊर्ध्वाधर आरक्षण (Vertical Reservation): SC, ST और OBC जैसी सामाजिक श्रेणियों के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण प्रदान करता है।
  • क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation): ऊर्ध्वाधर आरक्षण की विभिन्न श्रेणियों के अंदर महिलाओं, दिव्यांगजनों आदि के लिए आरक्षण का प्रावधान करता है।
  • जाति आधारित आरक्षण: ऐतिहासिक रूप से वंचित और सामाजिक रूप से पिछड़े समुदायों को शिक्षा और रोजगार में अवसर उपलब्ध कराने का उद्देश्य रखता है।
  • लिंग आधारित आरक्षण: महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर केंद्रित है। अनुच्छेद 243D और 243T के तहत पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण है।
  • आय आधारित आरक्षण: आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को अवसर उपलब्ध कराने पर आधारित है। EWS आरक्षण इसका प्रमुख उदाहरण है।
  • दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण: दिव्यांग व्यक्तियों की समान भागीदारी और अवसर सुनिश्चित करने के लिए सरकारी सेवाओं में आरक्षण प्रदान करता है।

आरक्षण से संबंधित संवैधानिक प्रावधान

  • अनुच्छेद 15(4): सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों तथा SC और ST के विकास के लिए विशेष प्रावधान की अनुमति देता है।
  • अनुच्छेद 16(4): राज्य सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व न रखने वाले पिछड़े वर्गों के लिए सरकारी नियुक्तियों में आरक्षण का प्रावधान करता है।
  • अनुच्छेद 16(4A): राज्य सेवाओं में SC और ST के लिए पदोन्नति में आरक्षण का प्रावधान करता है।
  • अनुच्छेद 16(4B): खाली रह गई कुछ आरक्षित सीटों/पदों को अगले वर्षों में भरने की अनुमति देता है।
  • अनुच्छेद 39A: कमजोर वर्गों के लिए समान न्याय और निःशुल्क कानूनी सहायता सुनिश्चित करने का निर्देश देता है।
  • अनुच्छेद 243D और 243T: पंचायतों और नगर निकायों में SC, ST और महिलाओं के लिए आरक्षण से संबंधित हैं।
  • अनुच्छेद 330 और 332: क्रमशः लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में SC और ST के लिए सीटों के आरक्षण से संबंधित हैं।

आरक्षण की आवश्यकता

  • सामाजिक न्याय: ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों को प्रतिनिधित्व और अवसर प्रदान करता है।
  • अवसर की समानता: पिछड़े समुदायों को शिक्षा और सरकारी रोजगार में प्रतिस्पर्धा के लिए बेहतर अवसर देकर वास्तविक समानता को बढ़ावा देता है।
  • सुधारात्मक उपाय: जातिगत भेदभाव, सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक पिछड़ेपन के लंबे समय से चले आ रहे प्रभावों को कम करने का प्रयास करता है।
  • संवैधानिक उद्देश्य: अनुच्छेद 38 और 46 में कमजोर वर्गों के कल्याण की संवैधानिक भावना को आगे बढ़ाता है।

आरक्षण से जुड़ी प्रमुख समस्याएं

  • औपचारिक बनाम वास्तविक समानता: बहस इस बात पर है कि समानता का अर्थ सभी के साथ समान व्यवहार है या पिछड़े वर्गों को अतिरिक्त सहायता देना भी समानता का हिस्सा है।
  • आरक्षित पदों का खाली रहना: सरकारी सेवाओं में बड़ी संख्या में आरक्षित पदों के खाली रहने की समस्या सामने आती है।
  • लाभ का असमान वितरण: रोहिणी आयोग ने OBC आरक्षण के लाभों के कुछ ही समुदायों में अधिक केंद्रित होने की ओर ध्यान दिलाया।
  • क्रीमी लेयर: आरक्षित समुदायों के अपेक्षाकृत संपन्न और आगे बढ़ चुके वर्गों को आरक्षण के कुछ लाभों से बाहर रखने को लेकर बहस जारी है।
  • राजनीतिक ध्रुवीकरण: आरक्षण कई बार राजनीतिक विवाद का विषय बन जाता है, जिससे सामाजिक एकता और बंधुता के संवैधानिक उद्देश्य से जुड़ी चुनौतियां उत्पन्न होती हैं।

 

अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न. भारत में आरक्षण और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों की संवैधानिक स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. अनुच्छेद 341 और अनुच्छेद 342A अनुसूचित जातियों तथा सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान के लिए समान संवैधानिक व्यवस्था प्रदान करते हैं। 
  2. किसी व्यक्ति द्वारा इस्लाम धर्म अपनाना अपने आप में उसे किसी विशेष अधिसूचित मुस्लिम पिछड़े वर्ग का सदस्य सिद्ध नहीं करता। 
  3. क्षैतिज आरक्षण, ऊर्ध्वाधर आरक्षण की श्रेणियों के भीतर लागू होता है और इसमें महिलाओं या दिव्यांगजनों जैसे वर्गों को लाभ मिल सकता है। 
  4. अनुच्छेद 16(4B) कुछ रिक्त आरक्षित पदों को बाद के वर्षों में भरने के लिए आगे ले जाने की अनुमति देता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 4
(d) केवल 3 और 4

सही उत्तर: (b) केवल 2 और 3

व्याख्या

  • अनुच्छेद 341 और अनुच्छेद 342A अलग-अलग वर्गों से संबंधित हैं और इनके लिए अलग संवैधानिक व्यवस्थाएं हैं। अनुच्छेद 341 अनुसूचित जातियों से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 342A सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों से संबंधित है। अतः कथन 1 गलत है।
  • इस्लाम धर्म अपनाने मात्र से व्यक्ति किसी विशेष अधिसूचित मुस्लिम पिछड़े वर्ग का सदस्य नहीं बन जाता। ऐसी मान्यता के लिए संबंधित कानूनी आधार और आवश्यक प्रमाण होना चाहिए। अतः कथन 2 सही है।
  • क्षैतिज आरक्षण, ऊर्ध्वाधर आरक्षण की श्रेणियों के भीतर लागू होता है। उदाहरण के लिए, SC, ST या OBC श्रेणियों के भीतर महिलाओं या दिव्यांगजनों को क्षैतिज आरक्षण का लाभ मिल सकता है। अतः कथन 3 सही है।
  • अनुच्छेद 16(4B) कुछ रिक्त आरक्षित पदों को बाद के वर्षों में भरने के लिए आगे ले जाने से संबंधित है। अतः कथन 4 गलत है।

 

लेसोथो के प्रधानमंत्री सैमुअल माटेकाने बने साडक सुरक्षा सहयोग अंग के आगामी अध्यक्ष

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

रीएनर्जी डायनेमिक्स को भारत हरित ऊर्जा पुरस्कार 2026 में सम्मान

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

आंद्रेज पोचोबुत को पोलैंड में ‘वर्ष का व्यक्तित्व’ सम्मान

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

  • 21 अक्टूबर 2026 को दक्षिणी अफ्रीकी विकास समुदाय—साडक के विशेष आभासी शिखर सम्मेलन में लेसोथो के प्रधानमंत्री न्त्सोकोआने सैमुअल माटेकाने को राजनीति, रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग अंग का आगामी अध्यक्ष चुना गया। सम्मेलन की अध्यक्षता दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने की।

 

मुख्य बिंदु

 

  • माटेकाने का चयन साडक के राजनीति, रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग अंग के नेतृत्व के लिए हुआ है।
  •  
  • यह अंग सदस्य देशों के बीच राजनीतिक संवाद, क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और रक्षा सहयोग के लिए संस्थागत व्यवस्था प्रदान करता है।
  •  
  •  इसकी स्थापना 28 जून 1996 को बोत्सवाना की राजधानी गाबोरोन में हुई थी।
  •  
  • 14 अगस्त 2001 को राजनीति, रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए गए। इससे संबंधित नीतियों और गतिविधियों के समन्वय को स्पष्ट कानूनी आधार मिला।

 

महत्वपूर्ण तथ्य

 

  • साडक का पूरा नाम: दक्षिणी अफ्रीकी विकास समुदाय।
  •  
  • वर्तमान स्वरूप की स्थापना: 17 अगस्त 1992, विंडहोक, नामीबिया।
  •  
  • मुख्यालय: गाबोरोन, बोत्सवाना।
  •  
  • सदस्य देश: 16।

 

 

 

 

  • हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, रीएनर्जी डायनेमिक्स को छठे भारत हरित ऊर्जा पुरस्कार समारोह में संपीड़ित बायोगैस क्षेत्र का अभियांत्रिकी, खरीद एवं निर्माण ठेकेदार पुरस्कार मिला। यह सम्मान भारत में संपीड़ित बायोगैस अवसंरचना विकसित करने में कंपनी के योगदान के लिए दिया गया।

 

मुख्य बिंदु

 

  • पुरस्कारों का आयोजन भारतीय हरित ऊर्जा महासंघ ने किया।
  •  
  • रिपोर्ट के अनुसार, पुरस्कार केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा विद्युत राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने प्रदान किया।
  •  
  • अभियांत्रिकी, खरीद एवं निर्माण को संक्षेप में ईपीसी कहा जाता है।
  •  
  •  संपीड़ित बायोगैस परियोजनाओं में ईपीसी कंपनियाँ संयंत्र की तकनीकी रूपरेखा, उपकरणों की खरीद, निर्माण और विभिन्न प्रणालियों के एकीकरण में भूमिका निभाती हैं।
  •  
  •  सम्मान परियोजनाओं के क्रियान्वयन में कंपनी की टीमों तथा परियोजना भागीदारों के सामूहिक योगदान से संबंधित है।

 

महत्वपूर्ण तथ्य

 

  • सीबीजी का अर्थ: संपीड़ित बायोगैस।
  •  
  • जैविक अपशिष्ट से प्राप्त बायोगैस को शुद्ध और संपीड़ित करके यह ईंधन तैयार किया जाता है।
  •  सतत पहल: 1 अक्टूबर 2018 को शुरू हुई।
  •  
  • इसका उद्देश्य अपशिष्ट एवं बायोमास से संपीड़ित बायोगैस उत्पादन का तंत्र विकसित करना और प्राकृतिक गैस के साथ इसके उपयोग को बढ़ावा देना है।

 

 

 

 

 

  • पोलिश मूल के बेलारूसी पत्रकार और पोलिश अल्पसंख्यक समुदाय के कार्यकर्ता आंद्रेज पोचोबुत को ‘ज़्वॉटी लाउर सुपर बिज़नेस 2026’ की ‘वर्ष का व्यक्तित्व’ श्रेणी में सम्मानित किया गया। समारोह 20 अक्टूबर 2026 को पोलैंड की राजधानी वारसॉ के होटल बेलोटो में हुआ। इसकी खबर 21 अक्टूबर को प्रकाशित हुई।

 

मुख्य बिंदु

 

  •  पोचोबुत को साहस, दृढ़ता तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के लिए संघर्ष के प्रतीक के रूप में सम्मान मिला।
  •  
  • मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आलेस बियालियात्स्की ने उनके सम्मान में संबोधन दिया।
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  • बेलारूसी विपक्ष की प्रमुख नेता स्वेतलाना तिखानोव्स्काया भी समारोह में उपस्थित थीं।
  •  
  • ज़्वॉटी लाउर सुपर बिज़नेस’ पुरस्कार की स्थापना वर्ष 2014 में सुपर बिज़नेस की संपादकीय टीम ने की थी।
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  • पुरस्कार पोलैंड की अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक जीवन में योगदान देने वाली कंपनियों तथा व्यक्तियों को सम्मानित करता है।

 

महत्वपूर्ण तथ्य

 

  • मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा का अनुच्छेद 19 विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मान्यता देता है।
  •  इसमें बिना हस्तक्षेप विचार रखने तथा सीमाओं की परवाह किए बिना विभिन्न माध्यमों से सूचना और विचार प्राप्त करने एवं साझा करने का अधिकार शामिल है।