उत्तराखंड के मुनस्यारी में दिखा दुर्लभ लाल सिर वाला गिद्ध
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी क्षेत्र में लाल सिर वाला गिद्ध देखा गया। IUCN की रेड लिस्ट में गंभीर रूप से संकटग्रस्त यह प्रजाति पारिस्थितिकी में मृत पशुओं के निपटान और पोषक तत्त्वों के पुनर्चक्रण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
5 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी क्षेत्र में लाल सिर वाला गिद्ध (Sarcogyps calvus) देखा गया। यह पक्षी लगभग 2,650 मीटर की ऊँचाई पर पातलथोड़ के जंगलों में दिखाई दिया।
प्रमुख तथ्य
वैज्ञानिक नाम: Sarcogyps calvus
कुल: Accipitridae।
IUCN स्थिति: गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered)।
पहचान: लाल, पंखरहित सिर और गर्दन तथा गहरे रंग के पंख।
वितरण: भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ भाग।
पारिस्थितिक महत्त्व
लाल सिर वाला गिद्ध मुख्यतः मृत पशुओं के शव खाता है। इससे शवों का निपटान और पोषक तत्त्वों का पुनर्चक्रण होता है। मुनस्यारी में इसका दिखना पश्चिमी हिमालय में जैव विविधता की निगरानी के महत्त्व को दर्शाता है।
प्रमुख खतरे
पशु चिकित्सा में प्रयुक्त डाइक्लोफेनाक दवा गिद्धों की किडनी को नुकसान पहुँचा सकती है और उनकी मृत्यु का कारण बन सकती है। आवास में व्यवधान तथा भोजन की कमी भी इनके लिए खतरा हैं।
भारत ने वर्ष 2006 में पशु चिकित्सा के लिए डाइक्लोफेनाक के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था।
संरक्षण के उपाय
गिद्धों के संरक्षण के लिए प्रतिबंध का प्रभावी क्रियान्वयन, प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा, नियमित आबादी सर्वेक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी आवश्यक है।
MCQ - HINDI
प्रश्न. लाल सिर वाले गिद्ध के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
इसका वैज्ञानिक नाम Sarcogyps calvus है।
IUCN की रेड लिस्ट में इसे गंभीर रूप से संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है।
पशु चिकित्सा में प्रयुक्त डाइक्लोफेनाक दक्षिण एशिया में गिद्धों की मृत्यु का एक कारण रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3
उत्तर: (D)
व्याख्या: लाल सिर वाला गिद्ध गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति है। पशु चिकित्सा में प्रयुक्त डाइक्लोफेनाक गिद्धों की किडनी को नुकसान पहुँचाकर उनकी मृत्यु का कारण बन सकता है।

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