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Current Affairs - Daily 19 अक्टूबर 2026

दुर्लभ बेलीड ईगल-आउल

केरल के कोझिकोड जिले के जानकीक्काड वन में दुर्लभ स्पॉट-बेलीड ईगल-आउल का पहला पुष्ट फोटोग्राफिक रिकॉर्ड सामने आया है। यह खोज पक्षी विविधता, पश्चिमी घाट की पारिस्थितिकी और वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण है।

केरल के कोझिकोड में दुर्लभ स्पॉट-बेलीड ईगल-आउल का फोटोग्राफिक रिकॉर्ड

चर्चा में क्यों?

  • 16 अक्टूबर 2026 को केरल के कोझिकोड जिले के जानकीक्काड वन में दुर्लभ स्पॉट-बेलीड ईगल-आउल (Ketupa nipalensis) की तस्वीर ली गई।
  • वन्यजीव फोटोग्राफर सुनील टीटो तथा इको-टूरिज्म गाइड सुधीश ए. ने इसे कैमरे में दर्ज किया। यह जिले में इस प्रजाति का पहला पुष्ट फोटोग्राफिक रिकॉर्ड है।

स्पॉट-बेलीड ईगल-आउल के बारे में

  • वैज्ञानिक नाम: Ketupa nipalensis (पूर्व नाम Bubo nipalensis)।
  • सामान्य नाम: फॉरेस्ट ईगल-आउल।
  • स्थानीय नाम: कोल्लियान और कट्टूमूंगा।
  • गण (Order): Strigiformes (स्ट्रिजिफॉर्मीज)।
  • कुल (Family): Strigidae (स्ट्रिजिडी)।
  • आकार: लंबाई लगभग 55–65 सेंटीमीटर तथा वजन अधिकतम लगभग 2.5 किलोग्राम।
  • इसे भारत में पाई जाने वाली दूसरी सबसे बड़ी उल्लू प्रजाति माना जाता है।

शारीरिक विशेषताएँ

  • इसकी आँखें गहरी तथा सिर पर कान जैसी दिखाई देने वाली विशिष्ट पंख-कलगियाँ होती हैं।
  • पेट के हल्के रंग वाले हिस्से पर गहरे रंग के V-आकार जैसे चिह्न पाए जाते हैं।
  • भूरे रंग के चित्तीदार पंख घने वनों में छिपने में सहायता करते हैं।
  • मजबूत पंजे तथा मुड़ी हुई चोंच शिकार पकड़ने में सहायक हैं।

आवास एवं वितरण

  • यह भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण-पूर्व एशिया के विभिन्न क्षेत्रों में पाया जाता है।
  • भारत में इसका वितरण हिमालयी वनों, पूर्वोत्तर भारत तथा पश्चिमी घाट में है।
  • इसके प्रमुख आवास घने सदाबहार वन, वनाच्छादित घाटियाँ तथा ऊँचाई पर स्थित शोला वन हैं।
  • दक्षिण भारत में साइलेंट वैली, वायनाड तथा पेरियार इसके महत्त्वपूर्ण आवास क्षेत्रों में शामिल हैं।

भोजन एवं व्यवहार

  • यह मुख्यतः रात्रिचर तथा एकाकी शिकारी पक्षी है।
  • साँप, छोटे स्तनधारी तथा अन्य पक्षी इसके प्रमुख आहार हैं।
  • यह शिकार जीवों की आबादी को नियंत्रित करके वन पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में योगदान देता है।

संरक्षण स्थिति

  • IUCN रेड लिस्ट: कम चिंताजनक (Least Concern–LC)।
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: संशोधित अनुसूची-I के अंतर्गत संरक्षित।
  • आवास विनाश तथा वनों का विखंडन इसके संरक्षण के लिए महत्त्वपूर्ण चुनौतियाँ हैं।

खोज का महत्त्व

  • जानकीक्काड वन लगभग 325 एकड़ में विस्तृत है तथा कुट्टियाडी नदी के किनारे स्थित है।
  • यहाँ पक्षियों की 160 से अधिक प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं।
  • नया फोटोग्राफिक रिकॉर्ड जैव विविधता के दस्तावेजीकरण तथा भविष्य के पारिस्थितिक अनुसंधान के लिए महत्त्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

यह अवलोकन पश्चिमी घाट की जैव विविधता के संरक्षण हेतु नियमित वन्यजीव निगरानी, प्राकृतिक आवास संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों की सहभागिता की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

MCQ – HINDI

प्रश्न. स्पॉट-बेलीड ईगल-आउल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. यह स्ट्रिजिडी (Strigidae) कुल का पक्षी है तथा मुख्यतः रात्रिचर होता है।
  2. IUCN की रेड लिस्ट में इसे कम चिंताजनक (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है।
  3. यह भारत के पश्चिमी घाट का स्थानिक (Endemic) पक्षी है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a) 

व्याख्या: स्पॉट-बेलीड ईगल-आउल स्ट्रिजिडी कुल का रात्रिचर शिकारी पक्षी है। इसकी IUCN स्थिति कम चिंताजनक है। इसका वितरण दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में होने के कारण यह पश्चिमी घाट की स्थानिक प्रजाति नहीं है।