रामप्पा मंदिर के निकट प्रस्तावित कोयला खदान: विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन
तेलंगाना के मुलुगु जिले में स्थित रामप्पा मंदिर काकतीय काल की स्थापत्य, मूर्तिकला और इंजीनियरिंग परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण है। प्रस्तावित PVNR ओपनकास्ट कोयला खदान को लेकर इसके UNESCO विश्व धरोहर दर्जे, रामप्पा झील, भूजल व्यवस्था और मंदिर की संरचनात्मक स्थिरता पर संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई गई है। यह मुद्दा विकास और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के बीच संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
भूमिका
भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि सभ्यतागत निरंतरता, स्थानीय पहचान और सामाजिक-आर्थिक पूंजी का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए विकास परियोजनाओं और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन सतत विकास की प्रमुख चुनौती बन गया है।
चर्चा में क्यों?
- तेलंगाना के मुलुगु जिले के वेंकटापुर में प्रस्तावित PVNR ओपनकास्ट कोयला खदान को लेकर विरासत संरक्षण कार्यकर्ताओं ने चिंता व्यक्त की है।
- उद्धृत चिंताओं के अनुसार, परियोजना का काकतीय रुद्रेश्वर मंदिर (रामप्पा मंदिर) तथा समीप स्थित रामप्पा झील पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।
ऐतिहासिक एवं स्थापत्य महत्व
- रामप्पा मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी में काकतीय काल में हुआ था। यह काकतीय स्थापत्य एवं मूर्तिकला की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मंदिर की विशिष्ट ‘Sand-box Foundation’ तकनीक उस काल के उन्नत इंजीनियरिंग ज्ञान को दर्शाती है।
- रामप्पा मंदिर को UNESCO विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है। इसके निकट स्थित रामप्पा झील काकतीय काल की पारंपरिक जल-प्रबंधन एवं सिंचाई व्यवस्था के महत्व को दर्शाती है। इस प्रकार मंदिर और झील एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक परिदृश्य (Cultural Landscape) का प्रतिनिधित्व करते हैं।
प्रस्तावित खनन से जुड़ी चिंताएँ
- प्रस्तावित खदान मंदिर और झील से लगभग 5 किमी downstream स्थित होगी तथा लगभग 300 मीटर गहराई तक खुदाई प्रस्तावित है।
- विशेषज्ञों ने क्षेत्र में मौजूद geological lineaments और faults के माध्यम से भूजल की आवाजाही में संभावित बदलाव को लेकर चिंता जताई है। भूजल व्यवस्था में परिवर्तन से मंदिर की नींव पर संभावित प्रभाव की आशंका भी व्यक्त की गई है।
- ओपनकास्ट खनन से भूमि-क्षरण, कंपन, धूल, जल-प्रवाह में बदलाव और पारिस्थितिक दबाव जैसी चिंताएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। हालांकि, इनके वास्तविक प्रभाव का निर्धारण विस्तृत एवं परियोजना-विशिष्ट वैज्ञानिक अध्ययनों के माध्यम से किया जाना आवश्यक है।
संवैधानिक एवं नीतिगत आयाम
विरासत संरक्षण को निम्न प्रावधानों से जोड़ा जा सकता है:
- अनुच्छेद 49 — राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों एवं ऐतिहासिक/कलात्मक महत्व की वस्तुओं के संरक्षण से संबंधित।
- अनुच्छेद 51A(f) — भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को महत्व देने और उसका संरक्षण करने का नागरिक कर्तव्य।
- अनुच्छेद 21 — स्वस्थ पर्यावरण के महत्व की व्यापक संवैधानिक व्याख्या।
- Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act, 1958 — संरक्षित स्मारकों के संरक्षण का प्रमुख कानूनी ढांचा।
- UNESCO World Heritage Convention — असाधारण सार्वभौमिक मूल्य वाली सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत के संरक्षण का अंतरराष्ट्रीय ढांचा।
आगे की राह
- विस्तृत Heritage Impact Assessment (HIA) कराया जाए।
- स्वतंत्र Hydro-geological और Environmental Impact Assessment किया जाए।
- मंदिर की संरचनात्मक स्थिति और भूजल स्तर की निरंतर निगरानी की जाए।
- ASI, राज्य सरकार, वैज्ञानिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय बढ़ाया जाए।
- महत्वपूर्ण जोखिमों की स्थिति में Precautionary Principle अपनाया जाए। यदि वैज्ञानिक अध्ययन गंभीर जोखिम दर्शाते हैं, तो वैकल्पिक खनन क्षेत्र अथवा तकनीक पर विचार किया जाए।
निष्कर्ष
रामप्पा मंदिर का मुद्दा केवल “खनन बनाम विरासत” का प्रश्न नहीं है। यह भारत के सामने मौजूद ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास, पर्यावरणीय सततता और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के बीच संतुलन की चुनौती को दर्शाता है। इसलिए लक्ष्य “Development vs Heritage” नहीं, बल्कि “Development with Heritage Conservation” होना चाहिए।
MCQ – HINDI
प्रश्न. रामप्पा मंदिर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- रामप्पा मंदिर का निर्माण काकतीय काल में हुआ था।
- मंदिर अपनी विशिष्ट ‘Sand-box Foundation’ तकनीक के लिए जाना जाता है।
- रामप्पा मंदिर UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल है।
- रामप्पा झील काकतीय काल की पारंपरिक जल-प्रबंधन व्यवस्था से संबंधित है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
(A) केवल एक
(B) केवल दो
(C) केवल तीन
(D) सभी चार
उत्तर: (D) सभी चार
व्याख्या:
रामप्पा मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी में काकतीय काल में हुआ था। इसकी Sand-box Foundation तकनीक इसकी प्रमुख स्थापत्य एवं इंजीनियरिंग विशेषताओं में शामिल है। मंदिर को UNESCO विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है। इसके निकट स्थित रामप्पा झील काकतीय काल की पारंपरिक जल-प्रबंधन एवं सिंचाई व्यवस्था के महत्व को दर्शाती है।
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