RWA Civil Services
Current Affairs - Daily 15 अक्टूबर 2026

निवारक निरोध, गिरफ्तारी और हिरासत में क्या अंतर है?

भारतीय कानून में गिरफ्तारी, हिरासत और निवारक निरोध अलग-अलग कानूनी अवधारणाएं हैं। संविधान का अनुच्छेद 22 और BNSS, 2023 इनके संबंध में महत्वपूर्ण सुरक्षा और प्रक्रियाएं प्रदान करते हैं।

निवारक निरोध, गिरफ्तारी और हिरासत: भारतीय कानून में अंतर

NEWS CONTENT HINDI

खबरों में क्यों?

  • दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हिरासत ने गिरफ्तारी, हिरासत और निवारक निरोध के बीच अंतर को चर्चा में ला दिया है।
  • ये तीनों शब्द समान नहीं हैं और इनके उद्देश्य तथा कानूनी सुरक्षा उपाय अलग-अलग हैं।

निवारक निरोध

  • निवारक निरोध का उद्देश्य किसी व्यक्ति को ऐसे कार्य करने से रोकना है, जिन्हें कानून के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा माना जा सकता है।
  • यह दंडात्मक नहीं, बल्कि भविष्य में संभावित गतिविधि को रोकने की व्यवस्था है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), 1980 इसके लिए प्रमुख कानूनों में से एक है।
  • अनुच्छेद 22(4) के अनुसार, सामान्यतः तीन महीने से अधिक निवारक निरोध के लिए संबंधित सलाहकार बोर्ड की राय आवश्यक होती है, हालांकि संविधान और लागू कानून में अपवाद हो सकते हैं।
  • अनुच्छेद 22(5) के तहत निरोध के आधार की जानकारी देना और व्यक्ति को उसके खिलाफ अभ्यावेदन का अवसर देना आवश्यक है।
  • निवारक निरोध और अपराध को रोकने के लिए पुलिस द्वारा की गई निवारक गिरफ्तारी एक समान नहीं हैं।

हिरासत

  • हिरासत एक व्यापक शब्द है, जिसका अर्थ कानूनी अधिकार के तहत किसी व्यक्ति को अभिरक्षा में रखना है।
  • किसी अपराध की जांच के दौरान गिरफ्तारी के बाद व्यक्ति को पुलिस या न्यायिक हिरासत में रखा जा सकता है।
  • BNSS, 2023 की धारा 187 के तहत निर्धारित अवधि में जांच पूरी न होने पर मजिस्ट्रेट आगे की हिरासत को अधिकृत कर सकता है।
  • परिस्थितियों के अनुसार हिरासत पुलिस हिरासत या न्यायिक हिरासत हो सकती है।

गिरफ्तारी

  • गिरफ्तारी का अर्थ किसी व्यक्ति को कानूनी अभिरक्षा में लेना है, सामान्यतः किसी अपराध के संदेह में या न्यायालय के आदेश के आधार पर।
  • BNSS, 2023 ने 1 जुलाई 2024 से CrPC का स्थान लिया और गिरफ्तारी तथा आपराधिक जांच की प्रक्रिया निर्धारित की।
  • धारा 35: कुछ परिस्थितियों में बिना वारंट गिरफ्तारी की पुलिस शक्ति।
  • धारा 36: गिरफ्तारी की प्रक्रिया और पुलिस अधिकारी के कर्तव्य।
  • धारा 47: गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार और, जहां लागू हो, जमानत के अधिकार की जानकारी देना।

संवैधानिक सुरक्षा

  • अनुच्छेद 22(1): गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार की जानकारी और अपनी पसंद के वकील से परामर्श एवं बचाव का अधिकार है।
  • अनुच्छेद 22(2): गिरफ्तार व्यक्ति को सामान्यतः 24 घंटे के भीतर, यात्रा में लगने वाले समय को छोड़कर, निकटतम मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना आवश्यक है।
  • इसके बाद हिरासत जारी रखने के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति आवश्यक होती है।
  • BNSS की धारा 168 और 170 कुछ परिस्थितियों में संज्ञेय अपराधों को रोकने के लिए पुलिस को निवारक कार्रवाई की शक्ति देती हैं।

मुख्य अंतर

  • गिरफ्तारी: किसी व्यक्ति को कानूनी अभिरक्षा में लेना, सामान्यतः किसी कथित अपराध के संबंध में।
  • हिरासत: कानूनी अधिकार के तहत व्यक्ति को अभिरक्षा में रखने की व्यापक अवधारणा।
  • निवारक निरोध: भविष्य में संभावित हानिकारक गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से की गई विशिष्ट कानूनी कार्रवाई। 

अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न: भारतीय कानून के अंतर्गत गिरफ्तारी, निरोध और निवारक निरोध के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. अनुच्छेद 22 के अंतर्गत निवारक निरोध मुख्यतः दंडात्मक प्रकृति का है और इसके लिए व्यक्ति का किसी विशिष्ट आपराधिक अपराध को करना आवश्यक है। 
  2. अनुच्छेद 22(4) के अनुसार, सामान्यतः तीन महीने से अधिक निवारक निरोध के लिए सलाहकार बोर्ड की राय आवश्यक होती है, जो संवैधानिक एवं वैधानिक प्रावधानों के अधीन है। 
  3. BNSS, 2023 की धारा 170 कुछ निर्धारित परिस्थितियों में संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी की शक्ति देती है। 
  4. अनुच्छेद 22(2) के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को सामान्यतः गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करना आवश्यक है, जिसमें यात्रा में लगने वाला समय शामिल नहीं है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 2, 3 और 4
(D) 1, 2, 3 और 4 

सही उत्तर: (C) केवल 2, 3 और 4

व्याख्या 

  • कथन 1 गलत है। निवारक निरोध दंडात्मक नहीं बल्कि निवारक प्रकृति का होता है। इसका उद्देश्य किसी संभावित हानिकारक गतिविधि को रोकना है; इसके लिए व्यक्ति का पहले से किसी विशिष्ट अपराध में दोषी होना आवश्यक नहीं है।
  • कथन 2 सही है। अनुच्छेद 22(4) के अनुसार, सामान्यतः तीन महीने से अधिक निवारक निरोध जारी रखने के लिए सलाहकार बोर्ड की राय आवश्यक होती है, जो संबंधित संवैधानिक एवं वैधानिक प्रावधानों के अधीन है।
  • कथन 3 सही है। BNSS, 2023 की धारा 170 कुछ परिस्थितियों में संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी करने की शक्ति प्रदान करती है।
  • कथन 4 सही है। अनुच्छेद 22(2) के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को सामान्यतः गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करना आवश्यक है। इस अवधि में यात्रा के लिए आवश्यक समय शामिल नहीं किया जाता है। अतः कथन 2, 3 और 4 सही हैं।