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Current Affairs - Daily 23 सितमबर 2026

भारत में पुलिस सुधार: औपनिवेशिक विरासत से आधुनिक पुलिस व्यवस्था तक

भारत में पुलिस व्यवस्था का मूल ढांचा 1861 के पुलिस अधिनियम से विकसित हुआ था। स्वतंत्रता के बाद भी पुलिस सुधारों से जुड़ी कई चुनौतियां बनी हुई हैं, जिनमें राजनीतिक हस्तक्षेप, कर्मचारियों की कमी, अपर्याप्त संसाधन और कमजोर जवाबदेही प्रमुख हैं।

भारत में पुलिस सुधार

चर्चा में क्यों?

  • कई समितियों की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद भारत में व्यापक पुलिस सुधार अभी पूरी तरह लागू नहीं हो पाए हैं। 
  • भारत की पुलिस व्यवस्था का मूल ढांचा 1861 के पुलिस अधिनियम से जुड़ा है, जिसे 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश शासन ने लागू किया था। 
  • स्वतंत्रता के बाद भी पुलिस व्यवस्था में राजनीतिक हस्तक्षेप और कार्य में अनावश्यक दखल जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। 

प्रमुख चुनौतियां

  • राजनीतिक हस्तक्षेप: द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने बताया था कि पुलिस पर राजनीतिक नियंत्रण का व्यक्तिगत या राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग हो सकता है। 
  • पदों की कमी: देश में लगभग 5.92 लाख पुलिस पद रिक्त बताए गए हैं। इसके अलावा वर्तमान स्वीकृत संख्या कई जगह पुराने आकलनों पर आधारित है। 
  • लंबे कार्य घंटे: विभिन्न अध्ययनों के अनुसार कई पुलिसकर्मी प्रतिदिन लगभग 14 घंटे तक काम करते हैं। 
  • अपर्याप्त बुनियादी ढांचा: कई राज्यों में वाहनों, हथियारों, फोरेंसिक सुविधाओं और अन्य उपकरणों की कमी है। 
  • आवास की समस्या: बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों, विशेषकर निचले स्तर के कर्मचारियों को पर्याप्त पारिवारिक आवास उपलब्ध नहीं है। 
  • प्रशिक्षण की कमी: पुलिस प्रशिक्षण और वैज्ञानिक जांच की क्षमता को और मजबूत करने की आवश्यकता है। 
  • जवाबदेही: पुलिस को जवाबदेह बनाए रखने के साथ-साथ उसके रोजमर्रा के पेशेवर निर्णयों में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचना आवश्यक है। 

प्रमुख पुलिस सुधार पहल

  • राष्ट्रीय पुलिस आयोग (1978–82): पुलिस और आपराधिक न्याय व्यवस्था में बदलाव की सिफारिश की। 
  • रिबेरो समिति (1998): पहले की पुलिस सुधार सिफारिशों के क्रियान्वयन की समीक्षा की। 
  • पद्मनाभैया समिति (2000): भर्ती, प्रशिक्षण और अपराध रोकथाम में जनता की भागीदारी पर सुधार सुझाए। 
  • मलिमथ समिति (2002–03): फोरेंसिक सुविधाओं में सुधार, जांच को कानून-व्यवस्था से अलग करने और पुलिस संस्थाओं को मजबूत करने की सिफारिश की। 
  • सुप्रीम कोर्ट के 2006 के निर्देश: प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में कोर्ट ने सात निर्देश जारी किए, जिनमें राज्य सुरक्षा आयोग और पुलिस स्थापना बोर्ड का गठन शामिल था। 

 

भारत में पुलिस व्यवस्था

  • पुलिस राज्य सूची का विषय: संविधान के अनुसार पुलिस मुख्य रूप से राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आती है। 
  • राज्य पुलिस: प्रत्येक राज्य की अपनी पुलिस व्यवस्था होती है, जो कानून-व्यवस्था, अपराध की रोकथाम और जांच तथा नागरिकों की सुरक्षा का काम करती है। 
  • केंद्रीय पुलिस बल: केंद्र सरकार सात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के साथ खुफिया, जांच, अनुसंधान, रिकॉर्ड और प्रशिक्षण से जुड़ी विशेष संस्थाएं संचालित करती है। 
  • राज्य पुलिस की भूमिका: स्थानीय अपराध और कानून-व्यवस्था संभालने के साथ आतंकवाद या उग्रवाद जैसी घटनाओं में राज्य पुलिस शुरुआती प्रतिक्रिया देती है। 
  • केंद्रीय बलों की भूमिका: बड़े दंगों, उग्रवाद और अन्य गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में केंद्रीय बल विशेष सहायता प्रदान करते हैं। वे सीमा सुरक्षा में भी मदद करते हैं। 
  • केंद्र शासित प्रदेश: केंद्र सरकार केंद्र शासित प्रदेशों में पुलिस व्यवस्था के लिए जिम्मेदार है।
  • राज्यों को सहायता: केंद्र राज्य पुलिस को खुफिया जानकारी, वित्तीय सहायता और अन्य जरूरी सहयोग देता है। 
  • आधुनिकीकरण की आवश्यकता: प्रभावी पुलिसिंग के लिए पर्याप्त कर्मचारी, हथियार, फोरेंसिक सुविधाएं, संचार व्यवस्था और वाहन जरूरी हैं। 
  • स्वायत्तता और जवाबदेही: पुलिस को पेशेवर तरीके से काम करने की पर्याप्त स्वतंत्रता के साथ-साथ बेहतर कार्य परिस्थितियां और शक्ति के दुरुपयोग के लिए जवाबदेही भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

 

आगे की राह

  • पुलिस के बुनियादी ढांचे और फोरेंसिक सुविधाओं का आधुनिकीकरण। 
  • रिक्त पदों को भरना और कार्य परिस्थितियों में सुधार। 
  • नियमित प्रशिक्षण और पर्याप्त आवास की व्यवस्था। 
  • मजबूत जवाबदेही तंत्र विकसित करना। 
  • वैध लोकतांत्रिक नियंत्रण बनाए रखते हुए अनावश्यक राजनीतिक हस्तक्षेप कम करना।
  • संवैधानिक मूल्यों, नागरिक अधिकारों और जनता की सुरक्षा पर आधारित पुलिस व्यवस्था विकसित करना।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: भारत में पुलिस सुधारों और पुलिस व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. राष्ट्रीय पुलिस आयोग का गठन 1978 से 1982 के बीच हुआ था और उसने पुलिस तथा आपराधिक न्याय व्यवस्था में बदलाव की सिफारिश की थी। 
  2. प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में 2006 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों में राज्य सुरक्षा आयोग और पुलिस स्थापना बोर्ड के गठन की बात शामिल थी। 
  3. पुलिस राज्य सूची का विषय होने के कारण केंद्र सरकार राज्य पुलिस को खुफिया, वित्तीय या आंतरिक सुरक्षा संबंधी सहायता नहीं दे सकती। 
  4. केंद्रीय पुलिस बल मुख्य रूप से राज्य पुलिस का स्थान लेकर नियमित अपराध जांच और स्थानीय कानून-व्यवस्था का संचालन करते हैं। 

उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

A. केवल 1 और 2
B. केवल 1, 2 और 3
C. केवल 2, 3 और 4
D. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: A. केवल 1 और 2

व्याख्या:

  • राष्ट्रीय पुलिस आयोग (1978–82) ने पुलिस और आपराधिक न्याय व्यवस्था में बदलाव की सिफारिश की थी। अतः कथन 1 सही है। 
  • प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2006 के निर्देशों में राज्य सुरक्षा आयोग और पुलिस स्थापना बोर्ड के गठन का प्रावधान शामिल था। अतः कथन 2 सही है।
  • पुलिस राज्य सूची का विषय है, लेकिन केंद्र सरकार राज्य पुलिस को खुफिया, वित्तीय और अन्य सहायता प्रदान करती है। अतः कथन 3 गलत है। 
  • स्थानीय अपराध, जांच और कानून-व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य पुलिस की है। केंद्रीय बल मुख्यतः बड़े दंगों, उग्रवाद और अन्य गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में विशेष सहायता देते हैं। अतः कथन 4 गलत है।