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Current Affairs - Daily 9 अक्टूबर 2026

लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2026: वैश्विक वन्यजीव आबादी में गिरावट और जैव विविधता संरक्षण

WWF की लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2026 के अनुसार 1970 से 2022 के बीच निगरानी की गई कशेरुकी जीवों की आबादी के औसत आकार में 73% की गिरावट दर्ज की गई। मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए। रिपोर्ट ने जैव विविधता संरक्षण में लक्षित प्रयासों से प्रकृति के पुनरुद्धार की संभावनाओं को भी रेखांकित किया है।

चर्चा में क्यों?

विश्व वन्यजीव कोष (WWF) ने लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2026 जारी की है। रिपोर्ट ने दुनिया भर में वन्यजीव आबादी में लंबे समय से हो रहे बदलाव और जैव विविधता की स्थिति का आकलन किया है।

लिविंग प्लैनेट इंडेक्स क्या है?

  • लिविंग प्लैनेट इंडेक्स (LPI) निगरानी की जा रही कशेरुकी जीवों की आबादी के आकार में होने वाले बदलाव को मापता है।
  • इसमें उभयचर, पक्षी, मछलियां, स्तनधारी और सरीसृप शामिल हैं।
  • इसे WWF ने 1998 में विकसित किया था। वर्ष 2006 से Zoological Society of London (ZSL), WWF के साथ मिलकर इसका प्रबंधन कर रहा है।
  • यह आबादी में औसत परिवर्तन को मापता है, न कि दुनिया में मारे गए कुल जीवों की संख्या को।

प्रमुख निष्कर्ष

  • 1970 से 2022 के बीच निगरानी की गई कशेरुकी जीवों की आबादी के औसत आकार में 73% की गिरावट आई।
  • अध्ययन में 5,790 प्रजातियों की 35,803 आबादी को शामिल किया गया।
  • मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र में सबसे अधिक 85% गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में 69% और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में 59% गिरावट रही।
  • क्षेत्रीय स्तर पर सबसे अधिक गिरावट लैटिन अमेरिका और कैरेबियन (95%), अफ्रीका (80%) और एशिया-प्रशांत क्षेत्र (49%) में हुई।
  • प्रमुख कारणों में आवास का नुकसान, प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन, जलवायु परिवर्तन, आक्रामक प्रजातियां, प्रदूषण और बीमारियां शामिल हैं।
  • खाद्य उत्पादन और उपभोग जैव विविधता के नुकसान के प्रमुख कारणों में हैं, क्योंकि कृषि के विस्तार से प्राकृतिक आवासों का नुकसान और संसाधनों का अत्यधिक उपयोग होता है।
  • हालांकि, प्रभावी संरक्षण उपायों से वन्यजीव आबादी में सुधार संभव है। बाघ, ग्रीन टर्टल, ब्लूफिन टूना और दक्षिणी अफ्रीकी हाथियों के उदाहरण इसका प्रमाण हैं।
  • वैश्विक जंगली बाघों की संख्या 2010 में लगभग 3,200 से बढ़कर 2025 में लगभग 5,700 हो गई।

 

जैव विविधता पर कन्वेंशन (CBD):

  • Convention on Biological Diversity (CBD) जैव विविधता के संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग से संबंधित एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता है। 
  • इसे 1992 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित UN Conference on Environment and Development (Rio Earth Summit) में हस्ताक्षर के लिए खोला गया था। 
  • वर्तमान में CBD के 196 पक्षकार (Parties) हैं। 
  • यह जैव विविधता के तीन प्रमुख स्तरों को कवर करता है: 
    • पारिस्थितिकी तंत्र 
    • प्रजातियां 
    • आनुवंशिक संसाधन 

तीन प्रमुख उद्देश्य

  • जैव विविधता का संरक्षण, जिसमें आनुवंशिक, प्रजातीय और पारिस्थितिकी तंत्र की विविधता शामिल है। 
  • जैव विविधता का सतत उपयोग। 
  • आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभों का न्यायसंगत और समान बंटवारा।

संस्थागत व्यवस्था

  • Conference of the Parties (COP) CBD का प्रमुख निर्णय लेने वाला निकाय है।
  • इसमें CBD के पक्षकार देश शामिल होते हैं। 
  • COP हर दो वर्ष में बैठक करता है और प्रगति की समीक्षा, प्राथमिकताओं का निर्धारण तथा कार्य योजनाओं को अपनाता है। 
  • CBD का सचिवालय मॉन्ट्रियल, कनाडा में स्थित है। 

प्रमुख प्रोटोकॉल

  • कार्टाजेना प्रोटोकॉल ऑन बायोसेफ्टी 
    • इसे 2000 में अपनाया गया और 2003 में लागू हुआ। 
    • इसका उद्देश्य Living Modified Organisms (LMOs) के सीमा-पार आवागमन को विनियमित करना है। 
    • यह LMOs से जैव विविधता को होने वाले संभावित जोखिमों से सुरक्षा पर केंद्रित है। 
  • नागोया प्रोटोकॉल 
    • इसे 2010 में अपनाया गया। 
    • यह आनुवंशिक संसाधनों तक पहुंच तथा उनके उपयोग से प्राप्त लाभों के न्यायसंगत और समान बंटवारे के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है।

वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF):

  • WWF एक अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन (NGO) है, जो पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा और प्रकृति पर मानव दबाव को कम करने के लिए कार्य करता है।
  • स्थापना: 1961
  • मुख्यालय: ग्लैंड, स्विट्जरलैंड
  • संस्थापक: सर पीटर स्कॉट, मैक्स निकोलसन और अन्य।
  • वैश्विक उपस्थिति: संरक्षण कार्यक्रमों और साझेदारियों के माध्यम से 100 से अधिक देशों में कार्य करता है।

उद्देश्य

  • जैव विविधता और वन्यजीवों का संरक्षण। 
  • वनों, जल एवं समुद्री संसाधनों की रक्षा। 
  • प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देना। 
  • प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन को कम करना। 
  • वनों की कटाई और आवास विनाश को रोकना। 
  • सतत खाद्य उत्पादन एवं उपभोग को बढ़ावा देना। 
  • पर्यावरणीय जागरूकता और सतत विकास को प्रोत्साहित करना।

प्रमुख पहल और रिपोर्ट

  • Living Planet Report प्रकाशित करता है, जो वैश्विक वन्यजीव आबादी में रुझानों का आकलन करता है।
  • Zoological Society of London (ZSL) के सहयोग से Living Planet Index (LPI) का प्रबंधन करता है।
  • Earth Hour जैसे वैश्विक जागरूकता अभियानों का आयोजन करता है।
  • Debt-for-Nature Swaps जैसी नवीन संरक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देता है।
  • वन्यजीवों की निगरानी और संरक्षण के लिए AI, सेंसर और कैमरा-ट्रैप तकनीकों का उपयोग करता है।

WWF-India

  • स्थापना: नवंबर 1969
  • भारत की प्राकृतिक विरासत और पारिस्थितिक विविधता के संरक्षण के लिए इसे एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में स्थापित किया गया था।
  • राष्ट्रीय सचिवालय: नई दिल्ली
  • WWF-India वन्यजीव संरक्षण, वन, मीठे पानी के संसाधन, सतत कृषि, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय शिक्षा जैसे क्षेत्रों में कार्य करता है।

 

अभ्यास प्रश्न 

प्र. लिविंग प्लैनेट इंडेक्स (LPI), जैव विविधता पर कन्वेंशन (CBD) और वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. लिविंग प्लैनेट इंडेक्स किसी निश्चित अवधि में निगरानी की गई कशेरुकी जीवों की आबादी से समाप्त हुए जीवों की कुल संख्या को मापता है। 
  2. कार्टाजेना प्रोटोकॉल जैव-सुरक्षा से संबंधित है, जबकि नागोया प्रोटोकॉल आनुवंशिक संसाधनों तक पहुंच और लाभ-साझाकरण पर केंद्रित है। 
  3. लिविंग प्लैनेट इंडेक्स को WWF ने 1998 में विकसित किया था और 2006 से Zoological Society of London (ZSL), WWF के साथ मिलकर इसका प्रबंधन कर रहा है। 
  4. WWF एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना जैव विविधता पर कन्वेंशन के तहत हुई थी

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

(a) केवल 2 और 3
(b) केवल 1 और 4
(c) 1, 2 और 3
(d) 2, 3 और 4

उत्तर: (a) केवल 2 और 3

व्याख्या:

  • लिविंग प्लैनेट इंडेक्स निगरानी की गई कशेरुकी प्रजातियों की आबादी के आकार में औसत परिवर्तन को मापता है, न कि समाप्त हुए जीवों की कुल संख्या को। अतः कथन 1 गलत है। 
  • कार्टाजेना प्रोटोकॉल जैव-सुरक्षा तथा जीवित रूप से संशोधित जीवों के सुरक्षित उपयोग से संबंधित है, जबकि नागोया प्रोटोकॉल आनुवंशिक संसाधनों तक पहुंच और लाभों के उचित बंटवारे से संबंधित है। अतः कथन 2 सही है। 
  • लिविंग प्लैनेट इंडेक्स को WWF ने 1998 में विकसित किया था और 2006 से ZSL, WWF के साथ साझेदारी में इसका प्रबंधन कर रहा है। अतः कथन 3 सही है। 
  • WWF एक अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन (NGO) है, जिसकी स्थापना 1961 में हुई थी। यह CBD के तहत स्थापित कोई अंतर-सरकारी संगठन नहीं है। अतः कथन 4 गलत है।