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Current Affairs - Daily 17 सितमबर 2026

6 राज्यों और दिल्ली ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित 422 मेगावाट की जलविद्युत एवं जल-संग्रहण परियोजना है। परियोजना का उद्देश्य सिंचाई, जलापूर्ति, जलविद्युत उत्पादन और यमुना में पर्यावरणीय प्रवाह को बढ़ावा देना है।

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौता

  • 15 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली ने 422 मेगावाट की किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के कार्यान्वयन के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। 
  • यह समझौता नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की उपस्थिति में हुआ। 
  • परियोजना टोंस नदी पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा के पास बनाई जाएगी और यह ऊपरी यमुना बेसिन (Upper Yamuna Basin) में प्रस्तावित प्रमुख जल-संग्रहण परियोजनाओं में शामिल है। 
  • परियोजना की अनुमानित लागत लगभग ₹15,624 करोड़ है। 
  • किशाऊ परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना (National Project) का दर्जा दिया गया है। 
  • वित्तीय व्यवस्था के तहत परियोजना की लगभग 90% लागत केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 10% लागत संबंधित राज्यों और दिल्ली द्वारा वहन की जाएगी। 
  • परियोजना का संबंध यमुना नदी में पर्यावरणीय प्रवाह (Environmental Flows) को बेहतर करने और ऊपरी यमुना बेसिन में जल उपलब्धता बढ़ाने से भी है। 
  • दिल्ली को परियोजना के प्रमुख लाभार्थियों में शामिल किया गया है, विशेष रूप से जल उपलब्धता और यमुना की स्थिति में सुधार के संदर्भ में। 
  • परियोजना की पृष्ठभूमि 1994 के ऊपरी यमुना बेसिन समझौते से जुड़ी है, जिसके तहत बेसिन के राज्यों ने अलग-अलग जल-संग्रहण परियोजनाओं के लिए पृथक समझौते करने पर सहमति व्यक्त की थी। 
  • ऊपरी यमुना बेसिन की अन्य प्रमुख जल-संग्रहण परियोजनाओं में लखवार और रेणुकाजी परियोजनाएं शामिल हैं। 
  • किशाऊ परियोजना में लंबे समय तक देरी का एक प्रमुख कारण परियोजना की वित्तीय लागत में राज्यों की हिस्सेदारी से जुड़े मतभेद रहे। 
  • 16 जून 2026 को छह राज्यों और दिल्ली ने किशाऊ परियोजना को आगे बढ़ाने पर सहमति बनाई थी। इसमें जल घटक की लागत के लिए केंद्र द्वारा 90% सहायता देने पर भी सहमति बनी।

     

प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न

प्रश्न. किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1- यह परियोजना टोंस नदी पर प्रस्तावित है, जो उत्तराखंड–हिमाचल प्रदेश सीमा के साथ बहती है। 

2-यह परियोजना ऊपरी यमुना बेसिन की जल-संग्रहण परियोजनाओं का हिस्सा है। 

3-राष्ट्रीय परियोजना घोषित होने के कारण 2026 के समझौते के तहत परियोजना की पूरी लागत केंद्र सरकार द्वारा वहन की जाएगी। 

4-परियोजना का उद्देश्य यमुना में पर्यावरणीय प्रवाह को बेहतर करने में भी योगदान देना है। 

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

(a) केवल 1, 2 और 3 

(b) केवल 1, 2 और 4 

(c) केवल 2, 3 और 4 

(d) 1, 2, 3 और 4 

उत्तर: (b) केवल 1, 2 और 4

व्याख्या:

कथन 1, 2 और 4 सही हैं। किशाऊ परियोजना टोंस नदी पर उत्तराखंड–हिमाचल प्रदेश सीमा के पास बनाई जाएगी और यह ऊपरी यमुना बेसिन की प्रमुख जल-संग्रहण परियोजनाओं में शामिल है। इसका एक उद्देश्य यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह में सुधार करना भी है। 

कथन 3 गलत है। राष्ट्रीय परियोजना होने के बावजूद केंद्र सरकार लगभग 90% वित्तीय भार वहन करेगी, जबकि शेष 10% लागत सहभागी राज्यों और दिल्ली द्वारा वहन की जाएगी।