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Current Affairs - Daily 19 अक्टूबर 2026

किगाली संशोधन के 10 वर्ष: HFCs में कमी और भारत के लिए बढ़ती शीतलन चुनौती

किगाली संशोधन मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) के उत्पादन और खपत को चरणबद्ध तरीके से कम करने का वैश्विक प्रयास है।

किगाली संशोधन और जलवायु परिवर्तन: HFCs में कमी

खबरों में क्यों?

  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के किगाली संशोधन को अपनाए हुए 10 वर्ष पूरे हो गए हैं।
  • इसे 15 अक्टूबर 2016 को किगाली, रवांडा में अपनाया गया था और यह 1 जनवरी 2019 से लागू हुआ।
  • इसका उद्देश्य हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) के उत्पादन और खपत को धीरे-धीरे कम करना है।

किगाली संशोधन क्या है?

  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, 1987 में अपनाया गया था और इसका मुख्य उद्देश्य ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले रसायनों को नियंत्रित करना था।
  • इसमें क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) जैसे रसायनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने पर जोर दिया गया।
  • CFCs के स्थान पर HFCs का उपयोग बढ़ा क्योंकि ये ओजोन परत को सीधे नुकसान नहीं पहुंचाते
  • लेकिन कई HFCs का ग्लोबल वार्मिंग पर बहुत अधिक प्रभाव होता है।
  • इसलिए किगाली संशोधन के तहत HFCs के उत्पादन और खपत को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय चरणबद्ध रूप से कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • इसके पूर्ण क्रियान्वयन से 2100 तक लगभग 0.3°C–0.5°C वैश्विक तापमान वृद्धि को रोका जा सकता है।

CFCs और HFCs में अंतर

  • CFCs: ओजोन परत को नुकसान पहुंचाते हैं और ग्लोबल वार्मिंग में भी योगदान देते हैं।
  • HFCs: ओजोन परत को नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन कई HFCs शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस हैं।
  • अमोनिया, कार्बन डाइऑक्साइड और कुछ हाइड्रोकार्बन कम जलवायु प्रभाव वाले विकल्प हो सकते हैं।

शीतलन क्यों महत्वपूर्ण है?

  • शीतलन क्षेत्र जलवायु परिवर्तन को दो तरीकों से प्रभावित करता है:
    • उपकरणों से HFCs का रिसाव।
    • एयर-कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर चलाने के लिए बिजली की खपत।
  • इसलिए कम ऊर्जा खपत करने वाले उपकरणों का उपयोग जलवायु प्रभाव को कम कर सकता है
  • भारत में वर्तमान नीतियों के तहत 2035 तक शीतलन की मांग दोगुने से अधिक होने का अनुमान है।

किगाली संशोधन के तहत भारत

  • भारत ने 2021 में किगाली संशोधन की पुष्टि की।
  • भारत को 2028 में HFC उत्पादन और खपत को निर्धारित आधार स्तर पर स्थिर करना है।
  • इसके बाद:
    • 2032 में आधार स्तर से 10% कमी
    • इसके बाद क्रमिक कमी
    • 2047 तक 85% कमी
  • बढ़ती गर्मी, शहरीकरण, आय में वृद्धि और एयर-कंडीशनिंग की बढ़ती पहुंच भारत में शीतलन की मांग को बढ़ा रही है।

आगे की राह

  • एयर-कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर के ऊर्जा दक्षता मानकों को मजबूत करना।
  • पुराने उपकरणों से निकलने वाले रेफ्रिजरेंट को वापस प्राप्त करना और सुरक्षित तरीके से पुनर्चक्रण या नष्ट करना।
  • तकनीशियनों को प्रशिक्षण देना।
  • उद्योगों को नई तकनीक और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना।
  • आयातित उपकरणों के लिए भी दक्षता मानकों को मजबूत करना।

बहुपक्षीय कोष

  • Multilateral Fund की स्थापना 1990 में विकासशील देशों की सहायता के लिए की गई थी।
  • यह तकनीकी बदलाव, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए वित्तीय सहायता देता है।
  • इसका उद्देश्य विकासशील देशों पर संक्रमण की पूरी आर्थिक लागत का बोझ न पड़ने देना है।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की सफलता

  • इसने ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों को नियंत्रित करने के लिए बाध्यकारी लक्ष्य तय किए।
  • सुरक्षित विकल्प उपलब्ध होने के साथ लक्ष्यों को और मजबूत किया गया।
  • विकासशील देशों को अधिक समय और वित्तीय सहायता दी गई।
  • वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर समझौते में बदलाव किए गए।
  • किगाली संशोधन इसी संस्थागत व्यवस्था का विस्तार है।

निष्कर्ष

  • किगाली संशोधन ओजोन संरक्षण और जलवायु कार्रवाई के बीच महत्वपूर्ण संबंध को दर्शाता है।
  • इसके अनुभव से मीथेन और ब्लैक कार्बन जैसे अल्पकालिक जलवायु प्रदूषकों को कम करने के लिए भी सीख ली जा सकती है।
  • हालांकि, दीर्घकालिक तापमान वृद्धि को सीमित करने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी भी आवश्यक रहेगी।

अभ्यास प्रश्न 

प्र. किगाली संशोधन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. किगाली संशोधन HFCs में कमी का प्रावधान करता है क्योंकि ये ओजोन परत को नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन इनमें से कई का ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल अधिक होता है। 
  2. किगाली संशोधन के तहत भारत को 2047 तक HFCs के उत्पादन और खपत को पूरी तरह समाप्त करना है। 
  3. बहुपक्षीय कोष (Multilateral Fund) विकासशील देशों को तकनीकी बदलाव और क्षमता निर्माण जैसी गतिविधियों के माध्यम से मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के दायित्वों को पूरा करने में सहायता करता है
  4. किगाली संशोधन का जलवायु संबंधी लाभ केवल रेफ्रिजरेंट के रिसाव को कम करने तक सीमित है, क्योंकि शीतलन उपकरणों द्वारा बिजली की खपत इसके दायरे से बाहर है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

A. केवल 1 और 3
B. केवल 1 और 2
C. केवल 2 और 4
D. केवल 1, 3 और 4 

उत्तर: A

व्याख्या:

  • HFCs ओजोन परत को नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन इनमें से कई का ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल अधिक होता है। अतः कथन 1 सही है।
  • भारत को HFCs को पूरी तरह समाप्त नहीं करना है, बल्कि इनके उत्पादन और खपत में चरणबद्ध कमी (phase-down) करनी है, जो 2047 तक 85% कमी तक पहुंचेगी। अतः कथन 2 गलत है।
  • बहुपक्षीय कोष विकासशील देशों को तकनीकी बदलाव, तकनीशियनों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में सहायता करता है। अतः कथन 3 सही है।
  • शीतलन क्षेत्र का जलवायु पर प्रभाव रेफ्रिजरेंट के रिसाव के साथ-साथ बिजली की खपत के माध्यम से भी पड़ता है। अतः कथन 4 गलत है।