जेयपोर ग्राउंड गेको: ओडिशा की बालदा पहाड़ियों में बॉक्साइट खनन से दुर्लभ प्रजाति पर संकट
जेयपोर ग्राउंड गेको (Cyrtodactylus jeyporensis) पूर्वी घाट की एक दुर्लभ एवं संकटग्रस्त छिपकली है। लगभग 130 वर्षों बाद 2010 में दोबारा खोजी गई
चर्चा में क्यों?
हाल ही में ओडिशा के कोरापुट जिले की बालदा पहाड़ियों में प्रस्तावित बॉक्साइट खनन परियोजना के कारण दुर्लभ जेयपोर ग्राउंड गेको (Cyrtodactylus jeyporensis) के प्राकृतिक आवास पर खतरा उत्पन्न हो गया है।
यह परियोजना नागेश्वरी आरक्षित वन के लगभग 147 हेक्टेयर क्षेत्र से संबंधित है। अक्टूबर 2026 तक पिछले एक वर्ष के दौरान इस क्षेत्र में इस प्रजाति के केवल चार जीव देखे जाने की खबर है।
प्रमुख बिंदु
- वैज्ञानिक नाम: Cyrtodactylus jeyporensis
- कुल: Gekkonidae
- प्रथम वैज्ञानिक विवरण: ब्रिटिश प्रकृतिविद् रिचर्ड हेनरी बेडडोम द्वारा वर्ष 1878 में प्रकाशित।
- पुनः खोज: वर्ष 2010 में ईशान अग्रवाल और अनिरुद्ध दत्ता-रॉय द्वारा ओडिशा के कोरापुट जिले में।
- वितरण: ओडिशा और आंध्र प्रदेश का पूर्वी घाट क्षेत्र।
- प्राकृतिक आवास: ऊँचाई वाले अर्द्ध-सदाबहार वन, चट्टानी क्षेत्र और पत्थरों के नीचे के स्थान।
- संरक्षण स्थिति: IUCN की रेड लिस्ट में संकटग्रस्त (Endangered)।
- प्रमुख खतरे: बॉक्साइट खनन, वनों की कटाई, आवास विखंडन और अवैध वन्यजीव व्यापार।
जेयपोर ग्राउंड गेको क्या है?
जेयपोर ग्राउंड गेको छिपकली की एक दुर्लभ प्रजाति है, जो भारत के पूर्वी घाट क्षेत्र में पाई जाती है।
इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- यह मुख्यतः जमीन पर रहने वाली तथा रात्रिचर प्रकृति की छिपकली है।
- इसकी लंबाई लगभग 9–12 सेंटीमीटर होती है।
- इसका सिर अपेक्षाकृत बड़ा तथा शरीर भूरे, पीले-नारंगी और गहरे धब्बेदार पैटर्न वाला होता है।
- यह प्रायः ऊँचाई वाले वन क्षेत्रों में चट्टानों, पत्थरों और गिरी हुई पत्तियों के बीच पाई जाती है।
खोज एवं पुनः खोज
- इस प्रजाति का वैज्ञानिक विवरण वर्ष 1878 में ब्रिटिश प्रकृतिविद् रिचर्ड हेनरी बेडडोम ने प्रकाशित किया था।
- लगभग 130 वर्षों तक इसका कोई प्रमाणित नया रिकॉर्ड नहीं मिलने के कारण इसके विलुप्त होने की आशंका व्यक्त की गई थी।
- वर्ष 2010 में भारतीय सरीसृप विशेषज्ञ ईशान अग्रवाल और अनिरुद्ध दत्ता-रॉय ने ओडिशा के कोरापुट जिले में इसकी पुनः खोज की।
प्राकृतिक आवास एवं वितरण
- यह प्रजाति मुख्यतः पूर्वी घाट के उच्च पर्वतीय वन क्षेत्रों में पाई जाती है।
- इसके ज्ञात आवासों में ओडिशा का कोरापुट जिला तथा आंध्र प्रदेश के उत्तरी पूर्वी घाट क्षेत्र शामिल हैं।
- यह विशेष रूप से नम, अर्द्ध-सदाबहार वन क्षेत्रों और चट्टानी सूक्ष्म आवासों पर निर्भर करती है।
संरक्षण की स्थिति
- IUCN रेड लिस्ट: संकटग्रस्त (Endangered)
- CITES: परिशिष्ट-II में सूचीबद्ध।
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची-I के अंतर्गत संरक्षण।
- परिशिष्ट-II में सूचीबद्ध प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित किया जाता है, ताकि व्यापार के कारण उनके अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न न हो।
प्रमुख पर्यावरणीय खतरे
- बॉक्साइट खनन से प्राकृतिक आवास का विनाश।
- वनों की कटाई और भूमि उपयोग में परिवर्तन।
- कॉफी बागानों तथा अन्य विकास गतिविधियों का विस्तार।
- सीमित भौगोलिक वितरण के कारण विलुप्ति का अधिक जोखिम।
ओडिशा के पोटांगी क्षेत्र में पूर्ववर्ती आवास को खनन गतिविधियों से नुकसान पहुँचा है, जहाँ से इस प्रजाति के स्थानीय रूप से लुप्त होने की आशंका है।
भारत के लिए महत्त्व
- जेयपोर ग्राउंड गेको का संरक्षण भारत के पूर्वी घाट की जैव विविधता की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
- इसके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक सर्वेक्षण, वन संरक्षण, प्रभावी पर्यावरणीय प्रभाव आकलन तथा स्थानीय समुदायों की भागीदारी आवश्यक है।
MCQ – HINDI
प्रश्न. जेयपोर ग्राउंड गेको के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह भारत के पूर्वी घाट क्षेत्र की स्थानिक प्रजाति है।
- इसकी पुनः खोज वर्ष 2010 में लगभग 130 वर्षों के अंतराल के बाद हुई थी।
- इसे IUCN की रेड लिस्ट में कम चिंताजनक (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है।
- ओडिशा में बॉक्साइट खनन से इसके प्राकृतिक आवास को खतरा उत्पन्न हुआ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 1, 2 और 4
(c) केवल 2, 3 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: B