Current Affairs - Daily
12 अक्टूबर 2026
जयप्रकाश नारायण: संपूर्ण क्रांति के जनक और लोकतंत्र के प्रहरी
लोकनायक जयप्रकाश नारायण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं, समाजवादी विचारकों और लोकतंत्र के समर्थकों में से एक थे। संपूर्ण क्रांति आंदोलन और आपातकाल के विरोध में उनकी भूमिका ने भारतीय राजनीति को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया।
चर्चा में क्यों?
- लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती (11 अक्टूबर) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
- उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक मूल्यों और आपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा में उनके योगदान को याद किया।
प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा
- जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित सिताबदियारा गाँव में हुआ था।
- उन्होंने पटना में शिक्षा प्राप्त की और 1922 में उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए। वहाँ उन्होंने समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र जैसे विषयों का अध्ययन किया।
- समाजवादी विचारों के संपर्क ने समानता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक परिवर्तन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को मजबूत किया।
स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका
- 1929 में भारत लौटने के बाद वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और राष्ट्रीय आंदोलन में समाजवादी विचारों के प्रमुख समर्थक बने।
- 1934 में उन्होंने श्रमिकों और किसानों के हितों को बढ़ावा देने के लिए कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान वे हजारीबाग जेल से भाग निकले और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भूमिगत प्रतिरोध संगठित किया।
- स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा।
संपूर्ण क्रांति आंदोलन
- 1974 में जयप्रकाश नारायण ने भारतीय राजनीति और समाज में व्यापक सुधारों की माँग करते हुए जन आंदोलन का नेतृत्व किया।
- यह आंदोलन भ्रष्टाचार, महँगाई, बेरोजगारी और सत्ता के दुरुपयोग जैसी समस्याओं के बीच उभरा।
- उन्होंने केवल सरकार बदलने के बजाय राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में व्यापक बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया।
- उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों को सार्वजनिक जीवन में भाग लेने तथा जवाबदेह शासन को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया।
आपातकाल का विरोध
- 1975 से 1977 के बीच लागू आपातकाल के दौरान जयप्रकाश नारायण सत्तावादी शासन के प्रमुख विरोधियों में शामिल थे।
- उन्होंने नागरिक स्वतंत्रताओं, संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
- उन्होंने विभिन्न विपक्षी दलों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके परिणामस्वरूप बनी जनता पार्टी ने 1977 के आम चुनाव में सत्ता प्राप्त की।
विचारधारा एवं विरासत
- सामाजिक न्याय: उन्होंने श्रमिकों, किसानों और वंचित वर्गों के कल्याण का समर्थन किया।
- सर्वोदय: उन्होंने गांधीवादी विचार के अनुसार सभी के कल्याण और उत्थान पर जोर दिया।
- विकेंद्रीकरण: उन्होंने ग्राम-स्तरीय संस्थाओं को अधिक अधिकार देने और शासन में जनता की भागीदारी बढ़ाने का समर्थन किया।
- नैतिक राजनीति: उन्होंने ईमानदारी, जवाबदेही और जनसेवा को सार्वजनिक जीवन का आधार माना।
जयप्रकाश नारायण सामाजिक सुधारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और सत्तावाद के विरोध के कारण भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. जयप्रकाश नारायण और उनके राजनीतिक योगदान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- जयप्रकाश नारायण ने 1934 में राष्ट्रीय आंदोलन के भीतर समाजवादी विचारों को बढ़ावा देने के लिए कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना में योगदान दिया।
- भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान वे हजारीबाग जेल से भाग निकले और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भूमिगत प्रतिरोध जारी रखा।
- वर्ष 1974 के संपूर्ण क्रांति आंदोलन का मुख्य उद्देश्य केवल सरकार बदलना था, इसमें व्यापक सामाजिक और प्रशासनिक सुधारों की माँग नहीं की गई थी।
- जयप्रकाश नारायण ने 1977 के आम चुनाव से पहले विपक्षी दलों को एकजुट करने में योगदान दिया, जिसके परिणामस्वरूप जनता पार्टी की सरकार बनी।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 1, 2 और 3
(c) केवल 1, 2 और 4
(d) केवल 2, 3 और 4
सही उत्तर: (c) केवल 1, 2 और 4
व्याख्या
- कथन 1 सही है। जयप्रकाश नारायण ने 1934 में कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना में योगदान दिया, जिसका उद्देश्य समाजवादी विचारों को बढ़ावा देना तथा श्रमिकों और किसानों के हितों की रक्षा करना था।
- कथन 2 सही है। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जयप्रकाश नारायण हजारीबाग जेल से भाग निकले और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भूमिगत प्रतिरोध संगठित किया।
- कथन 3 गलत है। वर्ष 1974 का संपूर्ण क्रांति आंदोलन केवल सरकार बदलने तक सीमित नहीं था। इसका उद्देश्य राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार करना था।
- कथन 4 सही है। जयप्रकाश नारायण ने विभिन्न विपक्षी दलों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे जनता पार्टी के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ, जिसने 1977 के आम चुनाव के बाद केंद्र में सरकार बनाई।
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