भारत में इंटरनेट शटडाउन: कानूनी प्रावधान
भारत में इंटरनेट सेवाओं का अस्थायी निलंबन दूरसंचार अधिनियम, 2023 और दूरसंचार निलंबन नियम, 2024 के तहत नियंत्रित होता है। इन नियमों में आदेश जारी करने वाले अधिकारियों, समय-सीमा, समीक्षा और नागरिकों के मौलिक अधिकारों से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
चर्चा में क्यों?
मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से पहले, दिल्ली के जंतर-मंतर के चार किलोमीटर के दायरे में 9 अक्टूबर से 10 अक्टूबर, 2026 तक मोबाइल इंटरनेट सेवाएँ निलंबित कर दी गईं। इस घटना ने इंटरनेट शटडाउन से संबंधित कानूनी प्रावधानों को चर्चा में ला दिया है।
कानूनी ढाँचा
दूरसंचार अधिनियम, 2023: इसकी धारा 20(2)(b) केंद्र और राज्य सरकारों को निर्धारित आधारों पर सार्वजनिक आपातकाल या जनसुरक्षा के हित में दूरसंचार सेवाएँ निलंबित करने का अधिकार देती है।
दूरसंचार (सेवाओं का अस्थायी निलंबन) नियम, 2024: नवंबर 2024 में लागू इन नियमों ने वर्ष 2017 के नियमों का स्थान लिया। आदेश में प्रतिबंध के कारण, प्रभावित क्षेत्र, निलंबित सेवाओं और अवधि का उल्लेख होना आवश्यक है। किसी आदेश की अधिकतम अवधि 15 दिन है।
समीक्षा व्यवस्था: आदेश की प्रति 24 घंटे के भीतर संबंधित समीक्षा समिति को भेजनी होती है और समिति को पाँच दिनों के भीतर उसकी जाँच करनी होती है।
इंटरनेट शटडाउन का आदेश कौन दे सकता है?
केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय गृह सचिव और राज्य सरकार की ओर से संबंधित राज्य का गृह सचिव आदेश जारी कर सकता है।
अपरिहार्य परिस्थितियों में संयुक्त सचिव या उससे उच्च स्तर का अधिकृत अधिकारी आदेश जारी कर सकता है। ऐसे आदेश की सक्षम प्राधिकारी से 24 घंटे के भीतर पुष्टि आवश्यक है।
वर्ष 2024 के नियमों के प्रमुख प्रावधान
लिखित कारण: प्रत्येक निलंबन आदेश में प्रतिबंध लगाने के कारण दर्ज करना आवश्यक है।
सार्वजनिक करना: आदेश को सार्वजनिक करना आवश्यक है। इसमें प्रभावित भौगोलिक क्षेत्र, निलंबित सेवाओं और प्रतिबंध की अवधि का उल्लेख होना चाहिए।
अधिकतम अवधि: कोई आदेश 15 दिनों से अधिक लागू नहीं रह सकता।
समीक्षा: आदेश की प्रति 24 घंटे के भीतर संबंधित समीक्षा समिति को भेजनी होती है। समिति को पाँच दिनों के भीतर बैठक करके उसकी वैधता की जाँच करनी होती है।
आनुपातिकता: अधिकारियों को यह विचार करना चाहिए कि क्या उद्देश्य कम प्रतिबंधात्मक उपायों से प्राप्त किया जा सकता है।
न्यायिक सुरक्षा उपाय
अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ (2020): सर्वोच्च न्यायालय ने अनिश्चितकालीन इंटरनेट शटडाउन को अस्वीकार्य माना और कहा कि प्रतिबंधों को आवश्यकता तथा आनुपातिकता की कसौटी पर खरा उतरना चाहिए।
फहीमा शिरीन बनाम केरल राज्य (2019): केरल उच्च न्यायालय ने शिक्षा और निजता सहित मौलिक अधिकारों के उपयोग में इंटरनेट की महत्ता को स्वीकार किया।
प्रेस की स्वतंत्रता: सर्वोच्च न्यायालय ने प्रेस की स्वतंत्रता को अनुच्छेद 19(1)(a) के अंतर्गत मान्यता दी है।
क्या इंटरनेट बंद होने पर फोन कॉल जारी रह सकती हैं?
यदि आदेश केवल मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करता है, तो सामान्य वॉयस कॉल और SMS जारी रह सकते हैं।
व्हाट्सऐप कॉल जैसी इंटरनेट-आधारित सेवाओं के लिए इंटरनेट कनेक्शन आवश्यक है।
कुछ परिस्थितियों में आदेश के दायरे के अनुसार वॉयस कॉल, SMS और ब्रॉडबैंड सेवाएँ भी निलंबित की जा सकती हैं।
महत्त्व
कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताओं से निपटने के लिए इंटरनेट शटडाउन का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इससे शिक्षा, व्यवसाय, स्वास्थ्य सेवाएँ और सूचना तक पहुँच बाधित हो सकती है।
जनसुरक्षा और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए स्पष्ट आदेश, कानूनी समीक्षा और आनुपातिक प्रतिबंध आवश्यक हैं।
इंटरनेट शटडाउन के प्रमुख कारण
संघर्ष और हिंसा: सरकारें सांप्रदायिक हिंसा, सशस्त्र संघर्ष और सीमा तनाव के दौरान जन-एकत्रीकरण रोकने तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंटरनेट सेवाएँ बंद कर सकती हैं।
विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक अस्थिरता: प्रदर्शनों, चुनावों और राजनीतिक अशांति के दौरान इंटरनेट बंद करने से जनसंचार तथा विरोध गतिविधियाँ प्रभावित हो सकती हैं।
मानवाधिकार उल्लंघनों को छिपाना: इंटरनेट बंद होने से हिंसा और नागरिक अधिकारों के उल्लंघन की घटनाओं का दस्तावेजीकरण तथा रिपोर्टिंग बाधित हो सकती है। म्यांमार, सूडान, गाजा और ईरान में ऐसी चिंताएँ सामने आई हैं।
इंटरनेट शटडाउन के प्रभाव
नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध: इंटरनेट बंद होने से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सूचना तक पहुँच और ऑनलाइन भागीदारी प्रभावित होती है।
आर्थिक नुकसान: इससे व्यवसाय, बैंकिंग, ऑनलाइन लेन-देन, शिक्षा और अन्य आवश्यक सेवाएँ बाधित होती हैं।
मानवीय सहायता में बाधा: संचार बंद होने से आपातकालीन प्रतिक्रिया, बचाव कार्य और मानवीय सहायता पहुँचाने में कठिनाई हो सकती है।
जवाबदेही में कमी: इंटरनेट की अनुपलब्धता पत्रकारों और नागरिकों को मानवाधिकार उल्लंघनों की रिपोर्टिंग तथा सरकारी कार्रवाई की निगरानी करने से रोक सकती है।
डिजिटल बहिष्करण: लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने से विद्यार्थियों, छोटे व्यवसायों और ऑनलाइन सेवाओं पर निर्भर कमजोर वर्गों पर अधिक प्रभाव पड़ता है।
आगे की राह
इंटरनेट शटडाउन का उपयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में अंतिम उपाय के रूप में किया जाना चाहिए।
आदेशों में पारदर्शिता, समयबद्ध समीक्षा और न्यायिक जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
जहाँ संभव हो, पूर्ण इंटरनेट बंद करने के बजाय लक्षित प्रतिबंध और कानूनी प्रवर्तन उपाय अपनाए जाने चाहिए।
आपातकालीन संचार प्रणालियों और आवश्यक डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता सुरक्षित रखी जानी चाहिए।
राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के साथ संवैधानिक स्वतंत्रताओं के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. भारत में इंटरनेट शटडाउन को नियंत्रित करने वाले कानूनी प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
दूरसंचार (सेवाओं के अस्थायी निलंबन) नियम, 2024 के अंतर्गत इंटरनेट निलंबन का आदेश समीक्षा समिति की मंजूरी से अधिकतम 30 दिनों तक प्रभावी रह सकता है।
अपरिहार्य परिस्थितियों में संयुक्त सचिव स्तर या उससे ऊपर का अधिकृत अधिकारी निलंबन का आदेश जारी कर सकता है, बशर्ते सक्षम प्राधिकारी 24 घंटे के भीतर इसकी पुष्टि करे।
अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ (2020) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अनिश्चितकालीन इंटरनेट शटडाउन की अनुमति नहीं है तथा प्रतिबंधों को आवश्यकता और आनुपातिकता के मानदंडों पर खरा उतरना चाहिए।
मोबाइल इंटरनेट सेवाओं के निलंबन से सामान्य वॉइस कॉल और SMS सेवाएँ भी अनिवार्य रूप से बंद हो जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1, 3 और 4
(d) केवल 2, 3 और 4
उत्तर: (b) केवल 2 और 3
व्याख्या
दूरसंचार (सेवाओं के अस्थायी निलंबन) नियम, 2024 के अनुसार, निलंबन का आदेश अधिकतम 15 दिनों तक प्रभावी रह सकता है। अतः कथन 1 गलत है।
अपरिहार्य परिस्थितियों में संयुक्त सचिव स्तर या उससे ऊपर का अधिकृत अधिकारी निलंबन का आदेश जारी कर सकता है, लेकिन सक्षम प्राधिकारी द्वारा 24 घंटे के भीतर इसकी पुष्टि आवश्यक है। अतः कथन 2 सही है।
अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ (2020) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने अनिश्चितकालीन इंटरनेट शटडाउन को अस्वीकार्य माना तथा प्रतिबंधों के लिए आवश्यकता और आनुपातिकता के मानदंड निर्धारित किए। अतः कथन 3 सही है।
यदि आदेश केवल मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करता है, तो सामान्य वॉइस कॉल और SMS सेवाएँ जारी रह सकती हैं। अतः कथन 4 गलत है।