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Current Affairs - Daily 19 अक्टूबर 2026

भारतीय मूल की खगोलविद NASA के PUFFINS मिशन का नेतृत्व करेंगी

बेंगलुरु में पली-बढ़ी खगोलविद डॉ. रम्या अंचे NASA के PUFFINS मिशन की Principal Investigator चुनी गई हैं। यह मिशन अंतरतारकीय धूल के बेहद छोटे कणों का अध्ययन करेगा, जो तारों और ग्रहों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

PUFFINS अंतरिक्ष मिशन और अंतरतारकीय धूल का अध्ययन

NASA का PUFFINS मिशन

  • बेंगलुरु में जन्मी खगोलविद डॉ. रम्या अंचे को NASA के PUFFINS मिशन की Principal Investigator चुना गया है।
  • PUFFINS का पूरा नाम Polarimetry in the Ultraviolet to Find Features in INterStellar dust है।
  • यह एक SmallSat मिशन है, जिसे NASA के Astrophysics Pioneers Programme के तहत चुना गया है।
  • इस मिशन के लिए लगभग 2 करोड़ डॉलर नहीं, बल्कि 20 मिलियन डॉलर की फंडिंग दी गई है और इसे 2030 में लॉन्च करने का लक्ष्य है।

मिशन क्या अध्ययन करेगा?

  • PUFFINS में लगभग 10 इंच की दूरबीन होगी।
  • यह लगभग 70 दूरस्थ तारों से आने वाले पराबैंगनी प्रकाश का अध्ययन करेगी।
  • मिशन का मुख्य उद्देश्य तारों के बीच मौजूद अंतरतारकीय धूल के बेहद छोटे कणों का अध्ययन करना है।
  • ये कण 50 नैनोमीटर से भी छोटे हो सकते हैं।
  • इतने छोटे कणों का अध्ययन पारंपरिक ऑप्टिकल या इंफ्रारेड तकनीकों से करना कठिन है।

अंतरतारकीय धूल क्यों महत्वपूर्ण है?

  • अंतरतारकीय धूल आकाशगंगा में तारों के प्रकाश के प्रसार को प्रभावित करती है।
  • इसके अध्ययन से तारों और ग्रहों के निर्माण को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है।
  • मिशन यह भी अध्ययन करेगा कि धूल के कण मिल्की वे के चुंबकीय क्षेत्र के साथ किस प्रकार व्यवहार करते हैं।
  • इससे अंतरतारकीय धूल और ब्रह्मांड की संरचना एवं विकास से जुड़ी वैज्ञानिक समझ को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

UV Spectropolarimetry

  • PUFFINS UV spectropolarimetry तकनीक का उपयोग करेगा।
  • इसमें पराबैंगनी प्रकाश और उसके ध्रुवण (polarisation) से संबंधित जानकारी का अध्ययन किया जाता है।
  • उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लगभग 30 वर्षों से अंतरिक्ष से इस तकनीक का उपयोग नहीं किया गया है।
  • इससे अंतरतारकीय धूल के गुणों और व्यवहार के बारे में नई जानकारी मिलने की उम्मीद है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग

  • मिशन की टीम में लगभग 40 वैज्ञानिक, इंजीनियर, शोधार्थी और पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता शामिल हैं।
  • इसमें University of Arizona और McDonald Observatory सहित कई संस्थानों के वैज्ञानिक शामिल हैं।
  • भारत से इसमें IUCAA, पुणे और Indian Institute of Astrophysics (IIA), बेंगलुरु भाग ले रहे हैं।

महत्व

  • PUFFINS अंतरिक्ष विज्ञान में SmallSat आधारित वैज्ञानिक मिशनों की उपयोगिता को दर्शाता है।
  • यह पराबैंगनी ध्रुवण के माध्यम से अंतरतारकीय धूल का अध्ययन करेगा।
  • इसके परिणाम तारों और ग्रहों के निर्माण तथा ब्रह्मांड के विकास को समझने में योगदान दे सकते हैं।

अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न: NASA के PUFFINS मिशन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. PUFFINS एक SmallSat मिशन है, जिसे NASA के Astrophysics Pioneers Programme के तहत चुना गया है। 
  2. यह मिशन लगभग 70 दूरस्थ तारों से आने वाले पराबैंगनी प्रकाश का अध्ययन करेगा। 
  3. PUFFINS का मुख्य उद्देश्य मिल्की वे के बाहरी ग्रहों की सतह का प्रत्यक्ष अध्ययन करना है। 
  4. मिशन में भारत से केवल Indian Institute of Astrophysics (IIA), बेंगलुरु की भागीदारी है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

A. केवल 1 और 2

B. केवल 1 और 3

C. केवल 2 और 4

D. केवल 3 और 4

उत्तर: A. केवल 1 और 2

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है। PUFFINS एक SmallSat मिशन है, जिसे NASA के Astrophysics Pioneers Programme के तहत चुना गया है। अतः कथन 1 सही है।
  • कथन 2 सही है। PUFFINS लगभग 70 दूरस्थ तारों से आने वाले पराबैंगनी प्रकाश का अध्ययन करेगा। अतः कथन 2 सही है।
  • कथन 3 गलत है। PUFFINS का उद्देश्य बाहरी ग्रहों की सतह का अध्ययन करना नहीं, बल्कि अंतरतारकीय धूल के छोटे कणों का अध्ययन करना है। अतः कथन 3 गलत है।
  • कथन 4 गलत है। मिशन में भारत से IIA, बेंगलुरु के साथ IUCAA, पुणे भी भाग ले रहा है। अतः कथन 4 गलत है।