Current Affairs - Daily
9 अक्टूबर 2026
भारत में कौशल विकास: शिक्षा, रोजगार और बदलते श्रम बाजार के बीच अंतर
NITI Aayog की रिपोर्ट के अनुसार भारत में कौशल प्रशिक्षण का विस्तार हुआ है, लेकिन शिक्षा और रोजगार के बीच अभी भी बड़ा अंतर मौजूद है। रिपोर्ट ने व्यावसायिक शिक्षा, अप्रेंटिसशिप, AI, हरित उद्योग और बदलती नौकरियों के अनुरूप पुनः कौशल विकास पर जोर दिया है।
खबरों में क्यों?
- NITI Aayog ने ‘Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047’ रिपोर्ट जारी की है।
- रिपोर्ट भारत की शिक्षा, कौशल और रोजगार के बीच मौजूद अंतर को कम करने के लिए कौशल विकास व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता बताती है।
प्रमुख तथ्य
- भारत की लगभग 65% आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है, जो देश के लिए जनसांख्यिकीय लाभांश का अवसर है।
- 2014-15 से अब तक 7.67 करोड़ से अधिक लोगों ने कौशल आधारित प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
- इसके बावजूद केवल लगभग 8.25% स्नातक अपनी योग्यता के अनुरूप नौकरियों में कार्यरत हैं।
- 15–59 वर्ष की आयु के लगभग 65% लोगों के पास किसी भी प्रकार का प्रशिक्षण नहीं है।
- NSDC के 2022 के अध्ययन के अनुसार भारत में लगभग 2.9 करोड़ कुशल श्रमिकों की कमी है।
- केवल लगभग 8% भारतीय कंपनियां कर्मचारियों को कार्यस्थल पर प्रशिक्षण प्रदान करती हैं।
ITI और कौशल विकास की समस्याएं
- ITI में प्रशिक्षण अभी भी इलेक्ट्रीशियन और फिटर जैसे पारंपरिक तकनीकी ट्रेडों पर अधिक केंद्रित है।
- दूसरी ओर, रोजगार की मांग तेजी से सेवा क्षेत्र, AI, ऑटोमेशन और हरित प्रौद्योगिकी की ओर बढ़ रही है।
- कई ITI सीटें खाली रहती हैं, जिसका कारण पुराने पाठ्यक्रम, सामाजिक धारणा, लैंगिक आधार पर ट्रेड का चयन, प्रशिक्षकों की कमी और रोजगार से कमजोर संबंध हैं।
- ITI के विस्तार से प्रशिक्षण की गुणवत्ता और रोजगार परिणामों में समान सुधार नहीं हुआ है।
आगे की राह
- स्कूल से विश्वविद्यालय स्तर तक व्यावसायिक शिक्षा और रोजगार योग्य कौशल को बढ़ावा देना।
- कक्षा 9 से ‘Kaushal Tracks’ शुरू करना, जिन्हें स्थानीय और राष्ट्रीय रोजगार मांग से जोड़ा जाए।
- अप्रेंटिसशिप और कार्य-आधारित डिग्री एवं डिप्लोमा कार्यक्रमों को मजबूत करना।
- ITI के पाठ्यक्रमों को उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुसार अपडेट करना।
- AI, ऑटोमेशन, इलेक्ट्रिक वाहन और हरित प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों पर ध्यान देना।
- मौजूदा कर्मचारियों के लिए Upskilling और नए क्षेत्रों में जाने वालों के लिए Reskilling को बढ़ावा देना।
- महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए पारंपरिक लैंगिक धारणाओं को बदलना।
- सामान्य और व्यावसायिक शिक्षा दोनों में निवेश बढ़ाना।
- जर्मनी के प्रारंभिक व्यावसायिक शिक्षा मॉडल से सीख लेना।
मानव पूंजी का महत्व
- Gary Becker के अनुसार शिक्षा और प्रशिक्षण में निवेश से कौशल, आय और रोजगार क्षमता बढ़ती है।
- Theodore Schultz ने शिक्षा और प्रशिक्षण को दीर्घकालिक मानव पूंजी निवेश माना।
- भारत में प्रभावी कौशल विकास युवा आबादी को जनसांख्यिकीय लाभांश में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
नीति आयोग के बारे में:
- NITI Aayog (National Institution for Transforming India) भारत सरकार का प्रमुख नीति थिंक टैंक है।
- यह केंद्र और राज्यों को नीतिगत एवं रणनीतिक सलाह प्रदान करता है तथा दीर्घकालिक विकास के लिए दिशा-निर्देश देता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य विकास प्रक्रिया में रणनीतिक और नीतिगत सुझाव देना तथा नए विचारों के लिए मंच प्रदान करना है।
गठन और पृष्ठभूमि
- योजना आयोग की स्थापना मार्च 1950 में पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से आर्थिक नियोजन के लिए की गई थी।
- समय के साथ इसे अत्यधिक केंद्रीकृत और कठोर व्यवस्था के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा।
- राज्यों की विविध आवश्यकताओं को पर्याप्त रूप से ध्यान में न रखने के कारण इसमें सुधार की आवश्यकता महसूस हुई।
- योजना आयोग को 13 अगस्त 2014 को समाप्त कर दिया गया।
- इसके स्थान पर 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग की स्थापना की गई।
- नीति आयोग का गठन केंद्र सरकार के कार्यकारी प्रस्ताव (Executive Resolution) द्वारा हुआ।
- इसलिए नीति आयोग न तो संवैधानिक निकाय है और न ही वैधानिक निकाय।
संरचना
- अध्यक्ष: भारत के प्रधानमंत्री - पदेन।
- शासी परिषद (Governing Council):
- सभी राज्यों के मुख्यमंत्री।
- विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेशों दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री।
- बिना विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल।
- क्षेत्रीय परिषदें:
- एक से अधिक राज्यों या क्षेत्रों को प्रभावित करने वाले विशेष मुद्दों के समाधान के लिए गठित की जाती हैं।
- आवश्यकता के अनुसार प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई जाती हैं।
- संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल इसमें शामिल होते हैं
- इनकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री या उनके द्वारा नामित व्यक्ति करता है।
- विशेष आमंत्रित सदस्य: प्रधानमंत्री द्वारा संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों, विशेषज्ञ पेशेवरों और प्रैक्टिशनरों को नामित किया जा सकता है।
पूर्णकालिक संगठनात्मक ढांचा
- उपाध्यक्ष: प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त; कैबिनेट मंत्री का दर्जा।
- पूर्णकालिक सदस्य: राज्य मंत्री का दर्जा।
- अंशकालिक सदस्य: अधिकतम 2, जिन्हें विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों आदि से लिया जाता है।
- पदेन सदस्य: प्रधानमंत्री द्वारा नामित अधिकतम 4 केंद्रीय मंत्री।
- CEO: प्रधानमंत्री द्वारा निश्चित कार्यकाल के लिए नियुक्त; भारत सरकार के सचिव का दर्जा।
- सचिवालय: आवश्यकता के अनुसार गठित किया जाता है।
अभ्यास प्रश्न
प्र. नीति आयोग और भारत की कौशल विकास व्यवस्था के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- नीति आयोग संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित एक वैधानिक निकाय है, जिसे योजना आयोग के उत्तराधिकारी के रूप में बनाया गया था।
- नीति आयोग की शासी परिषद में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री शामिल होते हैं।
- नीति आयोग ने कक्षा 9 से स्थानीय और राष्ट्रीय रोजगार की मांग से जुड़े ‘कौशल ट्रैक’ शुरू करने का प्रस्ताव दिया है।
- नीति आयोग के CEO की नियुक्ति प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है और उन्हें भारत सरकार के सचिव का दर्जा प्राप्त होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2, 3 और 4
(c) केवल 1, 3 और 4
(d) केवल 2 और 4
उत्तर: (b) केवल 2, 3 और 4
व्याख्या
- नीति आयोग का गठन केंद्र सरकार के कार्यकारी प्रस्ताव (Executive Resolution) द्वारा किया गया था। यह न तो संवैधानिक और न ही वैधानिक निकाय है। अतः कथन 1 गलत है।
- नीति आयोग की शासी परिषद में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री शामिल होते हैं। अतः कथन 2 सही है।
- नीति आयोग ने कक्षा 9 से ‘कौशल ट्रैक’ (Kaushal Tracks) शुरू करने का प्रस्ताव दिया है, जिन्हें स्थानीय और राष्ट्रीय रोजगार की मांग से जोड़ा जाएगा। अतः कथन 3 सही है।
- नीति आयोग के CEO की नियुक्ति प्रधानमंत्री द्वारा निश्चित कार्यकाल के लिए की जाती है और उन्हें भारत सरकार के सचिव का दर्जा प्राप्त होता है। अतः कथन 4 सही है।
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