Current Affairs - Daily
12 अक्टूबर 2026
लोकनायक जयप्रकाश नारायण: संपूर्ण क्रांति और लोकतंत्र में योगदान
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) भारत को पश्चिम एशिया और यूरोप से जोड़ने वाली एक बहुआयामी संपर्क परियोजना है। इसके महत्व, भू-राजनीतिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) से संबंधित प्रमुख तथ्यों का अध्ययन करें।
चर्चा में क्यों?
- 6 अक्टूबर 2026 को IMEC के लिए फ्रांस के विशेष दूत ने पश्चिम एशिया में संघर्षों और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले समुद्री व्यापार के जोखिमों के बीच वैकल्पिक एवं विश्वसनीय व्यापार मार्गों की आवश्यकता पर जोर दिया।
- रिपोर्टों के अनुसार, ओमान, मिस्र, लेबनान, ग्रीस और साइप्रस ने भी इस पहल में शामिल होने में रुचि दिखाई।
IMEC क्या है?
- भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) की घोषणा सितंबर 2023 में नई दिल्ली में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी।
- इसका उद्देश्य समुद्री मार्गों, रेलवे, बंदरगाहों और अन्य बुनियादी ढाँचों के एकीकृत नेटवर्क के माध्यम से भारत, अरब प्रायद्वीप और यूरोप के बीच व्यापार एवं आर्थिक सहयोग बढ़ाना है।
- इस गलियारे के दो प्रमुख भाग हैं:
- पूर्वी गलियारा: समुद्री मार्गों के माध्यम से भारत को अरब की खाड़ी से जोड़ता है।
- उत्तरी गलियारा: रेलवे और समुद्री संपर्कों के माध्यम से अरब की खाड़ी को यूरोप से जोड़ने की परिकल्पना करता है। इसमें सऊदी अरब, जॉर्डन और इजरायल से होकर गुजरने वाला प्रस्तावित मार्ग शामिल है।
- भारत, अमेरिका, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, इटली, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने इस पहल का समर्थन किया है।
- इसमें बिजली पारेषण नेटवर्क, स्वच्छ हाइड्रोजन पाइपलाइन और समुद्र के नीचे डिजिटल केबल विकसित करने की भी परिकल्पना है।
भारत के लिए IMEC का महत्व
- तेज व्यापार: इस गलियारे से भारत और यूरोप के बीच परिवहन समय में लगभग 40% की कमी आने का अनुमान है। वास्तविक बचत मार्ग और परिचालन दक्षता पर निर्भर करेगी।
- वैकल्पिक संपर्क: इससे भारत को व्यापार के लिए अतिरिक्त मार्ग मिलेंगे और स्वेज नहर जैसे पारंपरिक समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम हो सकती है।
- आर्थिक विकास: बेहतर संपर्क से परिवहन लागत घट सकती है, निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है और निवेश आकर्षित हो सकता है।
- रणनीतिक महत्व: IMEC चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) के विकल्प के रूप में देखा जाता है। भारत इसका विरोध करता है, क्योंकि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरता है।
- क्षेत्रीय सहयोग: यह परियोजना खाड़ी देशों और यूरोप के साथ भारत के आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों को मजबूत कर सकती है।
कार्यान्वयन की प्रमुख चुनौतियाँ
- क्षेत्रीय संघर्ष: गाजा संघर्ष और पश्चिम एशिया में व्यापक तनाव जॉर्डन तथा इजरायल से गुजरने वाले प्रस्तावित स्थलीय मार्ग को प्रभावित करते हैं।
- राजनयिक मतभेद: क्षेत्रीय देशों के बीच तनाव और सऊदी अरब-इजरायल संबंधों के सामान्य होने को लेकर अनिश्चितता परियोजना में बाधा डालती है।
- वित्तपोषण एवं बुनियादी ढाँचा: इस परियोजना के लिए बड़े निवेश, कई देशों के बीच समन्वय और नए परिवहन संपर्कों के निर्माण की आवश्यकता है।
- आर्थिक व्यवहार्यता: रेलवे निर्माण, माल के स्थानांतरण और संचालन की लागत को पर्याप्त व्यापार से होने वाले लाभ के अनुरूप होना चाहिए।
- सुरक्षा जोखिम: होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के आसपास अस्थिरता क्षेत्रीय आपूर्ति शृंखलाओं के लिए जोखिम बढ़ाती है।
आगे की राह
- भागीदार देशों के बीच एक संयुक्त समन्वय तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए।
- सार्वजनिक एवं निजी निवेश और बहुपक्षीय वित्तपोषण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
- व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और व्यवधानों का जोखिम घटाने के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित किए जाने चाहिए।
- परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए, जिसकी शुरुआत आर्थिक रूप से व्यवहार्य हिस्सों से हो।
अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC)
- INSTC भारत, रूस और ईरान द्वारा शुरू की गई एक बहुआयामी परिवहन पहल है। इसका उद्देश्य हिंद महासागर और फारस की खाड़ी को कैस्पियन सागर तथा उत्तरी यूरोप से जोड़ना है।
- इसके प्रस्तावित मार्ग में मुंबई से ईरान के बंदरगाहों तक समुद्री परिवहन, कैस्पियन सागर के पार रूस तक संपर्क और आगे यूरोप तक माल की आवाजाही शामिल है।
- इसका उद्देश्य पारंपरिक स्वेज नहर मार्ग की तुलना में परिवहन समय को लगभग 25 दिन और माल ढुलाई लागत को लगभग 30% तक कम करना है।
- IMEC और INSTC दोनों भारत को व्यापार मार्गों में विविधता लाने, क्षेत्रीय साझेदारियाँ मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) तथा अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- IMEC में भारत को अरब की खाड़ी से जोड़ने वाला पूर्वी समुद्री गलियारा तथा अरब की खाड़ी को यूरोप से जोड़ने वाला उत्तरी गलियारा प्रस्तावित है।
- INSTC भारत को मध्य एशिया से होकर गुजरने वाले केवल रेलवे नेटवर्क के माध्यम से यूरोप से जोड़ता है।
- IMEC का उद्देश्य व्यापार मार्गों में विविधता लाना तथा चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) के विकल्प के रूप में संपर्क व्यवस्था विकसित करना है।
- IMEC और INSTC दोनों व्यापारिक संपर्क बेहतर बनाने का प्रयास करते हैं, लेकिन उनके प्रस्तावित भौगोलिक मार्ग अलग-अलग हैं।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 1, 3 और 4
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2, 3 और 4
सही उत्तर: (b) केवल 1, 3 और 4
व्याख्या
- कथन 1 सही है। IMEC में भारत को अरब की खाड़ी से जोड़ने वाला पूर्वी समुद्री गलियारा तथा अरब की खाड़ी को यूरोप से जोड़ने वाला उत्तरी गलियारा प्रस्तावित है, जिसमें रेलवे और समुद्री मार्ग शामिल हैं।
- कथन 2 गलत है। INSTC केवल रेलवे नेटवर्क पर आधारित नहीं है, बल्कि इसमें समुद्री, सड़क और रेल परिवहन शामिल हैं। इसका प्रस्तावित मार्ग भारत से ईरान, कैस्पियन सागर और रूस होते हुए यूरोप तक जाता है।
- कथन 3 सही है। IMEC का उद्देश्य भारत के व्यापार मार्गों में विविधता लाना और चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) के विकल्प के रूप में एक वैकल्पिक संपर्क नेटवर्क विकसित करना है।
- कथन 4 सही है। IMEC भारत को अरब की खाड़ी और यूरोप से जोड़ने पर केंद्रित है, जबकि INSTC ईरान, कैस्पियन सागर और रूस के माध्यम से उत्तरी यूरोप तक संपर्क स्थापित करने की परिकल्पना करता है।
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