भारत में भूजल स्तर में लगातार गिरावट
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की State of Global Water Resources 2025 रिपोर्ट के अनुसार भारत में भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। अत्यधिक भूजल दोहन और अपर्याप्त पुनर्भरण के कारण जल संतुलन पर दबाव बढ़ रहा है।
भारत में भूजल स्तर में लगातार गिरावट
चर्चा में क्यों?
- विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की State of Global Water Resources 2025 रिपोर्ट के अनुसार भारत में भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।
यह समस्या विशेष रूप से उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में गंभीर है, जहां भूजल का अधिक दोहन होता है।
प्रमुख वैश्विक निष्कर्ष
- सबसे सूखे वर्षों में से एक: 2025 में वैश्विक नदी प्रवाह 35 वर्षों में सबसे कम स्तरों में रहा। विश्व के 36% नदी बेसिन क्षेत्र में सामान्य से कम प्रवाह दर्ज किया गया।
- असामान्य नदी प्रवाह: लगातार सातवें वर्ष, केवल 34–38% नदी बेसिनों में सामान्य जल-प्रवाह रहा, जबकि 1991–2020 का औसत 46% था।
- जल भंडारण में गिरावट: लगभग 2014–16 से वैश्विक स्थलीय जल भंडारण में लगातार कमी देखी जा रही है, जो मीठे जल के दीर्घकालिक ह्रास को दर्शाती है।
- भूजल पर दबाव: 2025 में दुनिया के लगभग दो-तिहाई निगरानी किए गए कुओं का जलस्तर अपने ऐतिहासिक स्तरों से बाहर रहा और स्थिति जल-अभाव की ओर बढ़ी।
- ग्लेशियरों का नुकसान: 2025 में लगातार चौथे वर्ष प्रमुख हिमनद क्षेत्रों में व्यापक बर्फ हानि हुई। इस जल-वर्ष में ग्लेशियरों ने लगभग 408 ± 132 गीगाटन बर्फ खोई।
- कई क्षेत्रों में बाढ़ और सूखे की घटनाएँ जारी रहीं और इनके बीच पुनर्प्राप्ति का समय भी कम रहा। एशिया और अफ्रीका सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र रहे।
- जल-विज्ञान संबंधी निगरानी में सुधार हुआ है, लेकिन एशिया और अफ्रीका में अभी भी पर्याप्त निगरानी सुविधाएँ नहीं हैं, जबकि ये क्षेत्र जल संबंधी चरम घटनाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं।
भारत से संबंधित प्रमुख निष्कर्ष
- उत्तरी भारत में जल भंडारण में कमी: 2025 में उत्तरी भारत में स्थलीय जल भंडारण सामान्य से कम रहा। इसमें भूजल, मिट्टी की नमी, नदियाँ, झीलें, जलाशय, बर्फ और हिम शामिल हैं।
- भूजल संकट: 2022–25 के दौरान भारत में लगातार भूजल की कमी देखी गई। उत्तर-पश्चिमी भारत में सामान्य से कम और बहुत कम भूजल स्तर विशेष रूप से व्यापक रहे।
- गंगा–सिंधु क्षेत्र: 2021–25 के दौरान गंगा–सिंधु के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में स्थलीय जल भंडारण बार-बार सामान्य से कम रहा।
- दक्षिण एशिया के ग्लेशियर: South Asia West ग्लेशियर क्षेत्र में वार्षिक बर्फ-द्रव्यमान संतुलन रिकॉर्ड के तीन सबसे नकारात्मक वर्षों में रहा। इससे हिमालयी जल उपलब्धता पर दीर्घकालिक प्रभाव की चिंता बढ़ती है।
- सतही जल और भूजल में अंतर: भूजल संकट के बावजूद, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में 2025 के दौरान नदी प्रवाह सामान्य से अधिक रहा। इसलिए अधिक नदी प्रवाह का अर्थ यह नहीं है कि दीर्घकालिक भूजल और जल-भंडारण की कमी समाप्त हो गई।
- भारत की जलवायु स्थिति: WMO द्वारा रिपोर्ट किए गए भारतीय मौसम विभाग के आँकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत में वर्षा 1971–2020 के दीर्घकालिक औसत की 110% रही, जबकि देश का औसत वार्षिक तापमान 1991–2020 के औसत से 0.28°C अधिक रहा।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO)
- विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की स्थापना 1950 में संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक विशेष एजेंसी के रूप में हुई।
- इसका विकास अंतर्राष्ट्रीय मौसम विज्ञान संगठन (IMO) से हुआ, जिसकी स्थापना 1873 में हुई थी
- WMO मौसम, जलवायु, जल विज्ञान और संबंधित पर्यावरणीय विज्ञानों के क्षेत्र में कार्य करता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय सहयोग तथा वैज्ञानिक जानकारी और तकनीक के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।
- विश्व मौसम विज्ञान कांग्रेस इसका सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है।
- कार्यकारी परिषद इसकी नीतियों को लागू करती है, जबकि सचिवालय प्रशासनिक कार्य संभालता है।
- इसके 193 सदस्य हैं और इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न- WMO की State of Global Water Resources 2025 रिपोर्ट के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- वर्ष 2025 में उत्तरी भारत में भूमि पर उपलब्ध कुल जल भंडारण सामान्य से कम रहा, जबकि दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में नदी प्रवाह सामान्य से अधिक रहा।
- भारत में 2022–25 के दौरान लगातार भूजल की कमी देखी गई, जिसका प्रभाव विशेष रूप से उत्तर-पश्चिमी भारत में व्यापक था।
- रिपोर्ट के अनुसार सामान्य से अधिक नदी प्रवाह का अर्थ अनिवार्य रूप से भूजल और दीर्घकालिक जल भंडारण में सुधार है।
- दक्षिण एशिया पश्चिमी ग्लेशियर क्षेत्र में वार्षिक ग्लेशियर द्रव्यमान संतुलन रिकॉर्ड के तीन सबसे नकारात्मक वर्षों में रहा।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 1, 2 और 4
C. केवल 2, 3 और 4
D. 1, 2, 3 और 4
उत्तर: B. केवल 1, 2 और 4
व्याख्या:
- उत्तरी भारत में कुल जल भंडारण सामान्य से कम रहा, जबकि दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में नदी प्रवाह सामान्य से अधिक था। अतः कथन 1 सही है।
- भारत में 2022–25 के दौरान लगातार भूजल कमी देखी गई, विशेषकर उत्तर-पश्चिमी भारत में। अतः कथन 2 सही है।
- नदी प्रवाह अधिक होना भूजल या दीर्घकालिक जल भंडारण में सुधार का अनिवार्य संकेत नहीं है। अतः कथन 3 गलत है।
दक्षिण एशिया पश्चिमी ग्लेशियर क्षेत्र में ग्लेशियर द्रव्यमान संतुलन रिकॉर्ड के तीन सबसे नकारात्मक वर्षों में रहा। अतः कथन 4 सही है।
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