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Current Affairs - Daily 19 अक्टूबर 2026

भारत-चीन व्यापार में बढ़ता असंतुलन: कारण, चुनौतियां और आगे की राह

भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन भारत का व्यापार घाटा भी लगातार बढ़ रहा है। जनवरी-सितंबर 2026 के दौरान भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 105.93 अरब डॉलर रहा। बाजार पहुंच, गैर-टैरिफ बाधाएं और चीनी मध्यवर्ती एवं तैयार वस्तुओं पर निर्भरता प्रमुख चिंताएं हैं।

भारत-चीन व्यापार: बढ़ता व्यापार, लेकिन लगातार असंतुलन

  • भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन व्यापार संतुलन अभी भी चीन के पक्ष में काफी अधिक है।
  • जनवरी-सितंबर 2026 के दौरान दोनों देशों का कुल व्यापार 25.4% बढ़कर 144.45 अरब डॉलर हो गया।
  • इसी अवधि में चीन को भारत का निर्यात 40.7% बढ़कर 19.26 अरब डॉलर हो गया।
  • दूसरी ओर, चीन से भारत का आयात 125.19 अरब डॉलर रहा, जिसमें 23.3% की वृद्धि हुई।
  • इसके कारण भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 105.93 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में 20.7% अधिक है।

व्यापार घाटे के प्रमुख कारण

  • चीनी मध्यवर्ती वस्तुओं पर निर्भरता: भारतीय उद्योग उत्पादन के लिए चीन से कलपुर्जे, मशीनरी, कच्चा माल और अन्य इनपुट आयात करते हैं। इससे उत्पादन को मदद मिलती है, लेकिन आपूर्ति शृंखला बाहरी व्यवधानों के प्रति संवेदनशील होती है।
  • तैयार वस्तुओं का आयात: इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी जैसी वस्तुओं का बड़े पैमाने पर आयात घरेलू कंपनियों के लिए उत्पादन और मूल्य संवर्धन के अवसर कम कर सकता है।
  • व्यापार की असमान संरचना: भारत चीन से बड़ी मात्रा में औद्योगिक सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी आयात करता है, जबकि चीन को भारत का निर्यात अपेक्षाकृत कम उत्पादों तक सीमित है।
  • बाजार पहुंच की समस्या: भारत का कहना है कि उसके कई प्रतिस्पर्धी उत्पादों को चीन के बाजार में पर्याप्त पहुंच नहीं मिलती।

गैर-टैरिफ बाधाएं

  • गैर-टैरिफ बाधाएं सीमा शुल्क के अलावा ऐसे नियम और प्रक्रियाएं हैं जो विदेशी वस्तुओं के आयात को प्रभावित करती हैं।
  • इनमें तकनीकी मानक, प्रमाणन, लाइसेंस और स्वास्थ्य एवं पादप स्वच्छता संबंधी नियम शामिल हो सकते हैं।
  • ऐसे नियम स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए आवश्यक हो सकते हैं। लेकिन यदि उनकी प्रक्रिया अस्पष्ट, लंबी या भेदभावपूर्ण हो, तो वे बाजार पहुंच को कठिन बना सकते हैं।
  • भारत ने चीन को जेनेरिक दवाओं, बोवाइन मांस, सब्जियों और अन्य जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं बताई हैं।

रणनीतिक और आपूर्ति शृंखला संबंधी चिंताएं

  • उर्वरक और दुर्लभ मृदा तत्वों जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों पर चीन के निर्यात नियंत्रण से भारतीय उद्योगों के सामने अनिश्चितता बढ़ सकती है।
  • चीनी कलपुर्जों और मशीनरी पर निर्भरता से भारतीय उद्योग कीमतों में बदलाव और आपूर्ति बाधाओं के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं।
  • तैयार वस्तुओं पर अत्यधिक निर्भरता घरेलू विनिर्माण क्षमता के विकास को प्रभावित कर सकती है।
  • चीन से अधिक आयात भारत के कुल आयात बिल पर दबाव बढ़ाता है।

भारत का दृष्टिकोण

  • भारत व्यापार असंतुलन दूर करने के लिए टैरिफ या दंडात्मक कार्रवाई की बजाय बातचीत को प्राथमिकता देता है।
  • सितंबर 2026 में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने व्यापार असंतुलन, आपूर्ति शृंखला और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
  • भारत अन्य देशों के साथ व्यापार समझौतों को भी आगे बढ़ा रहा है। इससे नए बाजार मिल सकते हैं और किसी एक व्यापारिक साझेदार पर अत्यधिक निर्भरता कम हो सकती है।

आगे की राह

  • चीन में भारतीय उत्पादों की बाजार पहुंच बेहतर करने के लिए नियामक बाधाओं का पारदर्शी और समयबद्ध समाधान किया जाए।
  • फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, प्रसंस्कृत खाद्य और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात को बढ़ाया जाए।
  • बुनियादी ढांचे, तकनीक और उत्पादकता में सुधार करके घरेलू विनिर्माण को मजबूत किया जाए।
  • महत्वपूर्ण कच्चे माल और कलपुर्जों के लिए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत विकसित किए जाएं।
  • द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार समझौतों का विस्तार किया जाए।
  • उच्च मूल्य संवर्धन वाली वस्तुओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत की जाए।

अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न: भारत-चीन व्यापार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा मुख्यतः चीन से तैयार वस्तुओं के आयात के कारण है, जबकि मध्यवर्ती वस्तुओं का आयात इस असंतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभाता। 
  2. गैर-टैरिफ बाधाओं में तकनीकी मानक, प्रमाणन, लाइसेंसिंग तथा सैनिटरी एवं फाइटोसैनिटरी उपाय शामिल हो सकते हैं। 
  3. भारत के चीन को निर्यात में वृद्धि के बावजूद, निर्यात की तुलना में आयात का स्तर काफी अधिक बना हुआ है।  
  4. भारत व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए दंडात्मक टैरिफ की बजाय संवाद और बातचीत को प्राथमिकता देता है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

A. केवल 1 और 2

B. केवल 2 और 3

C. केवल 2, 3 और 4

D. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: C. केवल 2, 3 और 4

व्याख्या:

  • कथन 1 गलत है। भारत के उद्योग चीन से कलपुर्जे, मशीनरी, कच्चा माल और अन्य मध्यवर्ती वस्तुएं भी बड़े पैमाने पर आयात करते हैं। अतः मध्यवर्ती वस्तुओं का आयात व्यापार असंतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • कथन 2 सही है। गैर-टैरिफ बाधाओं में तकनीकी मानक, प्रमाणन आवश्यकताएं, लाइसेंसिंग प्रक्रियाएं तथा सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी उपाय शामिल हो सकते हैं।
  • कथन 3 सही है। जनवरी-सितंबर 2026 में भारत का चीन को निर्यात 40.7% बढ़कर 19.26 अरब डॉलर हुआ, लेकिन चीन से आयात 125.19 अरब डॉलर रहा। इसलिए निर्यात बढ़ने के बावजूद व्यापार असंतुलन बना हुआ है।
  • कथन 4 सही है। भारत ने व्यापार असंतुलन और बाजार पहुंच से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए दंडात्मक टैरिफ के बजाय संवाद और बातचीत को प्राथमिकता दी है।