Current Affairs - Daily
6 अक्टूबर 2026
भारत की ब्लू इकोनॉमी: समुद्री संसाधनों से विकास की नई संभावनाएँ
भारत अपनी विशाल तटरेखा और समुद्री संसाधनों का उपयोग आर्थिक विकास, रोजगार, मत्स्य पालन, ऊर्जा और समुद्री अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कर रहा है। हालांकि, इस विकास के साथ समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और तटीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
भारत की ब्लू इकोनॉमी: विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन
चर्चा में क्यों?
- भारत व्यापार, मत्स्य पालन, पर्यटन, ऊर्जा और समुद्री अनुसंधान के लिए अपने समुद्री संसाधनों का व्यापक उपयोग करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
- 11,098 किमी लंबी तटरेखा भारत को समुद्री क्षेत्र के विकास की व्यापक संभावनाएँ प्रदान करती है।
- इसके साथ समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और तटीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
ब्लू इकोनॉमी क्या है?
- ब्लू इकोनॉमी का अर्थ समुद्र और तटीय संसाधनों का इस प्रकार उपयोग करना है, जिससे आर्थिक विकास, रोजगार और आजीविका को बढ़ावा मिले तथा समुद्री पर्यावरण भी सुरक्षित रहे।
- इसके प्रमुख क्षेत्र हैं:
- मत्स्य पालन और जलीय कृषि
- बंदरगाह और समुद्री परिवहन
- तटीय पर्यटन
- अपतटीय नवीकरणीय ऊर्जा
- समुद्री जैव-प्रौद्योगिकी
- समुद्री अनुसंधान और मानचित्रण
समुद्री बुनियादी ढाँचे का विस्तार
- वित्त वर्ष 2025–26 में भारत के प्रमुख बंदरगाहों ने 915.17 मिलियन टन माल संभाला, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.06% अधिक है।
- भारत के लगभग 95% व्यापार की मात्रा समुद्री मार्गों से परिवहन की जाती है।
- सागरमाला कार्यक्रम 2015 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य बंदरगाहों के विकास और सड़क, रेल तथा अंतर्देशीय जलमार्गों के साथ बेहतर संपर्क स्थापित करना है।
- इसके तहत लगभग ₹6.06 लाख करोड़ की 845 परियोजनाएँ शुरू की गई हैं।
- मार्च 2026 तक:
- 315 परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं।
- 210 परियोजनाएँ कार्यान्वयन के अधीन हैं।
- 320 परियोजनाएँ योजना स्तर पर हैं।
मत्स्य पालन और आजीविका
- मत्स्य पालन और जलीय कृषि से लगभग 3 करोड़ लोगों की आजीविका जुड़ी है।
- भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और वैश्विक मछली उत्पादन में लगभग 8% योगदान देता है।
- समुद्री खाद्य निर्यात 2024–25 में ₹62,408 करोड़ से बढ़कर 2025–26 में ₹73,890 करोड़ हो गया।
- मछुआरों की आय बढ़ाने के लिए बेहतर मछली उतारने की सुविधाएँ, कोल्ड स्टोरेज, सस्ता ऋण, प्रसंस्करण और बाजार तक पहुँच आवश्यक हैं।
समुद्र से जुड़ी नई संभावनाएँ
- ₹7,453 करोड़ की योजना के तहत गुजरात और तमिलनाडु के तटों पर कुल 1 GW अपतटीय पवन ऊर्जा क्षमता विकसित करने की योजना है।
- ₹4,077 करोड़ का डीप ओशन मिशन समुद्री जैव-विविधता, समुद्री अवलोकन, पानी के भीतर तकनीक और गहरे समुद्र के अध्ययन पर केंद्रित है।
ब्लू फाइनेंस
- ब्लू बॉन्ड ऐसे ऋण साधन हैं, जिनसे प्राप्त धन का उपयोग समुद्र और जल से जुड़ी टिकाऊ परियोजनाओं में किया जाता है।
- SEBI के 2023 ढाँचे में ब्लू बॉन्ड को ऋण प्रतिभूतियों के अंतर्गत शामिल किया गया।
- भारत में ब्लू फाइनेंस की सफलता के लिए मजबूत परियोजनाएँ, पारदर्शिता और पर्यावरणीय परिणामों की स्पष्ट निगरानी आवश्यक है।
- सागरमाला के तहत प्रस्तावित ₹600 करोड़ के ब्लू बॉन्ड को निवेशकों द्वारा अधिक ब्याज दर की मांग किए जाने के बाद वापस लेना पड़ा। इससे स्पष्ट होता है कि केवल पर्यावरण-अनुकूल लेबल से सस्ती वित्तीय सहायता सुनिश्चित नहीं होती।
भारत के लिए ब्लू इकोनॉमी का महत्व
- समुद्री संसाधन
- मत्स्य पालन: मछली उत्पादन से खाद्य सुरक्षा, निर्यात और तटीय आजीविका को बढ़ावा मिलता है।
- खनिज: भारत के समुद्री क्षेत्रों में इल्मेनाइट, मोनाजाइट, जिरकॉन और रूटाइल जैसे खनिज पाए जाते हैं।
- हाइड्रोकार्बन: समुद्री क्षेत्र तेल और प्राकृतिक गैस के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
- नवीकरणीय ऊर्जा: समुद्र से अपतटीय पवन, ज्वारीय, तरंग और समुद्री तापीय ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।
- बंदरगाह, जहाजरानी और पर्यटन
- बंदरगाह आधारित विकास: बंदरगाह व्यापार, उद्योग और तटीय विकास को बढ़ावा देते हैं।
- जहाजरानी: भारत के लगभग 95% व्यापार की मात्रा समुद्री मार्गों से परिवहन होती है।
- तटीय पर्यटन: यह रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है।
- समुद्री विज्ञान और सेवाएँ
- समुद्री आँकड़े मौसम पूर्वानुमान, सुनामी चेतावनी, मत्स्य सलाह और तेल रिसाव की निगरानी में मदद करते हैं।
- समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग समुद्री जैव-विविधता और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में मदद करता है।
- रोजगार के अवसर
- ब्लू इकोनॉमी में मत्स्य पालन, जलीय कृषि, पर्यटन, जहाज निर्माण और समुद्री उद्योगों में रोजगार की संभावनाएँ हैं।
भारत की ब्लू इकोनॉमी की चुनौतियाँ
- अत्यधिक मत्स्यन: अधिक मछली पकड़ने से मछली भंडार और समुद्री पारिस्थितिकी को नुकसान होता है।
- समुद्री प्रदूषण: प्लास्टिक, तेल रिसाव और औद्योगिक अपशिष्ट समुद्री पर्यावरण को नुकसान पहुँचाते हैं।
- बुनियादी ढाँचे की कमी: कमजोर बंदरगाह और परिवहन संपर्क तटीय विकास को सीमित करते हैं।
- समुद्री डकैती और विवाद: समुद्री डकैती, असुरक्षित समुद्री मार्ग और सीमा विवाद जहाजरानी तथा मत्स्य पालन के लिए खतरा हैं।
- जलवायु परिवर्तन: समुद्र-स्तर में वृद्धि, चक्रवातों की तीव्रता और समुद्री परिस्थितियों में बदलाव तटीय समुदायों को प्रभावित करते हैं।
आगे की राह
- भारत को ब्लूवॉशिंग से बचना होगा, जिसमें किसी परियोजना को “ब्लू” बताकर वास्तविक पर्यावरणीय लाभ के बिना वित्त प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है।
- स्वतंत्र मूल्यांकन, धन के उपयोग में पारदर्शिता और नियमित रिपोर्टिंग आवश्यक है।
- भारत की ब्लू इकोनॉमी का लक्ष्य आर्थिक विकास, तटीय समुदायों की आजीविका और समुद्री संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना होना चाहिए।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. भारत की ब्लू इकोनॉमी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- सागरमाला कार्यक्रम केवल प्रमुख बंदरगाहों के विकास पर केंद्रित है और इसमें सड़क, रेल तथा जलमार्गों के साथ संपर्क सुधारना शामिल नहीं है।
- ब्लू बॉन्ड ऐसे ऋण साधन हैं, जिनसे प्राप्त धन को टिकाऊ जल एवं समुद्र से संबंधित परियोजनाओं के लिए निर्धारित किया जाता है।
- भारत की ब्लू इकोनॉमी में मत्स्य पालन और जहाजरानी जैसे पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ अपतटीय नवीकरणीय ऊर्जा और समुद्री जैव-प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्र भी शामिल हैं।
- प्रस्तावित सागरमाला ब्लू बॉन्ड को वापस लिए जाने से यह स्पष्ट होता है कि केवल पर्यावरणीय मान्यता कम ब्याज दर पर ऋण सुनिश्चित नहीं कर सकती।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
(a) केवल 2 और 3
(b) केवल 1 और 4
(c) केवल 2, 3 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: (c) केवल 2, 3 और 4
व्याख्या:
- सागरमाला कार्यक्रम बंदरगाह आधारित विकास के साथ सड़क, रेल और जलमार्गों से संपर्क सुधारने पर भी केंद्रित है। अतः कथन 1 गलत है।
- ब्लू बॉन्ड ऐसे ऋण साधन हैं, जिनकी राशि का उपयोग टिकाऊ जल और समुद्री परियोजनाओं के लिए किया जाता है। अतः कथन 2 सही है।
- भारत की ब्लू इकोनॉमी में मत्स्य पालन और जहाजरानी के साथ अपतटीय नवीकरणीय ऊर्जा और समुद्री जैव-प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्र भी शामिल हैं। अतः कथन 3 सही है।
- प्रस्तावित ₹600 करोड़ के सागरमाला ब्लू बॉन्ड को निवेशकों द्वारा अधिक ब्याज दर की मांग के बाद वापस लिया गया। इससे पता चलता है कि केवल पर्यावरणीय लेबल कम लागत वाला वित्त सुनिश्चित नहीं करता। अतः कथन 4 सही है।
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