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Current Affairs - Daily 15 अक्टूबर 2026

यमन में हूतियों का उदय और ईरान से उनके संबंध

हूती आंदोलन यमन में एक धार्मिक पुनरुत्थानवादी समूह से विकसित होकर एक प्रमुख राजनीतिक और सैन्य शक्ति बन गया है। इसके उदय में जायद़ी शिया पहचान, आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता और ईरान का समर्थन महत्वपूर्ण रहे हैं।

खबरों में क्यों?

  • हूती यमन का एक विद्रोही आंदोलन है, जिसके ईरान के साथ करीबी संबंध हैं।
  • यह संगठन यमन के बड़े उत्तरी हिस्से, जिसमें राजधानी सना भी शामिल है, पर प्रभाव रखता है और वहां वास्तविक सत्ता के रूप में कार्य करता है।

उत्पत्ति और विचारधारा

  • हूती स्वयं को अंसार अल्लाह यानी “अल्लाह के समर्थक” कहते हैं।
  • यह आंदोलन जायद़ी शिया इस्लाम से जुड़ा है, जिसका प्रमुख आधार उत्तरी यमन है।
  • हुसैन अल-हूती ने 1990 के दशक में Believing Youth आंदोलन शुरू किया।
  • 2002 के बाद आंदोलन ने अमेरिकी प्रभाव और इजरायल की नीतियों का विरोध तेज किया।
  • भ्रष्टाचार, खराब शासन, आर्थिक कठिनाइयों और जायद़ी समुदायों के हाशिए पर होने की भावना ने भी इसके विस्तार में योगदान दिया।

सत्ता की ओर:

  • 2004 में हुसैन अल-हूती की सरकारी बलों के साथ संघर्ष में मृत्यु हो गई।
  • इसके बाद उनके भाई अब्दुलमलिक अल-हूती ने नेतृत्व संभाला।
  • 2005–2010 के बीच हुए संघर्षों ने हूतियों की सैन्य क्षमता को मजबूत किया।
  • अरब स्प्रिंग के बाद यमन में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी।
  • 2014 में हूतियों ने सना पर कब्जा कर लिया और राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी को राजधानी छोड़नी पड़ी।

सऊदी हस्तक्षेप

  • मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हूतियों के खिलाफ ऑपरेशन डिसाइसिव स्टॉर्म शुरू किया।
  • इसका उद्देश्य यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को पुनः स्थापित करना और ईरानी प्रभाव का मुकाबला करना था।
  • अभियान हूतियों को निर्णायक रूप से हटाने में सफल नहीं हुआ और यमन का संघर्ष लंबे समय तक जारी रहा।

ईरान से संबंध

  • ईरान हूतियों को राजनीतिक और राजनयिक समर्थन देता है तथा उनके साथ करीबी संबंध रखता है।
  • हालांकि, हूतियों को केवल ईरान का “प्रॉक्सी” मानना उनके स्थानीय राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक आधार को नजरअंदाज कर सकता है।
  • यमन की आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट, जनजातीय संरचना और सांप्रदायिक तनाव भी हूती आंदोलन के उदय के महत्वपूर्ण कारण हैं।
  • ओमान ने अपेक्षाकृत तटस्थ भूमिका बनाए रखी है और शांति वार्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अरब स्प्रिंग की उत्पत्ति

  • अरब स्प्रिंग की शुरुआत दिसंबर 2010 में ट्यूनीशिया से हुई।
  • एक सड़क विक्रेता मोहम्मद बुआज़ीज़ी ने स्थानीय अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न और अपना सामान जब्त किए जाने के विरोध में आत्मदाह कर लिया।
  • उनकी घटना ने जैस्मिन क्रांति को जन्म दिया, जिसमें राजनीतिक स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय, आर्थिक अवसर और निरंकुश शासन के अंत की मांग की गई।
  • बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों के कारण राष्ट्रपति ज़ीन अल-अबिदीन बेन अली को जनवरी 2011 में सत्ता छोड़कर देश से भागना पड़ा।
  • ट्यूनीशिया के आंदोलन से प्रेरित होकर मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (MENA) के कई देशों में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए।

प्रमुख आंदोलन और संघर्ष

  • मिस्र: जनवरी 2011 में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जिनका प्रमुख केंद्र तहरीर स्क्वायर था। राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने फरवरी 2011 में इस्तीफा दिया। हालांकि, शुरुआती लोकतांत्रिक परिवर्तन बाद में 2013 के सैन्य हस्तक्षेप के बाद उलट गए।
  • लीबिया: मुअम्मर गद्दाफी के खिलाफ प्रदर्शन सशस्त्र संघर्ष में बदल गए। 2011 में NATO ने हवाई अभियान चलाया। गद्दाफी की सत्ता समाप्त हुई और बाद में उनकी हत्या कर दी गई, लेकिन देश लंबे समय तक राजनीतिक और सैन्य संघर्ष में फंसा रहा।
  • सीरिया: 2011 में बशर अल-असद के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुए। सरकार की कठोर कार्रवाई के बाद यह आंदोलन लंबे गृहयुद्ध में बदल गया। इससे व्यापक मानवीय और शरणार्थी संकट पैदा हुआ।
  • यमन: प्रदर्शनों ने राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह की स्थिति कमजोर कर दी। खाड़ी देशों की मध्यस्थता से सत्ता अब्द रब्बुह मंसूर हादी को हस्तांतरित हुई। बाद में राजनीतिक अस्थिरता ने गृहयुद्ध का रूप ले लिया।
  • बहरीन: राजनीतिक और आर्थिक सुधारों की मांग को लेकर बड़े प्रदर्शन हुए। सरकार ने GCC सुरक्षा बलों की सहायता से आंदोलन को दबा दिया।
  • मोरक्को, अल्जीरिया, जॉर्डन और ओमान: सरकारों ने प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए राजनीतिक और आर्थिक रियायतें दीं।

क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव

  • अरब स्प्रिंग ने दिखाया कि जन-आंदोलन और सोशल मीडिया निरंकुश सरकारों के खिलाफ बड़े स्तर पर लोगों को संगठित कर सकते हैं।
  • इसके परिणाम अलग-अलग देशों में अलग रहे—ट्यूनीशिया में शुरुआत में लोकतांत्रिक सुधार हुए, जबकि लीबिया, सीरिया और यमन में लंबे समय तक अस्थिरता और संघर्ष जारी रहे।
  • इसने गृहयुद्ध, राजनीतिक अस्थिरता, सांप्रदायिक तनाव और प्रॉक्सी संघर्षों को बढ़ावा दिया।
  • सीरिया, लीबिया और यमन के संघर्षों ने बड़े पैमाने पर शरणार्थी और मानवीय संकट पैदा किए।
  • ईरान, सऊदी अरब और खाड़ी देशों जैसी क्षेत्रीय शक्तियों की भूमिका कई संघर्षों में बढ़ी।
  • इसके प्रभाव क्षेत्रीय सुरक्षा, प्रवासन, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार तक पहुंचे।

Arab Spring 2.0

  • 2019–20 के दौरान अरब देशों में एक नई लहर के रूप में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए।
  • अल्जीरिया: विरोध प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति अब्देलअज़ीज़ बुतफ्लिका को पद छोड़ना पड़ा।
  • सूडान: लंबे विरोध प्रदर्शनों के बाद सेना ने राष्ट्रपति ओमर अल-बशीर को सत्ता से हटा दिया।
  • इराक और लेबनान: भ्रष्टाचार, खराब शासन और आर्थिक संकट के खिलाफ बड़े प्रदर्शन हुए।
  • समान मांगों और क्षेत्रीय स्वरूप के कारण इस नई लहर को कई बार “Arab Spring 2.0” कहा गया।

 

अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न. हूती आंदोलन और अरब स्प्रिंग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. हूती आंदोलन की शुरुआत जायद़ी समुदाय के बीच एक धार्मिक पुनरुत्थानवादी आंदोलन के रूप में हुई, जो बाद में एक प्रमुख राजनीतिक और सैन्य शक्ति बन गया। 
  2. अरब स्प्रिंग के बाद उत्पन्न राजनीतिक अस्थिरता का लाभ उठाते हुए हूतियों ने 2014 में सना पर कब्जा कर लिया, जिसके बाद राष्ट्रपति अब्द रब्बुह मंसूर हादी को राजधानी छोड़नी पड़ी।  
  3. 2015 में सऊदी अरब के सैन्य हस्तक्षेप ने हूतियों को उत्तरी यमन से सफलतापूर्वक हटा दिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार की सत्ता बहाल कर दी। 
  4. अरब स्प्रिंग के बाद अधिकांश अरब देशों में समान रूप से सफल लोकतांत्रिक परिवर्तन हुआ और निरंकुश शासन समाप्त हो गए।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

A. केवल 1 और 2
B. केवल 1, 2 और 3
C. केवल 2 और 4
D. केवल 1, 3 और 4

उत्तर: A. केवल 1 और 2

व्याख्या

  • हूती आंदोलन की शुरुआत जायद़ी समुदाय के धार्मिक पुनरुत्थानवादी आंदोलन के रूप में हुई और बाद में यह एक प्रमुख राजनीतिक एवं सैन्य शक्ति बन गया। अतः कथन 1 सही है।
  • अरब स्प्रिंग के बाद यमन में राजनीतिक अस्थिरता का लाभ उठाकर हूतियों ने 2014 में सना पर कब्जा कर लिया और राष्ट्रपति हादी को राजधानी छोड़नी पड़ी। अतः कथन 2 सही है।
  • सऊदी अरब ने 2015 में ऑपरेशन डिसाइसिव स्टॉर्म शुरू किया, लेकिन वह हूतियों को उत्तरी यमन से हटाने और उन्हें निर्णायक रूप से पराजित करने में सफल नहीं हुआ। अतः कथन 3 गलत है।
  • अरब स्प्रिंग के परिणाम सभी देशों में समान नहीं रहे। ट्यूनीशिया में शुरुआती लोकतांत्रिक परिवर्तन हुए, जबकि सीरिया, लीबिया और यमन में लंबे संघर्ष और अस्थिरता उत्पन्न हुई। अतः कथन 4 गलत है।