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15 अक्टूबर 2026
हिंसा के बीच कलकत्ता में गांधी: स्वतंत्रता दिवस पर शांति का प्रयास
1947 में जब भारत स्वतंत्रता का जश्न मना रहा था, महात्मा गांधी ने दिल्ली के बजाय सांप्रदायिक हिंसा से प्रभावित कलकत्ता में रहकर हिंदू-मुस्लिम शांति स्थापित करने का प्रयास किया।
गांधी ने स्वतंत्रता दिवस कलकत्ता में क्यों बिताया?
खबरों में क्यों?
- महात्मा गांधी ने 15 अगस्त 1947 के आसपास का समय कलकत्ता में बिताया, जबकि देश के प्रमुख स्वतंत्रता समारोह दिल्ली में आयोजित किए जा रहे थे।
- उन्होंने बेलियाघाटा स्थित हैदरी मंजिल में रहना चुना, जो एक मुस्लिम-बहुल क्षेत्र था और सांप्रदायिक हिंसा से प्रभावित था।
- गांधी का मानना था कि भारत की स्वतंत्रता के साथ-साथ सांप्रदायिक शांति स्थापित करना भी आवश्यक था।
बंगाल में सांप्रदायिक हिंसा की पृष्ठभूमि
- कलकत्ता में सांप्रदायिक तनाव 16 अगस्त 1946 के डायरेक्ट एक्शन डे के बाद काफी बढ़ गया।
- मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग को आगे बढ़ाने के लिए डायरेक्ट एक्शन डे का आह्वान किया था।
- इसके बाद हुई हिंसा को अक्सर ग्रेट कलकत्ता किलिंग कहा जाता है, जिसमें हजारों लोग मारे गए।
- इसके बाद सांप्रदायिक हिंसा उत्तर भारत के अन्य क्षेत्रों तक भी फैल गई।
- गांधी पहले ही नोआखाली में कई महीनों तक रहकर प्रभावित गांवों का दौरा कर चुके थे और हिंदुओं की सुरक्षा तथा शांति की अपील कर रहे थे।
गांधी ने कलकत्ता में रहने का फैसला क्यों किया?
- बंगाल के मुख्यमंत्री हुसैन सुहरावर्दी ने गांधी से कलकत्ता में रुककर शांति स्थापित करने में मदद करने का आग्रह किया।
- गांधी ने यह शर्त रखी कि सुहरावर्दी उनके साथ रहेंगे और दोनों मिलकर शांति के लिए काम करेंगे
- 13 अगस्त 1947 को गांधी हैदरी मंजिल पहुंचे।
- उनके आगमन का कुछ हिंदू समूहों ने विरोध किया और उन पर मुसलमानों का पक्ष लेने का आरोप लगाया।
- गांधी ने हिंसा का विरोध करते हुए स्वयं को जनता के बीच रखा और शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी लोगों पर भी डाली।
गांधी की शांति स्थापित करने की रणनीति
- गांधी ने अहिंसा, उपवास, प्रार्थना और प्रत्यक्ष जनसंपर्क का सहारा लिया।
- उन्होंने राजनीतिक नेताओं, स्थानीय लोगों और विरोध कर रहे समूहों से बातचीत की।
- स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर उन्होंने कहा कि यदि सांप्रदायिक हिंसा जारी रही तो स्वतंत्रता का उद्देश्य कमजोर पड़ जाएगा।
- उन्होंने लोगों से स्वतंत्रता दिवस को केवल उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि प्रार्थना, उपवास और आत्मचिंतन के अवसर के रूप में मनाने का आग्रह किया।
स्वतंत्रता दिवस और कलकत्ता
- गांधी ने 15 अगस्त 1947 को 24 घंटे का उपवास किया।
- इसी दिन कलकत्ता में सांप्रदायिक हिंसा में उल्लेखनीय कमी आई।
- हिंदू और मुसलमानों ने मिलकर राष्ट्रीय ध्वज लगाए, सड़कों को सजाया और स्वतंत्रता का उत्सव मनाया।
- गांधी ने इस एकता का स्वागत किया, लेकिन यह भी कहा कि यह केवल अस्थायी उत्साह न होकर वास्तविक और स्थायी भाईचारे में बदलना चाहिए।
- हालांकि बाद में हिंसा फिर शुरू हुई, लेकिन गांधी की भूमिका ने उस समय सांप्रदायिक शांति और अहिंसक हस्तक्षेप की संभावनाओं को सामने रखा।
डायरेक्ट एक्शन डे - 16 अगस्त 1946
परिचय
- 1946 में मुहम्मद अली जिन्ना, जो मुस्लिम लीग के नेता थे, ने 16 अगस्त को डायरेक्ट एक्शन डे घोषित किया।
- मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग को स्वीकार कराने के लिए सामान्य हड़ताल का आह्वान किया
- इसका उद्देश्य ब्रिटिश सरकार पर दबाव डालना और मुस्लिम-बहुल अलग राष्ट्र पाकिस्तान की मांग को मजबूत करना था।
- इस दिन विशेष रूप से कलकत्ता (कोलकाता) में हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच बड़े पैमाने पर हिंसा हुई।
- यह घटना भारत के विभाजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।
पृष्ठभूमि
- 1946 तक भारत की स्वतंत्रता और सत्ता हस्तांतरण को लेकर राजनीतिक बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच चुकी थी।
- ब्रिटिश सरकार ने सत्ता हस्तांतरण की योजना तैयार करने के लिए कैबिनेट मिशन भारत भेजा।
- शुरुआत में कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ने कैबिनेट मिशन योजना को स्वीकार किया।
- जुलाई 1946 में जवाहरलाल नेहरू के एक बयान के बाद मुस्लिम लीग को आशंका हुई कि कांग्रेस भविष्य में योजना में बदलाव कर सकती है।
- मुस्लिम लीग के भीतर हिंदू बहुमत के वर्चस्व की आशंका बढ़ी।
- इसके बाद जिन्ना ने कैबिनेट मिशन योजना को अस्वीकार कर दिया और संविधान सभा का बहिष्कार करने का निर्णय लिया।
- उन्होंने पाकिस्तान की मांग के लिए डायरेक्ट एक्शन अपनाने की घोषणा की।
सांप्रदायिक हिंसा
- अगस्त 1946 से पहले ही कलकत्ता में सांप्रदायिक तनाव काफी बढ़ चुका था।
- राजनीतिक प्रचार और कुछ समाचार पत्रों की भड़काऊ रिपोर्टिंग ने दोनों समुदायों के बीच तनाव को और बढ़ाया।
- 16 अगस्त की हड़ताल जल्द ही व्यापक सांप्रदायिक हिंसा में बदल गई।
- कलकत्ता में हुई इस हिंसा को ग्रेट कलकत्ता किलिंग के नाम से भी जाना जाता है।
- कई दिनों तक चले दंगों में हजारों लोग मारे गए और घायल हुए।
- घरों, दुकानों और पूरे इलाकों को नुकसान पहुंचा तथा लोगों का विस्थापन हुआ।
- हिंसा बाद में नोआखाली, बिहार, बॉम्बे और संयुक्त प्रांत जैसे क्षेत्रों तक भी फैल गई।
राजनीतिक प्रभाव
- हिंसा ने हिंदू-मुस्लिम विभाजन को और गहरा कर दिया।
- अलग राष्ट्र की मांग को लेकर राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ा।
- ब्रिटिश प्रशासन की कानून-व्यवस्था बनाए रखने की क्षमता पर सवाल उठे।
- बंगाल की मुस्लिम लीग सरकार और विशेष रूप से मुख्यमंत्री हुसैन सुहरावर्दी की भूमिका की आलोचना हुई।
- इस घटना ने दिखाया कि राजनीतिक मतभेद किस प्रकार बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक संघर्ष में बदल सकते हैं।
अंतरिम सरकार और कांग्रेस-मुस्लिम लीग संघर्ष
- सितंबर 1946 में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ।
- मुस्लिम लीग ने शुरुआत में इसमें शामिल होने से इनकार किया, लेकिन बाद में अक्टूबर 1946 में सरकार में शामिल हो गई।
- इसके बावजूद कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच सहयोग नहीं बन सका।
- दोनों पक्षों के मंत्रियों के बीच लगातार मतभेद और टकराव होते रहे।
- मुस्लिम लीग ने सरकार में अपनी भागीदारी का उपयोग पाकिस्तान की मांग को आगे बढ़ाने के लिए किया।
- इस प्रकार अंतरिम सरकार सहयोग का माध्यम बनने के बजाय कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच राजनीतिक संघर्ष का मंच बन गई।
महत्व
- डायरेक्ट एक्शन डे ने भारत में बढ़ते सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को और तीव्र किया।
- इसने 1946–47 के राजनीतिक संकट को गहरा किया और अंततः 1947 के भारत विभाजन की पृष्ठभूमि तैयार करने वाली प्रमुख घटनाओं में योगदान दिया।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. डायरेक्ट एक्शन डे तथा 1947 में कलकत्ता में महात्मा गांधी की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- कैबिनेट मिशन योजना पर सहमति टूटने के बाद मुस्लिम लीग ने डायरेक्ट एक्शन का निर्णय लिया, जिसका संबंध पाकिस्तान की मांग से था।
- गांधी ने हैदरी मंजिल में रहने का निर्णय मुख्यतः कलकत्ता में आयोजित आधिकारिक स्वतंत्रता समारोहों में भाग लेने के लिए लिया था।
- बेलियाघाटा में गांधी की उपस्थिति के साथ दोनों समुदायों को सांप्रदायिक हिंसा रोकने की जिम्मेदारी स्वीकार करने के लिए प्रेरित करने का प्रयास जुड़ा था।
- 15 अगस्त 1947 को कलकत्ता में अस्थायी सांप्रदायिक शांति स्थापित होने से यह सिद्ध हो गया कि सांप्रदायिक तनाव स्थायी रूप से समाप्त हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 3
B. केवल 1, 2 और 3
C. केवल 2 और 4
D. केवल 1, 3 और 4
उत्तर: A. केवल 1 और 3
व्याख्या:
- कैबिनेट मिशन योजना पर कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच सहमति टूटने के बाद मुस्लिम लीग ने डायरेक्ट एक्शन का रास्ता अपनाया और पाकिस्तान की मांग को आगे बढ़ाया। अतः कथन 1 सही है।
- गांधी ने हैदरी मंजिल में स्वतंत्रता समारोह में भाग लेने के लिए नहीं, बल्कि कलकत्ता में सांप्रदायिक शांति स्थापित करने के उद्देश्य से रहने का निर्णय लिया था। अतः कथन 2 गलत है।
- गांधी ने स्वयं को हिंसा प्रभावित क्षेत्र में रखकर दोनों समुदायों को शांति बनाए रखने और हिंसा रोकने की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित किया। अतः कथन 3 सही है।
- 15 अगस्त को कलकत्ता में शांति अस्थायी थी और आने वाले सप्ताहों में हिंसा फिर शुरू हुई। अतः कथन 4 गलत है।