Current Affairs - Daily
8 अक्टूबर 2026
अत्यधिक गर्मी गर्भवती महिलाओं और नवजातों के लिए बढ़ा रही स्वास्थ्य जोखिम
Wellcome के एक वैश्विक सर्वेक्षण ने अत्यधिक गर्मी और मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के बीच बढ़ते संबंध को रेखांकित किया है।
अत्यधिक गर्मी से गर्भवती महिलाओं और नवजातों पर बढ़ता स्वास्थ्य खतरा
- Wellcome के एक सर्वेक्षण में अत्यधिक गर्मी से गर्भवती महिलाओं, भ्रूण और नवजातों के स्वास्थ्य पर बढ़ते खतरे को उजागर किया गया है।
- सर्वेक्षण में भारत, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, ब्रिटेन और जिम्बाब्वे के 1,000 मातृ स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल हुए।
- लगभग 73% विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं में गर्मी से जुड़ी समस्याओं में वृद्धि देखी, जबकि 76% ने भ्रूण और नवजात स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी बताई।
- अत्यधिक गर्मी से जुड़ी प्रमुख समस्याओं में:
- गर्भावस्था संबंधी जटिलताएं।
- कम जन्म वजन और कम विकास।
- नवजातों में निर्जलीकरण और गर्मी से होने वाली बीमारी।
- दूध पीने, सांस लेने और शरीर का तापमान नियंत्रित करने में कठिनाई शामिल हैं।
- लगभग 27% विशेषज्ञों ने बताया कि अत्यधिक गर्मी के कारण परिवारों के लिए स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचना कठिन हुआ, जबकि 29% ने आपातकालीन मामलों में वृद्धि देखी।
- Wellcome के अनुसार, तापमान में प्रत्येक 1°C वृद्धि से समय से पहले प्रसव की संभावना लगभग 5% बढ़ सकती है। हीटवेव को गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं के 25% अधिक जोखिम से भी जोड़ा गया है।
- UNFCC COP31 से पहले Wellcome ने गर्भवती महिलाओं, नई माताओं और नवजातों को जलवायु एवं स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल करने तथा बेहतर चेतावनी और स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली विकसित करने की मांग की है।
ग्लोबल वार्मिंग के बारे में:
- ग्लोबल वार्मिंग पृथ्वी के औसत सतही तापमान में दीर्घकालिक वृद्धि है।
- इसका मुख्य कारण मानवीय गतिविधियों से ग्रीनहाउस गैसों (GHGs) का बढ़ता उत्सर्जन है।
- प्रमुख मानवीय कारण:
- कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों का उपयोग।
- वनों की कटाई, जिससे CO₂ अवशोषण की क्षमता घटती है।
- औद्योगिक गतिविधियां, जैसे सीमेंट उत्पादन और विनिर्माण।
- कृषि, विशेषकर पशुपालन और रासायनिक उर्वरकों का उपयोग।
- प्राकृतिक कारणों में सौर गतिविधि में बदलाव, ज्वालामुखी विस्फोट और पृथ्वी की कक्षा में परिवर्तन शामिल हैं। हालांकि, वर्तमान तेज तापमान वृद्धि मुख्यतः मानव-जनित है।
UNFCCC के बारे में:
- UNFCCC जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समझौता है।
- इसे 1992 के रियो पृथ्वी सम्मेलन में अपनाया गया।
- इसके 198 पक्षकार हैं। जिसमे 197 राष्ट्र और यूरोपियन यूनियन शामिल हैं।
- यह क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस समझौते का आधार है।
- इसके तहत हर वर्ष COP आयोजित होता है।
- IPCC, जिसे UNEP और WMO ने 1988 में स्थापित किया, जलवायु परिवर्तन से संबंधित वैज्ञानिक आकलन उपलब्ध कराता है।
क्योटो प्रोटोकॉल के बारे में:
- इसे 1997 में अपनाया गया। और विकसित देशों के लिए उत्सर्जन में कटौती के लक्ष्य निर्धारित किए।
- स्वच्छ विकास तंत्र (CDM) जैसे बाजार-आधारित उपायों को बढ़ावा दिया।
पेरिस समझौता के बारे में:
- यह 2015 के COP21 में अपनाया गया।
- वैश्विक तापमान वृद्धि को 2°C से काफी नीचे रखने और 1.5°C तक सीमित करने का प्रयास करता है।
- सभी देश राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) प्रस्तुत करते हैं।
- इसमें अनुकूलन, जलवायु लचीलापन और जलवायु वित्त पर भी जोर दिया गया है।
प्रश्न. अत्यधिक गर्मी, ग्लोबल वार्मिंग और अंतरराष्ट्रीय जलवायु समझौतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- पेरिस समझौता सभी देशों के लिए समान और कानूनी रूप से बाध्यकारी उत्सर्जन-कटौती लक्ष्य निर्धारित करता है।
- क्योटो प्रोटोकॉल के तहत उत्सर्जन में कमी के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए स्वच्छ विकास तंत्र (CDM) जैसे बाजार-आधारित तंत्र की शुरुआत की गई।
- वैश्विक तापमान में हाल की तीव्र वृद्धि मुख्यतः मानवीय गतिविधियों के कारण है, हालांकि ज्वालामुखीय गतिविधि और सौर विकिरण में बदलाव जैसे प्राकृतिक कारक भी जलवायु को प्रभावित करते हैं।
- UNFCCC को 1992 के रियो पृथ्वी सम्मेलन में अपनाया गया था और इसने क्योटो प्रोटोकॉल तथा पेरिस समझौते के लिए आधार प्रदान किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1, 3 और 4
(d) केवल 2, 3 और 4
उत्तर: (d) केवल 2, 3 और 4
व्याख्या:
- पेरिस समझौते के तहत देश राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) प्रस्तुत करते हैं। सभी देशों के लिए समान और कानूनी रूप से बाध्यकारी उत्सर्जन लक्ष्य निर्धारित नहीं किए गए हैं। अतः कथन 1 गलत है।
- स्वच्छ विकास तंत्र (CDM) क्योटो प्रोटोकॉल के तहत उत्सर्जन में कमी के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपनाए गए बाजार-आधारित तंत्रों में शामिल था। अतः कथन 2 सही है।
- ज्वालामुखी और सौर गतिविधि जैसे प्राकृतिक कारक जलवायु को प्रभावित करते हैं, लेकिन हाल की तीव्र ग्लोबल वार्मिंग मुख्यतः मानव-जनित है। अतः कथन 3 सही है।
- UNFCCC को 1992 के रियो पृथ्वी सम्मेलन में अपनाया गया और यह क्योटो प्रोटोकॉल तथा पेरिस समझौते के लिए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय ढांचा प्रदान करता है। अतः कथन 4 सही है।
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