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Current Affairs - Daily 24 अक्टूबर 2026

चुनावी प्रचार में बच्चों की भागीदारी: कानूनी और नैतिक बहस

चुनावी प्रचार में बच्चों की भागीदारी, मतदाताओं की स्वतंत्र पसंद और बाल अधिकारों से जुड़े सवालों को दर्शाता सांकेतिक चित्र।

चुनाव प्रचार में बच्चों की भागीदारी: कानूनी और नैतिक बहस

  • 15 अक्टूबर 2026 को मद्रास उच्च न्यायालय ने सलेम उत्तर विधानसभा क्षेत्र से संबंधित चुनाव याचिका खारिज की। 
  • न्यायालय ने राजनीतिक प्रचार में बच्चों की भागीदारी की आलोचना की, लेकिन कहा कि प्रस्तुत आरोप चुनाव निरस्त करने योग्य अनुचित प्रभाव स्थापित नहीं करते।

पृष्ठभूमि

  • विवाद 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के समर्थन में बच्चों से अभिभावकों को प्रभावित कराने के आरोपों से संबंधित था। 
  • बच्चों द्वारा परिवार के सदस्यों पर दबाव डालने वाले सोशल मीडिया वीडियो भी विवाद का हिस्सा थे। न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती ने राजनीतिक आग्रह और मतदाता की स्वतंत्र इच्छा में हस्तक्षेप के बीच अंतर किया।

 

 

संवैधानिक एवं कानूनी ढाँचा

  • अनुच्छेद 324 निर्वाचन आयोग (ECI) को चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति देता है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123(2) अनुचित प्रभाव से तथा धारा 100 चुनाव को शून्य घोषित करने के आधारों से संबंधित है। 
  • निर्वाचन आयोग ने 5 फरवरी 2024 को चुनावी रैलियों, प्रचार और नारेबाजी में बच्चों के उपयोग पर रोक संबंधी निर्देश दिए। न्यायालय के अनुसार इन निर्देशों का उल्लंघन अपने आप में चुनाव निरस्त करने का वैधानिक आधार नहीं बनता।

न्यायिक निष्कर्ष

  • न्यायालय ने माना कि बच्चों के माध्यम से भावनात्मक आग्रह वयस्क मतदाताओं की स्वतंत्र इच्छा को अनिवार्य रूप से समाप्त नहीं करता। दल के नेता के कथित आचरण को आवश्यक कानूनी संबंध सिद्ध किए बिना उम्मीदवार का आचरण नहीं माना जा सकता। 
  • न्यायालय ने बच्चों के राजनीतिक उपयोग को अनुचित बताया और संसद द्वारा अधिक स्पष्ट कानूनी प्रावधानों पर विचार की आवश्यकता व्यक्त की।

बाल अधिकार एवं लोकतांत्रिक चिंताएँ

  • दलगत प्रचार में नाबालिगों का उपयोग मानसिक दबाव, भावनात्मक शोषण, निजता के उल्लंघन और ऑनलाइन जोखिम पैदा कर सकता है। 
  • संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अभिसमय बच्चों की अभिव्यक्ति एवं भागीदारी को मान्यता देता है, लेकिन उपयुक्त सुरक्षा उपाय भी आवश्यक हैं। नागरिक शिक्षा और सुविचारित राजनीतिक चर्चा को संगठित चुनाव प्रचार से अलग समझना चाहिए।

आगे की राह

  • प्रचार आयोजकों की जवाबदेही, डिजिटल सामग्री की निगरानी और बाल-संवेदनशील शिकायत तंत्र मजबूत किए जा सकते हैं। 
  • यह विषय चुनावी अनियमितता और कानून में परिभाषित भ्रष्ट आचरण के अंतर तथा बाल संरक्षण और लोकतांत्रिक भागीदारी के संतुलन को स्पष्ट करता है।

MCQ 

प्रश्न 1. कथनों पर विचार कीजिए: 

(1) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123(2) अनुचित प्रभाव से संबंधित है। 

(2) धारा 100 चुनाव को शून्य घोषित करने के आधार निर्धारित करती है। 

(3) निर्वाचन आयोग के प्रत्येक निर्देश का उल्लंघन स्वतः चुनाव को अमान्य कर देता है। 

सही कथन कौन-से हैं? 

(a) केवल 1 और 2 

(b) केवल 2 और 3 

(c) केवल 1 और 3 

(d) सभी

उत्तर: (a)

व्याख्या: पहले दो कथन सही हैं; निर्देश का उल्लंघन स्वतः चुनाव निरस्त नहीं करता।

प्रश्न 2. कथनों पर विचार कीजिए: 

(1) आयोग ने 5 फरवरी 2024 को चुनाव प्रचार में बच्चों की भागीदारी पर निर्देश जारी किए। 

(2) अनुच्छेद 324 आयोग के चुनावी अधीक्षण से संबंधित है। 

(3) अभिभावकों की सहमति से बच्चों को रैलियों में नारेबाजी की सामान्य छूट है। 

सही कथन कौन-से हैं? 

(a) केवल 1 और 2 

(b) केवल 2 और 3 

(c) केवल 1 और 3 

(d) सभी

उत्तर: (a)