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Current Affairs - Daily 3 अक्टूबर 2026

बंगाल की खाड़ी में नई मछली प्रजाति Bathymyrus perplexus की पहचान

ZSI के गोपालपुर केंद्र के वैज्ञानिकों ने DNA परीक्षण और अन्य वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर बंगाल की खाड़ी में मछली की नई प्रजाति Bathymyrus perplexus की पहचान की है।

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI), गोपालपुर के वैज्ञानिकों ने बंगाल की खाड़ी में मछली की नई प्रजाति Bathymyrus perplexus की पहचान की है। 
  • इस प्रजाति का पहला नमूना 2021 में पारादीप के तट के पास एकत्र किया गया था। हालांकि, इसकी पहचान की पुष्टि विस्तृत परीक्षण और DNA विश्लेषण के बाद हुई। 
  • पश्चिम बंगाल, गोदावरी और काकीनाडा से इस प्रजाति के कुल 32 नमूने एकत्र किए गए और गोपालपुर स्थित ZSI केंद्र में उनका अध्ययन किया गया। 
  • इस अध्ययन के निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय समुद्री विज्ञान पत्रिका Bulletin of Marine Science में प्रकाशित हुए। 

प्रमुख विशेषताएँ

  • आवास: यह प्रजाति सामान्यतः तट से दूर 50–100 मीटर की गहराई वाले जल में पाई जाती है। 
  • शरीर: इसका शरीर लंबा और बेलनाकार होता है तथा सिर और थूथन की संरचना विशिष्ट है। 
  • शरीर का रंग गुलाबी से धुंधले गुलाबी रंग तक होता है। 
  • सिर के ऊपरी हिस्से में गहरा काला रंग पाया जाता है और आँख से थूथन तक एक काला निशान होता है। 
  • पृष्ठीय और गुदा-पंखों के बाहरी किनारों पर पतली काली धारियाँ होती हैं। 
  • इसके ऊपरी और निचले दोनों जबड़ों के साथ-साथ सिर के क्षेत्र में भी दाँत पाए जाते हैं। 
  • यह प्रजाति गैर-विषैली (Non-venomous) है। 

महत्त्व

  • यह खोज बंगाल की खाड़ी की समुद्री जैव-विविधता के बारे में जानकारी बढ़ाती है।
  • शारीरिक विशेषताओं के अध्ययन और DNA विश्लेषण से इसे संबंधित मछली प्रजातियों से अलग पहचानने में मदद मिली। 
  • इस प्रजाति के नमूने को आगे के शोध के लिए प्रयोगशाला में संरक्षित रखा गया है।

 

भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के बारे में: 

  • उत्पत्ति: ZSI की शुरुआत 1875 में कलकत्ता स्थित भारतीय संग्रहालय के प्राणी-विज्ञान अनुभाग से हुई। 
  • स्थापना: ZSI की आधिकारिक स्थापना 1 जुलाई 1916 को हुई। 
  • उद्देश्य: भारत की पशु विविधता के सर्वेक्षण, अन्वेषण और वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा देना। 
  • विस्तार: समय के साथ क्षेत्रीय केंद्रों, कर्मचारियों और शोध कार्यक्रमों का विस्तार हुआ। 
  • जैव-विविधता संदर्भ: भारत दुनिया के 17 मेगा-बायोडायवर्स देशों में शामिल है और यहाँ चार जैव-विविधता हॉटस्पॉट हैं: 
    • पश्चिमी घाट–श्रीलंका 
    • इंडो-बर्मा 
    • हिमालय 
    • सुंडालैंड 
  • जीव-जंतु दस्तावेजीकरण: भारत में लगभग 1,00,693 पशु प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं; कई प्रजातियों, विशेषकर निम्न अकशेरुकी जीवों, की अभी खोज बाकी है। 
  • CBD के तहत भूमिका: प्रजाति पहचान, जैव-विविधता आकलन, संरक्षण योजना और जैव संसाधनों के सतत उपयोग में योगदान। 

 

कार्य

  • प्रजाति सर्वेक्षण: स्थलीय, मीठे पानी और समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों में प्रजातियों की विविधता और वितरण का अध्ययन। 
  • संरक्षण सहयोग: प्रजातियों और उनके आवासों के यथास्थान संरक्षण (In-situ Conservation) के लिए वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराना। 
  • पर्यावरण प्रभाव आकलन: पारिस्थितिकी, वन्यजीव और जैव-विविधता पर केंद्रित EIA अध्ययन करना। 
  • सतत उपयोग: व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण प्रजातियों की निगरानी और उनके सतत उपयोग पर सलाह देना। 
  • GIS एवं जलवायु अनुसंधान: जैव-विविधता मानचित्रण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अध्ययन के लिए GIS व रिमोट सेंसिंग का उपयोग। 
  • सलाहकारी सेवाएँ: CITES, वन्यजीव फॉरेंसिक, EIACP और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय जैव-विविधता अनुसंधान में सहयोग।

 

प्रमुख प्रकाशन

  • Fauna of India Series: भारतीय जीव-जंतुओं के वर्गीकरण, वितरण और जैविक विशेषताओं का प्रमुख संदर्भ स्रोत। 
  • Fauna of States and Conservation Areas: राज्यों, राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों की क्षेत्रीय जीव-जंतु विविधता का विवरण। 
  • Red Data Book on Indian Animals: पहली बार 1983 में प्रकाशित; संकटग्रस्त और विलुप्तप्राय पशु प्रजातियों तथा उनकी संरक्षण स्थिति का विवरण। 
  • Animal Discoveries Reports: भारत में खोजी गई नई प्रजातियों और नए जीव-जंतु अभिलेखों की वार्षिक रिपोर्ट। 
  • Faunal Survey – A Methodology: जीव-जंतु सर्वेक्षण और जैव-विविधता आकलन के लिए वैज्ञानिक विधियाँ एवं दिशा-निर्देश।

अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न. Bathymyrus perplexus तथा भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. Bathymyrus perplexus को प्रारंभ में 2021 में बंगाल की खाड़ी से एकत्र किया गया था और बाद में आकारिकी परीक्षण तथा DNA विश्लेषण के माध्यम से इसकी पहचान की पुष्टि की गई।
  2. यह प्रजाति सामान्यतः 50–100 मीटर की गहराई में पाई जाती है तथा इसके सिर के ऊपरी भाग पर गहरी काली रंजकता पाई जाती है।
  3. भारतीय प्राणी सर्वेक्षण की आधिकारिक स्थापना 1875 में कलकत्ता स्थित भारतीय संग्रहालय के प्राणी-विज्ञान अनुभाग के उत्तराधिकारी के रूप में की गई थी।
  4. ZSI द्वारा प्रकाशित Red Data Book on Indian Animals पहली बार 1983 में प्रकाशित की गई थी और इसमें संकटग्रस्त तथा विलुप्तप्राय पशु प्रजातियों से संबंधित जानकारी दी गई है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

(a) केवल 1, 2 और 3
(b) केवल 1, 2 और 4
(c) केवल 2, 3 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4

उत्तर: (b) केवल 1, 2 और 4

व्याख्या:

  • Bathymyrus perplexus को पहली बार 2021 में पारादीप के तट के पास एकत्र किया गया था और इसकी पहचान की पुष्टि विस्तृत आकारिकी परीक्षण तथा DNA परीक्षण के माध्यम से की गई। अतः कथन 1 सही है।
  • यह प्रजाति सामान्यतः 50–100 मीटर की गहराई में पाई जाती है और इसके सिर के ऊपरी भाग पर गहरी काली रंजकता पाई जाती है। अतः कथन 2 सही है।
  • कलकत्ता स्थित भारतीय संग्रहालय के प्राणी-विज्ञान अनुभाग की स्थापना 1875 में हुई थी, जबकि भारतीय प्राणी सर्वेक्षण की आधिकारिक स्थापना 1 जुलाई 1916 को हुई थी। अतः कथन 3 गलत है
  • Red Data Book on Indian Animals को ZSI द्वारा पहली बार 1983 में प्रकाशित किया गया था और इसमें संकटग्रस्त तथा विलुप्तप्राय पशु प्रजातियों के साथ-साथ उनकी संरक्षण स्थिति का विवरण दिया गया है। अतः कथन 4 सही है।