Current Affairs - Daily
16 सितमबर 2026
उत्तराखंड में ओपु-आईवीएफ तकनीक से हुआ बद्री बछिया का जन्म
उत्तराखंड में ओपु-आईवीएफ (OPU-IVF - Ovum Pick-Up and In Vitro Fertilization) तकनीक की मदद से एक स्वस्थ बद्री मादा बछिया का जन्म हुआ है। यह उपलब्धि राज्य की अनमोल स्वदेशी बद्री गाय की नस्ल के संरक्षण, संवर्धन और आनुवंशिक सुधार (genetic improvement) की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी।
उत्तराखंड के अकादमिक डेयरी फार्म में OPU-IVF तकनीक के माध्यम से स्वस्थ बद्री मादा बछड़े का जन्म हुआ है। यह उपलब्धि राज्य की स्वदेशी बद्री मवेशी नस्ल के संरक्षण, तेजी से प्रसार और आनुवंशिक सुधार में उन्नत प्रजनन तकनीक की संभावनाओं को दर्शाती है।
महत्वपूर्ण बिन्दु:
- उत्तराखंड के अकादमिक डेयरी फार्म में 11 सितंबर 2026 को Ovum Pick-Up और In Vitro Fertilisation (OPU-IVF) तकनीक के माध्यम से स्वस्थ बद्री मादा बछड़े का जन्म हुआ।
- यह उपलब्धि एक बद्री भ्रूण को साहीवाल गाय में प्रत्यारोपित करने के बाद हासिल हुई।
- यह परियोजना ICAR-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (ICAR-NDRI), करनाल और जी. बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के सहयोग से संचालित की गई। इसे उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद, हल्दी से वित्तीय सहायता मिली।
- OPU-IVF प्रक्रिया के तहत आनुवंशिक रूप से मूल्यवान बद्री गायों से अल्ट्रासाउंड-निर्देशित ओवम पिक-अप के जरिए अंडाणु एकत्र किए गए।
- इन अंडाणुओं को प्रयोगशाला में परिपक्व कर आनुवंशिक रूप से श्रेष्ठ बद्री सांड के वीर्य से इन-विट्रो निषेचन कराया गया।
- तैयार भ्रूणों को नियंत्रित प्रयोगशाला परिस्थितियों में विकसित करने के बाद सिंक्रोनाइज्ड रिसिपिएंट गायों में प्रत्यारोपित किया गया।
- एक अन्य सिंक्रोनाइज्ड क्रॉसब्रेड गाय से अगले 5-7 दिनों में एक और बद्री बछड़े के जन्म की उम्मीद है।
- ICAR-NDRI के निदेशक के अनुसार, OPU-IVF तकनीक से श्रेष्ठ मादा आनुवंशिक संसाधनों का तेजी से प्रसार किया जा सकता है और नस्ल संरक्षण व सुधार कार्यक्रमों को मजबूत किया जा सकता है।
- शोध टीम श्रेष्ठ और अधिक उत्पादन वाली बद्री गायों की क्लोनिंग पर भी काम कर रही है और शोध के दौरान क्लोन किए गए बद्री भ्रूण तैयार किए गए हैं।
- बद्री मवेशी, जिनका नाम बद्रीनाथ से जुड़ा है और जिन्हें पहले ‘पहाड़ी गाय’ कहा जाता था, हिमालयी परिस्थितियों के अनुकूल हैं तथा उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में पाए जाते हैं।
- बद्री नस्ल को उत्तराखंड के राज्य पशु के रूप में मान्यता प्राप्त है और यह स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूलन तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती है।
- यह उपलब्धि स्वदेशी पशुधन के संरक्षण, तेजी से प्रसार और आनुवंशिक सुधार में उन्नत प्रजनन जैव-प्रौद्योगिकी की क्षमता को दर्शाती है।
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