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Current Affairs - Daily 8 अक्टूबर 2026

Animal Diplomacy: कूटनीति में जानवरों का इस्तेमाल और भारत की भूमिका

Animal Diplomacy में जानवरों का उपयोग अंतरराष्ट्रीय संबंधों में उपहार, ऋण, सद्भावना और सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में किया जाता है। इसका इतिहास प्राचीन मिस्र से लेकर आधुनिक पांडा डिप्लोमेसी और Project Cheetah तक फैला है। CITES ने वन्यजीवों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार और संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण नियम बनाए हैं।

Animal Diplomacy: प्राचीन उपहारों से आधुनिक संरक्षण तक

चर्चा में क्यों?

  • डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की हालिया बैठक के बाद चीन द्वारा अमेरिका को दो विशाल पांडा ऋण पर देने के निर्णय से Animal Diplomacy फिर चर्चा में है। 
  • Animal Diplomacy का अर्थ अंतरराष्ट्रीय संबंधों में जानवरों का उपयोग उपहार, ऋण या सद्भावना के प्रतीक के रूप में करना है। 

Animal Diplomacy का इतिहास:

  • Animal Diplomacy का अर्थ देशों के बीच राजनयिक संबंधों को बढ़ावा देने, सॉफ्ट पावर प्रदर्शित करने और सद्भावना कायम करने के लिए जानवरों का उपहार, ऋण या राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में रणनीतिक उपयोग करना है।
  • इसका इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। प्राचीन मिस्र के शासकों द्वारा भूमध्यसागरीय क्षेत्र के शासकों को अफ्रीकी जानवर भेजे जाने के प्रमाण मिलते हैं। 
  • 802 ईस्वी में अब्बासी खलीफा हारून अल-रशीद ने अबुल-अब्बास नामक हाथी को शार्लमेन को उपहार में दिया था। 
  • 17वीं शताब्दी में रूस के जार ने स्वीडन के राजा को ध्रुवीय भालू उपहार में भेजा। 
  • पक्षियों, विशेषकर बाज, का भी सद्भावना के प्रतीक के रूप में आदान-प्रदान किया जाता रहा है। 

पांडा डिप्लोमेसी और वैश्विक उदाहरण:

  • 20वीं शताब्दी में चीन की Panda Diplomacy विशेष रूप से महत्वपूर्ण हुई। 
  • इसकी शुरुआत 1957 में मानी जाती है, जब चीन ने सोवियत संघ को पांडा उपहार में दिए। इसके बाद 1972 में अमेरिका के साथ भी पांडा का आदान-प्रदान हुआ।
  • ऑस्ट्रेलिया ने भी 1943 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल को विंस्टन नामक प्लैटिपस भेजा था। 
  • आधुनिक समय में चीन स्थायी उपहारों की जगह मुख्यतः वैज्ञानिक ऋण का उपयोग करता है और पांडा का स्वामित्व चीन के पास रहता है। 

भारत और Animal Diplomacy:

  • 1414 में मालिंदी के दूतों ने बंगाल में चीनी नौसैनिक कमांडर झेंग हे को एक जिराफ दिया, जिसे मिंग सम्राट योंगले के लिए श्रद्धांजलि के रूप में भेजा गया था। 
  • गुजरात के सुल्तान मुजफ्फर द्वितीय ने 16वीं शताब्दी में पुर्तगाल के राजा को एक गैंडा उपहार में दिया। बाद में जर्मन कलाकार अल्ब्रेख्ट ड्यूरर ने इसी से प्रेरित होकर प्रसिद्ध चित्र “The Rhinoceros” बनाया। 
  • मुगल सम्राट जहाँगीर विदेशी और दुर्लभ जानवरों में विशेष रुचि रखते थे तथा पुर्तगालियों के माध्यम से दुर्लभ प्रजातियाँ प्राप्त करते थे। 
  • स्वतंत्रता के बाद जवाहरलाल नेहरू ने जापान सहित कई देशों को हाथी उपहार में दिए। 
  • Project Cheetah, जिसे 2022 में नामीबिया के सहयोग से शुरू किया गया और बाद में दक्षिण अफ्रीका तथा बोत्सवाना तक बढ़ाया गया, संरक्षण से जुड़ी आधुनिक Animal Diplomacy का उदाहरण है। 
  • 2026 में भारत ने संयुक्त राष्ट्र के जिनेवा स्थित यूरोपीय मुख्यालय के लिए पाँच मोर भी उपहार में दिए। 

सॉफ्ट पावर और संरक्षण:

  • जानवर किसी देश की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक बन सकते हैं और विदेशी जनता के साथ भावनात्मक जुड़ाव पैदा करके Soft Power बढ़ा सकते हैं। 
  • ऐसे आदान-प्रदान से प्राप्तकर्ता देश पर जानवरों की उचित देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी भी आती है। 
  • हालांकि, दुर्लभ या संकटग्रस्त प्रजातियों को विदेशी वातावरण में भेजने से उनके कल्याण और संरक्षण को लेकर चिंताएँ पैदा हो सकती हैं। 

CITES और Animal Diplomacy में बदलाव:

  • Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora (CITES) को 1973 में अपनाया गया और यह 1975 में लागू हुआ। 
  • संरक्षण संबंधी नियम मजबूत होने के बाद स्थायी पशु-उपहारों की जगह अस्थायी वैज्ञानिक ऋण और संरक्षण सहयोग को अधिक महत्व मिलने लगा। 
  • चीन की पांडा डिप्लोमेसी इसका प्रमुख उदाहरण है। 
  • 2024 में मलेशिया की प्रस्तावित Orangutan Diplomacy की आलोचना हुई क्योंकि पाम ऑयल के विस्तार से ओरंगुटान के आवास को नुकसान पहुँच रहा था। इसके बाद मलेशिया ने विदेशों में ओरंगुटान भेजने के बजाय in-situ conservation के लिए वित्तीय सहयोग का मॉडल अपनाया।

वन्य जीव-जंतु और वनस्पति की संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES) के बारे में:

  • CITES सरकारों के बीच एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वन्य जीव-जंतुओं और वनस्पतियों का अंतरराष्ट्रीय व्यापार उनके अस्तित्व के लिए खतरा न बने। 
  • इसे 1973 में अपनाया गया और 1975 में लागू हुआ। 
  • वर्तमान में इसके 184 सदस्य पक्ष (Parties) हैं और यह 38,000 से अधिक प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करता है। 
  • CITES अपने सदस्य देशों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी है, लेकिन यह राष्ट्रीय कानूनों का स्थान नहीं लेता। प्रत्येक देश को अपने कानूनों के माध्यम से इसके प्रावधानों को लागू करना होता है। 
  • CITES Secretariat का संचालन संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा किया जाता है और इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है। 
  • सदस्य देश हर 2–3 वर्ष में Conference of the Parties (COP) में मिलते हैं और संरक्षण की स्थिति तथा संरक्षित प्रजातियों की सूची की समीक्षा करते हैं। 

CITES की तीन Appendices

  • Appendix I: इसमें विलुप्ति के खतरे वाली प्रजातियाँ शामिल होती हैं। इन्हें सर्वाधिक संरक्षण प्राप्त होता है और इनके व्यावसायिक अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सामान्यतः प्रतिबंध होता है। 
  • Appendix II: इसमें ऐसी प्रजातियाँ शामिल होती हैं जो वर्तमान में विलुप्ति के खतरे में नहीं हैं, लेकिन व्यापार पर नियंत्रण न होने पर खतरे में पड़ सकती हैं। इनके व्यापार को परमिट और निर्धारित शर्तों के तहत अनुमति दी जाती है।
  • Appendix III: इसमें वे प्रजातियाँ शामिल होती हैं जिनके अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करने में किसी देश को अन्य CITES सदस्य देशों की सहायता चाहिए। इनके व्यापार के लिए संबंधित परमिट या Certificate of Origin आवश्यक होता है।

Animal Diplomacy की प्रमुख विशेषताएँ:

  • सॉफ्ट पावर का साधन: प्रसिद्ध या राष्ट्रीय पहचान से जुड़े जानवर सांस्कृतिक प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं और औपचारिक राजनयिक माध्यमों से आगे बढ़कर विदेशी जनता के साथ भावनात्मक संबंध बनाने में मदद करते हैं।
  • उपहार से संरक्षण-आधारित ऋण की ओर बदलाव: आधुनिक Animal Diplomacy में विशेष रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों के मामले में स्थायी पशु-उपहारों की जगह अस्थायी वैज्ञानिक या संरक्षण-आधारित ऋण को अधिक महत्व दिया जा रहा है।
  • संरक्षण संबंधी नियमन: संकटग्रस्त वन्यजीवों के अंतरराष्ट्रीय हस्तांतरण को CITES के तहत नियंत्रित किया जाता है, ताकि राजनयिक आदान-प्रदान में संरक्षण और शोषण से बचाव संबंधी सुरक्षा उपायों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
  • वैश्विक प्रचलन: Animal Diplomacy केवल पांडा तक सीमित नहीं है। विभिन्न देशों ने हाथी, कोआला, बाज, गैंडा, चीता और अन्य विशिष्ट वन्यजीवों का भी राजनयिक उद्देश्यों के लिए उपयोग किया है।

महत्त्व:

  • जानवर मित्रता और सद्भावना के सहज प्रतीक के रूप में कार्य कर सकते हैं, जिससे औपचारिक वार्ताओं से आगे बढ़कर देशों के बीच विश्वास और द्विपक्षीय संबंध मजबूत होते हैं।
  • राष्ट्रीय पहचान से जुड़े वन्यजीव किसी देश की सांस्कृतिक दृश्यता और सार्वजनिक कूटनीति को बढ़ा सकते हैं तथा विदेशों में व्यापक जन और मीडिया का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं।

 

अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न. Animal Diplomacy और वन्य जीव-जंतुओं एवं वनस्पतियों की संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. आधुनिक Animal Diplomacy में विशेष रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों के मामले में स्थायी पशु-उपहारों से अस्थायी वैज्ञानिक या संरक्षण-आधारित ऋण की ओर बदलाव हुआ है। 
  2. CITES अपने सदस्य पक्षों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी है और संरक्षित प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करने के लिए उनके घरेलू वन्यजीव कानूनों का स्थान लेता है। 
  3. CITES की Appendix II में शामिल प्रजातियों का अंतरराष्ट्रीय व्यापार विनियमित परिस्थितियों में किया जा सकता है, बशर्ते आवश्यक संरक्षण संबंधी शर्तें पूरी हों। 
  4. Appendix III में वे प्रजातियाँ शामिल हैं जिनके अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करने के लिए कोई देश अन्य CITES सदस्य पक्षों से सहयोग चाहता है। 

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

(a) केवल 1 और 2
 (b) केवल 2 और 3
 (c) केवल 1, 3 और 4
 (d) केवल 1, 2 और 4

उत्तर: (c) केवल 1, 3 और 4

व्याख्या

  • आधुनिक Animal Diplomacy में विशेष रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए स्थायी उपहारों की जगह अस्थायी वैज्ञानिक या संरक्षण-आधारित ऋण को बढ़ावा मिला है। अतः कथन 1 सही है। 
  • CITES सदस्य देशों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी है, लेकिन यह उनके राष्ट्रीय कानूनों का स्थान नहीं लेता; प्रत्येक देश अपने कानूनों के माध्यम से इसे लागू करता है। अतः कथन 2 गलत है।
  • Appendix II में ऐसी प्रजातियाँ शामिल हैं जो व्यापार पर नियंत्रण न होने पर संकटग्रस्त हो सकती हैं और इनके अंतरराष्ट्रीय व्यापार की अनुमति उचित नियमों एवं परमिट के तहत दी जा सकती है। अतः कथन 3 सही है। 
  • Appendix III में ऐसी प्रजातियाँ शामिल हैं जिनके अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करने के लिए कोई देश अन्य CITES सदस्य देशों से सहयोग चाहता है। अतः कथन 4 सही है।