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Current Affairs - Daily 9 अक्टूबर 2026

AI की बढ़ती दौड़ और ई-कचरे की चुनौती

AI डेटा सेंटरों के तेजी से विस्तार से सर्वर, GPU, नेटवर्किंग, बिजली और कूलिंग उपकरणों का बड़ा हिस्सा भविष्य में ई-कचरे में बदल सकता है। इसका प्रभाव पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य और डेटा सुरक्षा पर पड़ सकता है।

खबरों में क्यों?

  • Basel Action Network (BAN) के एक नए आकलन ने AI डेटा सेंटरों के विस्तार से भविष्य में बढ़ने वाले ई-कचरे की समस्या को रेखांकित किया है।
  • 2025 से 2050 के बीच AI से जुड़े लगभग 395–617 मिलियन टन इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उपयोग से बाहर हो सकते हैं।

प्रमुख तथ्य

  • 2030 तक AI से संबंधित ई-कचरा हर वर्ष लगभग 8.6–13.1 मिलियन टन तक पहुंच सकता है।
  • यह समस्या केवल सर्वर और GPU तक सीमित नहीं होगी। डेटा सेंटर के कुल उपकरणों के भार में इनकी हिस्सेदारी लगभग 13% है।
  • अन्य प्रमुख स्रोतों में नेटवर्किंग उपकरण, बिजली आपूर्ति प्रणाली, कूलिंग सिस्टम और बैकअप पावर उपकरण शामिल हैं।
  • AI तकनीक में तेजी से बदलाव के कारण पुराने उपकरण पूरी तरह खराब न होने के बावजूद कम उपयोगी हो सकते हैं और उन्हें जल्दी बदलना पड़ सकता है।

पर्यावरण और डेटा सुरक्षा संबंधी चिंताएं

  • ई-कचरे में सीसा और पारा जैसे हानिकारक पदार्थ हो सकते हैं, जो अनुचित निपटान की स्थिति में मिट्टी, जल और मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • उपकरणों का पुनः उपयोग, मरम्मत और मूल्यवान पदार्थों की पुनर्प्राप्ति नए संसाधनों की मांग को कम कर सकती है।
  • पुराने सर्वर और स्टोरेज उपकरणों में संवेदनशील डेटा मौजूद हो सकता है। इसलिए उन्हें दोबारा उपयोग या रीसाइक्लिंग से पहले सुरक्षित तरीके से डेटा मिटाना जरूरी है।
  • ई-कचरे को ऐसे देशों में भेजना जहां रीसाइक्लिंग व्यवस्था कमजोर है, पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ा सकता है।

भारत के लिए महत्व

  • भारत में AI और डेटा सेंटरों के विस्तार से भविष्य में ई-कचरे की मात्रा बढ़ सकती है।
  • इसके लिए पुनः उपयोग, मरम्मत, रीसाइक्लिंग, संसाधन पुनर्प्राप्ति और सुरक्षित निपटान की प्रभावी व्यवस्था आवश्यक होगी।
  • AI के पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन केवल बिजली और पानी की खपत तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उपकरणों के पूरे जीवन-चक्र ‘निर्माण से लेकर उपयोग, प्रतिस्थापन और निपटान तक’ को ध्यान में रखना चाहिए।

बेसल एक्शन नेटवर्क (BAN)

  • स्थापना:1997 
  • BAN की स्थापना Greenpeace International के Toxic Trade Campaign के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए की गई थी, जिसे 1996 में समाप्त कर दिया गया था। 
  • यह एक पर्यावरण संगठन है, जो पर्यावरणीय स्वास्थ्य, न्याय और विषैले कचरे के व्यापार को रोकने के लिए कार्य करता है। 
  • BAN Basel Convention के लिए एक निगरानी संगठन (Watchdog) के रूप में कार्य करता है। 
  • यह Basel Convention (1989) के प्रभावी क्रियान्वयन को बढ़ावा देता है। 
  • यह Basel Ban Amendment का समर्थन करता है, जिसका उद्देश्य विकसित देशों से विकासशील देशों में खतरनाक कचरे के निर्यात पर रोक लगाना है। 
  • इसके प्रमुख उद्देश्य हैं: 
    • विषैले कचरे के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को समाप्त करना। 
    • विषाक्त-मुक्त भविष्य को बढ़ावा देना। 
    • प्रत्येक व्यक्ति के स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार की रक्षा करना। 
    • वैश्विक पर्यावरणीय स्वास्थ्य और न्याय को बढ़ावा देना।

 

अभ्यास प्रश्न 

प्र. AI से संबंधित ई-कचरे और Basel Action Network (BAN) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. Basel Action Network की स्थापना 1996 में समाप्त हुए Greenpeace International के Toxic Trade Campaign के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए की गई थी। 
  2. Basel Ban Amendment का उद्देश्य विकासशील देशों से विकसित देशों में खतरनाक कचरे के निर्यात पर रोक लगाना है। 
  3. AI डेटा सेंटरों के कुल उपकरणों के भार में सर्वर और GPU की हिस्सेदारी सीमित है, जबकि नेटवर्किंग, बिजली और कूलिंग प्रणालियां एक बड़ा हिस्सा बनाती हैं। 
  4. AI से संबंधित ई-कचरे का प्रभाव मुख्यतः प्रदूषण तक सीमित है, क्योंकि पुराने सर्वर सामान्यतः डेटा-सुरक्षा संबंधी जोखिम उत्पन्न नहीं करते हैं। 

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 1, 2 और 3
(c) केवल 2 और 4
(d) केवल 1, 3 और 4

उत्तर: (a) केवल 1 और 3

व्याख्या

  • Basel Action Network (BAN) की स्थापना 1997 में 1996 में समाप्त हुए Greenpeace International के Toxic Trade Campaign के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए की गई थी। अतः कथन 1 सही है। 
  • Basel Ban Amendment का उद्देश्य विकसित देशों से विकासशील देशों में खतरनाक कचरे के निर्यात पर रोक लगाना है, न कि विकासशील देशों से विकसित देशों में। अतः कथन 2 गलत है। 
  • AI डेटा सेंटरों के उपकरणों के भार में सर्वर और GPU की हिस्सेदारी केवल लगभग 13% है। नेटवर्किंग, बिजली, कूलिंग और बैकअप प्रणालियां इसका बड़ा हिस्सा बनाती हैं। अतः कथन 3 सही है। 
  • पुराने सर्वर और स्टोरेज उपकरणों में संवेदनशील डेटा हो सकता है। इसलिए ई-कचरे से जुड़ी समस्या में पर्यावरणीय जोखिमों के साथ डेटा सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। अतः कथन 4 गलत है।